जानिए उत्तराखंड के प्रसिद्ध मेलों के बारे में About Uttarakhand Mela

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “उत्तराखंड के प्रसिद्ध मेलों” (Uttarakhand mela)  के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते  हैं, “उत्तराखंड के प्रसिद्ध मेलों “(Uttarakhand Mela)  के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|




Kumbh Mela Haridwar

KUMBH MELA , HARIDWAR !! (कुम्भ मेला)

कुम्भ मेला हिन्दू धर्म का एक महत्त्वपूर्ण पर्व है| कुम्भ मेला भारत में सिर्फ परम्परा मात्र एक मेले के रूप में नहीं , बल्कि उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है | यह एक ऐसा प्रसिद्ध मेला है , जहाँ लोग श्रद्धालु के रूप में गंगा नदी में डुबकी लगाते हुए नज़र आते है | यह एक ऐसा पर्व है जो हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से एक है । कुम्भ मेला सिर्फ पौराणिक इतिहास के साथ पर्व स्थलों के कारण भी काफी प्रसिद्ध है | कुम्भ मेले के सम्बन्ध में अनेक पौराणिक एवम् लोक प्रचलित कथाएँ है , लेकिन सबसे पुरानी एवम् मान्यतानुसार सही कही जाने वाली कथा “समुन्द्र मंथन” से जुडी है | कुम्भ का संस्कृत में अर्थ है – “कलश” , ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिन्ह है |
हिन्दू धर्म में कुम्भ का पर्व हर 12 वर्ष के अंतराल पर चारो स्थानों में से किसी एक पवित्र नदी के तट पर मनाया जाता है | हरिद्वार में गंगा , उज्जैन में शिप्रा , नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में गंगा , यमुना और सरस्वती मिलती है |





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 झंडा मेला देहरादून Jhanda Mela Dehradun

झंडा मेला या झंडे का मेला उत्तरी भारत में सबसे बड़ा मेल है जो हजारों भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है , यह मेला देहरादून में मनाया जाता हैं|  इसे श्री गुरु राम राय जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जो सिखों के सातवें गुरु के सबसे बड़े पुत्र हैं – श्री हर राय जी। इस मेले में 1733 में इस दिन डून घाटी में आने के लिए एक विशाल ध्वज (झांडा जी) फहराया गया है। झंडा मेला चैत्र के पांचवें दिन मनाया जाता है जो होली के पांचवें दिन भी है।पंजाब, यूपी, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के पड़ोसी राज्यों के हजारों भक्त झंडा मेले में झंडा उछाल समारोह से कुछ दिन पहले देहरादून आते हैं ।एकादशी की पूर्व संध्या पर, गुरु राम राय दरबार के श्री महाता द्वारा सभी भक्तों का स्वागत है, हरियाणा के राययनवाला में यमुना नदी के किनारे जाते हैं, देहरादून से 45 किलोमीटर दूर संगत को आमंत्रित और स्वागत करते हैं।

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गौचर मेला चमोली 






उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में लगने वाला सुप्रसिद्ध मेलागौचर मेला,समुद्रसतह से 800 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।

उत्तराखंड, मेलों  संस्कृति और विचारों का  मिलन स्थल माना जाता  है। यहां के प्रसिद्ध मेलों में से एक अनूठा मेला गौचर मेला है।

यह मेला पिथौरागढ़ व चमोली जिले में भोटिया जनजाति के लोगों द्वारा आयोजित किया गया है।

गौचर अपने ऐतिहासिक व्यापार मेले के रूप में जाना जाता है। जो उत्तराखंड के समतल भूमि का सबसे बड़ा क्षेत्र है। जिसमें भविष्य में हवाई अड्डा बनने की संभावना है।

गढ़वाल के तत्कालीन डिप्टी  कमिश्नर के सुझाव, पर माह नवम्बर, 1943 में प्रथम बार गौचर में व्यापारिक मेले का आयोजन शुरू हुआ। तथा बाद में धीरे-धीरे इसने, औद्योगिक विकास मेले एवं सांस्कृतिक मेले का स्वरूप धारण कर लिया।  गौचर मेले का आयोजन भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिन के अवसर पर 14 नवम्बर को होता है।

पूर्णागिरि मेला उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत नगर में स्थित पूर्णागिरि मंदिर में आयोजित किया जाता है

PURNAGIRI MELA TANAKPUR , CHAMPAWAT !! (पूर्णागिरी मेला !!)






उत्तराखंड के चम्पावत जिले में पड़ने वाले उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध स्थान में “मांपूर्णागिरि” का दरबार है | पूर्णागिरी मंदिर उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत नगर में काली नदी के दांये किनारे पर स्थित है । चीन, नेपाल और तिब्बत की सीमाओं से घिरे सामरिक दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण चम्पावत ज़िले के प्रवेशद्वार टनकपुर से 19 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ माँ भगवती की 108 सिद्धपीठों में से एक है। उत्तराखण्ड जनपद चम्पावत के टनकपुर के पर्वतीय अंचल में स्थित अन्नपूर्णा चोटी के शिखर में लगभग 3000 फीट की उंचाई पर यह शक्तिपीठ स्थापित है अर्थात ” पूर्णागिरी मंदिर”।देश के चारों दिशाओं में स्थित कालिकागिरि, हेमलागिरि व मल्लिकागिरि में मां पूर्णागिरि का यह शक्तिपीठ सर्वोपरि महत्व रखता है। आसपास जंगल और बीच में पर्वत पर विराजमान हैं ” भगवती दुर्गा “ । इसे शक्तिपीठों में गिना जाता है । इस शक्तिपीठ में पूजा के लिए वर्ष-भर यात्री आते-जाते रहते हैं |

जौलजीबी का मेला

जौलजीबी का मेला , पिथौरागढ़ !! (JAULJIBI MELA , PITHORAGARH)

पिथौरागढ़ नगर से 68 किमी की दूरी पर स्थित “जौलजीबी” एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह स्थान गोरी और काली नामक दो नदियों का संगम स्थल होने के कारण प्रसिद्ध है । इसके अलावा इसी संगम स्थल पर प्रतिवर्ष एक प्रसिद्ध मेला “जौलजीबी का मेला” आयोजित किया जाता है , जो पूरे भारत और नेपाल के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है । जौलजीबी का मेला भारत नेपाल के साझी संस्कृति का एक ऐतिहासिक प्रतीक है | मेला मकर संक्रान्ति के शुभ अवसर पर आयोजित किया जाता है । जौलजीबी से 10 किमी की दूरी पर एक अन्य पर्यटक आकर्षण “कालापानी की पहाड़ी” है , जहाँ एक गर्म पानी का स्रोत है, जिसे औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है ।

Thal Mela Festival of Pithoragarh

थल मेला , पिथौरागढ़ (THAL MELA , PITHORAGARH)

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 50 कि.मी. की दुरी पर “थल” नामक एक क़स्बा है |पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के बालेश्वर थल मंदिर में हर वर्ष बैशाखी के अवसर पर क्षेत्र में प्रसिद्ध व्यवसायिक मेला का आयोजन किया जाता है , जो की स्थान के अनुसार “थल मेला”कहलाता है | 13 अप्रैल 1940 को यहां बैशाखी के अवसर पर “जलियांवाला दिवस” मनाए जाने के बाद इस मेले की शुरुआत हुई ।






थल में स्थित “शिव मंदिर” इस मेले का प्रमुख केंद्र है | थल के दुसरे मंदिरों में बालेश्वर मंदिरकी महिमा का वर्णन भी मिलता है | इस मेले के अवसर पर मंदिर में स्थित “शिवलिंग” के विशेष दर्शन प्राप्त किये जाते है | स्कन्दपुराण के यात्री को रामगंगा में स्नान कर तथा शिव के गणों का पूजन कर पवित्र पर्वत की ओर प्रस्थान करना होता है | वर्तमान समय में भी थल यात्री मान सरोवर की ओर प्रस्थान करते है |

कैंची धाम मेला आयोजन

कैंची धाम मेला , नैनीताल (KAINCHI DHAM MELA , NAINITAL)






कैंची धाम , उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा/रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पर स्थित है । कैंची धाम सरोवर नगरी (नैनीताल) से आगे 22 किमी० और भवाली से 8 किमी० पर अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित है | बाबा नीम करौली महाराज का सुन्दर मन्दिर, जो कि आस्था का प्रतीक है | इसकी संस्थापक बाबा नीब करौली महाराज ने सन 1962 के आसपास यहाँ आये थे । इस आश्रम को “नीम करौली”, “नीब करौली”, “कैंची धाम” नाम से भी जाना जाता है | नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा/रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित कैंची धाम अपनी स्थापना के बाद से ही लगातार जनमानस के लिए अपार श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा है। कैंची धाम और खासकर स्वर्गीय नीम करौली बाबा के भक्तों की यहां खूब आस्था है। ( कैंची धाम मेला )

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