TOP 10 BEST AND AWESOME TOURIST PLACES TO VISIT IN UTTARKASHI उत्तरकाशी जिले के पर्यटक एवं आकर्षण स्थल 

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन “के इस पोस्ट में उत्तरकाशी जिले में स्थित पर्यटक एवं आकर्षण स्थल “Best And Awesome Tourist Places To Visit In Uttarkashi” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं उत्तरकाशी के”पर्यटक एवं आकर्षण स्थल″ के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|

HAR KI DOON UTTARKASHI

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उत्तराखंड राज्य, के उत्तरकाशी जिले में स्थित हर की दून, जिसे ईश्वर की भूमि कहा जाता है। यह यमुना नदी की सहायक रूपिन व सूपिन, नदियों के आस-पास फतेह पर्वत की गोंद में बसा है। यह उच्च हिमालय के निकट स्थित एक अत्यन्त दुर्गम अन्चल है।
उत्तर में हिमाचल के व पूर्व में तिब्बत से लगा हर की दून का इलाका अपने भीतर गोविन्द पशु विहार वन्य जीव अभयारण्य को समेटे हुए है। हर की दून घाटी की ऊंचाई समुद्र सतह से लगभग 3500 मीटर है।

दून की घाटी में टैªकिंग के लिए पर्यटक आते रहते है। यह घाटी पृष्ठभूमि में 21000 फीट की ऊंचाई वाली स्वर्गारोहिणी चोटी भी दिखाई देती है। इसकी मान्यता है। कि महाभारत काल में युधिष्ठिर अन्य पाण्डवों सहित इसी शिखर से स्वर्ग को गये थे।

GANGOTRI NATIONAL PARK UTTARKASHI

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गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में स्थित है। पार्क की पूर्वोत्तर सीमा तिब्बत के साथ, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगी हुई है।गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क की स्थापना 1989 में हुई थी | इसका  कुल क्षेत्रफल, 1553 वर्ग किलोमीटर में फैला हैं सतह से औसतन ऊंचाई 7083 मीटर है। बर्फ से ढकी पहाड़ और हिमनद इस उद्यान के विस्तृत भाग में फैले हुए है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख भी इसी पार्क के अन्दर ही स्थित है। इस पार्क का नाम गंगोत्री इसी स्थल के नाम से रखा गया हैं गंगोत्री हिमनद जिस पर पार्क का नाम दिया है। वो हिन्दुओं के पवित्र स्थलों में से एक है।




DODITAL UTTARKASHI

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उत्तराखंड राज्य के “उत्तरकाशी जिले” में स्थित सुन्दर एवं आकर्षण डोडीताल, पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। डोडीताल सुंदर झील, दुर्लभ प्रजातियां मछलियां और बर्फीले बुग्याल पर्यटकों का, पसंदीदा स्थान बनता जा रहा हैं, लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते यहां पर्यटक काफी कम पहुच पा रहे है।डोडीताल समुद्रसतह से 3,310 मीटर की ऊंचाई पर उच्च पहाड़ों के बीच घिरा हुआ एक पन्ना झील है। यह ताल अपनी शांत एवं सुन्दर वातावरण के कारण उत्तर भारत के सबसे खूबसूरत उच्च ऊंचाई झीलों में से एक है। डोडीताल का नाम दुर्लभ हिमालय ब्राउन ट्राउन प्रजाति की मछलियों के नाम से रखा गया है।








DAYARA BUGYAL DISTRICT UTTARKASHI

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उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल समुद्र सतह से 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। उत्तरकाशी गंगोत्री मार्ग पर स्थित भटवारी नामक स्थान से इस खूबसूरत घास के मैदान के लिए रास्ता जाता है। दयारा पहुँचने के लिए यात्रियों को बरसू गांव पहुचना पड़ता है। यह दयारा बुग्याल का अंतिम गांव है। यहा तक यात्री आसानी से वाहनों द्वारा पहुँच सकते है। यहां ट्रैकिंग द्वारा लगभग 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।ह जगह शानदार हिमालय का दृश्य प्रस्तुत करता है। यहा पर्यटक झील के निकट कैम्पिंग सुविधाओं का भी आनन्द ले सकते है। दयारा बुग्याल से 30 किमी की दूरी पर स्थित दोदीताल भी है। जो यात्रीयों के लिए काफी लोकप्रिय है।

KAPIL MUNI ASHRAM UTTARKASHI

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कपिल मुनि आश्रम देवभूमि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गुन्दीयाट गाव में स्थित है | यह आश्रम समुद्री तल से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक छोटे से गांव गुन्दीयाट में स्थित है , जो कि गढ़वाल क्षेत्र का एक विशिष्ट काली स्लेट की छतों एवं छोटी खिड़कियों वाला गांव है । यह आश्रम ऋषि कपिल मुनि को समर्पित है, जिन्होंने यहाँ हिंदू देवता शिव से आशीर्वाद लेने के लिए उनकी पूजा-अर्चना एवं तपस्या की थी। साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ऋषि को आशीर्वाद दिया । कपिल मुनि ‘सांख्य दर्शन’ के प्रवर्तक थे, जिन्हें भगवान विष्णु का पंचम अवतार माना जाता है ।

KARN DEVTA TEMPLE , UTTARKASHI

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कर्ण देवता मंदिर , उत्तरकाशी जिले के नेतवार गाँव से लगभग डेढ़ मील दूर सारनौल गांव में स्थित एक प्राचीन एवम् लोकप्रिय मंदिर है | यह मंदिर महाभारत के समय से सम्बंधित है | यह मंदिर कर्ण को समर्पित है जिसे पांडवों में सबसे बड़ा भाई माना जाता है एवम् कर्ण देवता मंदिर को शक्ति और शांति का प्रतीक माना जाता है | कर्ण देवता मंदिर के निकट तमस या टोंस नदी नामक नदी स्थित है इस नदी के बारे में यह मान्यता है कि भुब्रूवाहन के आंसुओं के कारण ही यह नदी बनी थी | कर्ण देवता मंदिर के अल्वा उत्तराखंड के सीमांत जनपद मोरी ब्लॉक के 24 गांव ऐसे हैं जहां लोग दानवीर कर्ण की पूजा करते हैं | इस क्षेत्र के लोग कर्ण देवता को अपना “कुल देवता” और “ईष्ट देवता” मानते है |




POKHU DEVTA TEMPLE , UTTARKASHI

पोखु देवता मंदिर

पोखु देवता मंदिर , उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के क्षेत्र नैटवाड़ गांव में यमुना नदी की सहायक टोंस नदी के किनारे स्थित है | पोखू देवता को लोग न्याय के रूप में भी पूजा करते हैं | नैटवाड़ गांव चारों ओर सुंदर देवदार और चीड़ के पेड़ है। नैटवाड गांव पहुंचने के लिए पर्यटकों को चकराता से चकराता-शिमला मार्ग पर स्थित ट्यूनी जाना होता है। इस घाटी से एक संकीर्ण रास्ता एक लोहे का पुल पर निकलता है, जो यात्रियों को पोखू देवता मंदिर ले जाता है। उत्तरकाशी के नैटवाड़ में स्थित पोखू देवता का मंदिर भी न्याय के लिए प्रसिद्ध है। सदियों से ऐसी मान्यता है कि यहां हाजिरी लगाने वाले को हमेशा अविलंब न्याय मिलता है।

SHANI DEV TEMPLE ,KHARSALI , UTTARKASHI

Shani Temple Uttarkashi

शनिदेव मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के खरसाली गांव में स्थित एक प्राचीन मंदिर है । यह मंदिर हिंदूओं के देवता शनिदेव को समर्पित है , जिन्हें एक पौराणिक कथा के अनुसारहिंदू देवी यमुना का भाई माना जाता है | कहा जाता है कि शनिदेव न्यायाधीश हैं , जो हर कर्म का हिसाब करते हैं । यह मंदिर समुद्री तल से लगभग 7000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है । इस मंदिर की कलाकृति बेहद ही प्राचीन है | शनि मंदिर के बारे में इतिहासकार मानते है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवो ने करवाया है एवम् इस पांच मंजिला मंदिर के निर्माण में पत्थर और लकड़ी का उपयोग किया गया है ।





KUTETI DEVI TEMPLE , UTTARKASHI

कुटेटी देवी मंदिर

कुटेटी देवी मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक प्राचीन एवम् धार्मिक मंदिर है | यह मंदिर भागीरथी नदी के तट पर हर पर्वत पहाड़ी पर उत्तरकाशी से 2 कि.मी. की दुरी पर स्थित है | इस मंदिर के निकट ही प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर भी स्थित है | पुराने समय में कुटेटी देवी मंदिर सामान्य स्थानीय भवन शैली से ही मेल खाता था । बाद में “मनेरी भाली परियोजना” निर्माण के दौरान मंदिर का पक्का निर्माण करवाया गया तथा मंदिर को शिखर शैली का रूप दिया गया ।




कुटेटी देवी मंदिर के बारे में यह माना जाता है कि मंदिर की स्थापना महाराजा कोटा की बेटी और दामाद के द्वारा की गयी है | कुटेटी देवी के निर्देश के अनुसार महाराजा कोटा की बेटी और दामाद ने कुटेटी देवी (जो कि देवी दुर्गा का एक रूप है ) के मंदिर का निर्माण ठीक उस स्थान पर कराया , जिस स्थान पर कीमती पत्थरों की खोज की गई थी | यह मंदिर अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है और पूरे देश के पर्यटकों द्वारा इस मंदिर का दर्शन किया जाता है | उत्तरकाशी की पूजा में ” कोट ग्राम खाई ” के लोग कुटेटी देवी को अपने मुख्य देवता के रूप में पूजते हैं ।

VISHWANATH TEMPLE , UTTARKASHI

काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी

विश्वनाथ मंदिर हिन्दू देवस्थानो में से सर्वाधिक सुप्रसिद्ध मंदिरों में से एक है | यह मंदिर उत्तरकाशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है |उत्तरकाशी को प्राचीन समय में विश्वनाथ की नगरी कहा जाता था एवम् कालांतर में इस स्थान को “उत्तरकाशी” कहे जाने लगा | केदारखंड और पुराणों में उत्तरकाशी के लिए ‘बाडाहाट’ शब्द का प्रयोग किया गया है और पुराणों में इसे ‘सौम्य काशी’ भी कहा गया है । 12 ज्योतिर्लिगों में से एक उत्तराखण्ड के काशी विश्वनाथ मंदिर की स्‍थापना परशुराम जी द्वारा की गई थी एवम्  ज्योतिलिंग के अतर्गत मंदिर में विश्वनाथ भगवान प्रकट हुए थे | विश्वनाथ मंदिर हिंदूओं के देव भगवान शिव को समर्पित है , तथा भक्त यहां मंत्रों का सस्वर पाठ हर समय सुन सकते हैं | विश्वनाथ मंदिर आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है |