जानिए? उत्तराखंड के  प्रसिद्ध हिल स्टेशन के बारे में Best Hill Station Uttarakhand

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में उत्तराखंड के “प्रसिद्ध हिल स्टेशन” (Best Hill Station Uttarakhand) के बारे में बताने वाले हैं, यदि आप जानना चाहते हैं, “प्रसिद्ध हिल स्टेशन Best Hill Station Uttarakhand” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

Places to visit in Nainital

नैनीताल Nainital






नैनीताल का मुख्य आकर्षण नैनीताल में स्थित “नैनी झील” है। स्‍कंद पुराण में इसे त्रिऋषि सरोवर भी कहा गया है। नैनीताल और उसके दिल में सबसे लोकप्रिय पर्यटक आकर्षणों में से एक – नैनी झील अपनी सुन्दरता का रंग दर्शाता है । यह झील नाशपाती के आकर की दिखाई देती है | इस झील को देख कर  बहुत से पर्यटक आकर्षित होते है | नैनी झील में आप नौकायन , बोटिंग  या पैडलिंग बोटिंग का आनंद ले सकते हैं । इस झील को सात हरे-भरी पहाड़ियों ने घिरा हुआ है और बहुत से लोगों का दिल चुरा लेता है | नैनी झील में आपको अनेक मछलिया भी दिखयी देंगे | झील के दोनों किनारों पर बहुत सी दुकानें और विक्रय केन्द्र हैं जहाँ बहुत भीड़भाड़ रहती है । नदी के उत्तरी छोर पर नैना देवी मंदिर है ।

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              पंगोट नैनीताल Pangot Nainital

उत्तराखंड, राज्य के नैनीताल जिले के कोसिआकुतोली तहसील में एक छोटा सा गांव पंगोट है| यह  समुद्रतल से लगभग 6,300 फीट की ऊंचाई पर एक पर्यटक स्थल है| यह पर्यटकों की बेहत पसंदीदा जगह है|पंगोट नैनीताल से सिर्फ 15 किमी दूर स्थित अपने जंगलों और पक्षियों के लिए प्रसिद्ध एक छोटा सुरम्य स्थान है। पंगोट में घूमना एक दूरस्थ हिमालयी गांव में कदम उठाने जैसा है। यह एक चिड़ियाघर है यहाँ आके पर्यटक स्वर्ग के सामान अनिभूति करते है| यहाँ आसपास के पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां हैं।





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मसूरी  Mussoorie






उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले से मसूरी मात्र 35 km की दुरी पर स्थित एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है | यह उत्तराखंड में सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशन है | इस जगह को पहाड़ो की रानी” के नाम से भी जाना जाता है | मसूरी ने “मुसर्जी या झाड़ी के मंसूर के पौधे से नाम प्राप्त किया है जो कि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। मसूरी 1880 मीटर की औसत उचाई पर गढ़वाल के पहाड़ो पर एक घोड़े की नाल के ऊपर स्थित है | मसूरी – दून वैली और शानदार हिमालय के कमांडिंग नज़ारे प्रदान करता है | इस इलाके में सबसे ऊँचा स्थल लाल टिब्बा है जो की लन्दौर नामक जगह में है | इसकी ऊँचाई 2,275 मीटर है

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धनौल्टी Dhanaulti 






धनौल्टी , एक शांत और खूबसूरत जगह स्थान है जो कि मसूरी से लगभग तीस किलोमीटर दूर टिहरी जाने वाली रोड पर स्थित है | धनौल्टी देवदार के जंगल से घिरा है। अब देवदार का जंगल ही इसकी पहचान बन चुका है । गढ़वाली व्यंजन सुंदर स्थलों के साथ ही गढ़वाल अंचल अपने विशिष्ट व्यंजनों के लिए भी काफी मशहूर है।धनौल्टी काफ़ी शान्तिपूर्ण स्थल के रूप में भी जानी जाती है जिस कारण यहाँ पर्यटकों की भीड़ अधिक रहती है। लंबी जंगली ढलानें , ठंडी व शांत हवाएँ , स्थानीय लोगों द्वारा की जाने वाली मेहमान नवाजी, मनमोहक मौसम, बर्फ़ से ढंके पहाड़ यहाँ की ख़ास विशेषताओं में शामिल हैं, जो इस जगह को सुकूनभरी छुट्टियाँ बिताने के लिए एक आदर्श जगह का दर्ज़ा देते हैं ।

Almora A Tourist Place in Uttarakhand

अल्मोड़ा Almora






उत्तराखंड के कुमाऊं मण्डल का एक जिला है , जिसका मुख्यालय अल्मोड़ा नगर में है | अल्मोड़ा एक पहाड़ी जिला है जो की घोड़े के खुर के समान रूप में बना हुआ है | अल्मोड़ा जिले का क्षेत्रफल 3072 वर्ग किलोमीटर है | एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि अल्मोड़ा की कौशिका देवी ने शुम्भ और निशुम्भ नामक दानवो को इसी क्षेत्र में मारा था | अल्मोड़ा पर पहले चाँद साम्राज्य का अधिकार था फिर कत्यूरी राजवंश का हो गया ।

History of Bhimtal in Hindi

भीमताल Bhimtal






यह एक त्रिभुजाकर झील है | यह उत्तराखंड में काठगोदाम से 10 किलोमीटर उत्तर की ओर है | इस ताल की लम्बाई 1674 मीटर , चौड़ाई 447 मीटर , और गहराई 15 से 50 मीटर तक है | भीमताल “नैनीताल” से भी अत्यधिक बड़ा ताल है | नैनीताल की भाति भीमताल के भी दो कोने है , जिन्हें मल्लीताल और तल्लीताल कहते है और यह दोनों कोने आपस में सडक से जुड़े हुए है | नैनीताल से भीमताल की दुरी 22.5 km है | इस स्थान से गौला नदी निकलती है जो कि आगे हल्द्वानी से बहते हुए रामगंगा नदी में मिल जाती है |

History of Binsar Almora

बिनसर Binsar






बिनसर का एक समृद्ध , विविध और आकर्षक इतिहास है जो की प्राचीन काल में वापस आ सकता है | बिनसर चंद वंश की राजधानी थी जो की 7 वी और 8 वी शताब्दी के बीच कुमाउं क्षेत्र पर शासन करता था | चंद राजवंश के शासक इस शांत शहर की पहाडियों और प्रकर्ति के बीच सुखुद मौसम और शांतिपूर्ण दृश्यों का आनंद लेने के लिए गर्मियों में बिनसर गए थे | बिनसर क्षेत्र में गोलू देवता और बिनसर के राजा के बीच एक पौराणिक युद्ध भी देखा गया है |गोलू देवता , जो गौर भैरव या भगवान शिव का अवतार माने जाते है , वो उत्तराखंड के कुमाउं क्षेत्र में पौराणिक और ऐतिहासिक भगवान है | ग़लतफ़हमी के परिणाम के रूप में , गोलू देवता का सिर काट दिया गया था और उनका सूँढ अब बिनसर वन्यजीव अभयारण के निकट ग्यारड दाना गोलू में गिर गया था और इनका निर्णायक सिर कपकरहन में गिर गया | इन दोनों जगहों पर अभी भी भगवान गोलू को समर्पित मंदिर है |

chamba

चंबा Chamba 






चम्बा मंसूरी से 60 किलोमीटर और नरेन्द्र नगर से 48 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चंबा  समुद्र तल से 1676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से बर्फ से ढके हिमालय पर्वत और भागीरथी घाटी का खुबसूरत नजारा देखा जा सकता है। चम्बा अपने स्वादिष्ट सेबों के लिए भी प्रसिद्ध है। यह स्थान देवप्रयाग से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चंद्रबदनी पहुचने के लिए आपको देवप्रयाग से जामनी खाल होते हुए नैखरि एवं जुराना बैन्ड तक गाड़ी में जाना होगा। यह एक रमनीक स्थल भी है, उत्तराखंड में माता के तीन सिद्धपीठ शुरकन्डा, कुन्जापुरि एवं चन्द्रबदनी है, जिनके दर्शन आप उपरोक्त तीनों में से किसी एक मंदिर में खडे होकर कर सकते हैं|

Champawat Tourism Uttarakha

चम्पावत Champawat 






चम्पावत , उत्तराखंड में स्थित एक प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय पर्यटन स्थल है | चम्पावत को 1997 में एक अलग जिले के रूप में स्थापित किया गया था और यह क्षेत्र मंदिरों और सौंदर्यपर्ण दृश्य के लिए प्रसिद्ध है | चम्पावत 1613 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को अपने आधीन करता है और नेपाल , उधमसिंह नगर जिला , नैनीताल जिला और अल्मोड़ा जिले के साथ अपनी सीमा को सांझा करता है | चम्पावत, टनकपुर से 75 किमी की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है | चम्पावत, टनकपुर से 75 किमी की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है | पौराणिक इतिहास के अनुसार चम्पावत चंद वंश की राजधानी थी |

Chopta Trek

चोपता Chopta






चोपता उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में उखीमठ से 37 किलोमीटर दूर पर समुद्र की सतह से 9515 फीट की ऊंचाई पर स्थित है । यह पहाड़ी स्थान एक ऐसी खूबसूरत जगह है , जहाँ पहुँच कर मन को शांति और विश्राम मिलता है | इस स्थान को ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड’ के नाम से भी जाना जाता है | यह सिर्फ एक पड़ाव है , जहाँ केदारनाथ और बद्रीनाथ के बीच चलने वाली गाड़ियाँ रुकती हैं । यह छोटा-सा हिल स्टेशन है , जहाँ की सुंदरता किसी साँचे में कैद तस्वीर जैसी लगती है। यह किसी दूसरी दुनिया यानी धरती पर स्वर्ग जैसा अहसास कराती है ।

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चौकोड़ी Chaukori






उत्तराखंड राज्य, के पिथौरागढ़ जिले में स्थित चौकोड़ी एक छोटा सा शहर है।यह बेरीनाग से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

चौकोड़ी एक ऐसा हिल स्टेशन  हैं , जहां तेजी से मौसम परिर्वतित होता रहता है। यहां सपने देखने वाले अपनी कल्पना को वास्तविकता में बदल सकते है। शाही हिमालय और मोटी वुडलैंड्स से घिरा हुआ, चौकोड़ी भव्य नंदा देवी, नंदा कोट और पंचाचुली शिखर का शानदार दृश्य पेश करता है। चौकोड़ी  समुद्रसतह से 2,010 मीटर की ऊंचाई पर स्थित  है।

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ग्वालदमGwaldam 






ग्वालदम हरी जंगल और सेब बागानों के बीच, 1629 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। कौसानी से 40 किलोमीटर, ग्वालदम हिमालयी चोटियों नंदा देवी (7817 मीटर), त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदा घुति (630 9 मीटर) का एक आकर्षक दृश्य पेश करता है।ग्वाल्दाम बैजनाथ से 22 किमी दूर है|

ग्वालदम एक छोटा सा शहर है, इसकी समृद्धि का मुख्य कारण यह कुमाऊं और गढ़वाल का स्टेशन  है और यहाँ से  बहुत  रास्ते विभिन्न क्षेत्रों और गांवों  की ओर जाते है|

खिरसू

खिरसू khirsu 






उत्तराखंड लंबे समय से अपने धार्मिक इतिहास के लिए जाना जाता है । खिरसू उन पर्यटन स्थलों में से एक है , जो की वर्तमान समय में एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन के रूप में प्रसिद्ध है | खिरसू उत्तराखंड राज्य के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है | यह एक रमणीक स्थल है । खिरसू असल में एक गांव है , जिसे उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पर्यटन स्थल का दर्जा दिया गया । खिरसू समुन्द्रतल से लगभग 1700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है

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 लैंसडाउन Lansdown






उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले में स्थित लैंसडाउन एक छावनी शहर है। जिसकी खूबसूरत देखते ही बनती है। उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में स्थित लैंसडाउन बेहद खूबसूरत पहाड़ी हिल स्टेशन है।

यहां का मौसम पूरे वर्ष बेहद सुहावना रहता है।  हर तरफ हरियाली आपको अलग दुनियां का एहसास कराती है। लैंसडाउन की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 1706 मीटर है। कहा जाता है कि इस जगह को अंग्रेजों ने पहाड़ों को काटकर बसाया था।

Munsiyari Images

मुनस्यारी Munsyari






मुनस्यारी एक खूबसूरत पर्वतीय स्थल है , जो कि पिथौरागढ़ का एक सीमांत क्षेत्र है जिसके एक तरफ तिब्बत सीमा और दूसरी ओर नेपाल सीमा लगा हुआ है | यह स्थल मुख्य शहरपिथौरागढ़ से 128 km की दुरी पर स्थित है | मुनि का सेरा अर्थात तपस्वियों का तपस्थलहोने के कारण इसका नाम “मुनस्यारी” पड़ा | मुनस्यारी उत्तराखंड राज्य में हिमालय पर्वत की तलहटी पर स्थित एक छोटा सा हिल स्टेशन है | यह छोटा-सा शहर पिथौरागढ़ जिले में सबसे सुखद मौसम के लिए जाना जाता है |

मुक्तेश्वर Mukteswar






“मुक्तेश्वर” उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में स्थित एक ग्राम पंचायत है । यह समुन्द्र सतह से 2286 मीटर (7500 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है | मुक्तेश्वर का नाम दो संस्कृत शब्द से निकला है “मुक्ति” और “ईश्वर से” । ‘मुक्ति’ का मतलब “शाश्वत जीवन” और “ईश्वर” भगवान के लिए है और मुक्तेश्वर के बारे में एक प्राचीन कथा में जिक्र है , जिसमें शिव के साथ एक राक्षस का युद्ध होता है , हालांकि दानव पराजित हो जाता है, वह अमरता प्राप्त करता है । अंग्रेजी दौर में बने खूबसूरत हिल स्टेशन मुक्तेश्वर को “मुक्ति के ईश्वर” , संसार की बुरी शक्तियों के संहारक “भगवान शिव का घर” कहा जाता है |

नौकुचियाताल Naukuchiatal

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल क्षेत्र में पर्यटन के लिए दर्शन स्थल में से एक स्थल है “नौकुचियाताल” | नौकुचियाताल एक ऐसी बड़ी झील है जिसकी सुन्दरता देखते ही बनती है | Naukuchiatal (Lake with Nine Corners)

नौकुचियाताल भीमताल से 4 किलोमीटर की दुरी पर दक्षिण पूर्व दिशा की ओर स्थित है |समुद्र तल से नौकुचियाताल की ऊँचाई 1290 मीटर हैं

पिथौरागढ़ Pithoragarh






पिथौरागढ़ , देवभूमि उत्तराखंड राज्य का एक नगर है , जो कि उत्तराखंड राज्य के पूर्व में स्थित सिमांतर जनपद है | इस जिले के उत्तर में तिब्बत, पूर्व में नेपाल, दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व में अल्मोड़ा, एवं उत्तर-पश्चिम में चमोली ज़िले पड़ते हैं |पिथौरागढ़ का पुराना नाम “सोरघाटी” है। सोर शब्द का अर्थ होता है-– सरोवर। यहाँ पर माना जाता है कि पहले इस घाटी में सात सरोवर थे । सरोवर में पानी सूखने से इस स्थान में पठारी भूमि का जन्म हुआ | जिससे इस जगह का नाम “पिथोरा गढ़” पडा और यह भी माना जाता है कि मुगलों के शासन काल में उनकी भाषा की दिक्कतों के चलते इसका नाम “पिथौरागढ़” पड़ गया | पिथौरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है

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रामगढ   Ramgarh






रामगढ उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में स्थित एक छोटा पहाड़ी स्टेशन है।  यह समुद्रतल से लगभग 1,729 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। नैनीताल से केवल 24 किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ फलों का एक अनोखा क्षेत्र  है। कुमाऊं क्षेत्र में सबसे अधिक फलों का उत्पादन भुवाली-रामगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में होता है। इस क्षेत्र में अनेक प्रकार के फल पाए जाते है। बर्फ पड़ने के बाद सबसे पहले ग्रीन स्वीट सेब और सबसे बाद में पकने वाला हरा पिछौला सेब होता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में डिलिशियस, गोल्डन किंग, फैनी और जोनाथन जाति के श्रेष्ठ वर्ग के सेब भी होते है। आडू, नासपाती, खूबानी, पूलम भी यहा काफी मात्रा में पाए जाते है। रामगढ़ शान्त वातावरण एवं स्कून देने वाली जगह है। यहां से हिमालय का सुन्दर नजारा दिखाई देता है

रानीखेत Ranikhet






रानीखेत भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थल है। रानीखेत,उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के अंतर्गत एक स्थान है। देवदार और बलूत के वृक्षों से घिरा रानीखेत बहुत ही रमणीक एक लघु हिल स्टेशन है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 85 किमी. की दूरी पर स्थित यह अच्छी पक्की सड़क से जुड़ा है। इस स्थान से हिमाच्छादित मध्य हिमालयी श्रेणियाँ स्पष्ट देखी जा सकती हैं। समुद्रतल से लगभग 1830 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस खूबसूरत शहर का भ्रमण करने के लिए विश्व भर से पर्यटक यहा आते है। यह नगर कभी अंग्रेजो की बेहद पसंदीदा जगह हुआ करता था । इस बात का प्रमाण है। अंग्रेजो द्वारा बनाए गए भव्य भवन जो आज भी इस नगर की शोभा को बढाते है। रानी खेत का मौसम और रानीखेत का तापमान भी बेहद मनभावन व सुहाना होता है |

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