Gaurikund – A Religious Place in Rudraprayag !! ( गौरीकुंड )

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित प्रसिद्ध लोकप्रिय धार्मिक एवम् पवित्र मंदिर “ Gaurikund – A Religious Place in Rudraprayag !! ( गौरीकुंड ) ” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है | यदि आप ” गौरीकुंड मंदिर “ के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते है , तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |



History and Beliefs of Gaurikund in Rudraprayag !! ( गौरीकुंड का इतिहास एवम् मान्यता !! )

गौरीकुंड रुद्रप्रयाग उत्तराखंड गौरीकुंड एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थयात्रा है , जो कि उखिमठ से 28 कि.मी और सोनप्रयाग से 5 कि.मी की दुरी पर समुन्द्र तल से 1982 की ऊँचाई पर देवभूमि उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है | ऐतिहासिक दृष्टि से गौरीकुंड प्राचीन काल से विद्यमान है | यहाँ से केदारनाथ मंदिर की दूरी 14 किलोमीटर है , जो पैदल अथवा घोड़े , डाँडी या कंडी में तय की जा सकती हैं । इस स्थान से केदारनाथ के लिए पैदल रास्ता प्रारंभ होता है | यह कुंड गढ़वाल हिमालय में 6000 फीट की एक प्रभाव्स्शाली ऊँचाई पर स्थित है | पहाड़ी इलाको का भव्य नज़ारा और कुंड के निकट बहती वासुकी गंगा के चारो ओरे उज्जवल हरियाली देखने के लिए एक आकर्षक जगह है | हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार यह माना जाता है कि गौरीकुंड वह स्थान है , जहाँ देवी पारवती ने सौ साल तक भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए ध्यान या तपस्या करी थी , यहां मान्यता है कि जो भी महिला माता पार्वती की आराधना करे उसे मनचाहा फल प्राप्त हो सकता है । गौरी कुंड के निकट गौरा माई का एक प्राचीन मंदिर है , जो कि देवी पारवती को समर्पित है | गौरीकुंड के निकट प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर भी स्थित है , जहाँ भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था | इस मंदिर में युगल की मूर्तियों की जटिलताएं हैं । इस स्थान के पास दो पवित्र स्नान पूल भी उपस्थित है , जिनमे से एक पूल में गर्म पानी सल्फर के निशान के साथ निकलता है और दुसरे कुंड से ठंडा पानी निकलता है , जिसे गौरीकुंड कहा जाता है | इस कुंड का पानी अक्सर बदलता रहता है ,गर्म पानी से तेज पानी मन्दाकिनी नदी से निकलता है , जो कि नजदीक से बहती है |

पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव ने गंगा को अपनी जटा में बांध लिया था । शिव का स्पर्श पाकर वह पवित्र हो गईं । यह पार्वती को अच्छा नहीं लगा था कि वो हमेशा शिव के साथ रहें । ऐसे में जब इस कुंड के पास से कोई यात्री गंगाजल लेकर कोई गुजरे तो पानी में उबाल आ जाता है । मान्यता है कि यदि कोई महिला इस कुंड में गंदे वस्त्रों से स्नान करे या वस्त्र कुंड में फेंक दे तो कुंड का पानी सूख जाता है ।

एक पवित्र मंदिर जो कि भगवान शिव द्वारा गणेश के काटे हुआ सिर का स्मरण कराता है !!





गौरीकुंड के निकट एक ओर प्रसिद्ध मंदिर स्थित है , जिसे “सिरकाता मंदिर” के नाम से जाना जाता है और यह मंदिर प्रभु गणेश को समर्पित गौरीकुंड से लगभग आधा किलोमीटर की दुरी पर स्थित है | यह मंदिर देवी पार्वती की प्रसिद्ध किंवदंती के बाद बनाया गया है , जिसने प्रभु गणेश को दरवाजे की रक्षा करने का आदेश दिया क्योंकि वह पूल में स्नान कर रही थी । जब प्रभु गणेश ने पूल के अंदर भगवान शिव को जाने के लिए प्रतिबंधित किया , तो भगवान शिव ने क्रोध में प्रभु गणेश का सर काट दिया , लेकिन भगवान शिव को यह मालूम नहीं था कि गणेश उनका अपना बेटा था | देवी पारवती को प्रभु गणेश की मृत्यु का बारे में पता चलते ही , देवी पारवती ने भगवान शिव को अपने प्यारे पुत्र का जीवन वापस लाने के लिए विनती की | फलस्वरूप , भगवान शिव ने गणेश के सिर को एक सफ़ेद हाथी के सिर के साथ बदल दिया और गणेश को अमरता का वरदान देकर “गणपति” नाम दिया | तब से, प्रभु गणेश की पुरे
भारत भर में समृद्धि और खुशी के देवता के रूप में पूजा होती है | इस कुंड के एक  निकट उमा शंकर शीला नामक एक विशाल चट्टान है , जहां 12 संतों की आत्माएं निवास करते थी , जो कि श्रीलंका से निकलने के बाद भगवान शिव का पालन करते थे |

यदि आप रुद्रप्रयाग जिले में घूमने आते है , तो पवित्र तीर्थ स्थान गौरीकुंड के दर्शन जरुर करे और साथ ही साथ अन्य प्रसिद्ध कालीमठ मंदिर , केदारनाथ मंदिर तुंगनाथ मंदिर , कोटेश्वर महादेव मंदिर , हरियाली देवी मंदिर , गुप्तकाशी मंदिर और त्रियुगीनारायण मंदिर दर्शन कर अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकते है |

Google Map of Gaurikund , Rudraprayag !!\

गौरीकुंड एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थयात्रा है , जो कि उखिमठ से 28 कि.मी और सोनप्रयाग से 5 कि.मी की दुरी पर समुन्द्र तल से 1982 की ऊँचाई पर देवभूमि उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है | आप इस स्थान को निचे Google Map में देख सकते है |





उम्मीद करते है कि आपको रुद्रप्रयाग जिले में स्थित पवित्र स्थल “ गौरीकुंड ” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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