चितई गोलू देवता मंदिर का इतिहास और मान्यताये , अल्मोड़ा (History and Beliefs of Chitai Golu Devta Temple )

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर “चितई गोलू देवता मंदिर का इतिहास एवम् मान्यताओ” के बारे में जानकारी देने वाले है , यदि आप चितई गोलू देवता मंदिर का इतिहास एवम् मान्यताओ के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े !!

अल्मोड़ा में स्थित प्रसिद्ध मंदिरों की जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक में क्लिक करे !



चितई गोलू देवता मंदिर का इतिहास और मान्यताये ,अल्मोड़ा  (History and Beliefs of Chitai Golu Devta Temple , Almora)

उत्तराखंड को देव भूमि के नाम से भी जाना जाता है , क्योकिं उत्तराखंड में कई देवी देवता वास करते है | (चितई गोलू देवता मंदिर का इतिहास और मान्यताये ,अल्मोड़ा )

जो कि हमारे ईष्ट देवता भी कहलाते है जिसमे से एक है , गोलू देवता |

जिला मुख्यालय अल्मोड़ा से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर न्याय के देवता कहे जाने वाले गोलू देवता का मंदिर स्थित है, इसे चितई ग्वेल भी कहा जाता है | सड़क से चंद कदमों की दूरी पर ही एक ऊंचे तप्पड़ में गोलू देवता का भव्य मंदिर बना हुआ है। मंदिर के अन्दर घोड़े में सवार और धनुष बाण लिए गोलू देवता की प्रतिमा है।

उत्तराखंड के देव-दरबार महज देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना, वरदान के लिए ही नहीं अपितु न्याय के लिए भी जाने जाते हैं | यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक भगवान और शिव के अवतार गोलू देवता को समिर्पत है । ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद वंश के एक सेनापति ने 12वीं शताब्दी में करवाया था।

एक अन्य कहानी के मुताबिक गोलू देवता चंद राजा, बाज बहादुर ( 1638-1678 ) की सेना के एक जनरल थे और किसी युद्ध में वीरता प्रदर्शित करते हुए उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके सम्मान में ही अल्मोड़ा में चितई मंदिर की स्‍थापना की गई।पहाड़ी पर बसा यह मंदिर चीड़ और मिमोसा के घने जंगलों से घिरा हुआ है। हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं।

कुमाउं के प्रसिद्ध निम्न चार स्थानो में स्थित गोलू देवता का मंदिर :-





1. गोलू देव मंदिर , चितई , अल्मोड़ा

2. चम्पावत गोलू मंदिर , चम्पावत

3. घोराखाल गोलू मंदिर , घोडाखाल

4. तारीखेत गोलू मंदिर , ताडीखेत

लोगों को मंदिरों में जाकर अपनी मुरादें मांगते देखा होगा | लेकिन उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित गोलू देवता के मंदिर में केवल चिट्ठी भेजने से ही मुराद पूरी हो जाती है। मूल मंदिर के निर्माण के संबंध में हालांकि कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं | परन्तु पुजारियों के अनुसार 19वीं सदी के पहले दशक में इसका निर्माण हुआ था।

इतना ही नहीं गोलू देवता लोगों को तुरंत न्याय दिलाने के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इस‌ कारण गोलू देवता को “न्याय का देवता” भी कहा जाता है।

चितई गोलू देवता मंदिर की मान्यताये

इस मंदिर की मान्यता ना सिर्फ देश बल्कि विदेशो तक में है | इसलिए इस जगह में दूर दूर से पर्यटक और श्रदालु आते है | इस मंदिर में प्रवेश करते ही यहाँ अनगिनत घंटिया नज़र आने लगती है |

कई टनों में मंदिर के हर कोने कोने में देखने वाले इन घंटे घंटियों की संख्या कितनी है , ये आज तक मंदिर के लोग भी नहीं जान पाए | आम लोग के द्वारा इसे घंटियों वाला मंदिर भी पुकारा जाता है | जहा कदम रखते ही घंटियों की पंक्तियाँ शुरू हो जाती है |

चितई मंदिर में मनोकामना पूर्ण होने के लिए भक्तो के द्वारा अनेक अर्ज़िया लगायी जाती है | क्योंकि माना जाता है कि जिन्हें कही से न्याय नहीं मिलता है वो गोलू देवता की शरण में पहुचते है | और लोगो का मानना यह भी है कि ” गोलू देवता न्याय करते ही है ” | क्युकी गोलू देवता को “ न्याय का देवता ” माना जाता है |

और यदि आप गोलू देवता की कहानी को जानना चाहते है तो इस लिंक में क्लिक करे :- घोडाखाल गोलू देवता की कहानी 

चितई मंदिर में लोग स्टाम्प पेपर पर लिखकर मन्नते मांगते है और मन्नते पूर्ण होने पर घंटिया चढाते है | और गोलू देवता के प्रति आस्था आप खुद मंदिर में लगी घंटियों को देखकर समझ सकते है |

चितई गोलू देवता मंदिर की यह मान्यता भी है कि यदि कोई नव विवाहित जोड़ा इस मंदिर में दर्शन के लिए आते है | तो उनका रिश्ता सात जन्मो तक बना रहता है |



उम्मीद करते है कि आपको “चितई गोलू देवता मंदिर का इतिहास और मान्यताये” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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