रुद्रप्रयाग धाम का इतिहास , पौराणिक मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल ! (History , Mythological Beliefs and Attractions of Rudraprayag)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड में स्थित 5 प्रयाग में से दुसरे प्रयाग “रुद्रप्रयाग” के बारे में जानकारी देने वाले है | (देवप्रयाग का इतिहास , पौराणिक मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल )

और इससे पहले की पोस्ट में हमने देवप्रयाग के बारे में जानकारी दी थी | यदि आपने वो पोस्ट नहीं पढ़ी तो निचे दिए गए लिंक में क्लिक कर देवप्रयाग के बारे में जरुर जाने |

रुद्रप्रयाग का इतिहास (History of Rudraprayag)

रुद्रप्रयाग का इतिहास“उत्तराखंड” जो कि ऐसे ही कई धार्मिक और पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्द है। यहाँ के कई स्थल सिर्फ पर्यटक स्थल के रूप में ही नहीं, पवित्र तीर्थस्थलों के रूप में भी लोकप्रिय हैं। उत्तराखंड के पंचप्रयागों में से एक “रुद्रप्रयाग” का अपना महत्व है | केदारनाथ धाम की ओर से आती मंदाकनी और दूसरी ओर से आती अलकनंदा जिस स्थान में मिलती है | उस स्थान को “रुद्रप्रयाग” के नाम से जाना जाता है | भगवान शिव को “रूद्र” नाम से भी संबोधित किया जाता था | इसलिए “रूद्र” नाम से इस संगम का नाम “रुद्रप्रयाग” रखा गया है | इस क्षेत्र में अलकनंदा व मन्दाकिनी नदियों के संगम पर भगवान रूद्रनाथ का प्राचीन मंदिर भी स्थित है | केदारनाथ भी रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है | प्रसिद्ध धर्मस्थल “केदारनाथ धाम” रुद्रप्रयाग से 76 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है |

रुद्रप्रयाग जिले का निर्माण 16 सितम्बर 1997 में किया गया | इस जनपद का निर्माण चमोली और पौड़ी के कुछ हिस्सों को मिलाकर किया गया था | रुद्रप्रयाग जिले के इतिहास के बारे में प्रामाणिक लिपि शब्द पर केवल 6 वें AD में पाया जाता है। आजादी से पहले यह स्थान टिहरी क्षेत्र के आधीन था | टिहरी का प्रमुख क्षेत्र नागपुर कहलाता है | रुद्रप्रयाग के बारे में यह माना जाता है कि यहाँ नागवंशी राजा राज्य करते थे | बाद में पंवार वंशी शासको ने अपना शासन स्थापित किया | 1804 में यह क्षेत्र गोरखा1815 में अंग्रेजो के आधीन रहा | पुराणों में केदार-खण्ड को भगवान का निवास कहा जाता था | यह वेदों और भारतीय पुराणों, रामायण और महाभारत के तथ्यों से लगता है कि इन हिंदू शास्त्रों को केदार-खण्ड में लिखा गया हैं।(देवप्रयाग का इतिहास , पौराणिक मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल)

और यदि आप रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित केदारनाथ धाम के बारे में जानना चाहते है तो निचे दिए गए लिंक में क्लिक करे :-

रुद्रप्रयाग की पौराणिक मान्यताये (Mythological Beliefs of Rudraprayag )

1. स्कन्दपुराण केदारखंड के अनुसार महाभारत के समय में पांडवो के युद्ध में विजय होने के उपरांत अपने कौरव भाइयो की हत्या का पश्चाताप करने के लिए पांडव अपना राज्य छोड़ कर मन्दाकिनी नदी के तट पर केदारनाथ पहुँच गये | और इसी स्थान से पांडव ने स्वर्गारोहिणी के द्वारा स्वर्ग को प्रस्थान किया |

2. केदारखंड के अनुसार रुद्रप्रयाग में महर्षि नारद ने भगवान शिव की एक पाँव पर खड़े होकर उपासना की थी और उनकी उपासना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने महर्षि नारद को रूद्र रूप में दर्शन दिए और महर्षि नारद ने रूद्र रूप में भगवान शिव से संगीत की शिक्षा ली एवम् भगवान शिव ने उन्हें वीणा प्रदान करी | और कहा जाता है कि तभी से इस जगह को “रुद्रप्रयाग” कहा जाने लगा | (रुद्रप्रयाग का इतिहास , पौराणिक मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल )

रुद्रप्रयाग के आकर्षण स्थल (Attractions of Rudraprayag)

rudraprayag history

कोटेश्वर मंदिर (3 किमी) :- कोटेश्वर महादेव मंदिर एक गुफा के रूप में है और यह अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। भक्तों का मानना है कि भगवान शिव ने
केदारनाथ के रास्ते पर गुफा में ध्यान दिया था जिसमें मूर्तियों का स्वाभाविक रूप से गठन किया गया था।

rudranath temple of rudraprayag

रुद्रनाथ मंदिर :- यह मंदिर पंच केदार में से एक है और यह गौरी कुंड में स्थित है | यह मंदिर समुन्द्र तल से 2,286 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | यह सूर्यकुंड ,
चंद्रकुड , और तारकुंड के मध्य में स्थित है | भक्त इस मंदिर में नीलकंठ के रूप में भगवान शिव की पूजा करते है |

रुद्रप्रयाग का इतिहास

तुंगनाथ मंदिर( चोपता मंदिर से 3 किमी) :- यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में सबसे ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिर है | तुंगनाथ मंदिर की मान्यता यह है कि यह मंदिर 1000
वर्ष पुराना है और इस स्थान पर भगवान शिवजी की पंच केदार में से एक रूप में पूजा की जाती है |

ऊपर दिए गए चित्र में दिए गए आकर्षण स्थल के अल्वा आप गुप्तकाशी, गौरीकुंड, मद्यममहेश्वर, उखीमठ , कालीमठ, कोटेश्च्वर महादेव, उम्र-नारायण, धारीदेवी,
त्रिजुगीनारायण, तुंगनाथ मंदिर भी रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित हैं। रुद्रप्रयाग जनपद “केदारनाथ मंदिर” के लिए प्रसिद्ध है | इसके अलावा अगस्त्मुनी, जखोली, सोनप्रयाग,
खिर्सू, गौरीकुण्ड, देवरियाताल, चोपता, गांधीसरोवर, चंद्रशिला, चोर्बरी ग्लेशियर और वासुकीताल आदि भी रुद्रप्रयाग के आकर्षण केन्द्र हैं | (रुद्रप्रयाग का इतिहास , पौराणिक मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल )

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