History of Dwarahat (द्वाराहाट का इतिहास)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य में स्थित प्रसिद्ध जिला अल्मोड़ा के “द्वाराहाट” अर्थात “द्वाराहाट का इतिहास” के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देने है | यदि आप द्वाराहाट के इतिहास के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़े |




“द्वाराहाट अथवा द्वारहाट” , रानीखेत तहसील , अल्मोड़ा जिला , उत्तराखंड का एक प्राचीन स्थान है | यह स्थान रानीखेत से 13 मील (लगभग 20.8 कि.मी.) की दुरी पर स्थित है | द्वाराहाट में तीन वर्ग के मंदिर है – कचहरी , मनिया तथा रत्नदेव | द्वाराहाट बद्रीनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान केंद्र रहा है | इसकी सांस्कृतिक महत्व के कारण , द्वाराहाट को “उत्तरा द्वारका” (उत्तर द्वारका – भगवान कृष्ण के निवास) के रूप में भी जाना जाता है । पुरातात्विक रूप से , द्वाराहाट के 55 मंदिरों के समूह को 8 समूह में विभाजित किया जा सकता है | गुज्जर देव , कछारी देवल , मांडवे , रतन देवल , मृत्युंजय , बद्रीनाथ और केदारनाथ | इन मंदिरों का निर्माण 10 से 12 सदी के बीच किया गया था | यह जगह पुराने जमाने में कत्युरी साम्राज्य की राजधानी थी। ( द्वाराहाट का इतिहास )

History of Dwarahat ( द्वाराहाट का इतिहास )

History of Dwarahat in Hindiद्वाराहाट अल्मोड़ा के कुमाउं पर्वत में एक छोटा सा शहर है और 1510 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | यह अपने पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है | इस जगह में कई खूबसूरत और प्रसिद्ध मंदिर है एवम् इस स्थान को “मंदिरों का गाँव” भी कहा जाता है | द्वाराहाट 10वी-12वी शताब्दी से 8 मंदिरों का घर है , जिनमे से ज्यादातर पत्थर से बने पिरामिड शंकु है जो लोहे कुसिरयो से अधिक बंधे है | दूनागिरी और नाथना देवी मंदिर में प्रसिद्ध शक्ति मंदिर द्वाराहाट के दो प्रमुख आकर्षण है | मान्यताओं के अनुसार, दुर्लभ जड़ी बूटी “संजीवनी”, शक्ति मंदिर के परिसर के अंदर ही पैदा होती है | शहर के विभिन्न भागों में मंदिरों की संख्या के कारण कभी-कभी “कुमाऊं के खजुराहो” के रूप में द्वाराहाट आपको स्वर्ग की यात्रा की भावना महसूस कराता है |( द्वाराहाट का इतिहास )

महामत्युजंय मन्दिर द्वाराहाट

यह मन्दिर दवाराहाट में स्थित भगवान शिव-मृत्युजंय (मृत्यु पर विजय पाने वाला) को समर्पित है। यह मन्दिर नागर शिखर शैली में निर्मित पूर्वाभिमुखी त्रिरथ योजना से बनाया गया है, जिसमें गर्भगृह, अन्तराल और मडंप युक्त है। यह मन्दिर लगभग 11 वी से 12 वी शताब्दी का माना जाता है। मन्दिर परिसर में स्थित दो अन्य मन्दिर भी है। जो कि भगवान काल भैरव तथा लघु देवालय जीर्ण-शीर्ण को समर्पित है।

mrityunjay dawarahat

महामत्युजंय मन्दिर द्वाराहाट की मान्यता

लोक मान्यता के अनुसार मुत्यु से भयभीत मनुष्य को अभयदान प्रदान करने वाले भगवान शिव भक्तों की सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी करते है।

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#मृत्युजंय मन्दिर समूह, #द्वाराहाट, जनपद-#अल्मोड़ा ।।।

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