जानिए रामगढ़ नैनीताल  का इतिहास History Of Ramgarh Nainital Uttarakhand  –

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “रामगढ़ नैनीताल  के इतिहास History Of Ramgarh”  के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं “रामगढ़ नैनीताल  का इतिहास History Of Ramgarh”  तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |





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रामगढ़ का इतिहास History Of Ramgarh Nainital Uttarakhand

रामगढ उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में स्थित एक छोटा पहाड़ी स्टेशन है।  यह समुद्रतल से लगभग 1,729 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। नैनीताल से केवल 24 किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ फलों का एक अनोखा क्षेत्र  है। कुमाऊं क्षेत्र में सबसे अधिक फलों का उत्पादन भुवाली-रामगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में होता है। इस क्षेत्र में अनेक प्रकार के फल पाए जाते है। बर्फ पड़ने के बाद सबसे पहले ग्रीन स्वीट सेब और सबसे बाद में पकने वाला हरा पिछौला सेब होता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में डिलिशियस, गोल्डन किंग, फैनी और जोनाथन जाति के श्रेष्ठ वर्ग के सेब भी होते है। आडू, नासपाती, खूबानी, पूलम भी यहा काफी मात्रा में पाए जाते है। रामगढ़ शान्त वातावरण एवं स्कून देने वाली जगह है। यहां से हिमालय का सुन्दर नजारा दिखाई देता है।





रामगढ़ को  दो हिस्सों में बाटा गया है एक को मल्ला रामगढ़ तथा दूसरे को तल्ला रामगढ़ के नाम से जाना जाता है।रामगढ़ की सुंदरता इसकी शांति, उत्कृष्टता और शांति में निहित है। यह जगह एक बार अंग्रेजी सेना का छावनी शहर था।

प्रसिद्ध कवि रवींद्रनाथ टैगोर और सामाजिक कार्यकर्ता नारायण स्वामी ने रामगढ़ में अपने आश्रम की स्थापना की थी। रवींद्रनाथ टैगोर ने रामगढ़ में अपनी कुछ रचनाओ की रचना की थीं। अंग्रेज रामगढ़ के शांत वातावरण में अपनी छुट्टियों बिताने आते हैं| कई कवियों और लेखकों ने अपनी रचनात्मक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए रामगढ़ में सप्ताह बिताए हैं।

रामगढ़ पक्षियों की असंख्य प्रजातियों को अपने घने जंगल और हरी चरागाहों में आकर्षित करता है। रामगढ़ और इसके आसपास के कुछ उल्लेखनीय वन ट्रेल्स और पर्वत की सैर प्रदान करते हैं। कोई भी रामगढ़ के बाजार में जा सकता है और वापस या ओल्ड बंगलों, नीमराना के साथ आगे बढ़कर राजसी दृश्यों को देख सकता है|

रामगढ के बारे में About Ramgarh Nainital-

रामगढ़, जहाँ अपने फलों के लिए विख्यात है, वहाँ यह अपने नैसर्गिक सौन्दर्य के लिए भी प्रसिद्ध है। हिमालय का विराट सौन्दर्य यहां से साफ-साफ दिखाई देता है। रामगढ़ की पर्वत चोटी पर जो बंगला है, उसी में एक बार विश्वकवि रवीन्द्र नाथ टैगोर आकर ठहरे थे। उन्होंने यहाँ से जो हिमालय का दृश्य देखा  तो मुग्ध हो गए और कई दिनों तक हिमालय के दर्शन इृसी स्थान पर बैठकर करते रहे। उनकी याद में बंगला आज भी ‘टैगोर टॉप‘ के नाम से जाना जाता है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु को भी रामगढ़ बहुत पसन्द था। कहते हैं आचार्य नरेन्द्रदेव ने बी अपने ‘बौद्ध दर्शन’ नामक विख्यात ग्रन्थ को अन्तिम रूप यहीं आकर दिया था।






साहित्यकारों को यह स्थान सदैव अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। स्व. महादेवी वर्मा, जो आधुनिक हिन्दी साहित्य की मीरा कहलाती हैं, को तो रामगढ़ भाया कि वे सदैव ग्रीष्म ॠतु में यहीं आकर रहती थीं। उन्होंने अपना एक छोटा सा मकान भी यहाँ बनवा लिया था। आज भी यह भवन रामगढ़-मुक्तेश्वर मोटर मार्ग के बायीं ओर बस स्टेशन के पीछे वाली पहाड़ी पर वृक्षों के बीच देखा जा सकता है। जीवन के अन्तिम दिनों में वे पहाड़ पर नहीं आ सकती थीं। अत: उन्होंने मृत्यु से कुछ पहले इस मकान को बेचा था। परन्तु उनकी आत्मा सदैव इस अंचल में आने के लिए सदैव तत्पर रहती थी। ऐसे ही अनेक ज्ञात और अज्ञात साहित्य – प्रेमी हैं, जिन्हें रामगढ़ प्यारा लगा था और बहुत से ऐसे प्रकृति – प्रेमी हैं जो बिना नाम बताए और बिना अपना परिचय दिए भी इन पहाड़ियों में विचरम करते रहते हैं।

यहाँ तक कैसे पहुचे How To Reach?






रामगढ़ तक आप आसानी से पहुँच सकतें हैं|

हवाई जहाज – निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर हवाई अड्डा है| पंतनगर से रामगढ़ की दूरी 86 km हैं|  पंतनगर से आप टैक्सी अथवा कार में आसानी से जा सकते हैं |

ट्रेन – निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है काठगोदाम से रामगढ़ की दूरी 27   किलोमीटर हैं काठगोदाम से रामगढ़ तक आप टैक्सी अथवा कार में आसानी से जा सकतें हैं |

RAMGARH NAINITAL IN 360 DEGREE 






RAMGARH NAINITAL UTTARAKHAND





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