भीमताल का इतिहास , विशेषता एवम् आकर्षण स्थल ! History , Features and Attractions of Bhimtal

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट में भीमताल के बारे में जानकारी देने वाले है | उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में भिन्न-भिन्न स्थानों पर झीलों की श्रंखला देखी जा सकती है , जिनमे नौकुचियाताल , भीमताल , सातताल एवम् मालनिय ताल काफी प्रसिद्ध है | इसलिए आज हम आपको इस पोस्ट में इन सभी ताल में से सर्वप्रसिद्ध ताल “भीमताल” के बारे में जानकारी देने वाले है |  ( भीमताल का इतिहास , विशेषता एवम् आकर्षण स्थल )

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भीमताल का इतिहास (History of Bhimtal)

यह एक त्रिभुजाकर झील है | यह उत्तराखंड में काठगोदाम से 10 किलोमीटर उत्तर की ओर है | इस ताल की लम्बाई 1674 मीटर , चौड़ाई 447 मीटर , और गहराई 15 से 50 मीटर तक है | भीमताल “नैनीताल” से भी अत्यधिक बड़ा ताल है | नैनीताल की भाति भीमताल के भी दो कोने है , जिन्हें मल्लीताल और तल्लीताल कहते है और यह दोनों कोने आपस में सडक से जुड़े हुए है | नैनीताल से भीमताल की दुरी 22.5 km है | इस स्थान से गौला नदी निकलती है जो कि आगे हल्द्वानी से बहते हुए रामगंगा नदी में मिल जाती है | नैनीताल की खोज होने से पहले भीमताल को ही लोग महत्व देते थे । ‘भीमकार’ होने के कारण शायद प्रसिद्ध ताल को “भीमताल” के बारे में जाना जाता है | परन्तु कुछ विद्वान इस ताल का सम्बन्ध पाण्डु – पुत्र भीम से जोड़ते हैं । कहते हैं कि पाण्डु – पुत्र भीम ने भूमि को खोदकर यहाँ पर विशाल ताल की उत्पति (खोज) की थी । वैसे यहाँ पर भीमेश्वर महादेव का मन्दिर है । यह प्राचीन मन्दिर है – शायद भीम का ही स्थान हो या भीम की स्मृति में बनाया गया हो । भीमताल महाभारत के भीम के नाम पर एक प्राचीन स्थान है |  ( भीमताल का इतिहास , विशेषता एवम् आकर्षण स्थल )

यह माना जाता है कि भीमताल झील के किनारे स्थित शिव मंदिर “भीमेश्वर मंदिर” है | इस मंदिर का निर्माण तब हुआ था , जब वनवास के समय पांडवो में से भीम ने इस स्थान का दौरा किया था | आज भी यह मन्दिर भीमेश्वर महादेव के मन्दिर के रुप में जाना और पूजा जाता है | वर्तमान मंदिर 17 वीं शताब्दी में, बज़ बहादुर (1638-78 ईस्वी), चांद वंश के राजा और कुमाऊं के राजा द्वारा बनाया गया था। भीमताल एंग्लो-नेपाली युद्ध (1814-16) के बाद ब्रिटिश शासन के अधीन आया , जब नैनीताल को गर्मियों की राजधानी बना दिया गया था | नैनीताल के नजदीकी शहर से भीमताल सिर्फ 150-160 साल पुराना है । पुरानी पेडैसरियल रोड (Pedesterial road) अभी भी यहाँ उपयोग में है और यह सड़क काठगोदाम के पास सभी कुमाऊं क्षेत्र और यहां तक कि नेपाल और तिब्बत प्रांत को भी जोड़ती है |

इस ताल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सुंदर घाटी में और खिले हुए आँचल में स्थित है | इस ताल के बीच में टापू “भीमताल Fish Aquarium” के रूप में इस्तेमाल होता है | जिससे इस ताल की शोभा अत्यधिक बढ़ जाती है | नावो से टापू में पहुँचने का प्रबंध है | टापू में पहुँचते ही समुन्द्र एवम् झील की विभिन्न प्रजाति की मछलिया देख सकते है | यहाँ पर पर्यटन विभाग की ओर से 34 शैय्याओं वाला आवास-गृह बनाया गया है। इसके अलावा भी यहाँ पर रहने खाने की बेहतरीन व्यवस्था है।

Places to Visit In Bhimtal:-

Bhimtal lake of bhimtal

Bhimtal Lake “भीमताल झील”

“भीमताल झील” भीमताल में स्थित है | यह कुमाऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी झील है, जिसे भारत के झील के जिले के रूप में जाना जाता है। झील से पीने के पानी की सुविधा मिलती है और मछलीयो की विभिन्न प्रजातियों के लिए विविधता के साथ जलीय कृषि का समर्थन होता है । झील के बीचो बीच में एक द्वीप है जो एक पर्यटक आकर्षण के रूप में विकसित किया गया है और इसमें एक मछलीघर है ।

Hanuman garhi of bhimtal

हनुमान गढ़ी (Hanuman Garhi) 

हनुमान गढ़ी 6,401 फुट ऊंची ऊंचाई पर स्थित है | इस मंदिर का निर्माण 1 99 5 में एक स्थानीय संत बाबा नीम करोली द्वारा किया गया था और बापू लीला शाह और शिला देवी मंदिर के आश्रम के करीब स्थित है । यह सूर्योदय और सूर्यास्तों का एक सुंदर दृश्य भी पेश करता है। किंवदंती यह है कि एक धर्मी भक्त होने के नाते , भगवान हनुमान ने एक बार अपने सीने में भगवान राम और सीता माता की छवि प्रकट करने के लिए छाती खोल दी थी। इसी घटना को इस मंदिर में विराजित मूर्ति में दिखाया गया है।

भीमेश्वर महादेव मंदिर  (Bhimeshwara Mahadev Temple)

शक्तिशाली महाभारत चरित्र भीम के नाम पर भीमताल के तट में भीमेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। स्कंद्पुरांड के अनुसार भीम द्वारा आसपास के मंदिर का दौरा करने के बाद भीम पहाड़ पर चड़ने लगे तो उनको आकाश से एक दिव्य आवाज़ बताती है कि यदि वह अपने नाम को पीढियों तक याद रखना चाहते है तो उन्हें अपनी भक्ति से शिव का एक मंदिर स्थापित करना होगा इसी कारण भीमताल झील के तट पर स्थित , भीमेश्वर महादेव मंदिर भीम के द्वारा भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है ।




Nal-Damyanti Tal 

इस ताल का नाम राजा “नल ” और रानी “दमयंती” के नाम पर पडा था | और इसी ताल में उनकी समाधी बना दी गयी थी | इस ताल का आकर “पंचकोणी” है | उस समय इस ताल से पुरे गाँव में सिचाई की जाती थी | इसमें कभी-कभी कटी हुई मछलियों के अंग दिखाई देते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अपने जीवन के कठोर दिनों में नल दमयन्ती इस ताल के समीप निवास करते थे। जिन मछलियों को उन्होंने काटकर कढ़ाई में डाला था, वे भी उड़ गयी थीं। कहते हैं, उस ताल में वही कटी हुई मछलियाँ दिखाई देती हैं।

कर्कोताका मंदिर ( Karkotaka Temple )

यह एक पुराना नाग मंदिर है जो कोरटाटाका पहाड़ी पर स्थित है । यह मंदिर नाग के देवता, नाग कोरटाटाका महाराजा को समर्पित है। इस पहाड़ी का नाम पौराणिक “कोबरा कोरटाटाका” के नाम पर रखा गया था। ऋषि पंचमी के अवसर पर, यहां भारी संख्‍या में श्रद्धालु प्रार्थना करने आते है और भगवान के दर्शन करते हैं । किंवदंतियों के अनुसार, यह भगवान सर्प के काटने से भक्‍तों की रक्षा करते हैं । सर्प देवता, नाग करकोका महाराज के प्रति समर्पित, तीर्थयात्री ऋषि पंचमी के अवसर पर बड़ी संख्या में आते हैं।  ( भीमताल का इतिहास , विशेषता एवम् आकर्षण स्थल )

लोक संस्कृति संग्रहालय (Folk Culture Museum)

यह राज्य की परंपराओं, संस्कृति और अतीत का पता लगाने के लिए एक अद्भुत जगह है। इसके अलावा लोक संस्कृति संग्रहालय के रूप में जाना जाता है | यह जगह दिलचस्प कलाकृतियों , पारंपरिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों और पत्थर के औजारों और पुरातात्विक महत्व के अन्य चीजों पर जानकारी प्रदर्शित करता है। इन सभी स्थानों के अलावा आप मॉल रोड , हिडिम्बा पर्वत , सातताल , नौकुचियाताल , विक्टोरिया डैम , butterfly research center , गर्ग पर्वत , एक्वेरियम भीमताल आइलैंड (Aquarium Bhimtal Island) आदि स्थानों का भी लुफ्त उठा सकते है |

Activities to do in Bhimtal

भीमताल में घुड सवारी , साइकिलिंग एवम् बोटिंग , कर्कोटक मंदिर तक ट्रेक , शौपिंग ,पैराग्लाइडिंग , कयाकिंग , भोटिया बाज़ार आदि जैसी चीजों का आनंद ले सकते है |

भीमताल कैसे पहुचे ! ( How to Reach Bhimtal )





1. By Air

भीमताल पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर एयरपोर्ट है , जो की भीमताल से लगभग 58 km दूर है | एयरपोर्ट से आप टैक्सी करके भीमताल पहुँच सकते है |

2. By Road

भीमताल मोटरसाइकिल सड़कों के माध्यम से उत्तराखंड के प्रमुख शहरों और कस्बों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आईएसबीटी आनंद विहार, नई दिल्ली से बसें काठगोदाम और नैनीताल के लिए उपलब्ध हैं। भीमताल से टैक्सी अल्मोड़ा, नैनीताल और काठगोदाम से आसानी से उपलब्ध हैं।

3. By Train

निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम , भीमताल से 30 किमी की दूरी पर स्थित है । काठगोदाम तक आप ट्रेन से पहुच सकते है | उसके बाद आगे का सफ़र आपको टैक्सी के द्वारा तय करना होगा जो की लगभग 30 km होगा |

उम्मीद करते है आपको “भीमताल का इतिहास , विशेषता एवम् आकर्षण स्थल ” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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360 Degree Images of Bhimtal !

360 degree images of Bhimtal Lake



360 degree image of Bhimtal Road