जानिए ज्वालाजी मंदिर के रहस्य के बारे में Jvalaji Temple Dehradun

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में ज्वाला जी मंदिर Jwalaji Temple के बारे में बताने वाले हैं | यदि आप जानना चाहते हैं ज्वाला जी मंदिर Jwalaji Temple के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|





jwalaji-temple

ज्वाला जी मंदिर का इतिहास History Of Jwalaji Temple –

देहरादून मसूरी  में स्थित माँ दुर्गा का मंदिर प्रसिद्ध ‘ज्वाला जी मंदिर’ के रूप में जाना जाता है, ज्वाला देवी मंदिर देवी दुर्गा के भक्तों के लिए विश्वास और भक्ति का केंद्र है। समुद्रतल से लगभग  2104 मीटर की ऊंचाई पर बिनोग पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित ज्वाला देवी मंदिर ओक और देवदार के पेड़ से घिरा हुआ है।

देवी दुर्गा भक्तों के लिए पूजा की जगह, ज्वाला देवी मंदिर बेनोग हिल में लगभग 2100 मीटर की ऊंचाई पर एक पुराना मंदिर है। मां दुर्गा के आशीर्वाद लेने के लिए आगंतुक अक्सर ज्वाला जी मंदिर जाते हैं। देवी दुर्गा की पुरानी पत्थर की मूर्ति ज्वाला जी मंदिर में है।






तीर्थयात्रियों और भक्तों के अलावा, प्रकृति प्रेमियों अक्सर भी इस जगह पर जाते हैं। मोटे हरे जंगल से घिरे हुए, ज्वाला देवी मंदिर प्रकृति प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। मंदिर में शांति और शांति आसानी से महसूस की जा सकती है क्योंकि यह शहर की भीड़ से बहुत दूर है। मंदिर से, आगंतुक यमुना नदी और शिवालिक रेंज देख सकते हैं। यह मंदिर मसूरी से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं| यहाँ नवरात्र में भक्तों का ताँता लगा रहता हैं| यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद सुन्दर हैं|

पौराणिक कथा –

ज्वालाजी  मंदिर शक्ति पीठ मंदिरों में से एक है। पूरे भारतवर्ष में कुल 51 शक्तिपीठ है। जिन सभी की उत्पत्ति कथा एक ही है। यह सभी मंदिर शिव और शक्ति से जुड़े हुऐ है। धार्मिक ग्रंधो के अनुसार इन सभी स्थलो पर देवी के अंग गिरे थे। शिव के ससुर राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया जिसमे उन्होंने शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया क्योंकि वह शिव को अपने बराबर का नहीं समझते थे। यह बात सती को काफी बुरी लगी और वह बिना बुलाए यज्ञ में पहुंच गयी।





यज्ञ स्‍थल पर शिव का काफी अपमान किया गया जिसे सती सहन न कर सकी और वह हवन कुण्ड में कुद गयीं। जब भगवान शंकर को यह बात पता चली तो वह आये और सती के शरीर को हवन कुण्ड से निकाल कर तांडव करने लगे। जिस कारण सारे ब्रह्माण्ड में हाहाकार मच गया। पूरे ब्रह्माण्ड को इस संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से 51 भागो में बांट दिया जो अंग जहां पर गिरा वह शक्ति पीठ बन गया। मान्यता है कि ज्वालाजी में माता सती की जीभ गिरी थी।

How To Reach यहाँ तक कैसे पहुचें?

हवाई जहाज – निकटतम हवाई जॉली ग्रांट हवाई अड्डा हैं| यहाँ से ज्वाला जी मंदिर की दूरी लगभग 66  किलोमीटर हैं| यहाँ से आप आसानी से कार से जा सकते हैं|

ट्रेन- निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून रेलवे स्टेशन हैं यहाँ से ज्वाला मंदिर की दूरी

लगभग 35  किलोमीटर हैं| यहाँ से आप आसानी से टैक्सी अथवा कार से जा सकते हैं |

GOOGLE MAP OF JWALAJI TEMPLE DEHRADUN MUSSOORIE 






उमीद करते हैं आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा| यदि आपको यह पोस्ट पसंद आये तो इसे like तथा निचे दिए बटनों द्वारा share जरुर करें|