Kanvashram – A Tourist Place in Kotdwar !!

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार शहर में स्थित “ Kanvashram – A Tourist Place in Kotdwar , Pauri Garhwal !! (कण्वाश्रम) ” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है | यदि आप कण्वाश्रम” के बारे में जानना चाहते है , तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

History of Kanvashram !! ( कण्वाश्रम का इतिहास )




karnashram kotdwarकण्वाश्रम उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार शहर से 14 कि.मी. की दुरी पर स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है | हेमकूट और मणिकूट पर्वतों की गोद में स्तिथ ‘कण्वाश्रम’ ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल है । कण्वाश्रम के बारे में यह माना जाता है कि इस स्थान पर कण्व ऋषि का आश्रम था | कोटद्वार भाबर क्षेत्र की प्रमुख एतिहासिक धरोहरों में ‘कण्वाश्रम’ सर्वप्रमुख है , जिसका उल्लेख पुराणों में विस्तार से मिलता है |स स्थान के विशाल भूभाग में फैले महर्षि कण्व का आश्रम आज से कई सहस्त्र शताब्दी पूर्व एक विश्व विख्यात आध्यात्मिक केंद्र व एक आदर्श गुरूकुल महाविद्यालय था, जहां दस सहस्त्र विद्यार्थी कुलपति महर्षि कण्व से शिक्षा ग्रहण करते थे । कण्वाश्रम शिवालिक की तलहटी में मालिनी नदी के दोनों तटो पर स्थित छोटे-छोटे आश्रमों का प्रसिद्ध विद्यापीठ था , जिसमे सिर्फ उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा थी | इसमें सिर्फ वो विद्यार्थी प्रवेश ले सकते थे , जो की सामान्य विद्यापीठ का पाठ्यक्रम पूरा कर और अधिक अधयन्न करना चाहते थे | आश्रम में रहने वाले योगी अकेली जगह में कुतिया या गुफा बनाकर उसके अन्दर रहते थे | यह स्थान ऋषी मुनियों की तप स्थली भी था , जहॉ वे साधना मे लीन मोक्ष की प्राप्ति के लिए कठोर तप करते थे | कण्वाश्रम के बारे में यह भी माना जाता है कि महाराजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम से ही देश का नाम भारत हुआ और इस चक्रवर्ती सम्राट का जन्म हिमालय की सुरम्य घाटियों और भाबर के संगम में मालिनी नदी के तट पर कण्वाश्रम में हुआ था |

हर वर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर कण्वाश्रम में तीन दिन तक मेला चलता है।

“कण्वाश्रम को “कण्व का आश्रम ” क्यों कहा जाता है ?

कण्वाश्रम को “कण्व का आश्रम” इसलिए कहा जाता था क्युकी यह कण्वाश्रम कण्व ऋषि का वही आश्रम है | जहां हस्तिनापुर के राजा दुष्यन्त तथा शकुन्तला के प्रणय के पश्चात “भरत” का जन्म हुआ था, कालान्तर में इसी गढ़वाली खस नारी शकुन्तला पुत्र भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। शकुन्तला ऋषि विश्वामित्र व अप्सरा मेनका की पुत्री थी | महाकवि कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुंतलम और पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है ।

कण्वाश्रम का इतिहास !!





विश्वमित्र व मेनका अप्सरा के प्रणय संबंधों के फलस्वरूप उत्पन्न कन्या को मेनका यहां कण्वाश्रम के आस-पास जंगल में छोड़ गई । तपस्या में लीन महर्षि कण्व ने जब बच्चे के रोने की आवाज सुनी , तो वे वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सुंदर नवजात कन्या दिखी जो शाकुंत पक्षियों से घिरी मिली। महर्षि कण्व बच्ची को आश्रम ले आए व उसको शकुंतला नाम दिया और उसका लालन-पालन किया। एक दिन महाराजा दुष्यंत ने महर्षि कण्व की गोद ली पुत्री शकुंतला को देखा तो वे उसके संस्कारों व सुंदरता से प्रभावित हुए और उन्होंने शकुंतला से गंधर्व विवाह किया । कुछ समय पश्चात शकुंतला ने एक अत्यंत सुंदर व तेजस्वी बालक को जन्म दिया। इस वीर बालक का बचपन “कण्वाश्रम” में सिंह शावकों से क्रीड़ा एवं ज्ञानार्जन में व्यतीत हुआ । बड़े होकर इसी बालक ने इस विशाल भूखंड को एकीकृत कर इस राज्य पर राज किया और ये बालक चकक्रवर्ती सम्राट “भरत” के नाम से जाना गया और इसी महान पराक्रमी राजा के नाम से इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा।

पौड़ी गढ़वाल जिले में कण्वाश्रम के अलावा अन्य प्रसिद्ध मंदिर NEELKANTH MAHADEV TEMPLE , RISHIKESH , PAURI GARHWAL !! ( नीलकंठ महादेव मंदिर !! ) , Sidhbali Temple , Kotdwar , Pauri Garhwal !! ( सिध्बली मंदिर) , Kandoliya Temple , Pauri Garhwal !! (कंडोलिया मंदिर) , Danda Nagaraja Temple,Pauri Garhwal !! ( डांडा नागराजा मंदिर ) , Dhari Devi Temple , Pauri Garhwal !! ( धारी देवी मंदिर ) , KAMLESHWAR MAHADEV TEMPLE , SRINAGAR , PAURI GARHWAL !! ( कमलेश्वर महादेव मंदिर ) के भी दर्शन जरुर करने चाहिए |

Google Map of Kanvashram , Kotdwar !!

कण्वाश्रम उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार शहर से 14 कि.मी. की दुरी पर स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है | आप इस स्थान को निचे Google Map में देख सकते है |




उम्मीद करते है कि आपको “Kanvashram – A Tourist Place in Kotdwar , Pauri Garhwal !! ( कण्वाश्रम )” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई तो हमारे फेसबुक पेज को LIKE और SHARE  जरुर करे |

उत्तराखंड के विभिन्न स्थल एवम् स्थान का इतिहास एवम् संस्कृति आदि के बारे मे जानकारी प्राप्त के लिए हमारा YOUTUBE  CHANNEL जरुर   SUBSCRIBE करे |