जानिए क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर के बारे में | History Of Kyunkaleshwar Mahadev Temple

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “पौड़ी गढ़वाल में स्थित क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर” Kyunkaleshwar Mahadev Temple के रहस्य तथा मान्यतओं के बारे में बताने वाले हैं| यदि आप जानना चाहते हैं, क्यूंकालेश्वर महादेव Kyunkaleshwar Mahadev Temple के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े|





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क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर पौडी गढ़वाल का इतिहास 

क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर पौडी गढ़वाल से लगभग 2200 मीटर की उचाई में स्थित हैं | क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन 8 वीं शताब्दी का मंदिर है। यह अलकनंदा घाटी के किनारे बसा हुआ है और यहाँ  हिमपात पर्वतमाला का सुन्दर दृश्य दिखाई देता हैं |





कालेश्वर मंदिर का वास्तुकला कुछ हद तक केदारनाथ के समान है। मंदिर भगवान शिव, देवी पार्वती, गणपति, कार्तिकेय, भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों को दर्शाता है। भक्तों को मोटी वुडलैंड्स पार करना होता है और सीढ़ी आपको मंदिर ले जाती है। ऐसा माना जाता है कि अद्वैत वेदांत के संस्थापक आदि गुरु शंकराचार्य जी ने मंदिर का निर्माण किया था। महा शिवरात्रि इस मंदिर में आनंद के साथ मनाया जाता है।

पौराणिक मान्यताए –

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान यमराज (मृत्यु के देवता) ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा की। भगवान शिव ने भगवान यम को आशीर्वाद दिया और कहा कि काली युग में, मैं गुप्त में दिखाई दूंगा और मेरा नाम कंकलेश्वर, कंकलेश्वर, मुक्तिश्वर आदि होगा। मैं काली युग में भक्तों को भक्ति और मुक्ति प्रदान करूंगा। मंदिर केदारनाथ में मंदिर संरचना के साथ चरम समानता है। बर्फ से ढके पहाड़ों का दृश्य मंदिर से काफी बेहतर है।

इस क्षेत्र का उच्चतम स्टेडियम समुद्र तल से 2000 मीटर से अधिक है, यह अपने पर्यटन स्थलों में से एक है जो अब क्रिकेट, ट्रैक और फील्ड के खेल और फुटबॉल, ड्राइव या ट्रेक के लिए एक पूर्ण स्टेडियम बन गया है। एक ही सड़क आपको भगवान शिव के एक प्राचीन आठवीं सदी के मंदिर में ले जाएगी, जिसे क्युनलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।

क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर –






मन्दिर परिसर में विकास को कृत संकल्प मन्दिर के महन्त श्री चैतन्यानन्द जी ने क्यूंकालेश्वर मठ को नया रुप दिया है। जिसके अन्तर्गत श्रद्धालु भक्तगणों एवं धार्मिक पर्यटकों के ठहरने की उचित व्यवस्था है। मन्दिर का सौन्दर्य यहां आने वाले पर्यटकों के लिये किसी आश्चर्य से कम नहीं है। पूर्व में मन्दिर के अतिरिक्त रहन सहन की सारी व्यवस्था मन्दिर परिसर से हटकर 200 गज ऊंची पहाड़ी पर थी जिसके भग्रव्शेष आज भी विद्यमान हैं। मन्दिर के सम्मुख धूनी वाले भवन के अतिरिक्त कोई भी भवन नहीं था। यह भवन लगभग 205 वर्ष प्राचीन बताया जाता है। हरीशर्मा मुनि जी इस क्षेत्र के प्रकाण्ड विद्वानों में गिने जाते थे। उनकी विद्वता के कारण किंग जार्ज पंचम के समय उन्हें “महामहोपाध्याय” की उपाधि से विभूषित किया गया।

यहाँ तक कैसे पहुचे How To Reach?

हवाई अड्डा – जॉली ग्रांट एअरपोर्ट से क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर की दूरी लगभग 130 किलोमीटर हैं| यह से आसानी से जा टैक्सी अथवा कार से जा सकते हैं|

ट्रेन– ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर की दूरी लगभग 116 किलोमीटर हैं| यहाँ से आप आसानी से कार अथवा टैक्सी से आसानी से जा सकते हैं|

GOOGLE MAP OF KYUNKALESHWAR MAHADEV TEMPLE PURI GARHWAL 






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