नवरात्री क्यों मनाया जाता हैं ?

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन”के इस पोस्ट  नवरात्री  के बारे में (माँ के नौ रूपों के बारे में) Maa Durga Navratri  बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं माँ के नौ रूपों के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|





नवरात्रि माँ दुर्गा (Navratri Maa Durga)

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नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें‘। इन नौ रातों और दस दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा मनाया जाता है। नवरात्रि वर्ष में दो बार आता है।चैत्र, अश्विन, में धूम धाम से मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों महाल़क्ष्मी,सरस्वती और दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।





नवदुर्गा के नौ रूप –

  • शैलपुत्री– इसका अर्थ होता है। पहाड़ों की पुत्री
  • ब्रह्यचारिणी– इसका अर्थ होता है। ब्रह्यचारिणी
  • चंद्रघंटा-इसका अर्थ होता है। चाँद की तरह चमकने वाली।
  • कूष्माण्डा– इसका अर्थ होता है। पूरा जगत उनके पैर में है।
  • स्कंदमाता– इसका अर्थ होता है।कार्तिक स्वामी की माता ।
  • कात्यायनी– इसका अर्थ होता है।कात्यायन आश्रम में जन्मी।
  • कालरात्रि– इसका अथ्र्र होता है। काल का नाश करने वाली।
  • महागौरी– इसका अर्थ होता है। सफेद रंग वाली मां
  • सिद्धिदात्री– इसका अर्थ होता है।सर्व सिद्धि देने वाली।

मां दुर्गा का मंत्र-

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

कैलाश पर्वत की ध्यानी की अर्धागिनी मां सती ही दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में विख्यात हुई उन्हें ही शैलपुत्री,ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा,कूष्मांडा, स्कंदमाता,कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी,सिद्धिदात्री आदि नामों से जाना जाता है।





माता की कथाः-

आदि सतयुग के राजा दक्ष की पुत्री सती माता को शक्ति कहा जाता है। शिव के कारण उनका नाम शक्ति हो गया। हालांकि उनका असली नाम दाक्षायनी था। यज्ञ कंुड में कुदकर आत्मदाह करने के कारण भी उन्हें सती कहा जाता है। बाद में उन्हें पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती पर्वतराज की पुत्री थी। पिता की अनिच्छा से उन्होंने हिमालय के इलाके में ही रहने वाले शिव से विवाह कर लिया। एक यज्ञ में जब दक्ष ने सती तथा शिव को न्यौता नहीं दिया, तब  माता सती शिव के मना करने के बावजूद अपने पिता के यज्ञ में चली गयी। लेकिन जब माता सती वहां पहुची तो पिता दक्ष ने भगवान शिव के बारे सती को अपमानजनक बातें कही। सती को यह सब बरदाश्त नहीं हुआ और उन्होंने यज्ञ के कुंड में कूद कर अत्मदाह कर लिया। जब भगवान शिव को यह पता चला तो उन्होंने अपने सेनापति वीरभद्र को भेजा, जिसे दक्ष का सिर काट दिया। इसके बाद दुखी होकर सती के शरीर को अपने सिर पर धारण कर शिव क्रोधित हो धरती पर घूमते रहें। इस दौरान जहां-जहां सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे उसे अब शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है।

नवरात्रि क्यों मनाया जाता है?

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मान्यता है कि लंका युद्ध में ब्रह्मजी ने श्रीराम से रावण वध के लिए चंडी देवी की पूजा कर देवी को प्रसन्न करने को कहा और विधि के अनुसार चंडी पूजन और हवन हेतु दुर्लभ 108 नीलकमल की व्यवस्था भी करा दी। वही दूसरी ओर रावण ने भी अमरत्व प्राप्त करने के लिए चंडी पाठ प्रारंभ कर दिया। यह बात पवन के माध्यम से इन्द्रदेव ने श्रीराम तक पहुँचवा दी।





इधर रावण ने मायावी तरीके से पूजास्थल पर हवन सामग्री में एक नीलकमल गायब करा दिया जिससे श्रीराम की पूजा बाधित हो जाए। श्रीराम का संकल्प टूटता नजर आया। सभी में इस बात का भय व्याप्त था कि कही मां दुर्गा कुपित न हो जाएँ। लेकिन ऐसा नहीं हुआ मां दुर्गा प्रकट हुई और कहा कि वह पूजा से प्रसन्न हुईं और उन्होंने श्री राम को आशीर्वाद दिया।

वही दूसरी ओर रावण की पूजा के समय हनुमान जी बाह्मण बालक का रूप धारण कर पूजा में पहंुच गए और पूजा कर रहे ब्राह्मणों से एक श्लोक जयादेवी भूर्तिहरिणी में हरिणी के स्थान पर करिणी उच्चारित करा दिया। हरिणी का अर्थ होता है। भक्त की पीड़ा हरने वाली और करिणी का अर्थ होता है। पीड़ा देने वालीं। इससे मां दुर्गा रावण से नाराज हो गयी और रावण को श्राप दे दियां। इस कारण रावण का सर्वनाश हो गया।

मां दुर्गा की दूसरी कथा-

मां दुर्गा की मान्यता यह भी की जब महिषासुर को उसकी उपासना से खुश होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वर प्रदरन कर दिया था। उस वरदान को पाकर महिषासुर ने उसका दुरूपयोग करना शुरू कर दिया और नरक को स्र्वग के द्वार तक विस्तारित कर दिया।महिषासुर ने सूर्य,चन्द्र,अग्नि,वायु वरूण और अन्य देवताओं से उनका अधिकार छीन लिया तब देवताओं को महिषासुर के भय से पृथ्वी पर विचरण करना पड़ रहा था। तब महिषासुर से क्रोधित होकर देवताओं ने मां दुर्गा की अराधना की। तब मां दुर्गा का नौ दिनों तक महिषासुर से संग्राम चला था और अन्त में महिषासुर का वध करके मां दुर्गा महिषासुरमर्दिनी कहलाई।





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