Most Popular Shiv Temple In Uttarakhand उत्तराखंड में स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर

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बिनसर महादेव मंदिरBINSAR MAHADEV TEMPLE

बिनसर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय हिंदू मंदिर है । यह मंदिर रानीखेत से लगभग 20 किमीकी दूरी पर स्थित है । कुंज नदी के सुरम्य तट पर करीब साढ़े पांच हजार फीट की ऊंचाई पर बिनसर महादेव का भव्य मंदिर है | समुद्र स्तर या सतह से 2480 मीटर की ऊंचाई पर बना यह मंदिर हरे-भरे देवदार आदि के जंगलों से घिरा हुआ है । हिंदू भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 10 वीं सदी में किया गया था | महेशमर्दिनी, हर गौरी और गणेश के रूप में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों के साथ निहित, इस मंदिर की वास्तुकला शानदार है | बिनसर महादेव मंदिर क्षेत्र के लोगों का अपार श्रद्धा का केंद्र है। यह भगवान शिव और माता पार्वती की पावन स्थली मानी जाती है। प्राकृतिक रूप से भी यह स्थान बेहद खूबसूरत है । हर साल हजारों की संख्या में मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु आते हैं |

History of Jaageshwer temple of Almora

JAGESHWER TEMPLE , ALMORA ( जागेश्वर मंदिर का इतिहास )

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है । यह ज्योतिलिंग “आठवा” ज्योतिलिंग माना जाता है | इसे “योगेश्वर” के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है । जागेश्वर के इतिहास के अनुसार उत्तरभारत में गुप्त साम्राज्य के दौरान हिमालय की पहाडियों के कुमाउं क्षेत्र में कत्युरीराजा था | जागेश्वर मंदिर का निर्माण भी उसी काल में हुआ | इसी वजह से मंदिरों में गुप्त साम्राज्य की झलक दिखाई देती है | मंदिर के निर्माणकी अवधि को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा तीन कालो में बाटा गया है “कत्युरीकाल , उत्तर कत्युरिकाल एवम् चंद्रकाल” | अपनी अनोखी कलाकृति से इन साहसी राजाओं ने देवदार के घने जंगल के मध्य बने जागेश्वर मंदिर का ही नहीं बल्कि अल्मोड़ा जिले में 400 सौ से अधिक मंदिरों का निर्माण किया है |





history of Mukteshwer Mahadev Temple

MUKTESHWER MAHADEV TEMPLE  मुक्तेश्वर महादेव मंदिर






मुक्तेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर के सर्वोच्च बिंदु के ऊपर स्थित है । यह मंदिर “मुक्तेश्वर धाम या मुक्तेश्वर” के नाम से भी जाना जाता है । मंदिर में प्रवेश करने के लिए पत्थर की सीढ़ियों से पहुंचा जा सकता है और यह मंदिर समुद्र तल से 2315 मीटर की ऊँचाई पर कुमाऊं पहाड़ियों में है । मुक्तेश्वर का नाम 350 साल पुराने शिव के नाम से आता है , जिसे मुक्तेश्वर धाम के रूप में जाना जाता है , जो शहर में सबसे ऊपर , सबसे ऊंचा स्थान है। मंदिर के निकट चौली की जाली” नामक एक चट्टान है |

पुराणों में शालीनता के रूप में, यह भगवान शिव के अठारह मुख्य मंदिरों में से एक है | यहाँ एक पहाड़ी के ऊपर शिवजी का मन्दिर है जो की 2315 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

नीलकंठ मन्हादेव मंदिर ऋषिकेश

नीलकंठ महादेव मंदिर (NEELKANTH MAHADEV TEMPLE , RISHIKESH)

नीलकंठ महादेव मंदिर , भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन पवित्र मंदिर है , जो कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम (राम झुला या शिवानन्द झुला) से किलोमीटर की दुरी पर मणिकूट पर्वत की घाटी पर स्थित है | मणिकूट पर्वत की गोद में स्थित मधुमती (मणिभद्रा) व पंकजा (चन्द्रभद्रा) नदियों के ईशानमुखी संगम स्थल पर स्थित नीलकंठ महादेव मन्दिर एक प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्र है । नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है | यह मंदिर समुन्द्रतल से 1675 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | नीलकंठ महादेव मंदिर में बड़ा ही आकर्षित शिव का मंदिर बना है एवम् मंदिर के बाहर नक्काशियो में समुन्द्र मंथन की कथा बनायी गयी है | नीलकंठ महादेव मंदिर के मुख्य द्वार पर द्वारपालो की प्रतिमा बनी है | मंदिर परिसर में कपिल मुनि और गणेश जी की मूर्ति स्थापित है |

कोटेश्वर महादेव मंदिर

कोटेश्वर महादेव मंदिर KOTESHWAR MAHADEV TEMPLE , RUDRAPRAYAG !!

कोटेश्वर मंदिर हिन्दुओ का प्रख्यात मंदिर है , जो कि रुद्रप्रयाग शहर से 3 कि.मी. की दुरी पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है | कोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है | कोटेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 14वि शताब्दी में किया गया था , इसके बाद 16 वी और 17 वी शताब्दी में मंदिर का पुनः निर्माण किया गया था | चारधाम की यात्रा पर निकले ज्यादातर श्रद्धालु इस मंदिर को देखते हुए ही आगे बढते है , गुफा के रूप में मौजूद यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है | मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने केदारनाथ जाते समय , इस गुफा में साधना की थी और यह मूर्ति प्राकर्तिक रूप से निर्मित है | गुफा के अन्दर मौजूद प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियाँ और शिवलिंग यहाँ प्राचीन काल से ही स्थापित है |





triyuginarayan-temple

त्रियुगीनारायण मंदिर TRIYUGINARAYAN TEMPLE

उत्तराखंड जो ऐसे ही कई धार्मिक और पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध है । यहाँ के कई स्थल सिर्फ पर्यटक स्थल के रूप में ही नहीं , पवित्र तीर्थस्थलों के रूप में भी लोकप्रिय हैं। ऐसा ही एक स्थल रुद्रप्रयाग में स्थित है जिसे “त्रियुगीनारायण मंदिर” से नाम से जाना जाता है | यह मंदिर काफी प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय माना जाता है | उत्तराखंड का त्रियुगीनारायण मंदिरही वह पवित्र और विशेष पौराणिक मंदिर है और यह रुद्रप्रयाग के प्रमुख स्थानों में से एक मुख्य स्थल है । यह स्थान रुद्रप्रयाग जिले का एक भाग है | यह मंदिर उत्तराखंड की वादियों के बीच अत्यधिक आकर्षित नज़र आता है | चारो तरफ हरयाली के बीच में स्थित मंदिर में आये हुए यात्रीयो , भक्तो के लिए यह मंदिर एक शांतिमय और सुरमय समां बाँध देता है |

budha- madhymaheshwar temple

मध्यमहेश्वर मंदिर MADHYAMAHESWAR TEMPLE , GARHWAL

मध्यमहेश्वर मंदिर , उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय के मंसुना गांव में स्थित प्रसिद्ध एवम् धार्मिक मंदिर भगवान शिव को समर्पित हिंदू मंदिर है । यह मंदिर समुन्द्र तल से 3,497 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है | मंदिर पंच केदार तीर्थ यात्रा में चौथा मंदिर है। मध्यमहेश्वर मंदिर को “मदमाहेश्वर” के नाम से भी जाना जाता है| मध्यमहेश्वर मंदिर में पूजा करने के बाद केदारनाथ, तुंगनाथ और रुद्रनाथ के मंदिरों का यात्रा की जाती हैं और साथ ही साथ कल्पेश्वर मंदिर का दौरा भी किया जाता है | इस मंदिर को पांडवो के द्वारा निर्मित माना जाता है एवम् यह भी माना जाता है कि भीम ने भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था | मंदिर प्रांगण में “मध्य” या “बैल का पेट” या “नाभि (नाभि)” भगवान शिवजी का दिव्य रूप माना जाता है |

history of baijnath temple bageshwer

 

BAIJNATH TEMPLE , BAGESHWER बैजनाथ मंदिर

बैजनाथ मंदिर कुमाऊ कत्युरी राजा द्वारा बागेश्वर जिले में करीब 1150 इसवी में गोमती नदी के किनारे पर बनाया गया था । यह मंदिर 1126 मीटर की ऊंचाई पर गोमती नदी के बाएं किनारे पर स्थित है | यह मंदिर विशाल पाषण शिलाओं से बनाया गया है।

बैजनाथ में यात्रा करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगहों में से एक 12 वी सदी में बना ऐतिहासिक एवम महत्वपूर्ण “बैजनाथ मंदिर” है | ऐसी मान्यता है कि शिव और पार्वती ने गोमती व गरुड़ गंगा नदी के संगम पर विवाह रचाया था |






बैजनाथ को पहले “कार्तिकेयपुर” के नाम से जाना जाता था , जो कि 12वीं और 13वीं शताब्दी में कत्यूरी वंश की राजधानी हुआ करती थी । शिव वैद्यनाथ के लिए समर्पित, भगवान के चिकित्सकों, बैजनाथ मंदिर वास्तव में एक मंदिर है , जो कि शिव, गणेश, पार्वती, चंदिका, कुबेर, सूर्य और ब्रह्मा की मूर्तियों के साथ कत्युरी राजाओं द्वारा बनाया गया है । इसके अलावा बैजनाथ शहर भी मंदिर से अपना नाम रखता है। महंत के घर के ठीक नीचे मुख्य मंदिर के रास्ते में ब्राह्मणी मंदिर है | जिसके बारे में पौराणिक कथा यह है कि मंदिर में एक ब्राह्मण महिला द्वारा निर्मित शिवलिंग भगवान शिव को समर्पित था ।

History of Baagnath temple of bageshwer

बागनाथ मंदिर , बागेश्वर (BAGNATH TEMPLE,BAGESHWER)

यह मंदिर एक पौराणिक मंदिर है , जो कि भगवान शिव को समर्पित है | यह मंदिर उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले में स्थित है | बागनाथ मंदिर बागेश्वर जिले का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है , इसी कारण बागेश्वर जिले का नाम इसी मंदिर के नाम पडा है | बागनाथ मंदिर के पास ही सरयू और गोमती नदी का संगम होता है। शैल राज हिमालय की गोद में गोमती सरयू नदी के संगम पर स्थित मार्केंडेय ऋषि की तपोभूमि के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव के बाघ रूप में इस स्थान में निवास करने से इसे “व्याघ्रेश्वर” नाम से जाना गया , जो बाद में बागेश्वर हो गया | बहुत पहले भगवान शिव के व्याघ्रेश्वर रूप का प्रतीक “देवालय” इस जगह पर स्थापित था , जहां बाद में एक भव्य मंदिर बना । जो कि “बागनाथ मंदिर” के नाम से जाना जाता है । कुछ स्रोत बताते हैं कि बागनाथ मंदिर 7 वीं शताब्दी से ही अस्तित्व में था और वर्तमान नगरी शैली का निर्माण 1450 में चंद शासक “लक्ष्मी चंद” ने कराया था | इसके अलावा , मंदिर में देखी जाने वाली विभिन्न पत्थर की मूर्तियां 7 वीं शताब्दी ईस्वी से 16 वीं शताब्दी ईस्वी तक की हैं | इस तरह की प्रतिमाओं में उमा , महेश्वर , पार्वती , महर्षि मंदिनी एक भुखी, त्रिमुखी व चतुर्भुखी शिवलिंग, गणेश, विष्णु, सूर्य सप्वमातृका एंव शाश्वतावतार भी प्रतिभाओं को दर्शनीय बनाकर बागनाथ जी के मंदिर के निर्माण को 13 वीं शताब्दी के आस-पास का बताया गया है।

केदारनाथ धाम का इतिहास !

केदारनाथ धाम का इतिहास ! KEDARNATH DHAM

केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखंड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है।

उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है |

यह उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है, जो कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। ये शिलाखंड भूरे रंग की हैं। मंदिर लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है। इसका गर्भगृह प्राचीन है जिसे 80वीं शताब्दी के लगभग का माना जाता है ।

केदारनाथ धाम और मंदिर तीन तरफ पहाड़ों से घिरा है। एक तरफ है करीब 22 हजार फुट ऊंचा केदारनाथ, दूसरी तरफ है 21 हजार 600 फुट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ है 22 हजार 700 फुट ऊंचा भरतकुंड।

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