Neelkanth Mahadev Temple , Rishikesh , Pauri Garhwal !! ( नीलकंठ महादेव मंदिर !! )

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में पौड़ी गढ़वाल जिले के ऋषिकेश  क्षेत्र में स्थित ” Neelkanth Mahadev Temple , Rishikesh , Pauri Garhwal !! (नीलकंठ महादेव मंदिर) के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है , यदि आप “नीलकंठ महादेव मंदिर” के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |



Neelkanth Mahadev Temple , Rishikesh , Pauri Garhwal !! (नीलकंठ महादेव मंदिर)

नीलकंठ महादेव मंदिर , भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन पवित्र मंदिर है , जो कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम (राम झुला या शिवानन्द झुला) से किलोमीटर की दुरी पर मणिकूट पर्वत की घाटी पर स्थित है | मणिकूट पर्वत की गोद में स्थित मधुमती (मणिभद्रा)पंकजा (चन्द्रभद्रा) नदियों के ईशानमुखी संगम स्थल पर स्थित नीलकंठ महादेव मन्दिर एक प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्र है । नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है | यह मंदिर समुन्द्रतल से 1675 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | नीलकंठ महादेव मंदिर में बड़ा ही आकर्षित शिव का मंदिर बना है एवम् मंदिर के बाहर नक्काशियो में समुन्द्र मंथन की कथा बनायी गयी है | नीलकंठ महादेव मंदिर के मुख्य द्वार पर द्वारपालो की प्रतिमा बनी है | मंदिर परिसर में कपिल मुनि और गणेश जी की मूर्ति स्थापित है | नीलकंठ महादेव मंदिर की सामने की पहाड़ी पर भगवान शिव की पत्नी “पार्वती” जी को समर्पित एक मंदिर है । मंदिर में शिवरात्रि और सावन में श्रधालुओ की काफी भीड़ लगी रहती है लेकिन बाकी के साल नीलकंठ महादेव मंदिर में नीलकंठ महादेव के दर्शन आसानी से किये जा सकते है | अन्य शिव मंदिर की तुलना में नीलकंठ महादेव मंदिर में चांदी से बने शिवलिंग का काफी नजदीक से दर्शन कर सकते है | मंदिर प्रांगण में अखंड धुनी जलती रहती है और उस धुनी की भभूत को श्रद्धालु प्रसाद के तौर पर लेकर जाते है | यदि जिन लोगो के पास चार धाम के बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शन करने के लिए समय नहीं होता है , तो उन्हें नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन जरुर करने चाहिए क्यूंकि बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने के मार्ग की झांकी की तरह है।

भगवान शिव को “नीलकंठ” क्यों कहा जाता है एवम् नीलकंठ महादेव मंदिर का नाम “नीलकंठ” कैसे पड़ा ?




नीलकंठ महादेव मंदिर के बारे में पुराणों की कथा के अनुसार एक बार किसी कारण देवताओं और राक्षसों के बीच अमृत के लिए मंथन हुआ था और वो मंथन दूध के सागर(क्षीरसागर) में हुआ था | उस मंथन में से 14 रत्न निकले (लक्ष्मी , शंख , कौस्तुभमणि , ऐरावत , पारिजात , उच्चेश्रवा , कामधेनु , कालकूट , रम्भा नामक अप्सरा , वारुणी मदिरा , चन्द्रमा , धन्वन्तरि ,अमृत और कल्पवृक्ष ) | देवता अपनी चतुराई से 14 रत्नों में से अमृत ले जाने में सफल हो गए लेकिन अमृत के साथ-साथ विष भी निकला था और वो विष इतना खतरनाक था कि उसकी एक बूंद पूरी दुनिया अर्थात संसार को ख़तम करने की शक्ति रखती थी , इस बात को जानकर देवता और राक्षस भयभीत हो गए और विष का निवारण पाने के लिए भगवान शिव जी के समक्ष पहुंचे | फिर भगवान शिव ने विष के प्रभाव से बचने के लिए एक उत्तर निकाला कि विष को स्वयं खुद पियेंगे | भगवान शिव ने विष से भरा घड़ा उठाया और देखते ही देखते पूरा विष पी गए लेकिन शिवजी ने विष को अपने गले से निचे नहीं निगला , उन्होंने विष को अपने गले में ही अटकाये रखा | विष पीने के बाद भगवान शिव का गला नीला हो गया और तब से भगवान शिव को “नीलकंठ” के नाम से भी जाना जाने लगा |

यह मंदिर भगवान शिव के सम्बन्ध में भुगतान करने के लिए स्थापित किया गया था इसलिए भगवान शिव के नाम “नीलकंठ” के कारण इस मंदिर का नाम “नीलकंठ महादेव” मंदिर रखा गया |

नीलकंठ महादेव मंदिर पौड़ी गढ़वाल  अपने प्रियजनों के साथ एक प्यारा समय बिताने लिए एक बेहतरीन स्थान है। इस लोकप्रिय पर्यटन स्थल में आकर इस पर्यटन स्थल का आनंद जरुर लें |

Google Map of Neelkanth Mahadev Temple , Rishikesh !! (नीलकंठ महादेव मंदिर)

नीलकंठ महादेव मंदिर , उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम ( राम झूला या शिवानंद झूला ) से 23 किलोमीटर दुरी पर स्थित है | आप इस स्थान को निचे दिए गए Google Map में देख सकते है |





उम्मीद करते है कि आपको “Neelkanth Mahadev Temple , Rishikesh , Pauri Garhwal !! (नीलकंठ महादेव मंदिर)” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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