“श्री श्री  1008″ फेणीनाग देवता मंदिर बागेश्वर-“Shri Shri 1008″ Ferinaag Devata Temple, Bageshwar 

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में बागेश्वर जिले, के दुदीला (कमेड़ी ) गांव में स्थित “श्री श्री  1008″ फेणीनाग देवता मंदिरShri 1008, Ferinaag Devata Temple, Bageshwar) का इतिहास तथा मान्यताओं के बारे में बताने वाले है। यदि आप जानना चाहते है। “श्री श्री  1008″ फेणीनाग देवता (Shri 1008, Ferinaag Devata Temple, Bageshwar) के बारे में तो इस पोस्ट को अन्त तक जरूर पढ़े।





 

श्री श्री 1008″  फेणीनाग देवता मंदिर का इतिहास-“Shri Shri 1008″ History of Ferinaag Devata Temple  

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“श्री श्री 1008” फेणीनाग देवता मंदिर, उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले में स्थित एक पर्वतीय स्थल है। यह बागेश्वर (कमेड़ी,दुदीला) चैकोड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग में बागेश्वर से 45 किलोमीटर तथा काण्डा से 10 किलोमीटर की दूरी पर, घने देवदार और चीड़  के जंगलो के बीच शिखर में  स्थित, प्रसिद्ध फेणीनाग देवता मंदिर है।






यह मंदिर, समुद्र स्तर से लगभग  2134 मीटर तथा 7 हजार फीट ऊंचा है। दुदीला से डेढ़ किलोमीटर, की पैदल यात्रा तय करने के बाद, यह भव्य मंदिर आता है। यहां से आप बर्फ से ढकी, हिमालय की चोटियाँ जैसे नन्दा देवी पर्वत, त्रिशूल पर्वत का सुन्दर दृश्य देख सकते है। दुदीला में स्थित प्रसिद्ध, श्री 1008 फेड़ीनाग देवता मंदिर प्रसिद्ध नाग मंदिरो में से एक है। फेड़ीनाग देवता मंदिर के, यात्रा के दौरान  आपको हिमालय की पूरी श्रंखला देखने को मिलती हैं और आप यहाँ  बारों  मास, बर्फ से ढकी हुई श्रंखलाओ  का आनंद ले सकते हैं|

“श्री श्री 1008″ फेणीनाग देवता मंदिर की मान्यताएं shri. 1008, the beliefs of Ferinag Devata Temple-

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यहां के स्थानीय लोगों की मान्यता है। कि नाग देवता उन्हें  संकट से उबारते है। और भक्तों के साथ अपनी कृपा बनाये रखते हैं|

गाय, भैस का पहला दूध तथा हर फसल का पहला अनाज, नाग देवता को चढ़ाया जाता है। हर साल यहां नाग पंचमी के दिन मेला भी लगता है। फेणीनाग देवता को खीर का भोग लगाया जाता है।

कपूरी, कमस्यार, टकनार, मलसूना, दुदीला, जाखनी,मजगांव सेरी, चौनाला,आदि दूर- दूर गांवो से, लोग फसल का पहला अनाज चढ़ाने यहां आते है।





नवरात्री में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। फेणीनाग देवता मंदिर में  चारो तरफ हरयाली के बीच में स्थित मंदिर में आये हुए यात्रीयो , भक्तो के लिए यह मंदिर एक शांतिमय और सुरमय समां बाँध देता है |





नाग देवता के मंदिर कहां-कहां स्थित हैWhere is the temple of Nag Devta located?

थल, बेरीनाग , डीडीहाट और बागेश्वर जिले के कांडा कमेड़ी देवी क्षेत्र में कभी नागों का आधिपत्य था। इसके अवशेष अब भी देखने को मिलते है।

  1.      धौलनाग- धौलनाग मंदिर विजयपुर, ( काण्डा बागेश्वर) की चोटी में स्थित है।
  2.      फेणीनाग- फेणीनाग मंदिर, कमेड़ी देवी, (दुदीला) की चोटी में स्थ्ति है।
  3.      बेणीनाग- बेणीनाग मंदिर, (बेरीनाग) की चोटी में स्थित है।
  4.      पिंगल नाग- पिंगल नाग मंदिर,जयनगर की चोटी में स्थित है।
  5.     बासुकीनाग- बासुकीनाग मंदिर, नागिलागांव पांखू के पास स्थित है।
  6.      धुम्रीनाग- धुम्रीनाग मंदिर, खपरचूला डीडीहाट में स्थित है।
  7.      सुन्दरीनाग- सुन्दरीनाग मंदिर, नापड़ तल्लाजोहार में स्थित है।
  8.     हरिनाग – हरिनाग मंदिर, रीमा, पचार के पपोली गांव में स्थित हैै
  9.      खरहरिनाग- खरहरिनाग मंदिर, खरई बागेश्वर में स्थित प्राचीन मंदिर है।
  10.     कालीनाग- कालीनाग मंदिर, थल के पास विषधर नाग का प्राचीन मंदिर है।

 

यहां तक कैसे पहुचेंhow to reach 

यहां तक आप आसानी से पहुंच सकते है।

रेल से :-

काठगोदाम रेलवे स्टेशन तक ट्रेन से आ सकते है। वहां से आप टैक्सी अथवा बस आसानी से जा सकते है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से दुदीला की दूरी 190 (NH309)  किलोमीटर है।

दुदीला से आपको डेढ़ किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी होगी। यहाँ तक पहुचने के दो रास्तें हैं एक  हैं कमेड़ी देवी से  दूसरा  ग्राम दुदिला से , दोनों जगह से आप आसानी से पैदल यात्रा कर सकते हैं |

Ferinaag Devta Temple In 360 Degree




















GOOGLE MAP OF SHRI 1008 FERINAAG DEVTA TEMPLE

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