उत्तरखंड में महकेगा तेजपत्ता बढेगा रोजगार Tej patta plant

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में उत्तराखंड में पाया जाने वाला “तेजपत्ता Tej Patta Plant” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं उत्तराखंड में पाया जाने वाला “तेजपत्ता Tej Patta Plant” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|





tejpatta

उत्तरखंड में महकेगा तेजपत्ता Tej patta plant

तेजपत्ते का इस्तेमाल ज्यादातर भारतीय पकवानों में किया जाता है. मसाले के तौर पर इस्तेामल होने वाली इन पत्त‍ियों में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. इनसे तेल भी निकाला जाता है. तेजपत्ते में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है.इसके अलावा इन पत्तियों में कई तरह के प्रमुख लवण जैसे कॉपर, पोटैशियम, कैल्शियम, गैगनीज,सेलेनियम और आयरन पाया जाता है.





उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में सरोवर नगरी के साथ ही तेजपत्ता उत्पादन के मामले में मुख्य उत्पादक क्षेत्र बनता जा रहा हैं| जिले के सात विकासखंडो में 3759 कृषक 250 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तेजपत्ता की खेती कर रहे हैं| मसाला उद्योग में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जाने वाले तेजपत्ता उत्पादन में किसानों की रूचि को देखते हुए अब भीमताल व ओखलकांडा क्षेत्र में 17 अरोमा कलस्टर विकसित किये जाएंगे| इसके लिए 286 कृषको की 183 हेक्टेयर भूमि को तेजपात की खेती से आच्छादित करने के लिए चयन किया गया है| इससे क्षेत्र में तेजपत्ता उत्पादन का बाजार तैयार होगा, जिससे रोजगार के साधन बढ़ेगे|

यहाँ बनेगे 17 अरोमा कलस्टर

विकासखंड भीमताल के ग्राम मंगोली भेवा, नलनी, जलालगाँव, खामारी, सूर्यागाँव, दोगड़ा, जन्तवाल,चोपडा,भाल्यूटी, हैडाखान, बडैत, स्युडा और ओखलकांडा ब्लाक के भदरेठा, मटेला, पुटपुडी, अडगांव तल्ला, साल, भनपोखरा, डालकन्या देवली, भद्र्कोट एवं तुषराड सहित अन्य गाँवों में 17 अरोमा कलस्टर विकसित किये जाएगे| इन कलस्टरों में चयनित कृषकों को जैविक खेती करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आरम्भ कर दिए गये हैं योजना के तहत कृषकों को जैविक खाद एवं उवर्रक, वर्मी कम्पोस्ट पिट और स्प्रे मशीन निश्शुल्क वितरित की जाएगी|




तेजपत्ता का क्या हैं उपयोग

तेजपत्ता की पत्ती व छाल दोनों का उपयोग किया जाता हैं| पत्तियों की सबसे अधिक खपत मसाला उद्योग में होती हैं पत्तियों का सीधे मसाले के रूप म प्रयोग होता हैं और पत्तियों से मिलाने वाले सुगंधित तेल का सौन्दर्य प्रसाधन में इस्तेमाल होता हैं





प्रतिवर्ष 30 क्विंटल पत्तियों का उत्पादन

पौधरोपण करने के पांच साल बाद तेजपात का लाभ मिलाना शुरू हो जाता हैं| एक हेक्टेयर श्रेत्रफल में ही प्रतिवर्ष तकरीबन 30 क्विंटल पत्तियों का उतपादन होता हैं जिससे किसानो को प्रति हेक्टेयर 1.50 लाख की आय होती है

तेजपत्ता का प्रदेश में उत्पादन

प्रदेश में लगभग 6200 किसान इस उत्पादन से जुड़े हैं, जो 365 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तेजपात की खेती कर रहे हैं इससे 900 टन पत्तियों का उत्पादन प्रतिवर्ष हो रहा हैं|

वैज्ञानिक प्रभारी नृपेंद्र चौहान, का कहना है कि सगंध पौध केंद्र ने परंपरागत कृष विकास योजना के अंतर्गत नैनीताल के भीमताल व ओखलकांडा ब्लाक के गांवो का चयन किया हैं उत्तराखंड में उत्पादित तेजपत्ता अपनी विशिष्ट गुणवत्ता के कारण अन्य राज्यों के तेजपात से भिन्न हैं इसकी अन्य राज्यों में भी मांग हैं|





तेजपत्ता के फायदे Benefits of Tej patta

तेजपत्ता डायबिटीज  के प्रभावों को दूर-

आयुर्वेद के अनुसार तेज पत्‍तों का उपयोग कर डायबिटीज  का उपचार किया जा सकता है। क्‍योंकि यह    रक्‍त ग्‍लूकोज, कोलेस्‍ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्‍तर को कम करने में मदद करते हैं। और अधिक लाभ प्राप्‍त करने के लिए आप इन पत्‍तों का पाउडर भी बना सकते हैं






तेजपत्ता कैंसर के प्रभावों को दूर-

कैंसर प्रभावों को दूर करने के लिए तेज पत्‍ता बहुत ही उपयोगी होता है। क्‍योंकि इसमें एंटी-कैंसर  गुण होते हैं। तेज पत्‍ते में कैफीक एसिड, कार्सेटिन, यूगानोल और कैचिन होते हैं जिनमें केमो- सुरक्षात्‍मक गुण होते हैं जो विभिन्‍न प्रकार के कैंसर को रोकने में मदद करते हैं।

उमीद करते है आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा| अगर आपको यह पोस्ट पसंद आये तो इसे like तथा नीचे दिए बटनों द्वारा share जरुर करें|