Top 15 Best Places To Visit In Uttarkashi!! (प्रसिद्ध पर्यटक स्थल उत्तरकाशी)

नमस्कार दोस्तों “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में  हम आपको “उत्तरकाशी जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटक स्थल ( Top 15 Best Places To Visit In Uttarkashi)”  के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जनना चाहते हैं, “उत्तरकाशी जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटक स्थल (Top 15 Best Places To Visit in Uttarkashi)”  के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|





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कपिल मुनि आश्रम

कपिल मुनि आश्रम देवभूमि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गुन्दीयाट गाव में स्थित है | यह आश्रम समुद्री तल से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक छोटे से गांव गुन्दीयाट में स्थित है , जो कि गढ़वाल क्षेत्र का एक विशिष्ट काली स्लेट की छतों एवं छोटी खिड़कियों वाला गांव है । यह आश्रम ऋषि कपिल मुनि को समर्पित है, जिन्होंने यहाँ हिंदू देवता शिव से आशीर्वाद लेने के लिए उनकी पूजा-अर्चना एवं तपस्या की थी। साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ऋषि को आशीर्वाद दिया । कपिल मुनि ‘सांख्य दर्शन’ के प्रवर्तक थे, जिन्हें भगवान विष्णु का पंचम अवतार माना जाता है ।

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हर की दून उत्तरकाशी

उत्तराखंड राज्य, के उत्तरकाशी जिले में स्थित हर की दून, जिसे ईश्वर की भूमि कहा जाता है। यह यमुना नदी की सहायक रूपिन व सूपिन, नदियों के आस-पास फतेह पर्वत की गोंद में बसा है। यह उच्च हिमालय के निकट स्थित एक अत्यन्त दुर्गम अन्चल है।
उत्तर में हिमाचल के व पूर्व में तिब्बत से लगा हर की दून का इलाका अपने भीतर गोविन्द पशु विहार वन्य जीव अभयारण्य को समेटे हुए है। हर की दून घाटी की ऊंचाई समुद्र सतह से लगभग 3500 मीटर है।

दून की घाटी में टैªकिंग के लिए पर्यटक आते रहते है। यह घाटी पृष्ठभूमि में 21000 फीट की ऊंचाई वाली स्वर्गारोहिणी चोटी भी दिखाई देती है। इसकी मान्यता है। कि महाभारत काल में युधिष्ठिर अन्य पाण्डवों सहित इसी शिखर से स्वर्ग को गये थे





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गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क

गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में स्थित है। पार्क की पूर्वोत्तर सीमा तिब्बत के साथ, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगी हुई है।गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क की स्थापना 1989 में हुई थी | इसका  कुल क्षेत्रफल, 1553 वर्ग किलोमीटर में फैला हैं सतह से औसतन ऊंचाई 7083 मीटर है। बर्फ से ढकी पहाड़ और हिमनद इस उद्यान के विस्तृत भाग में फैले हुए है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख भी इसी पार्क के अन्दर ही स्थित है। इस पार्क का नाम गंगोत्री इसी स्थल के नाम से रखा गया हैं गंगोत्री हिमनद जिस पर पार्क का नाम दिया है। वो हिन्दुओं के पवित्र स्थलों में से एक है।

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डोडीताल उत्तरकाशी 

उत्तराखंड राज्य के “उत्तरकाशी जिले” में स्थित सुन्दर एवं आकर्षण डोडीताल, पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। डोडीताल सुंदर झील, दुर्लभ प्रजातियां मछलियां और बर्फीले बुग्याल पर्यटकों का, पसंदीदा स्थान बनता जा रहा हैं, लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते यहां पर्यटक काफी कम पहुच पा रहे है।डोडीताल समुद्रसतह से 3,310 मीटर की ऊंचाई पर उच्च पहाड़ों के बीच घिरा हुआ एक पन्ना झील है। यह ताल अपनी शांत एवं सुन्दर वातावरण के कारण उत्तर भारत के सबसे खूबसूरत उच्च ऊंचाई झीलों में से एक है। डोडीताल का नाम दुर्लभ हिमालय ब्राउन ट्राउन प्रजाति की मछलियों के नाम से रखा गया है।




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दयारा बुग्याल उत्तरकाशी

उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल समुद्र सतह से 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। उत्तरकाशी गंगोत्री मार्ग पर स्थित भटवारी नामक स्थान से इस खूबसूरत घास के मैदान के लिए रास्ता जाता है। दयारा पहुँचने के लिए यात्रियों को बरसू गांव पहुचना पड़ता है। यह दयारा बुग्याल का अंतिम गांव है। यहा तक यात्री आसानी से वाहनों द्वारा पहुँच सकते है। यहां ट्रैकिंग द्वारा लगभग 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।ह जगह शानदार हिमालय का दृश्य प्रस्तुत करता है। यहा पर्यटक झील के निकट कैम्पिंग सुविधाओं का भी आनन्द ले सकते है। दयारा बुग्याल से 30 किमी की दूरी पर स्थित दोदीताल भी है। जो यात्रीयों के लिए काफी लोकप्रिय है।

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 कर्ण देवता मंदिर 

कर्ण देवता मंदिर , उत्तरकाशी जिले के नेतवार गाँव से लगभग डेढ़ मील दूर सारनौल गांव में स्थित एक प्राचीन एवम् लोकप्रिय मंदिर है | यह मंदिर महाभारत के समय से सम्बंधित है | यह मंदिर कर्ण को समर्पित है जिसे पांडवों में सबसे बड़ा भाई माना जाता है एवम् कर्ण देवता मंदिर को शक्ति और शांति का प्रतीक माना जाता है | कर्ण देवता मंदिर के निकट तमस या टोंस नदी नामक नदी स्थित है इस नदी के बारे में यह मान्यता है कि भुब्रूवाहन के आंसुओं के कारण ही यह नदी बनी थी | कर्ण देवता मंदिर के अल्वा उत्तराखंड के सीमांत जनपद मोरी ब्लॉक के 24 गांव ऐसे हैं जहां लोग दानवीर कर्ण की पूजा करते हैं | इस क्षेत्र के लोग कर्ण देवता को अपना “कुल देवता” और “ईष्ट देवता” मानते है |





पोखु देवता मंदिर

पोखु देवता मंदिर

पोखु देवता मंदिर , उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के क्षेत्र नैटवाड़ गांव में यमुना नदी की सहायक टोंस नदी के किनारे स्थित है | पोखू देवता को लोग न्याय के रूप में भी पूजा करते हैं | नैटवाड़ गांव चारों ओर सुंदर देवदार और चीड़ के पेड़ है। नैटवाड गांव पहुंचने के लिए पर्यटकों को चकराता से चकराता-शिमला मार्ग पर स्थित ट्यूनी जाना होता है। इस घाटी से एक संकीर्ण रास्ता एक लोहे का पुल पर निकलता है, जो यात्रियों को पोखू देवता मंदिर ले जाता है। उत्तरकाशी के नैटवाड़ में स्थित पोखू देवता का मंदिर भी न्याय के लिए प्रसिद्ध है। सदियों से ऐसी मान्यता है कि यहां हाजिरी लगाने वाले को हमेशा अविलंब न्याय मिलता है।

Shani Temple Uttarkashi

शनि देव मंदिर

शनिदेव मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के खरसाली गांव में स्थित एक प्राचीन मंदिर है । यह मंदिर हिंदूओं के देवता शनिदेव को समर्पित है , जिन्हें एक पौराणिक कथा के अनुसारहिंदू देवी यमुना का भाई माना जाता है | कहा जाता है कि शनिदेव न्यायाधीश हैं , जो हर कर्म का हिसाब करते हैं । यह मंदिर समुद्री तल से लगभग 7000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है । इस मंदिर की कलाकृति बेहद ही प्राचीन है | शनि मंदिर के बारे में इतिहासकार मानते है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवो ने करवाया है एवम् इस पांच मंजिला मंदिर के निर्माण में पत्थर और लकड़ी का उपयोग किया गया है ।





काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी

विश्वनाथ मंदिर  उत्तरकाशी

विश्वनाथ मंदिर हिन्दू देवस्थानो में से सर्वाधिक सुप्रसिद्ध मंदिरों में से एक है | यह मंदिर उत्तरकाशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है |उत्तरकाशी को प्राचीन समय में विश्वनाथ की नगरी कहा जाता था एवम् कालांतर में इस स्थान को “उत्तरकाशी” कहे जाने लगा | केदारखंड और पुराणों में उत्तरकाशी के लिए ‘बाडाहाट’ शब्द का प्रयोग किया गया है और पुराणों में इसे ‘सौम्य काशी’ भी कहा गया है । 12 ज्योतिर्लिगों में से एक उत्तराखण्ड के काशी विश्वनाथ मंदिर की स्‍थापना परशुराम जी द्वारा की गई थी एवम्  ज्योतिलिंग के अतर्गत मंदिर में विश्वनाथ भगवान प्रकट हुए थे | विश्वनाथ मंदिर हिंदूओं के देव भगवान शिव को समर्पित है , तथा भक्त यहां मंत्रों का सस्वर पाठ हर समय सुन सकते हैं | विश्वनाथ मंदिर आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है

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केदारताल उत्तरकाशी

केदारताल उत्तराखंड राज के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक ताल हैं| (जिसे शिव की झील भी कहा जाता है) यह हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र में समुद्र तल लगभग 4,750 मीटर (15,000 फीट) की ऊंचाई पर स्थित एक हिमनद झील है। उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत झीलों में से एक केदार ताल है। यह गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्थित, गढ़वाल हिमालय में दूर केदार ताल निश्चित रूप से साहसिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। इसके पास ही हैं प्रसिद्ध मृगुपंथ और थलयसागर पर्वत जो अपनी चोटियों के प्रतिबिंब से ताल की शोभा में चार चांद लगाते हैं। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जोभागीरथी की एक सहायक नदी है। कहीं शांत और कहीं कलकल करती यह नदी विशाल पत्थरों और चट्टानों के बीच से अपना रास्ता बनाती है। अपने आप को पूर्ण रूपेण गंगा कहलाने के लिए गंगोत्री के समीप यह भागीरथी में मिल जाती है।काफी शानदार और लुभावनी रूप से खूबसूरत, उत्तराखंड में केदार ताल की यात्रा काफी ज़ोरदार है।





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खारसाली उत्तरकाशी

खारसाली उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक छोटा सा गांव है। यह समुद्र तल से लगभग 2675 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं| खारसाली में सर्दियों के मौसम में  भारी बर्फबारी  होती हैं  यमुनोत्री  जाते हुए यात्री सर्दियों के दौरान बर्फ बारी के कारण, देवी यमुना के मंदिर में ही विश्राम करते हैं|

यह जगह प्राकृतिक स्प्रिंग्स और झरने से ढके प्राकृतिक परिवेशों के कारण यात्रियों के बीच एक लोकप्रिय पिकनिक स्थान है। खारसाली में भारत का सबसे पुराना शनि देव मंदिर  है। यात्री चार धाम यात्रा के दौरान भगवान शनि के दर्शन करके यमनोत्री जाते हैं| कहा जाता है कि, शीतकालीन मौसम के दौरान देवी यमुना की मूर्ति शनि देव मंदिर में रखी जाती है। मंदिर पत्थरों, लकड़ी और मोर्टार से बना एक तीन मंजिला मंदिर है।  ऐसा माना जाता है कि मंदिर पांडवों द्वारा बनाया गया था। भगवान शनि देव की कांस्य मूर्ति को चाया, सांग्या और नाग देवता के साथ यहां रखा गया है।

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मोरी उत्तरकाशी

मोरी उत्तरकाशी जिले के खुबसूरत हिल स्टेशन में से एक हैं मोरी हिल स्टेशन अपने आप में खूबसूरती के लिए मशहूर हैं यह समुद्र तल से लगभग 1150 मीटर की ऊंचाई में टोंस नदी के किनारे स्थित हैं| यहाँ बहने वाली टोंस यमुना की सहायक नदियों में से एक हैं यहाँ के टोंस नदी में रिवर राफ्टिंग का आनन्द लिया जा सकता है|  यहां के टॉन्स नदी में रिवर राफ्टिंग का आनंद लिया जा सकता है। यहां पर कैम्पिंग भी की जा सकती है। इसके लिए यहां सारा सामान उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा हाइकिंग, ट्रेकिंग, नेचर वॉक का आनंद किया जा सकता है। चिड़ियों की चहचहाहट, वनस्पति और जीव-जंतु पर्यटकों को चौका देते हैं। रॉक क्लांइबिंग भी मोरी के मशहूर खेलों में शामिल है।





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हर्षिल उत्तरकाशी

हरसिल  उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल उत्तरकाशी जिले में हैं यह स्थान गंगोत्री को जाने वाले मार्ग पर भागीरथी नदी के किनारे स्थित है | यह  समुद्र तल से 7,860 फीट (2,620 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित, हर्षिल 73 किमी दूर है। उत्तरकाशी से, और हर्षिल से 30 किमी दूर गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान है, जो1,553 वर्ग किमी से अधिक फैला है।गढ़वाल के अधिकांश सैंदर्य स्थल दुर्गम पर्वतों में स्थित हैं जहाँ पहुँचना बहुत कठिन होता  हैं | लेकिन ऐसे भी अनेक पर्यटक स्थल हैं जहाँ सभी प्राक्रतिक विषमता और दुरुहता समाप्त हो जाती है| वहां तक पहुचना सहज और सुगम होता है|यही कारन हैं कि इन सुविधापूर्ण प्राक्रतिक स्थलों पर अधिक पर्यटक पहुचते हैं| प्रक्रति की एक सुन्दर उपत्यका है,हरसिल

Gangotri Glacier Uttarkashi

गंगोत्री ग्लेशियर उत्तरकाशी

गंगोत्री ग्लेशियर हिमालय क्षेत्र का सबसे बड़ा ग्लेशियर हैं , जो कि उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं | इस ग्‍लेशियर की मात्रा 27 घन किमी. है और इसकी लंबाई और चौड़ाई लगभग 30 और 4 किमी. है | गंगात्री ग्लेशियर चीन से सीमा पर है और गंगा और भागीरथी( गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में से एक) के लिए पानी का प्राथमिक स्रोत है | गंगोत्री सबसे बड़ा हिमालयी ग्लेशियर है जो कि मेरु, शिवलिंग और थाले सागर चोटियों से घिरा हुआ है | यह ग्‍लेशियर, अपने निचले स्‍तर पर एक सर्किल से मिला हुआ है जिसे चौखंभा पीक कहते हैं जो पश्चिमोत्‍तर की ओर बहती है और अंत में एक गाय के मुंह के आकार में परिवर्तित हो जाती है। इसलिए, इस जगह को गोमुख कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है-गाय का मुंह। यह हिंदुओं के लिए एक अनुष्‍ठान होता है कि वह इस ग्‍लेशियर के जमा देने वाले ठंडे पानी में डुबकी लगाएं । यह ग्‍लेशियर 1780 में मापा गया था, जिसके बाद से यह हर साल 19 मीटर प्रति वर्ष की दर से गल रहा है। इस ग्‍लेशियर से निकलने वाली तीन सहायक नदियां भी है जिनका नाम है – रक्‍तवर्ण, चतुरंगी और कीर्ति 

UTTARKASHI IN 360 DEGREE






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