Top 15 Places To Visit In Dehradun देहरादून के 15 टॉप पर्यटक स्थल 

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “15  प्रसिद्ध पर्यटक स्थल देहरादून (Top 15 Places To Visit In Dehradun)” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं | 15 प्रसिद्ध पर्यटक स्थल देहरादून( Top 15 Places To Visit In Dehradun)”   के बारे में  तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|





Tapkeshwar Temple Dehradun

TAPKESHWAR TEMPLE , DEHRADUN !! (टपकेश्वर मंदिर)

टपकेश्‍वर मंदिर एक लोकप्रिय गुफा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । टपकेश्वर मंदिर देहरादून शहर के बस स्टैंड से 5.5 किमी दूर स्थित एक प्रवासी नदी के तट पर स्थित है । यह मंदिर सिध्पीठ के रूप में भी माना जाता है | टपकेश्वर मंदिर में “टपक” एक हिन्दी शब्द है , जिसका मतलब है “बूंद-बूंद गिरना” । टपकेश्वर मंदिर एक प्राकर्तिक गुफा है , जिसके अन्दर एक शिवलिंग विराजमान है | यह कहा जाता है कि गुफा के अन्दर विराजित शिवलिंग पर चट्टानों से लगातार पानी की बूंदे टपकती रहती है तथा पानी की बुँदे स्वाभाविक तरीके से शिवलिंग पर गिरती है | जिस कारण इस मंदिर का नाम “टपकेश्वर मंदिर” पड़ गया | मंदिर के कई रहस्य हैं और मंदिर के निर्माण के ऊपर भी कई तरह की बातें होती रहती हैं | कोई कहता है कि यहाँ मौजूद शिवलिंग स्वयं से प्रकट हुआ है , तो कई लोग बताते हैं कि पूरा मंदिर ही स्वर्ग से उतरा है | यह माना जाता है कि मंदिर अनादी काल से इस स्थान पर विराजित है और यह भी माना जाता है कि यह पवित्र स्थान गुरु द्रोणाचार्य जी की तपस्थली है |





Mahasu Devta Temple Dehradun

MAHASU DEVTA TEMPLE , DEHRADUN

महासू देवता मंदिर

महासू देवता न्याय के देवता है एवम् महासू देवता को समर्पित मंदिर देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जिले में चकराता के पास हनोल गांव में टोंस नदी के पूर्वी तकट पर स्थित है । यह मंदिर 9वीं शताब्दी में बनाया गया था और ये मंदिर मिश्रित शैली की स्थापत्य कला को संजोए हुए है | महासू देवता मंदिर भगवान शिवजी के अवतार “महासू देवता” को समर्पित है एवम् महासू देव को “नहादेव” का रूप कहा जाता है वर्तमान में यह मंदिर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के संरक्षण में है । मिश्रित शैली की स्थापत्य कला को संजोए यह मंदिर देहरादून से 190 किमी और मसूरी से 156 किमी दूर है ।‘महासू देवता’ एक नहीं चार देवताओं का सामूहिक नाम है और स्थानीय भाषा में महासू शब्द ‘महाशिव’ का अपभ्रंश है । चारों महासू भाइयों के नाम “बासिक महासू” , “पबासिक महासू” , “बूठिया महासू (बौठा महासू)” और “चालदा महासू” है , जो कि भगवान शिव के ही रूप हैं । महासू देवता जौनसार बावर , हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ईष्ट देव हैं | उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, बिशैहर और जुब्बल तक महासू देवता की पूजा होती है । इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मन्दिर को न्यायालय के रूप में माना जाता है ।

Lakhamandal Temple Dehradun

LAKHAMANDAL TEMPLE लाखामंडल मंदिर

लाखामंडल मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो कि उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसर-बावार क्षेत्र में स्थित है । यह मंदिर देवता भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित हैं एवम् समुन्द्रतल से इस मंदिर की ऊँचाई 1372 मीटर है | यह मंदिर शक्ति पंथ के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि उनका मानना ​​है कि इस मंदिर की यात्रा उनके दुर्भाग्य को समाप्त कर देगी । मंदिर अद्भुत कलात्मक काम से सुशोभित है । लाखामंडल मंदिर का नाम दो शब्दों से मिलता है | लाख अर्थ “कई” और मंडल जिसका अर्थ है “मंदिरों” या “लिंगम” मंदिर में दो शिवलिंग अलग-अलग रंगों और आकार के साथ स्थित हैं , “द डार्क ग्रीन शिवलिंग” द्वापर युग से संबंधित है , जब भगवान कृष्ण का अवतार हुआ था और “लाल शिव लिंग”त्रेता युग से संबंधित हैं , जब भगवान राम का अवतार हुआ था । लाखामंडल मंदिर को उत्तर भारतीय वास्तुकला शैली में बनाया गया है , जो कि गढ़वाल, जौनसर और हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्रों में मामूली बात है | मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टान पर देखे जा सकते हैं , जो इस मंदिर की विशिष्टता है । लाखामंडल मंदिर में भगवान कार्तिकेय, भगवान गणेश, भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की मूर्तियां मंदिर के अंदर स्थापित हैं ।





संतला देवी मंदिर

SANTALA DEVI TEMPLE संतला देवी मंदिर

संतला देवी मंदिर देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जिले में स्थित एक प्राचीन एवम् लोकप्रिय मंदिर है , जो कि देहरादून से 15 कि.मी. की दुरी पर हरे घने जंगलो के बीच में सन्तौर नामक गढ़ में स्थित है | यह मंदिर भक्तो के लिए एक आस्था का केंद्र है जो कि देहरादून नगर में नूर नदी के ठीक ऊपर विराजित है | यह मंदिर देवी संतला और उनके भाई संतूर को समर्पित है | देहरादून में स्थित धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण संतला देवी मंदिर को अन्य नामों से भी बुलाया जाता है , जैसे कि ” संतौरा देवी मंदिर “और ” संतौला देवी मंदिर “ | संतला देवी मंदिर में विश्वास लोगों के प्रतीक के रूप में खड़ा है और मंदिर का एक महान सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है | मंदिर के बारे में यह कहा जाता है कि यदि कोई भक्त या श्रद्धालु सच्चे मन से मनोकामना करता है तो माँ संतला देवी उसकी मनोकामना को पूरी करती है | संतला देवी मंदिर कि यह मान्यता है कि यह मंदिर हज़ारो वर्ष पूर्व माता संतला व उनके भाई संतूर का निवास स्थान हुआ करता था |

डाट काली मंदिर देहरादून

DAAT KALI TEMPLE , DEHRADUN डाट काली का मंदिर

डाटकाली मंदिर हिन्दुओ का एक प्रसिद्ध मंदिर है , जो कि सहारनपुर देहरादून हाईवे रोड पर स्थित है | डाट काली मंदिर देहरादून के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है तथा देहरादून नगर से 14 किमी की दुरी पर स्थित है | यह मंदिर माँ काली को समर्पित है इसलिए मंदिर को काली का मंदिर भी कहा जाता है एवम् काली माता को भगवान शिव की पत्नी “देवी सती” का अंश माना जाता है | माँ डाट काली मंदिर को “मनोकामना सिध्पीठ” व “काली मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है | डाट काली मंदिर के बारे में यह माना जाता है कि माता डाट काली मंदिर देहरादन में स्थित मुख्य सिध्पीठो में से एक है | डाट काली मंदिर में एक बड़ा सा हाल भी स्थित है , जिसमे मंदिर में आये श्रद्धालु व भक्त आदि लोग आराम कर सकते है |





लक्ष्मण सिद्ध मंदिर देहरादून

LAXMAN SIDDH TEMPLE लक्ष्मण सिद्ध मंदिर

लक्ष्मण सिद्ध मंदिर देहरादून में स्थित एक प्राचीन एवं लोकप्रिय मंदिर है | यह मंदिर या सिध्पीठ देहरादून से मात्र 13 किलोमीटर की दूरी बहुत ही शांत एवं सुरमय वातावरण में घने जंगलों के बीच स्थित है अर्थात यह सिद्धपीठ देहरादून ISBT से 12 किलोमीटर की दूरी पर हरिद्वार NH 72 हाईवे पर स्थित है | यह मंदिर अपने धार्मिक महत्व के लिए और सुंदर सौंदर्य के लिए भी काफी प्रसिद्ध है | लक्ष्मण सिद्ध मंदिर के बारे में यह कहा जाता है कि यह सिद्धपीठ ऋषि पीठ ऋषि दत्तात्रेय के चोरासी सिद्धों में से एक है | यह देहरादून में अवस्थित चार सिद्धपीठों में से यह सिद्धपीठ सर्वक्षेष्ठ है एवम् लोकमान्यता के अनुसार यह मंदिर राजा दशरथ के पुत्र “लक्ष्मण व राम “ के द्वारा रावण का वध करने के पश्चात ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान पर तपस्या की थी |

बुद्धा मंदिर देहरादून

BUDDHA TEMPLE बुद्धा मंदिर

उत्तराखंड अपनी विशाल प्राकृतिक सुंदरता , ताजा वातावरण और सुंदर लोगों के लिए जाना जाता है । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कई खूबसूरत जगह हैं । ऐसी ही एक खूबसूरत जगह बुद्धा टेम्पल या बुद्धा मंदिर” है , जो कि एक तिब्बती मठ है और यह मण्डोलिंग मठ के रूप में भी प्रसिद्ध है | इसका एक तिब्बती धार्मिक स्थान, मोहब्लेवाला, क्लेमेंट टाउन, देहरादून में स्थित है , जो कि आईएसबीटी देहरादून से कुछ किलोमीटर दूर है । यह चार तिब्बती धर्म विद्यालयों में से एक के रूप में बनाया गया था और इसका नाम “निंगमा” था । अन्य तीन स्कूलों को शाक्य, काजूयू और गेलुक कहा जाता है और तिब्बती धर्म में भी बहुत महत्व है । इस स्थान को “बुद्ध मोनस्ट्री” या “बुद्ध गार्डन” के नाम से भी जाना जाता है एवम् यह Mindrolling Monastery के नाम से भी जाना जाती है | बौद्ध मंदिर का निर्माण 1965 में प्रसिद्ध “कोहेन रिनपोछे” और बौद्ध धर्म के धर्म की रक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए कई अन्य भिक्षुओं द्वारा किया गया था । यह मंदिर जापानी वास्तुकला शैली में बनाया गया है ।





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सहस्त्रधारा SAHASTRADHARA DEHRADUN

सहस्त्रधारा देहरादून से आगे राजपुर रोड में पहाड़ों में घने जंगलों के बीच स्थित है।सहस्त्रधारा देहरादून बस स्टेशन से लगभग 16 किलो मीटर दूर है। यह एक पिकनिक स्पॉट है और गर्मियों में स्वर्ग हैं  लेकिन यहाँ का मुख्य आकर्षण वे ग़ुफाएँ हैं जिनमें लगातार पानी टपकता रहता है।यह पानी गंधक युक्त होता है, जिसमें नहाने  से चमड़ी के दर्द ठीक हो जाते हैं।पहाड़ी से गिरते पानी को प्राकृतिक तरीक़े से ही संचित किया गया है। थोड़ी दूर पहाड़ी पर आगे चलने पर पहाड़ी के अन्दर प्राकृतिक रूप से तराशी हुई कई छोटी छोटी ग़ुफा है जो बाहर से तो स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती इन ग़ुफा में जब प्रवेश करते है तो उनकी छत रिमज़िम हलकी बारिश की बौछारों की तरह टपकती रहती है। यहाँ अनेक धाराओ को जोड कर सहस्त्रधारा के नाम से जाना जाता है

त्रिवेणी घाट ऋषिकेश

TRIVENI GHAT त्रिवेणी घाट

देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में हिमालय पर्वतो के तल में बसे ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है | ऋषिकेश में यह स्थान एक प्रमुख स्नानागार घाट है , जहाँ सुबह से ही अनेक श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते है | त्रिवेणी घाट के बारे में यह कहा जाता है कि इस घाट पर तीन प्रमुख नदियों गंगा , यमुना और सरस्वती का संगम होता है | इस घाट से ही गंगा नदी दाई ओर मुड़ जाती है | ऋषिकेश के मंदिरों में जाने से पूर्व सभी भक्तो को घाट के पवित्र जल में डुबकी लगानी चाहिए | लोगो के विश्वास के अनुसार इस स्थल के जल पर डुबकी लगाने से पापो से मुक्ति मिल जाती है | इस स्थान पर बहुत से तीर्थयात्री संगम स्थल के जल को स्नान करने के लिए प्रयोग करते है | त्रिवेणी घाट हिन्दू पौराणिक कथाओं एवम् पुराणों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और हिन्दू महाकाव्यों में भी इस पवित्र स्थल का उल्लेख है , रामायण और महाभारत में यह माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इसी पवित्र स्थान का दौरा किया था , जब उन्हें “जरा” नामक एक शिकारी के तीर से चोट लगी थी एवम् इस घाट को भगवान कृष्ण का अंतिम संस्कार स्थल भी माना जाता है |





गुरु राम राय गुरुद्वारा

GURU RAM RAI GURUDWARA गुरु रामराय गुरुद्वारा

देहरादून में राम राय गुरुद्वारा 17 वीं सदी में देहरादून में सिखों के श्री हर राय जी के सातवें गुरु के सबसे बड़े पुत्र ‘राम राय’ द्वारा स्थापित किया गया था । यह स्थल देहरादून में स्थित सिखों का प्रमुख एवम् धार्मिक स्थल है | किंवदंती के अनुसार , गुरु राम राय को एक सिख गुरु बनने के लिए निकाल दिया गया था और उन्हें अपने मूल स्थान को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था । इसलिए वह देहरादून आये और 1676 में देहरादून में अपना शिविर स्थापित किया । मुगल सम्राट औरंगजेब गुरु राम राय जी की चमत्कारिक शक्तियों से बहुत प्रभावित हुए थे । इसलिए उन्होंने गुरु राम राय जी को सभी संभव मदद देने के लिए गढ़वाल के राजा फतेह शाह से पूछा । शुरू में धम्मवाला में एक गुरुद्वारा बनाया गया था | दरबार साहिब की वर्तमान इमारत का निर्माण 1707 में पूरा हुआ । राम राय गुरुद्वारा इस्लामी और हिंदू वास्तुकला का एक उदाहरण है । इमारत में एक गुंबद , मीनार, और भित्तिचित्रों को एक मिश्रित संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान को दर्शाती है ।

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CHAKRATA DEHRADUN चकराता पर्यटक स्थल

चकराता भारत के उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में एक छावनी शहर है। यह टोंस और यमुना नदियों के बीच है, 7000-7250 फीट की ऊंचाई पर, राज्य की राजधानी, देहरादून से 98 किमी दूर है| यह मूल रूप से ब्रिटिश भारतीय सेना का एक छावनी शहर था। इसके पश्चिम में हिमाचल प्रदेश, और पूर्व में मसूरी स्थित है|चकराता प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग में रुचि लेने वालों के लिए एकदम उपयुक्त स्थान है। यहाँ के सदाबहार शंकुवनों में दूर तक पैदल चलने का अपना ही मजा है। चकराता में दूर-दूर फैले घने जंगलों में जौनसारी जनजाति के आकर्षक गांव हैं। इस क्षेत्र को जौनसर-बवार के नाम से जाना जाता है, जिसमें आसपास के गांवों में उल्लेखनीय है।





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JWALAJI TEMPLEज्वाला जी मंदिर

देहरादून मसूरी  में स्थित माँ दुर्गा का मंदिर प्रसिद्ध ‘ज्वाला जी मंदिर’ के रूप में जाना जाता है, ज्वाला देवी मंदिर देवी दुर्गा के भक्तों के लिए विश्वास और भक्ति का केंद्र है। समुद्रतल से लगभग  2104 मीटर की ऊंचाई पर बिनोग पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित ज्वाला देवी मंदिर ओक और देवदार के पेड़ से घिरा हुआ है।

देवी दुर्गा भक्तों के लिए पूजा की जगह, ज्वाला देवी मंदिर बेनोग हिल में लगभग 2100 मीटर की ऊंचाई पर एक पुराना मंदिर है। मां दुर्गा के आशीर्वाद लेने के लिए आगंतुक अक्सर ज्वाला जी मंदिर जाते हैं। देवी दुर्गा की पुरानी पत्थर की मूर्ति ज्वाला जी मंदिर में है।तीर्थयात्रियों और भक्तों के अलावा, प्रकृति प्रेमियों अक्सर भी इस जगह पर जाते हैं। मोटे हरे जंगल से घिरे हुए, ज्वाला देवी मंदिर प्रकृति प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। मंदिर में शांति और शांति आसानी से महसूस की जा सकती है क्योंकि यह शहर की भीड़ से बहुत दूर है। मंदिर से, आगंतुक यमुना नदी और शिवालिक रेंज देख सकते हैं। यह मंदिर मसूरी से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं| यहाँ नवरात्र में भक्तों का ताँता लगा रहता हैं| यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद सुन्दर हैं|

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DEER PARK DEHRADUNमालसी डियर पार्क देहरादून

उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून में स्थित मालसी हिरन पार्क देहरादून से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं| देहरादून में राजाजी राष्ट्रीय पार्क के बाद मालसी हिरण पार्क एक प्रमुख वन्यजीव प्रेमियों का आकर्षण है।

मसूरी रोड में देहरादून से 10 किमी दूर स्थित, यह मिनी जूलॉजिकल पार्क या उद्यान अब देहरादून में एक प्रसिद्ध पिकनिक के रूप में विकसित हुआ है|  माल्सी रिजर्व वन से घिरा हुआ, माल्सी हिरण पार्क शिवलिक तलहटी में अपने प्राकृतिक आवास में छोटे-छोटे हिरण तथा मोर  के लिए प्रसिद्ध है। राजसी हिरण आबादी के अलावा, पार्क में दो सींग वाले हिरण और नीलगाई (इंडियन एंटेलोप) भी हैं। आगंतुक पार्क में अपने प्राकृतिक वातावरण में पक्षियों की विस्तृत विविधता भी देख सकते हैं।और कोई भी उन्हें खिला सकता है।

पार्क में अधिकारियों ने बच्चों के लिए कई स्लाइड भी स्थापित किये हैं।  पार्क में  कैंटीन खाने योग्य पदार्थों की सेवा भी उपलब्ध  है।

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NAG TIBBA DEHRADUN नाग टिब्बा देहरादून

नाग टिब्बा (नागटिब्बा) का अर्थ है सर्प चोटी, गढ़वाल क्षेत्र के निचले हिमालय की सबसे ऊंची चोटी है। यह नाग टिब्बा रेंज को भी नाम देता है, जो कि कम हिमालय की तीन श्रेणियों में से एक है, अन्य पर्वतमाला धौलाधार और पीर पंजाल हैं।नागटिब्बा वसंत ऋतु और गर्मियों के दौरान शिविर के लिए एक आदर्श स्थान है और सर्दियों के लिए सबसे उपयुक्त ट्रेक में से एक है, जब भारी बर्फ के कारण अधिकांश ट्रेक बंद हो जाते हैं। नागटिब्बा 3025 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। नाग टिब्बा 3,022 मीटर (9,915 फीट), उत्तराखंड राज्य (गढ़वाल मंडल) के कम हिमालयी क्षेत्र में सबसे ऊंची चोटी है, । यह लंढौर छावनी से 16 किमी (9.9 मील) दूर और उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में मसूरी से लगभग 57 किमी दूर स्थित है। ‘नाग टिब्बा रेंज’ हिमालय की तीन प्रमुख श्रेणियों में से एक है, जिसमें धौलाधार, और पीर पंजाल शामिल है, जो महान हिमालय से दूर है

नागटिब्बा राजसी सुंदर सौंदर्य और साहसिक प्रेमियों के लिए एक अच्छा ट्रेक प्रदान करता है। नाग टिब्बा से तेजस्वी बंदरपून चोटी, चोटियों का गंगोत्री समूह, उत्तर में केदारनाथ शिखर, दूनवालली और चनाबंग की बर्फ की चोटियों का स्पष्ट दृश्य देखा जा सकता है।





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ASAN BARRAGE DEHRADUN आसन बैराज

आसन बैराज 287.5 मीटर लंबा, तथा समुद्र तल से 389.4 मीटर  न्यूनतम  तथा  अधिकतम जल स्तर  लगभग  402.4 मीटर  ऊँचा  है।आसन बैराज उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित है। बैराज आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के लिए एक पर्यटन स्थल है। बैराज बिजली उत्पादन के लिए जलाशय के रूप में कार्य करता है। 2 घंटे की दूरी पर देहरादून शहर के साथ बैराज अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। बैराज के पास की बस्तियाँ ढकरानी, ​​धालीपुर और कुल्हाल हैं, जो बिजली भी पैदा करती हैं। बैराज अपने विदेशी स्थान और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। पक्षियों की विविधता को देखने के लिए लोग यहां आते हैं। ये पक्षी हर साल मौसम के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह आवागमन करते हैं। यह स्थान पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बन गया है, और हमेशा पक्षी महोत्सव में पक्षी स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। पक्षियों की रेंज देखने के लिए हजारों पक्षी देखने वाले यहां पहुंचे। यह स्थान अन्य स्थानों के बीच मुख्य आकर्षण था।

आसन बैराज में लगभग , 80 जल पक्षियों सहित 250 से अधिक पक्षी प्रजातिया  पाई जाती हैं |  महत्वपूर्ण प्रजातियों में से कुछ ब्राह्मणी बतख, डब्बलिंग डक, रूडली शेल बतख, डाइविंग डक हैं। पक्षी; बगुला, सारस, एग्रेस, इबिस गीज़ हैं, जो सर्दियों के मौसम (नवंबर से फ़रवरी) के दौरान देखा जा सकता है।

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