Byandhura Temple – A Holy and Religious Temple in Champawat !!

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य चम्पावत जिले में स्थित पवित्र एवम् धार्मिक “ब्यानधुरा मंदिर” OR  “Byandhura Temple – A Famous and Religious Temple in Champawat !!” ) के  बारे में पूरी जानकारी देने वाले है | यदि आप चम्पावत   जिले में स्थित पवित्र एवम् धार्मिक “ब्यानधुरा मंदिर” के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते है , तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |



History and Beliefs of Byandhura Temple !! (ब्यानधुरा मंदिर का इतिहास एवम् मान्यता !!)

byandhura-temple-champawatब्यानधुरा मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित एक प्राचीन एवम् लोकप्रिय मंदिर हैं | ब्यानधुरा का शाब्दिक अर्थ “बाण की चोटी” हैं | चोटी का आकर भी धनुष बाण की तरह एक सामान हैं | यह मंदिर जंगल के बीचो-बीच में पहाड़ी की चोटी पर नैनीताल और चम्पावत की सीमा में रोड से लगभग 35 किमी की दुरी पर ब्यानधुरा नामक क्षेत्र पर स्थित हैं | इस मंदिर में विराजित देवता को “ऐड़ी देवता” कहा जाता हैं एवम् मंदिर को शिव के 108 ज्योर्तिलिंगों में से एक की मान्यता प्राप्त है | कालान्तर में राजा ऐड़ी लोक देवताओं के रूप में पूजे जाते हैं | राजा ऐड़ी धनुष युद्ध विद्या में निपुण थे और उनका एक रुप महाभारत के अर्जुन के अवतार के रूप में भी माना जाता हैं | इस ऐड़ी देवता के मंदिर को देवताओं की विधान-सभा भी माना जाता है | इस मंदिर के बारे में यह कहा जाता हैं कि राजा ऐड़ी ने इस स्थान पर तपस्या की थी और तप के बल से राजा ने देव्तत्व को प्राप्त किया था एवम् महाभारत काल से ही ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी रहे इस क्षेत्र में अज्ञातवास के दौरान पांडवो ने अपना ठिकाना(निवासस्थल) बनाया था और अर्जुन ने अपने गांडीव धनुष भी इसी स्थान पर किसी एक चोटी के पत्थर के निचे छिपाया था | ऐसा भी कहा जाता हैं कि अर्जुन का गांडीव धनुष आज भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं और सिर्फ ऐड़ी देव के अवतार ही उस धनुष को उठा पाते हैं | महाभारत काल के अलावा इस क्षेत्र में मुग़ल और हुणकाल में बहारी आक्रमणकारियों का दौर रहा लेकिन यह आक्रमणकारी ब्यानधुरा क्षेत्र की चमत्कारिक शक्ति की वजह से चोटी से आगे पहाड़ो की ओर नहीं बढ़ सके | पर्वतीय क्षेत्र के अधिकांश मंदिरों में मनोकामना पूर्ण करने के लिए छत्र , ध्वजा, पताका, श्रीफल, घंटी आदि चढ़ाए जाते हैं लेकिन ब्यानधुरा एक ऐसा शक्तिस्थल है , जहां धनुष बाण चढ़ाए और पूजे जाते हैं । ब्यानधुरा मंदिर कितना प्राचीन हैं , इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पायी हैं लेकिन मंदिर परिसर में धनुष-बाण आदि के ढेर को देखकर अनुमान लगाया जा सकता हैं कि यह एडी देवता का मंदिर एक पौराणिक मंदिर हैं | ब्यानधुरा मंदिर में ऐड़ी देवता को लोहे के धनुष-बाण तो चढ़ाये जाते ही हैं , वहीं अन्य देवताओं को अस्त्र-शस्त्र चढ़ाने की परम्परा भी है |



मंदिर समिति के पूजारियो के अनुसार यह कहा जाता है कि यहां के अस्त्रों के ढेर में ऐड़ी देवता का सौ मन भारी धनुष भी उपस्थित है । इस मंदिर के ठीक आगे गुरु गोरखनाथ की धुनी हैं , जो कि लगातार जलती हैं एवम् गुरु गोरखनाथ की धुनी के अलावा मंदिर प्रांगण में एक अन्य धुनी भी है , जिसके समक्ष जागर आयोजित होते हैं | ब्यानधुरा मंदिर के पुजारी के अनुसार मंदिर में तराई क्षेत्र से लेकर पूर्ण कुमाऊ क्षेत्र के लोग मंदिर में विराजित ऐड़ी और अन्य देवता की पूजा करने आते हैं | ब्यानधुरा मंदिर के बारे में यह मान्यता हैं कि मंदिर में जलते दीपक के साथ रात्रि जागरण करने से वरदान मिलता हैं और विशेषकर संतानहीन दंपत्तियों की मनोकामना पूर्ण होकर उनकी सूनी गोद भर जाती है और मंदिर में मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त मंदिर में गाय दान और ऐड़ी देवता को प्रसन्न करने के लिए धनुष-बाण व अन्य अस्त्र-शस्त्र भेंट करते हैं । मंदिर में मकर संक्रांति के दिन के अलावा चैत्र नवरात्र , माघी पूर्णमासी को भव्य मेले का आयोजन किया जाता हैं |

उम्मीद करते है कि आपको “Byandhura Temple – A Holy and Religious Temple in Champawat !! (ब्यानधुरा बाबा मंदिर !!)” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई तो हमारे फेसबुक पेज को LIKE और SHARE  जरुर करे |

उत्तराखंड के विभिन्न स्थल एवम् स्थान का इतिहास एवम् संस्कृति आदि के बारे मे जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारा YOUTUBE  CHANNEL जरुर  SUBSCRIBE करे |