Gopinath Temple , Chamoli !! ( गोपीनाथ मंदिर )

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गोपीनाथ मंदिर चमोली

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर “Gopinath Temple , Chamoli !! (गोपीनाथ मंदिर)” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है , यदि आप गोपीनाथ मंदिर के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |
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Gopinath Temple Chamoliगोपीनाथ मंदिर उत्तराखण्ड के चमोली क्षेत्र के गोपेश्वर नामक शहर में स्थित एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है । भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर भारत के प्रमुख रमणीय स्थलों मे से एक है । गोपीनाथ मंदिर कत्युरी शासकों द्वारा 9 वीं और 11 वीं शताब्दी के बीच बनाया गया था । गोपीनाथ मंदिर एक अद्भुत गुंबद और एक पवित्र स्थान है , जिसमें 24 दरवाजे हैं । मुख्य अभयारण्य के अंदर, एक स्वयंभू या आत्म-प्रकट शिव लिंग जिसे गोपीनाथ और नंदी के नाम से देखा जा सकता है । मंदिर परिसर में आंशिक रूप से टूटी हुई मूर्तियां अन्य मंदिरों के अस्तित्व को दर्शाती हैं । मुख्य मंदिर का निर्माण नगरा पैटर्न में किया गया है । इस पवित्र स्थल के दर्शन मात्र से ही भक्त अपने को धन्य मानते हैं एवं भगवान सारे भक्तों के समस्त कष्ट दूर कर देते हैं , गोपीनाथ मंदिर , केदारनाथ मंदिर के बाद सबसे प्राचीन मंदिरों की श्रेणी में आता है | मंदिर पर मिले भिन्न प्रकार के पुरातत्व एवं शिलायें इस बात को दर्शाते है कि यह मन्दिर कितना पौराणिक है | मन्दिर के आस पास , माँ दुर्गा , श्री गणेश एवं श्री हनुमान जी के मन्दिर हैं , जो भक्तों को और भी आनन्दमय एवं श्रद्धा से परिपूर्ण करते है | भगवान गोपीनाथ जी के इस मन्दिर का दर्शन चार धाम यात्रा करने वाले श्रद्धालू चमोली से केदारनाथ यात्रा के दौरान गोपेश्वर में कर सकते है । भव्य शिलाओं से बने इस मंदिर का निर्माण और वास्तुकला का स्वरूप सभी को आकर्षित करता है | पौराणिक महत्व के लिए गोपीनाथ मंदिर शैव मत के साधकों का प्रमुख तीर्थ स्थल है | गोपेश्वर आने वाले तीर्थ यात्री गोपीनाथ मंदिर के दर्शन करना नहीं भूलते है।
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[av_heading heading=’Legend of Gopinath Temple !! ( गोपीनाथ मंदिर की पौराणिकता )’ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर क्षेत्र में स्थित भगवान शिव को समर्पित गोपीनाथ मंदिर के बारे में अनेक धार्मिक एवम् पौराणिक तथ्य है | पुराणों में गोपीनाथ मंदिर भगवान शिवजी की तपोस्थली थी | इसी स्थान पर भगवान शिवजी ने अनेक वर्षो तक तपस्या करी थी और कामदेव को भगवान शिवजी के द्वारा इसी स्थान पर भस्म किया गया था | यह भी कहा जाता है कि देवी सती के शरीर त्यागने के बाद भगवान शिव जी तपस्या में लीन हो गए थे और तब “ताड़कासुर” नामक राक्षस ने तीनों लोकों में हा-हा-कार मचा रखा था और उसे कोई भी हरा नहीं पा रहा था |

तब ब्रह्मदेव ने देवताओं से कहा कि भगवान शिव का पुत्र ही ताड़कासुर को मार सकता है | उसके बाद से सभी देवो ने भगवान शिव की आराधना करना आरम्भ कर दिया लेकिन तब भी शिवजी तपस्या से नहीं जागे , फिर भगवान शिव की तपस्या को समाप्त करने के लिए इंद्रदेव ने यह कार्य कामदेव को सौपा ताकि शिवजी की तपस्या समाप्त हो जाए और उनका विवाह देवी पारवती से हो जाए और उनका पुत्र राक्षस “ताड़कासुर” का वध कर सके | जब कामदेव ने अपने काम तीरो से शिवजी पर प्रहार किया तो भगवान शिव की तपस्या भंग हो गयी तथा शिवजी ने क्रोध में जब कामदेव को मारने के लिए अपना त्रिशूल फैका , तो वो त्रिशूल उसी स्थान में गढ़ गया जहाँ पर वर्तमान समय में गोपीनाथ मंदिर स्थापित है | इसी कारण इस मंदिर की स्थापना हुई |

इसके अल्वा एक और कथा के अनुसार इस क्षेत्र में राजा सागर का शासन था और वर्तमान समय में गोपेश्वर के निकट “सागर” नामक एक गाँव है , जिसका नाम राजा के नाम पर रखा गया है | स्थानीय लोगों के अनुसार उस समय एक अजीब घटना घटी , जब इस स्थान में एक गाय प्रतिदिन इस स्थान में आया करती थी और गाय के स्तनों का दूध अपने आप यहाँ गिरने लगता था , एक दिन राजा को इस बात का पता लगा तो राजा ने सिपाहियों के साथ गाय का पीछा किया और इस घटना को देखकर राजा आश्चर्यचकित हो गया कि गाय के स्तानो से दूध की धारा खुद ही बह कर निकट स्थापित शिवलिंग पर जा रही है , इस घटना को देखकर राजा ने उस पवित्र स्थान पर मंदिर का निर्माण किया |
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[av_heading heading=’Importance of Gopinath Temple ! (गोपीनाथ मंदिर का महत्व)’ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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भगवान गोपीनाथ जी के इस मन्दिर का महत्व बहुत ही विशेष है । हर रोज सैकडो़ श्रद्धालू यहाँ भगवान के दर्शन के लिए आते हैं , इस मन्दिर में शिवलिंग, परशुराम, भैरव जी की प्रतिमाएँ विराजमान हैं | मन्दिर के निर्माण से भव्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है | मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग स्थापित है और मंदिर से कुछ ही दूरी पर “वैतरणी नामक कुंड” स्थापित है , जिसके पवित्र जल में स्नान करने का विशेष महत्व है । सभी श्रद्धालू इस पवित्र स्थल के दर्शन प्राप्त करके अपने को धन्य मानते हैं ।

एक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव ने कामदेव को मारने के लिए अपना त्रिशूल फेंका तो वह इसी स्थान में गढ़ गया था । त्रिशूल का धातु वर्तमान में इसी स्थान में स्थित है , त्रिशूल के धातु का सही ज्ञान तो नहीं हो पाया है परंतु इतना अवश्य है कि यह अष्ट धातु का बना होगा , त्रिशूल पर कोई भी मौसम प्रभावहीन है और वर्तमान समय में यह एक आश्वर्यजनक बात है । यह भी मान्यता है कि कोई भी मनुष्य अपनी शारीरिक शक्ति से त्रिशूल को हिला भी नहीं सकता है , यदि कोई सच्चा भक्त त्रिशूल को कोई सी ऊँगली से छू लेता है , तो उसमे कम्पन पैदा होने लगती है |

यह मंदिर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्यूंकि इसी स्थान पर भगवान केदारनाथ के मुखभाग रुद्रनाथ जी की उत्सव मूर्ति शीतकाल में विराजमान होती है | भगवान केदारनाथ जी के मुखभाग रुद्रनाथ जी के मंदिर में प्रतिदिन भव्य पूजा की जाती है |
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[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’Google Map of Gopinath Temple , Chamoli !!’ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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गोपीनाथ मन्दिर उत्तराखण्ड के चमोली क्षेत्र के गोपेश्वर नामक शहर में स्थित एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है | आप निचे Google Map पर इस जगह को देख सकते है |
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Gopinath Temple , Chamoli !!
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