Haridwar District Tourism Places ,Sightseeing ,Height and Map !! ( हरिद्वार )

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Haridwar Uttarakhand

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन कि इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य में स्थित पवित्र शहर “हरिद्वार” Haridwar District Tourism Places ,Sightseeing ,Height and Map !! के बारे में जानकारी देने वाले है | यदि आप “हरिद्वार” के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े !

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[av_heading heading=’HISTORY OF HARIDWAR !! ( हरिद्वार का इतिहास !! ) ‘ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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Haridwar Uttarakhandहरिद्वार का इतिहास  बहुत ही पुराना और रहस्य से भरा हुआ है | “हरिद्वार” उत्तराखंड में स्थित भारत के सात सबसे पवित्र स्थलों में से एक है | यह बहुत प्राचीन नगरी है और उत्तरी भारत में स्थित है | हरिद्वार उत्तराखंड के चार पवित्र चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी है | यह भगवान शिव की भूमि और भगवान विष्णु की भूमि भी है। इसे सत्ता की भूमि के रूप में भी जाना जाता है | मायापुरी शहर को मायापुरी, गंगाद्वार और कपिलास्थान नाम से भी मान्यता प्राप्त है और वास्तव में इसका नाम “गेटवे ऑफ़ द गॉड्स” है । यह पवित्र शहर भारत की जटिल संस्कृति और प्राचीन सभ्यता का खजाना है | हरिद्वार शिवालिक पहाडियों के कोड में बसा हुआ है | पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे “हरिद्वार” का शाब्दिक अर्थ “हरी तक पहुचने का द्वार” है |

हरिद्वार चार प्रमुख स्थलों का प्रवेश द्वार भी है | हिन्दू धर्मं के अनुयायी का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है | प्रसिद्ध तीर्थ स्थान “बद्रीनारायण”तथा “केदारनाथ” धाम “भगवान विष्णु” एवम् “भगवान शिव “ के तीर्थ स्थान का रास्ता (मार्ग) हरिद्वार से ही जाता है | इसलिए इस जगह को “हरिद्वार” तथा “हरद्वार” दोनों ही नामों से संबोधित किया जाता है | महाभारत के समय में हरिद्वार को “गंगाद्वार” नाम से वयक्त किया गया है | हरिद्वार का प्राचीन पौराणिक नाम “माया” या “मायापुरी” है | जिसकी सप्तमोक्षदायिनी पुरियो में गिनती की जाती है | हरिद्वार का एक भाग आज भी “मायापुरी” के नाम से प्रसिद्ध है | यह भी कहा जाता है कि पौराणिक समय में समुन्द्र मंथन में अमृत की कुछ बुँदे हरिद्वार में गिर गयी थी | इसी कारण हरिद्वार में “कुम्भ का मेला” आयोजित किया जाता है | बारह वर्ष में मनाये जाने वाला “कुम्भ के मेले ” का हरिद्वार एक महत्वपूर्ण स्थान है |

और यदि आप हरिद्वार के इतिहास एवम् मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते है तो निचे दिए गए लिंक में क्लिक करे |

इसे भी पढ़े :- हरिद्वार का इतिहास (History of Haridwar) !!

इसे भी पढ़े :- हरिद्वार की मान्यताये ! (Beliefs of Haridwar)
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[av_heading heading=’Height of Haridwar !! (हरिद्वार की ऊंचाई !!)’ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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हरिद्वार उत्तराखंड में स्थित भारत के सात सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है।हरिद्वार उत्तराखंड प्रदेश का एक जिला है , जो कि समुन्द्र तल से 314 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है |
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[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’Haridwar Famous Places and Sightseeing !! (हरिद्वार के प्रसिद्ध स्थान !!)’ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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चंडी देवी मंदिर

चंडी देवी मंदिर उत्तराखण्ड की पवित्र धार्मिक नगरी हरिद्वार में नील पर्वत के शिखर पर स्थित है। यह गंगा नदी के दूसरी ओर अवस्थित है। यह देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। चंडी देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है।किवदंतियों के अनुसार चंडी देवी ने शुंभ-निशुंभ के सेनापति ‘चंद’ और ‘मुंड‘ को यहीं मारा था। जबकि एक अन्य लोककथा के अनुसार नील पर्वत वह स्थान है, जहाँ हिन्दू देवी चंडिका ने शुंभ और निशुंभ राक्षसों को मारने के बाद कुछ समय आराम किया था।
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मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जो हरिद्वार शहर से लगभग 3 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर हिंदू देवी मनसा देवी को समर्पित है , जो ऋषी कश्यप के दिमाग की उपज है । कश्यप ऋषी प्राचीन वैदिक समय में एक महान ऋषी थे। मनसा देवी, सापों के राजा नाग वासुकी की पत्नी हैं। यह मंदिर शिवालिक पहाड़ियों के बिल्व पर्वत पर स्थित है और इस मंदिर में देवी की दो मूर्तियाँ हैं। एक मूर्ति की पांच भुजाएं एवं तीन मुहं है एवं दूसरी अन्य मूर्ति भुजाएं हैं।
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गंगा आरती

गंगा आरती एक धार्मिक प्रार्थना है , जो हरिद्वार में हर-की-पौड़ी घाट पर पवित्र नदी गंगा के किनारे पर होती है । पूरे विश्व के पर्यटक और भक्त इस आरती का आनंद लेते है | यह प्रकाश और ध्वनि का एक अनुष्ठान है , जहां पुजारी आग के कटोरे और मंदिर की घंटी बजने के साथ प्रार्थना करते हैं । इस पवित्र नदी में स्नान का समारोह “कुम्भ मेला” के रूप में जाना जाता है , जो कि हर 12 वर्ष में हर की पौड़ी घाट में होता है । गंगा नदी के बारे में यह कहा जाता है कि लोग नदी में स्नान करते हैं , वे “मोक्ष” (निर्वाण) प्राप्त करते हैं |
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सप्तऋषि आश्रम 

हर-की-पौड़ी से 5 किमी दूर स्थित यह आश्रम हरिद्वार के प्रसिद्ध आध्यात्मिक विरासत स्थलों में से एक है। एक हिंदू लोककथा के अनुसार, यह आश्रम सात ऋषियों का आराधना स्थल था | वैदिक काल के ये प्रसिद्ध सात साधू महा ऋषि- कश्यप, वशिष्ठ, अत्री, विश्वमित्र, जमदादी, भारद्वाजा और गौतम की मेजबानी के लिए प्रसिद्ध है | इस आश्रम को ध्यान के लिए और शांत माहौल आदर्श के लिए जाना जाता है । यह भी माना जाता है कि गंगा इस स्थान पर सात धाराओं में खुद को विभाजित करती है ।
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[av_heading heading=’Google Map of Haridwar !!’ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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हरिद्वार शहर उत्तराखंड राज्य में स्थित है , आप निचे Google Map पर इस स्थान को देख सकते है !
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