History and Beliefs of Rishikesh , Dehradun !! (ऋषिकेश का इतिहास एवम् मान्यता !!)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में स्थित धार्मिक नगरी “ऋषिकेश” अर्थात “ऋषिकेश के इतिहास एवम् मान्यता” !!( History and Beliefs of Rishikesh !! ) के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है | यदि आप देहरादून जिले में स्थित “ऋषिकेश के इतिहास एवम् मान्यता” के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते है , तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

History of Rishikesh !! (ऋषिकेश का इतिहास !!)





Rishikesh-History-in-HIndi” ऋषिकेश “ भारत के उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में स्थित है | ऋषिकेश गढ़वाल हिमालय पर्वत की तलहटी में समुन्द्रतल से 409 मीटर की ऊँचाई पर स्थित और शिवालिक रेंज से घिरा हुआ है | हिमालय की पहाड़िया और प्राकर्तिक सौन्दर्यता से ही इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी ऋषिकेश को अतुल्य बनाती है | ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है | हर साल ऋषिकेश के आश्रमों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शांति के लिए आते है | वशिष्ठ गुफा , लक्ष्मण झूला और नीलकंठ मंदिर आदि ऋषिकेश के प्रमुख पर्यटन स्थल है |ऋषिकेश दो शब्दों के संयोजन से बना है , “ऋषिक” और “एश” | “ऋषिक” का अर्थ है “इन्द्रिया” और “एश” का अर्थ है “भगवान या गुरु” | स्वतंत्रता के बाद ऋषिकेश को पवित्र हिन्दू शहर के रूप में घोषित कर दिया गया | सन 1960 के दशक में “बीटल्स” ऋषिकेश के पास योग का अध्यन करने के लिए आया था | तब से इस शहर ने खुद को  “दुनिया की योग राजधानी”  कहा है | ऋषिकेश को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार माना जाता है।

Legend of Rishikesh !! (ऋषिकेश की पौराणिक कथा !!)

ऋषिकेश में एक प्रसिद्ध “संत रिहाना ऋषि” का निवास स्थान था | उन्होंने गंगा नदी के किनारे तपस्या करी | जिसके कारण इनाम स्वरुप भगवान विष्णु “ऋषिकेश” के रूप में संत रिहाना रिशी के समक्ष उपस्थित हुए | इस वजह से इस स्थान को ऋषिकेश का नाम दिया | यह भी माना जाता है कि ऋषिकेश पौराणिक “केदारखंड” का भाग है | इस स्थान में भगवान राम ने रावण को मारने के लिए घोर तपस्या करी थी | श्री राम के भाई लक्ष्मण ने गंगा नदी को एक विशेष बिंदु पर पार करा था | जो की “ लक्षमण झुला ” के नाम से जाना जाता है |



दूसरी कहानी कहती है कि “भरत” भगवान राम के भाई ने इस स्थान पर तपस्या की , जिसके बाद ऋषिकेश में “भरत मंदिर” बनाया गया और यह भी कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष “भगवान शिव” ने इसी स्थान पर पिया था। विष पीने के बाद उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें “नीलकंठ” के नाम से जाना गया। और इसी कारण ऋषिकेश में भगवान शिव की महिमा की वजह से “नीलकंठ मंदिर” स्थापित किया गया | हालांकि एक प्रसिद्ध धार्मिक गुरु आदि शंकराचार्य के बाद 9 वी शताब्दी में इस जगह का दौरा किया और बाद में ऋषिकेश ने धार्मिक स्थान के रूप में प्रमुखता प्राप्त कर ली |

Beliefs of Rishikesh , Dehradun !! (ऋषिकेश की मान्यता !!)

ऋषिकेश में बहुत प्राचीन मंदिर और आश्रम है | जिनका यहाँ धार्मिक महत्व है | ऋषिकेश को योग की राजधानी कहा जाता है क्यूंकि ऋषिकेश में योग और ध्यान का प्रशिक्षण होता है | हिन्दू साधू-संत ऋषिकेश में रहकर, योग और ध्यान में मग्न रहते है ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके | ऋषिकेश से 22 किमी. की दूरी पर 3000 साल पुरानी वशिष्ठ गुफा बद्रीनाथ–केदारनाथ मार्ग पर स्थित है। इस स्थान पर बहुत से साधुओं विश्राम और ध्यान लगाए देखे जा सकते हैं और यह कहा जाता है कि यह स्थान भगवान राम और बहुत से राजाओं के पुरोहित वशिष्ठ का निवास स्थल था । ऋषिकेश में स्थित “लक्ष्मण झूला” गंगा नदी के एक किनारे को दूसरे किनारे से जोड़ता “लक्ष्मण झूला” इस नगर की विशिष्ट पहचान है। इसे 1939 में बनवाया गया था। कहा जाता है कि गंगा नदी को पार करने के लिए लक्ष्मण ने इस स्थान पर जूट का झूला बनवाया था | ऋषिकेश में स्नान करने के लिए त्रिवेणी प्रमुख घाट है | इस स्थान में प्रात: काल से ही अनेक श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं । कहा जाता है कि इस स्थान पर हिन्दू धर्म की तीन प्रमुख नदियों ( गंगा , यमुना और सरस्वती ) का संगम होता है । इसी स्थान से गंगा नदी दायीं ओर मुड़ जाती है एवम् नगर में स्थित गंगा नदी में डुबकी या स्नान करने से ऐसा कहा जाता है कि डुबकी या स्नान लगाने से सारे पाप धुल जाते है और आत्मा की शुद्धी होती है |

Google Map of Rishikesh , Dehradun !!





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