कर्णप्रयाग का इतिहास , पौराणिक कथा व मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल ! History , Mythological beliefs and Attractions of Karnaprayag

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड में स्थित 5 प्रयाग में से तीसरे प्रयाग “कर्णप्रयाग” के बारे में जानकारी देने वाले है | ( कर्णप्रयाग का इतिहास , पौराणिक कथा व मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल )

और इससे पहले की पोस्ट में हमने रुद्रप्रयाग , देवप्रयाग के बारे में जानकारी दी थी | यदि आपने वो पोस्ट नहीं पढ़ी तो निचे दिए गए लिंक में क्लिक कर रुद्रप्रयाग , देवप्रयाग के बारे में जरुर जाने |

(History of Karnaprayag) कर्णप्रयाग का इतिहास

History of karnaprayag in hindiकर्णप्रयाग उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है | यह उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में एक शहर और नगरपालिका बोर्ड है । कर्णप्रायग, अलकनंदा नदी के पांच प्रसंग (पांच संगम), अलकनंदा संगम और पिंडार नदी के संगम पर स्थित है | अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर बसा शहर “कर्णप्रयाग” एक बहुत ही खूबसूरत शहर है | संगम से पश्चिम की ओर शिलाखंड के रुप में दानवीर कर्ण की तपस्थली और मन्दिर हैं। बद्रीनाथ धाम जाते समय साधुओ , ऋषियों , मुनियों एवम् पैदल तीर्थयात्रीयो को कर्णप्रयाग शहर से गुजर कर जाना होता है | कर्णप्रयाग पौराणिक समय में एक उन्नतिशील बाज़ार भी था और देश के अन्य जगह से आकर लोग यहाँ निवास करने लगे क्यूंकि यहाँ व्यापार के अवसर उपलब्ध थे |

इन गतिवधियो पर वर्ष 1803 को बिरेही बाँध के टूटने के कारण रोक लग गयी | उस समय इस स्थान में प्राचीन “उमा देवी मंदिर” का भी नुकसान हुआ | कर्णप्रयाग की संस्कृति उत्तराखंड की सबसे पौराणिक एवम् अद्भुत नन्द राज जट यात्रा से जुडी है | (कर्णप्रयाग का इतिहास , पौराणिक कथा व मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल )

कर्णप्रयाग से आगे स्थित धाम “बद्रीनाथ धाम” के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी पाने के लिए निचे दिए गए लिंक में क्लिक करे |

1. किबंदती के अनुसार “कर्णप्रयाग” का नाम कर्ण पर रखा गया है | जो की महाभारत एक महत्वपूर्ण पात्र था | कर्ण का जन्म माता कुंती के गर्भ में हुआ था और “कर्ण” पांडवो का बड़ा भाई था |

2. एक और किबंदती के अनुसार जिस स्थान पर कर्ण को समर्पित मंदिर है | यह स्थान कभी जल के अन्दर था और मात्र कर्णशिला नाम के एक पत्थर की नोक जल के बाहर थी | कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने कर्ण का दाह संस्कार “कर्णशिला” पर अपनी हथेली  का संतुलन बनाये रखकर किया था |

कर्णप्रयाग की पौराणिक मान्यताये एवम् कथा (Beliefs and Story of Karnaprayag)

1. पौराणिक मान्यता या कथा के अनुसार पौराणिक समय में कर्ण ने उमा देवी की शरण में रहकर इस संगम स्थल में भगवान सूर्य की कठोर तपस्या करी | जिससे की भगवान शिव , कर्ण की तपस्या को देखकर प्रसन्न हुए और भगवान सूर्य ने उन्हें अभेद्य कवच , कुंडल और अक्षय धनुष प्रदान किया था |

2. कर्ण मंदिर इस स्थान पर स्थित होने के कारण इस स्थान पर स्नान के बाद दान करना अत्यंत पूर्णकारी माना जाता है | यह भी कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने इसी स्थान पर कर्ण का अंतिम संस्कार किया था | इसलिए इस स्थान पर पितरो को तर्पण देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है |

3. कर्णप्रयाग की अन्य कथा यह है कि जब भगवान शिव के द्वारा अपमान किये जाने पर माँ पार्वती ने अग्नि कुंड में कूद गयी थी तो उन्होंने हिमालय की पुत्री के रूप अपना दूसरा जन्म उमा देवी के रूप में लिया और उन्होंने शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की थी और इसी स्थान पर माँ उमा का प्राचीन मंदिर भी है | (कर्णप्रयाग का इतिहास , पौराणिक कथा व मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल)

कर्णप्रयाग के आकर्षण स्थल (Attractions of Karnaprayag)

uma devi mandir of karnaprayag

1. उमा मंदिर :- इस मंदिर की स्थापना 8वी सदी में आदि शंकराचार्य द्वारा हुई | जबकि इस स्थान पर बहुत पहले से ही उमा देवी की मूर्ति स्थापित थी | कहा जाता है कि संकसेरा के एक खेत में उमा का जन्म हुआ | और यह भी कहा जाता है कि एक डिमरी ब्राह्मण को देवी ने स्वप्न में आकर अलकनंदा एवम् पिंडर नदियों के संगम पर उनकी प्रतिमा स्थापित करने का आदेश दिया था |

2. कर्णमंदिर :- ये मंदिर संगम स्थल के बाए किनारे पर बनाया गया है , जो की कर्ण के नाम पर है | पुराने मंदिर का वर्तमान समय में पुनःनिर्माण हुआ है | और इस मंदिर में मानव के आकर से भी बड़े आकर की कर्ण एवम् भगवान कृष्ण की मूर्ति मंदिर में स्थापित है | मंदिर के अन्दर छोटे मंदिर भी स्थित है जो कि भूमिया देवता , राम , सीता एवम् लक्षमण , भगवान शिव एवम् माँ पार्वती को समर्पित है |

“कर्ण मंदिर” कर्णप्रयाग का प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है | इन दोनों आकर्षण स्थल के अलवा आदिबद्री , नौटी गाँव , चन्द्रिका देवी सिमली , नंदप्रयाग , जोशीमठ और चोपटा आदि क्षेत्र का भी लुफ्त उठा सकते है |

उम्मीद करते है कि आपको “कर्णप्रयाग का इतिहास , पौराणिक कथा व मान्यताये एवम् आकर्षण स्थल ”  के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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