दूनागिरी का इतिहास ! (Doonagiri , Almora)

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history of Doonagiri in Hindi

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में अल्मोड़ा जिले में स्थित “दूनागिरी” अर्थात “दूनागिरी का इतिहास” के बारे में जानकारी देने वाले है , इसलिए इस पोस्ट को अंत तक पढ़े |

“दूनागिरी” उत्तराखंड राज्य में अल्मोड़ा जिले का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है | यह स्थान छह छोटे गाँव के समूह का निर्माण करता है , जिसे विभिन्न रूप में दूनागिरी , द्रोणगिरी और दोनागिरी कहा जाता है | समुन्द्रतल से 8000 फीट (2,400 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित , दूनागिरी कुमाऊं के शक्ति मंदिर के लिए प्रसिद्ध है (दूनागिरी देवी ) | इस क्षेत्र में दूनागिरी देवी का एक प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है |

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history of Doonagiri in Hindi

स्थानीय परंपरा के अनुसार , इस शहर का नियमित रूप से भारत के ऋषि-मुनि ने दौरा किया और प्रकर्ति के बीच में अपना आश्रम स्थापित किया | गर्ग मुनि का आश्रम भी दूनागिरी में था , जिसके बाद गंगा नदी का नाम रखा गया था | सुख देव मुनि (ऋषि वेद व्यास का पुत्र) का आश्रम भी यही था , जिसे अब “सुख देवी” के नाम से जाना जाता है | यह भी कहा जाता है कि अज्ञात यात्रा के दौरान महाभारत के पांडवो ने दूनागिरी में शरण ली थी | दूनागिरी के निकट “पंदुखोली” नामक स्थान में पांडवो ने लम्बे समय की अवधि के लिए निवास किया था | पांडवो के गुरु द्रोणाचार्य ने भी दूनागिरी में तपस्या करी थी | दूनागिरी के बारे में स्कन्दपुराण के मानसखंड में भी उल्लेख है | दूनागिरी देवी को महामाया हरप्रिया (मानसखंड , 36 .17-18) के रूप में भी जाना जाता है | स्कंदपुराण के मानसखंड ने ब्रह्म-परावत (देवी पर्वत) का शीर्षक दिया। दूनागिरी को कुमाउं के सभी शक्तिमंदिरो में सबसे प्राचीन “सिद्ध शक्तिपीठ” के बीच गिना जाता है और इसे “उग्र पीठ” नाम से भी जाना जाता है | (दूनागिरी का इतिहास)

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अल्मोड़ा जिले में स्थित दूनागिरी क्षेत्र में स्थित “दूनागिरी मंदिर” के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए निचे दिए गए लिंक में क्लिक करे |

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उम्मीद करते है कि आपको “दूनागिरी के इतिहास के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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