कौसानी का इतिहास ! (History of Kausani , Bageshwer)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन कि इस पोस्ट में बागेश्वर जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल “कौसानी” अर्थात “कौसानी के इतिहास” के बारे में जानकारी देने वाले है यदि आप कौसानी के इतिहास  के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े !

“कौसानी” उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले से 53 किलोमीटर दुरी पर उत्तर में स्थित है | यह भारत का एक खूबसूरत पर्वतीय पर्यटक स्थल है | यह स्थान हिमालय की सुन्दरता के दर्शन कराता पिंग्नाथ चोटी पर बसा है और साथ ही साथ इस स्थान से बर्फ से ढकी “नंदा देवी पर्वत” की चोटी का नज़ारा बड़ा भी अत्यधिक मनमोहक प्रतीत होता है | राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कौसानी (जो कि कोसी नदी और गोमती नदी के बीच में स्थित है) को “भारत का स्विट्ज़रलैंड” कहा था | कौसानी समुन्द्रतल से लगभग 6075 फीट की ऊँचाई पर बसा एक खूबसूरत पर्वतीय पर्यटक स्थल है | यह पर्वतीय शहर चिड के घने पेड़ो के बीच एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है एवम् इस स्थान से सोमेश्वर , गरुड़ आदि सुंदर घाटियों का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलता है | इस स्थान में एक चाय का बागान भी है , जो की कौसानी से लगभग 6 किलोमीटर की दुरी पर बैजनाथ की तरफ है | इस क्षेत्र की चाय बहुत ही खुशबूदार और स्वादिष्ट होती है |

History of Kausani , Bageshwer (कौसानी का इतिहास !)





History of Kausani in Hindi

कौसानी का इतिहास बड़ा ही रोचक है | इसके इतिहास के पीछे भी एक कथा है | बागेश्वर स्थित पर्यटन स्थल कौसानी के बारे में यह कहा जाता है कि इस स्थान पर कौशिक मुनि ने कठोर तप किया था इसलिए इस स्थान का नाम “कौसानी” रखा गया | कौसानी क्षेत्र में दो प्रमुख ऐतिहासिक घटनाऐ हुई जो कि वर्तमान समय में भी याद करी जाती है | सर्वप्रथम प्रसिद्ध भारतीय कवि , “सुमित्रानंदन पन्त” – जो की सन 1900 में कौसानी में पैदा हुए थे और महात्मा गांधी- जो कि अनासक्ति योग पर अपना कार्य पूरा करने के लिए 12 दिनों तक कौसानी में ठहरे थे |

तब महात्मा गाँधी जी ने कौसानी को ” भारत का स्विट्ज़रलैंड “ नाम की उपाधि दी थी एवम् उन्होंने “यंग इंडिया” पुस्तक में कौसानी की आलोकिक सौंदर्य और कुमाउं की पहाडियों के बारे में जानकारी देकर कौसानी को पुरे विश्व में प्रसिद्ध कर दिया | कौसानी क्षेत्र के बारे में एक कम जानने वाली बात यह है कि कौसानी को “वलना” नाम से भी जाना जाता था , जो कि कत्युरी वंश द्वारा शासित राज्य का एक हिस्सा था , जिसमे इसकी राजधानी कर्तिकेयापुरा थी | उस समय अल्मोड़ा ज़िला कत्यूरी के राजा बैचलदेव के क्षेत्राधिकार में आता था | बाद में राजा ने इसका काफ़ी बड़ा हिस्सा गुजरात के एक ब्राह्मण श्री चंद तिवारी को दे दिया |

यदि आप उत्तराखंड के 5 प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के बारे में जानना चाहते है तो निचे दिए गए लिंक में क्लिक कर पोस्ट को जरुर पढ़े |



उम्मीद करते है कि आपको “कौसानी का इतिहास ” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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