जानिए? माणा दर्रा चमोली गढ़वाल के बारे में History Of (Mana Pass) Chamoli Garhwal

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माणा दर्रा चमोली गढ़वाल उत्तराखंड Mana Pass Chamoli Garhwal Uttarakhand

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में Mana Pass “माणा दर्रा” भारत के उत्तराखंड राज्य को तिब्बत से जोड़ने वाली दुनिया की सबसे ऊँची परिवहन  सड़क  योजना  के बारे मेें बताने वाले है, यदि आप जानना चहते है। “माणा दर्रा” Mana Pass के बारे में तो इस पोस्ट को अन्त तक जरूर पढ़े।


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माणा दर्रा उत्तराखंड के बारे में About Mana Pass Uttarakhand  –


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माणा दर्रा उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल जिले में भारत चीन सीमा पर स्थित हिमालय का एक प्रमुख दर्रा है।

यह  NH-58 का अन्तिम छोर है। इसे माना ला, चिरबितया,चिरबितया अथवा डुंगरी ला के नाम से भी जाना जाता है। माणा दर्रा समुद्रतल से लगभग 5,545 मीटर तथा 18,192 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यह उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर के निकट स्थित है। माणा दर्रा उत्तराखंड के कुमाऊ श्रेणी में स्थित है। इस दर्रे से मानसरोवर तथा कैलाश की घाटी जाने का मुख्य मार्ग है। माणा दर्रा भारत को तिब्बत से जोड़ती हैं। इसे दुनिया का सबसे ऊंची परिवहन योग्य सड़क भी माना जाता है। माणा दर्रा सर्दियों के मौसम में 6 महीने तक बर्फ से ढका रहता है। माणा दर्रा, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर माणा शहर से 24 किलोमीटर और उत्तराखंड से प्रसिद्ध हिन्दू धार्मिक तीर्थ बद्रीनाथ से 27 किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है।  माना पास में बाईकर्स आना बेहद पसंद करते हैं|  यह  पर्यटकों के लिए बेहद सुन्दर एवं शांत वातावरण वाली जगह हैं |
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माणा दर्रा का इतिहास History Of Mana Pass –

कुमाऊं में प्राचीन काल में किन्नर, किरात और नाग लोग रहते थे। तदनंतर कुमाऊं में खस लोग आए और इन लोगों को पराजित कर यहां बहुत दिनों तक राज करते रहें । 9 वीं सदी ई0 के आसपास कत्यूरी वंश ने अपना प्रभुत्व स्थापित किया। यह कदाचित शक लोग थे। यह वंश 1050 ईं तक राज करता रहा। 1400 ईं के लगभग चंद्रवंश के अधिकार में यह प्रदेश आया। भारतीय रतनचंद,किरातीचंद, माणिकचंद, रूद्रचंद के पश्चात 17 वीं शदी में बांजबहादुरचंद्र 1638-78 ईं में राजा हुए। उन्होंने तिब्बत पर आक्रमणकर उसे अपने अधिकार में कर लिया। 18 वीं शदी में कुमाऊं पर आक्रमण किया और अनके मंदिर ध्वस्त किए।उन्होंने स्वंय तो अपना राज्य स्थापित नहीं किया किंतु चंद्रवंश की स्थिति इतनी नाजुक हो गई कि नेपाल के गोरखा राजाओं ने उस पर अधिकार कर लिया 1815 ईं में अग्रेजों ने इसे गोरखाओं से छीन लिया और भारत का एक अंग बन गया। इस प्रदेश के निवासी मुख्यतः ब्राहमण,राजपूत और शिल्पकार है।
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पौराणिक मान्यता-

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अपने पिता दक्ष के यहां यज्ञ के अवसर पर पति महादेव का अपमान देखकर पार्वती ने कुमाऊं के इसी स्थान में ही अग्निप्रवेश किया था। कहा जाता हैं कि पांडव यहाँ से स्वर्ग की ओर गए थे|
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यहां तक कैसे पहुंचे How To Reach Mana Pass?


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यहां तक आप आसानी से जा सकते है।

हवाईअड्डा- निकटतम हवाईअड्डा जाॅली ग्रान्ट हवाईअड्डा है। यहा तक आप बाईयर आ सकते है। वहां से माणा दर्रा तक टैक्सी अथवा कार से आसानी से जा सकते है। जाॅली ग्रान्ट हवाईअड्डे से माणा दर्रा की दूरी 362 किलोमीटर हैं|

ट्रेन- हरिद्वार रेलवे स्टेशन तक आप ट्रेन आ सकते हैं वहा से आप माणा दर्रा तक बस से या कार से आसानी से जा सकते है। हरिद्वार से माणा दर्रा की दूरी 370 किलोमीटर हैं|
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GOOGLE MAP OF MANA PASS   DISTRICT CHAMOLI GARHWAL 


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