History of Pithoragarh !! ( पिथौरागढ़ का इतिहास !! )

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पिथौरागढ़ का इतिहास !!

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य का जिला “History of Pithoragarh !! ( पिथौरागढ़ का इतिहास !!) के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है | यदि आप ” पिथौरागढ़ का इतिहास “ के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते है , तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

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[av_heading heading=’History of Pithoragarh in Hindi !! (पिथौरागढ़ का इतिहास हिंदी में !!)’ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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पिथौरागढ़ का इतिहास !!पिथौरागढ़ , देवभूमि उत्तराखंड राज्य का एक नगर है , जो कि उत्तराखंड राज्य के पूर्व में स्थित सिमांतर जनपद है | इस जिले के उत्तर में तिब्बत, पूर्व में नेपाल, दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व में अल्मोड़ा, एवं उत्तर-पश्चिम में चमोली ज़िले पड़ते हैं |पिथौरागढ़ का पुराना नाम “सोरघाटी” है। सोर शब्द का अर्थ होता है-– सरोवर। यहाँ पर माना जाता है कि पहले इस घाटी में सात सरोवर थे । सरोवर में पानी सूखने से इस स्थान में पठारी भूमि का जन्म हुआ | जिससे इस जगह का नाम “पिथोरा गढ़” पडा और यह भी माना जाता है कि मुगलों के शासन काल में उनकी भाषा की दिक्कतों के चलते इसका नाम “पिथौरागढ़” पड़ गया | पिथोरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है | इसके इतिहास के बारे में आम तौर पर दो कहानी बताई जाती है | पिथौरागढ़ (जिसे “मिनी कश्मीर” भी कहा जाता है)नेपाली राजा “पाल” नाम के राजा के अधीन था । जो कि 13 वी शताब्दी में पिथौरागढ़ पहुचे और उसके बाद पिथौरागढ़ में शासन करना शुरू कर दिया | स्थानीय राजा “चंद” ने उनके खिलाफ विद्रोह किया और “पाल” और “चंद” के बीच एक युद्ध आरम्भ हो गया | यह युद्ध तीन पीढियों तक जारी रहा , जिसमे कभी-कभी पाल का शासन होता था और कभी-कभी चंद के राजा इस राज्य पर शासन करते थे |

आखिरकार “चंद” वंश के राजा “पिथोरा चंद” ने “पाल” को हरा दिया और पिथौरागढ़ के राजा बन गए | इस प्रकार , इस जगह का नाम पिथौरागढ़ के राजा के नाम पर रखा गया और पिथौरागढ़ में जीत हासिल करने के बाद उन्होंने अपना किला स्थापित किया , जिसे अब वर्तमान समय में “तहसील” कहा जाता है | लेकिन ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में आगमन के तुरंत बाद राजा “पिथोराचंद” का शासन समाप्त हो गया और आखिरकार अंग्रेजो ने आज़ादी तक पिथोरागढ़ में शासन किया | पिथौरागढ़ के रूप में ज्यादातर लोग ‘पहाड़ी’ मूल के रहने वाले थे , लेकिन आजादी से पहले कई जगहों से कई लोग उदाहरण के लिए-कुछ लोग राजस्थान से आए, कुछ लोग महाराष्ट्र, नेपाल, बर्मा, बैंगलोर आदि से आए।

पिथोरागढ़ के इतिहास के सम्बन्ध में अच्छी कहानी बताने वालो का यह कहना है कि पिथोरागढ़ का नाम राजा “पृथ्वीराज चौहान” के नाम पर रखा गया है जो दशको से पिथोरागढ़ में शासन करता था , लेकिन चौहान राजपूत द्वारा पृथ्वीराज चौहान के नाम पर शहर की कहानियां लोककथाओं का हिस्सा हैं।

और एक अन्य कहानी के अनुसार पिथोरागढ़ का इतिहास कुछ इस प्रकार है :-


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पिथौरागढ़ के इतिहास के बारे में यह बात मानी जाती है कि श्राध्लू कैलाश मानसरोवर की यात्रा के दौरान पिथौरागढ़ में विश्राम किया करते थे | पिथोरागढ़ के नाम को लेकर अलग-अलग कहानी प्रस्तुत की गयी है | एटकिंस के अनुसार . चंद वंश के सामंत पीरु भाई गोसाई ने पिथौरागढ़ की स्थापना की थी | चंद वंश के राजा भारती चंद के शासनकाल (वर्ष 1437 से 1450) में उनके बेटे रत्न चंद ने नेपाल के राजा दोती को परास्त कर सोर घाटी पर कब्ज़ा करा था | इसके बाद 1449 में इसे कुर्मांचल में मिला लिया .| रत्न चंद के शासन काल में पीरु या पृत्वी गोसाई ने पिथौरागढ़ नाम से इस स्थान पर एक किला स्थापित किया और बाद में किले के नाम पर ही इस जगह का नाम “पिथौरागढ़” पड गया | पिथौरागढ़ के इतिहास में महान शासक पृथ्वी राज चौहान का नाम भी आता है | इतिहासकारों के अनुसार पृथ्वीराज चौहान ने जब अपने राज्य का विस्तार किया तो उन्होंने इस इलाके को अपने राज्य में मिला लिया और इस क्षेत्र को ‘राय पिथौरा’ नाम दिया | राजपूतों के शासन का यह नियम रहा है कि वो जिस इलाके पर कब्जा करते थे उसका नाम खुद रखते थे | आगे चलकर चंद वंश और कत्यूरी राजाओं के काल में यह नाम पृथीगढ़ हो गया | बाद में मुगलों के शासन काल में उनकी भाषा की दिक्कतों के चलते इसका नाम “पिथौरागढ़” पड़ गया |

पिथौरागढ़ में अलग अलग समय में कई राजवंश राजाओं ने राज किया | पृथ्वीराज चौहान से पहले इस राज्य में खस वंश के राजाओ का शासन चलता था | उसके बाद 1364 में इस राज्य में कचुड़ी वंश (पाल-मल्लासारी वंश) का उदय हुआ | 14वी सदी के अंत में पिथौरागढ़ में कचुड़ी वंश के राजाओ ने राज्य किया और अपने राज्य को पिथौरागढ़ से अस्कोट तक फैला दिया था |

पिथौरागढ़ का संबंध पांडवों से भी है | अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान पांडव इस इलाके में भी आए थे | पिथौरागढ़ में पांडु पुत्र नकुल को समर्पित एक मंदिर भी है , जिसका नाम नकुलेश्वर मंदिर है | उत्तराखंड राज्य के प्रसिद्ध हिलस्टेशन के रूप में पिथौरागढ़ का भी एक मुख्य स्थान है |
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[av_heading heading=’Google Map of Pithoragarh !! ‘ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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पिथौरागढ़ , देवभूमि उत्तराखंड राज्य का एक नगर एवम् जिला है , जो कि उत्तराखंड राज्य के पूर्व में स्थित सिमांतर जनपद है | इस जिले के उत्तर में तिब्बत , पूर्व में नेपाल , दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व में अल्मोड़ा , एवं उत्तर-पश्चिम में चमोली ज़िले पड़ता है | आप इस स्थान को निचे Google Map में देख सकते है |
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Pithoragarh , Uttarakhand !!
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उम्मीद करते है कि आपको उत्तराखंड राज्य का जिला “ पिथौरागढ़ का इतिहास ” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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