Kalpeshwar Temple , Chamoli !! ( कल्पेश्वर मंदिर ) !!

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर “Kalpeshwar Temple , Chamoli !! ( कल्पेश्वर मंदिर ) !!” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है , यदि आप कल्पेश्वर मंदिर के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

Kalpeshwar Temple , Chamoli !! ( कल्पेश्वर मंदिर ) !!





Kalpeshwar Temple Chamoliकल्पेश्वर मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक एवम् पवित्र स्थलों में से एक है | कल्पेश्वर मंदिर समुन्द्र तल से 2134 मीटर की ऊँचाई पर “उर्गम घाटी” में चमोली जिले में  स्थित है | इस मंदिर परिसर में “जटा” या हिन्दू धर्म के मान्य त्रिदेव में से एक “भगवान शिव जी” के उलझे हुए बालो की पूजा की जाती है | यह मंदिर “पंचकेदार” तीर्थ यात्रा में पांचवे स्थान पर आता है | कल्पेश्वर का मुख्य मंदिर भक्तों के मध्य ‘अनादिनाथ कल्पेश्वर महादेव’ के नाम से प्रसिद्ध है | इस मंदिर(छोटा सा पत्थर का मंदिर) में एक गुफा के माध्यम से पहुंचा जा सकता है | इस मंदिर का दौरा आप वर्ष के किसी भी समय में कर सकते है | यह मंदिर काफी ऊँचाई पर स्थित है | इस मंदिर में भगवान शिव की स्वयंभू जटाएं एक उभरी हुई शिला के रूप में शोभायमान हैं। मन्दिर के समीप एक ‘कलेवर कुंड’ स्थित है, जिसका जल सदैव स्वच्छ रहता है । तीर्थयात्री यहाँ से पवित्र जल ग्रहण करते हैं और उसे पी कर अनेक व्याधियों से मुक्ति पाते हैं। यहाँ साधु-तपस्वी भगवान शिव को आराध्य देने के लिए इस पवित्र जल का प्रयोग करते हैं तथा तपस्या भी करते हैं।कल्पेश्वर मंदिर के पुजारी दक्षिण भारत के नम्बुदी ब्राहमण है | इन पुजारी के बारे में कहा जाता है कि पुजारी आदिगुरु शंकराचार्य के शिष्य है | शिवपुराण के अनुसार , ऋषि दुर्वासा ने इसी स्थान पर वरदान देने वाले कल्पवृक्ष के निचे बैठकर तपस्या की थी और तभी से यह स्थान “कल्पेश्वर” कहलाने लगा और पुरानो में भी ऐसा उल्लेख मिलता है | यह मंदिर पंचकेदार मंदिर में से एकमात्र ऐसा मंदिर है जो सबसे कम ऊँचाई पर स्थित है और जिसके कपाट दर्शन के लिए वर्ष भर खुले रहते है | श्रावण महीने में मंदिर में भक्तो की भीड़ का तांता बंधा रहता है |

कल्पेश्वर मंदिर की पौराणिक कथा :-

शिवपुराण के अनुसार यह स्थान ऋषि दुवार्सा जिन्होंने वरदान देने वाले कल्पवृक्ष के निचे बैठकर तपस्या करी थी , तब से यह स्थान कल्पेश्वर कहलाने लगा एवम् केदारखंड पुराण में भी ऐसा ही उल्लेख है कि इस स्थल में दुर्वासा ऋषि ने कल्पवृक्ष के नीचे बैठकर घोर तपस्या की थी | तभी से यह स्थान “कल्पेश्वर मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध हो गया | इसके अतिरिक्त अन्य कथा अनुसार देवताओं ने असुरों के अत्याचारों से त्रस्त होकर कल्पस्थल मे नारायणस्तुति की और भगवान शिव के दर्शन कर अभय का वरदान प्राप्त किया था | कल्पेश्वर मंदिर कल्प्गंगा में स्थित है , कल्प्गंगा को प्राचीन काल में “हिरण्यवती” नाम से पुकारा जाता था | इसके दाहिने स्थान पर स्थित तट की भूमि दुरबसा भूमि कही जाती है | इस स्थान पर ध्यान बद्री का मंदिर है | कल्पेश्वर चट्टान के पाद में एक पुराना गड्ढा है | जिसके भीतर गर्भ में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है | यह भी कहा जाता है कि देवग्राम के केदार मंदिर पर पहले कल्पवृक्ष था और यहाँ देवताओं के राजा इंद्र ने दुर्वासा ऋषि के शाप से मुक्ति पाने हेतु शिव-आराधना कर कल्पतरु प्राप्त किया था |

चमोली में कल्पेश्वर मंदिर के अल्वा तुंगनाथ मंदिर जो कि सबसे ऊँचाई पर स्थित है , लाटू देवता मंदिर , गोपीनाथ मंदिर ,रुद्रनाथ मंदिर , अनुसूया देवी मंदिर आदि के भी दर्शन जरुर करने चाहिए |

Google Map of Kalpeshwar Temple , Chamoli !!

कल्पेश्वर मंदिर , उत्तराखंड राज्य में चमोली जिले में स्थित धार्मिक एवम् पवित्र स्थल है | आप इस स्थान को निचे Google Map में देख सकते है |




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