Kamleshwar Mahadev Temple , Pauri Garhwal !! ( कमलेश्वर महादेव मंदिर )

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर शहर में स्थित “Kamleshwar Mahadev Temple ,Pauri Garhwal !! (कमलेश्वर महादेव मंदिर)” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है , यदि आप कमलेश्वर महादेव मंदिर” के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |
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कमलेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर क्षेत्र में स्थित अतिप्राचीनतम शिवालयों में से एक महत्वपूर्ण शिवालय है | कमलेश्वर महादेव मंदिर एक स्थान है , जहां भगवान विष्णु भगवान शिव की पूजा करते हैं और सुदर्शन चक्र के साथ आशीषें होती हैं | स्कन्दपुराण के केदारखण्ड के अनुसार त्रेतायुग में भगवान रामचन्द्र रावण का वध कर जब ब्रह्महत्या के पाप से कलंकित हुये तो गुरु वशिष्ट की आज्ञानुसार वे भगवान शिव की उपासना हेतु देवभूमि पर आये इस स्थान पर आकर उन्होने सहस्त्रकमलों से भगवान शिव की उपासना की जिससे इस स्थान का नाम “कमलेश्वर महादेव” पड़ गया । इस मंदिर के पार्श्व भाग में गणेश एवं शंकराचार्य की मूर्तियां हैं एवम् मुख्य मंदिर में बने एक कमरे में सरस्वती , गंगा तथा अन्नपूर्णा की धातु मूर्तियां स्थापित हैं | कमलेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य मंदिर से जुड़े एक कमरे में भगवान शिवजी के वाहन नंदी की एक विशाल कलात्मक पीतल की मूर्ति उपस्थित है और साथ ही साथ मंदिर में मदमहेश्वर महादेव का पीतल का मुखौटा भी स्थित है | मंदिर की स्थापना के बारे में यह प्रसिद्ध है कि मंदिर की रचना मूल रूप से शंकराचार्य ने कराई थी तथा इसका जीर्णोद्धार उद्योगपति बिड़ला जी ने करवाया था । इस मंदिर में होने वाली पूजा निसंतान दंपतियों की सूनी गोद भरने के लिए प्रसिद्ध है | प्रत्येक वर्ष की भांति हर साली इस कमलेश्वर महादेव मंदिर में चार दिवसीय मेला बैकुन्ठ चतुर्दशी (कार्तिक मास की पूर्णिमा से पहले दिन) पर आयोजित किया जाता है । जिसमे संतान पुत्र-प्राप्ति की इच्छुक महिलायें अपने पति के साथ कमलेश्वर महादेव मंदिर में रात्रि भर प्रज्वलित दीपक हाथों में लेकर खड़ी रहकर भगवान शिव की स्तुति करती हैं । मान्यता है कि इस पूजा के बाद भगवान शिव के आशीर्वाद से कई दम्पतियों को पुत्र-रत्न/संतान की प्राप्ति हुई है । शिवरात्रि में श्रावण भक्त बड़ी संख्या में कमलेश्वर महादेव मंदिर की यात्रा करते हैं |

कमलेश्वर महादेव मंदिर की पौराणिक कथा :-

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम इस स्थान पर रावण को मारने के बाद आत्माओं की शान्ति के लिए प्रार्थना करते थे , वह हर रोज हजारों कमल के साथ भगवान शिव की पूजा करते थे । एक बार भगवान शिव ने अपनी भक्ति की परीक्षा करने का फैसला किया । तो एक दिन शिव ने एक कमल गायब कर दिया । जब भगवान राम को 1000 कमल के फूलो में से एक कमल का फूल नहीं मिला , तो भगवान राम ने अपना मन बनाकर अपनी आँखों को एक कमल के फूल के रूप में निकालना चाहा और उसे भगवान के सामने पेश किया । शिव यह सब देखकर अत्यंत प्रभावित हुए और व्यक्तिगत रूप से भगवान राम के सामने प्रकट हुए और राम को इस बलिदान से रोक दिया । यही कारण है कि श्री राम को ‘कमलेश्वर’ या “कमल-आंखों” के नाम से जाना जाता है एवम् इस मंदिर का नाम इसी कथा के कारण “कमलेश्वर” रखा गया |

कमलेश्वर महादेव मंदिर के पीछे पुत्र रत्न प्राप्ति की कथा :-


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कमलेश्वर मंदिर के महंत बताते हैं कि कमलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान विष्णु ने देवासुर संग्राम के दौरान कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के दिन अस्त्र-शस्त्रों के लिए भगवान शंकर की तपस्या की थी । तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने दूसरे दिन सुबह विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था । इस पूजा को किसी निसंतान दंपति भी देख रहे थे । निसंतान दंपति ने भगवान शंकर से संतान का वरदान मांगा । माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उन्हें यह वरदान दिया कि जो भी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के अवसर पर पूरी रात खड़ा दिया अनुष्ठान करेगा उसे संतान की प्राप्ति होगी । इसलिए कमलेश्वर महादेव मंदिर पुत्र रत्न प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है |

पौड़ी गढ़वाल जिले में कमलेश्वर महादेव मंदिर के अलावा अन्य प्रसिद्ध मंदिर NEELKANTH MAHADEV TEMPLE , RISHIKESH , PAURI GARHWAL !! ( नीलकंठ महादेव मंदिर !! ) , Sidhbali Temple , Kotdwar , Pauri Garhwal !! ( सिध्बली मंदिर) , Kandoliya Temple , Pauri Garhwal !! (कंडोलिया मंदिर) , Danda Nagaraja Temple,Pauri Garhwal !! ( डांडा नागराजा मंदिर ) , Dhari Devi Temple , Pauri Garhwal !! ( धारी देवी मंदिर ) के भी दर्शन जरुर करने चाहिए |
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कमलेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर शहर में स्थित है | आप इस स्थान को निचे Google Map में देख सकते है |
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उम्मीद करते है कि आपको “ कमलेश्वर महादेव मंदिर ” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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