जन्माष्टमी क्यों, और कैसे मनाया जाता हैं Krishna Janmashtami

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कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व, इतिहास तथा क्यों मनाया जाता है? Krishna Janmashtami

नमस्कार दोस्तों आज हम आपकों “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “श्रीकृष्ण जन्माष्टमी” (krishna janmashtami) के बारे में बताने जा रहें है। यदि आप जानना चाहते है “जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती और इस त्योहार के महत्व” के बारे में तो इस पोस्ट को अन्त तक जरूर पढ़े।


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जन्माष्टमी का महत्व और इतिहास –

जन्माष्टमी का त्योहार हिन्दुओं के लिए बहुत ही उत्साह  भरा पर्व है, जन्माष्टमी को श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इनका जन्म देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में मथुरा में हुआ था|

उन्होंने मथुरावासियों को निर्दयी कंस के शासन से मुक्ति दिलाई इतना ही नहीं महाभारत के युद्ध में पांडवों को जीत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी ।


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जन्माष्टमी एक ऐसा त्योहार है जिसे लोग पूरे उत्साह के साथ मनाते है। इस पवित्र दिन में भक्त मंदिरों में भगवान से प्रार्थना कर उन्हें भोग लगाते है। इस दिन लोग अपने घरों में बालगोपाल को दूध,शहद,पानी से अभिषेक कर नए वस्त्र पहनाते है।
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जन्माष्टमी क्यों मानाई जाती है?

पौराणिक ग्रथों के अनुसार भगवान विष्णु ने इस धरती को पापियों के जुल्मों से मुक्त कराने के लिए भगवान श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिए था।

श्रीकृष्ण ने माता देवकी की कोख से इस धरती पर अत्याचारी मामा कंस का वध करने के लिए मथुरा में अवतार लिया था इनका पालन पोषण माता यशोदा ने किया। श्रीकृष्ण बचपन से ही बहुत नटखट थे उनकी कई सखिंया भी थी।
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जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है?

जन्माष्टमी कई जगह अलग-अलग तरीक में मनाई जाती है। कई जगह इस दिन फूलों की होली भी खेली जाती है तथा साथ में रंगों की भी होली खेली जाती है। जन्माष्टमी के पर्व पर झाकियों के रूप में श्रीकृष्ण का मोहक अवतार देखने को मिलते है। मंदिरो को इस दिन काफी सहजता से सजाया जाता है। और कई लोग इस दिन व्रत भी रखते है। जन्माष्टमी के दिन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को झूला झूलाया जाता है। जन्माष्टमी को मथुरा नगरी में बहुत ही हर्षोल्लास से मानाया जाता है। जोकि श्रीकृष्ण की जन्मनगरी है।
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दही हांडी का महत्व-

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श्रीकृष्ण को माखन दूध,दही काफी पसन्द था जिसकी  वजह से पूरे गांव का माखन चोरी करके खा जाते थे। एक दिन उन्हें माखन चोरी करने से रोकने के लिए, उनकी मां यशोदा को उन्हें एक खंभे से बांधना पड़ा और इसी वजह से भगवान श्रीकृष्ण का नाम माखन चोर पड़ा।

वृन्दावन में महिलाओं ने मथे हुए माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया, जिससे की श्रीकृष्ण का हाथ वहां तक न पहुंच सके, लेकिन नटखट कृष्ण की समझदारी के आगे उनकी ये  योजना भी व्यर्थ साबित हुई,माखन चुराने के लिए श्रीकृष्ण ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर योजना बनाई और साथ मिलकर ऊंचाई में लटकाई मटकी से दही और माखन चुरा लिया वही से प्रेरित होकर दही हांडी शुरू हुआ ।


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उत्तराखंड में कई प्रकार के त्योहार मनाये जाते हैं, जैसे घुघुतिया त्योहार, बसंत पंचमी, रक्षा बंधन, फुलदेई छमादेई आदि इन त्योहारों के बारे में जानने के लिए नीचे दिए link पर clik करें

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