Madhyamaheswar Temple , Garhwal !! (मध्यमहेश्वर मंदिर)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध मंदिर “Madhyamaheswar Temple , Garhwal !! (मध्यमहेश्वर मंदिर) ” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है , यदि आप मध्यमहेश्वर मंदिर के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

Madhyamaheswar Temple , Garhwal !! (मध्यमहेश्वर मंदिर)




madhyamaheshwar-templeमध्यमहेश्वर मंदिर , उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय के मंसुना गांव में स्थित प्रसिद्ध एवम् धार्मिक मंदिर भगवान शिव को समर्पित हिंदू मंदिर है । यह मंदिर समुन्द्र तल से 3,497 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है | मंदिर पंच केदार तीर्थ यात्रा में चौथा मंदिर है। मध्यमहेश्वर मंदिर को “मदमाहेश्वर” के नाम से भी जाना जाता है| मध्यमहेश्वर मंदिर में पूजा करने के बाद केदारनाथ, तुंगनाथ और रुद्रनाथ के मंदिरों का यात्रा की जाती हैं और साथ ही साथ कल्पेश्वर मंदिर का दौरा भी किया जाता है | इस मंदिर को पांडवो के द्वारा निर्मित माना जाता है एवम् यह भी माना जाता है कि भीम ने भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था | मंदिर प्रांगण में “मध्य” या “बैल का पेट” या “नाभि (नाभि)” भगवान शिवजी का दिव्य रूप माना जाता है | इस मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली से निर्मित है एवम् यह मंदिर एक घास से भरे क्षेत्र में स्थित है | वर्तमान मंदिर में, काली पत्थर से बना एक नाभि के आकार का शिव-लिंगम, पवित्र स्थान में स्थित है। दो अन्य छोटे तीर्थ हैं, एक शिव व पार्वती के लिए और अन्य अर्धनारीश्वरा को समर्पित है , जो आधा-शिव आधा-पार्वती का रूप है | मुख्य मंदिर के दाहिनी ओर एक छोटा मन्दिर है , जिसके गर्भगृह में संगमरमर से बनी देवी सरस्वती ( हिन्दू धर्म में ज्ञान की देवी कहा जाता है) की मूर्ति है । इस मंदिर की रजत मूर्तियों को सर्दीयों में उखीमठ में स्थानांतरित कर दिया जाता है । मंदिर परिसर के पानी को अत्यधिक पवित्र माना जाता है इस मंदिर के पानी की कुछ बूंदों को स्नान के लिए पर्याप्त माना जाता है | इस मंदिर में पुजारी राज्य के कई अन्य मंदिरों के रूप में दक्षिण भारत के होते हैं | यह शास्त्रीक (पवित्र) की एक महत्वपूर्ण पवित्र तीर्थस्थल केंद्रों में से एक है जिसे पंचस्थली (पांच जगहों) सिद्धांत के रूप में वर्गीकृत किया गया है ।

इस मंदिर को पंचकेदार क्यों माना जाता है ?

एक कथा के अनुसार इस मंदिर को पंचकेदार इसलिए माना जाता है क्यूंकि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पापो से मुक्ति चाहते थे इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवो को सलाह दी थी कि वे भगवान शंकर का आर्शीवाद प्राप्त करे । इसलिए पांडवो ने भगवान शंकर का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए वाराणसी पहुँच जाते है परन्तु भगवान शंकर वाराणसी से चले गए होते है और गुप्तकाशी में आकर छुप जाते है क्योकि भगवान शंकर पांडवो से नाराज थे अर्थात पांडवो ने अपने कुल का नाश किया था । जब पांडव गुप्तकाशी पंहुचे तो फिर भगवान शंकर केदारनाथ पहुँच गए , जहां भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर रखा था । पांडवो ने भगवान शंकर को खोज कर उनसे आर्शीवाद प्राप्त किया था । ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ । अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है । शिव की भुजाएं तुंगनाथ में , मुख रुद्रनाथ में , नाभि मध्यमाहेश्वर में , भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए इसलिए इन पांच स्थानों में श्री मध्यमहेश्वर को पंचकेदार कहा जाता है।

Google Map of Madhyamaheswar Temple , Garhwal !!

मध्यमहेश्वर मंदिर , उत्तराखंड में गढ़वाल हिमालय के मंसुना गांव में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है | आप इस मंदिर का रास्ता निचे दिए गए Google Map में देख सकते है |




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