मकर सक्रांति पर्व क्यों मनाया जाता है !! (इतिहास , कथा , महत्व )

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[av_heading heading=’मकर सक्रांति पर्व क्यों मनाया जाता है !! (इतिहास,कथा , महत्व , पूजा विधि)’ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में प्रमुख हिन्दू त्यौहार “मकर सक्रांति“के बारे में जानकारी देने वाले है , यदि आप मकर सक्रांति पर्व के बारे पूर्ण जानकारी पढना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |
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[av_heading heading=’मकर सक्रांति त्यौहार !! ‘ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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makar-sakrantiमकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व या त्यौहार है , जो कि जनवरी के महीने में 14 या 15 तारीख को मनाया जाता है | हिन्दू महीने के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है । यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है जो कि हर साल एक ही तारीख पर आता है वास्तव में यह पर्व सोलर कैलेंडर का पालन करता है | उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं में मकर संक्रांति पर ‘घुघुतिया‘ के नाम एक त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार की अपनी अलग ही पहचान है।  इस पर्व को उत्तरायणी पर्व के रूप में भी माना जाता है | मकर संक्रांति पूरे भारतवर्ष और नेपाल में मुख्य फसल कटाई के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है । हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में एक दिन पहले 13 जनवरी को ही मनाया जाता है । इस दिन उत्सव के रूप में स्नान , दान आदि किया जाता है एवम् तिल और गुड के पकवान बांटे जाते है । भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है । आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे “संक्रांति” कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे “पोंगल पर्व” के रूप में मनाया जाता है । पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है , वहीं असम में “बिहू पर्व” के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है । अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पकवान भी अलग-अलग होते हैं , लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है । विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है । इसेक अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है । इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर स्नान किया जाता है । इसके अलावा तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य व्यंजन भी बनाए जाते हैं । इस पर्व के दिन लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाते है और ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से सभी पाप धुल जाते है |
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हिन्दू पुराणों के अनुसार इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव जो मकर राशि का स्वामी है के घर मिलने जाते है। ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नही है,  लेकिन सूर्य खद अपने पुत्र के घर जाते है। इसलिए पुरानो में यह दिन पिता पुत्र के संबंधो में निकटता के रूप में मनाया जाता है।

ऐसा कहा जाता है की इसी दिन भगवान विष्णु ने मधु कैटभ से युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने मधु के कंधो पर मंदार पर्वत रख कर उसे दबा दिया था। इसलिए भगवन विष्णु इस दिन से मधुसुदन कहलाये।

मकर सक्रांति के दिन ही माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के लिए धरती पर कदम रखा था |
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[av_heading heading=’इस पर्व को “मकर सक्रांति” क्यों कहा जाता है ?’ tag=’h2′ style=’blockquote modern-quote modern-centered’ size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ padding=’10’ color=” custom_font=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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मकर सक्रांति को मुख्य रूप से सूर्य पर्व के रूप में मनाया जाता है | इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है अर्थात् एक राशि को छोड़ के दूसरी राशि में प्रवेश करने की सूर्य की इस विस्थापन क्रिया को “सक्रांति” कहते है और सूर्य इसी दिन मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस समय को मकर सक्रांति कहा जाता है | इस दिन सूर्य “दक्षिणायन” से अपनी दिशा बदलकर उत्तरायण हो जाता है अर्थात सूर्य “उत्तर दिशा” की ओर बढ़ने लगता है , जिसके कारण दिन की लंबाई बढ़ने लगती है और रात की लंबाई छोटी होनी शुरू हो जाती है । भारत में इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है । अत: मकर संक्रांति को “उत्तरायण” के नाम से भी जाना जाता है।
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1. इसी दिन चमत्कारी माँ गंगा नदी का धरती पर अवतरण हुआ था |
2. महाभारत काल के समय में भीष्म पितामह ने मकर सक्रांति के दिन ही अपना देह त्याग किया था |
3. भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में बताया है कि सक्रांति से लगने वाले सूर्य के उत्तरायण में देह त्याग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है |जबकि दक्षिणायन में शरीर त्याग ने वाले मनुष्य को पुनः जन्म लेना पड़ता है |
4. उत्तरायण के 6 माह में सूरज की किरणे शान्ति और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है |
5. उत्तरायण का 6 महिना देवी-देवताओं का दिन है , जबकि दक्षिणायन का 6 महीना देवी देवताओं के लिए रात्री (रात) है |
6. कहा जाता है कि आज ही के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी । इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है । इस दिन गंगा सागर , कासी (वाराणसी) , त्रिवेणी संगम , हरिद्वार , पुष्कर , उज्जैन की शिप्रा , लोहाग्रल आदि तीर्थ स्थलों पर भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान करते है और भगवान सूर्य को जल चढाते है |
7. इस पर्व के दिन दान करना सबसे अच्छे दिनों में से एक माना जाता है | हर व्यक्ति को अपनी स्थिति के अनुसार अन्न , वस्त्र , धातु दान गरीबो को करना चाहिए | इस दिन गरीबो को देने वाला दान कई गुना अधिक फल और पुण्य देने वाला माना गया है | ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किए गए दान से सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं।
8. मकर सक्रांति पर्व किसानो के लिए अधिक महत्वपूर्ण होती है , इसी दिन सभी किसान अपनी फसल काटते है |

उम्मीद करते है कि आपको “मकर सक्रांति पर्व क्यों मनाया जाता है !! (इतिहास , कथा , महत्व )” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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