Nanda Devi Temple , Almora !! (नंदा देवी मंदिर !!)

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध एवम् विख्यात मंदिर “Nanda Devi Temple , Almora !! (नंदा देवी मंदिर !!)” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है | यदि आप ”  नंदा देवी मंदिर ” के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते है , तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

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[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’History of Nanda Devi Temple in Hindi !! (नंदा देवी मंदिर का इतिहास !!) ‘ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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nanda-devi-temple-almoraकुमाऊं क्षेत्र के उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले के पवित्र स्थलों में से एक “नंदा देवी मंदिर” का विशेष धार्मिक महत्व है ।इस मंदिर में “देवी दुर्गा” का अवतार  विराजमान है | समुन्द्रतल से 7816 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर चंद वंश की “ईष्ट देवी” माँ नंदा देवीको समर्पित है | नंदा देवी माँ दुर्गा का अवतार और भगवान शंकर की पत्नी है और पर्वतीय आँचल की मुख्य देवी के रूप में पूजी जाती है | नंदा देवी गढ़वाल के राजा दक्षप्रजापति की पुत्री है , इसलिए सभी कुमाउनी और गढ़वाली लोग उन्हें पर्वतांचल की पुत्री मानते है | कई हिन्दू तीर्थयात्रा के धार्मिक रूप में इस मंदिर की यात्रा करते है क्यूंकि नंदा देवी को “बुराई के विनाशक” और कुमुण के घुमन्तु के रूप में माना जाता है | इसका इतिहास 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है । नंदा देवी का मंदिर , शिव मंदिर की बाहरी ढलान पर स्थित है |पत्थर का मुकुट और दीवारों पर पत्थर से बनायीं गयी कलाकृति इस मंदिर की शोभा को अत्यधिक बढाते है | नन्दा की उपासना प्राचीन काल से ही किये जाने के प्रमाण धार्मिक ग्रंथों, उपनिषद और पुराणों में मिलते हैं | नंदा देवी को नव दुर्गा के रूप में से एक बताया गया है |भविष्यपुराण में जिन दुर्गा के बारे में बताया गया है,उनमे महालक्ष्मी , नंदा , नन्दा, क्षेमकरी, शिवदूती, महाटूँडा, भ्रामरी, चंद्रमंडला, रेवती और हरसिद्धी हैं ।

अल्मोड़ा स्थित नंदा देवी का मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों में से एक है | कुमाऊँ में अल्मोड़ा, रणचूला, डंगोली, बदियाकोट, सोराग, कर्मी, पोंथिग, कपकोट तहसील, चिल्ठा, सरमूल आदि में नन्दा देवी के मंदिर स्थित हैं। अल्मोड़ा में मां नंदा की पूजा-अर्चना तारा शक्ति के रूप में तांत्रिक विधि से करने की परंपरा है। पहले से ही विशेष तांत्रिक पूजा चंद शासक व उनके परिवार के सदस्य करते आए हैं |
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[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’नंदा देवी मंदिर की स्थापना का पौराणिक इतिहास ! (LEGENDARY HISTORY OF ESTABLISHMENT OF NANDA DEVI TEMPLE)’ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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नंदा देवी मंदिर के पीछे कई ऐतिहासिक कथा जुडी है और इस स्थान में नंदा देवी को प्रतिष्ठित (मशहूर) करने का सारा श्रेय चंद शासको का है | कुमाऊं में माँ नंदा की पूजा का क्रम चंद शासको के जामने से माना जाता है | किवंदती व इतिहास के अनुसार सन 1670 में कुमाऊं के चंद शासक राजा बाज बहादुर चंद बधाणकोट किले से माँ नंदा देवी की सोने की मूर्ति लाये और उस मूर्ति को मल्ला महल (वर्तमान का कलेक्टर परिसर, अल्मोड़ा) में स्थापित कर दिया , तब से चंद शासको ने माँ नंदा को कुल देवी के रूप में पूजना शुरू कर दिया | इसके बाद बधाणकोट विजय करने के बाद राजा जगत चंद को जब नंदादेवी की मूर्ति नहीं मिली तो उन्होंने खजाने में से अशर्फियों को गलाकर माँ नंदा की मुर्ति बनाई | मूर्ति बनने के बाद राजा जगत चंद ने मूर्ति को मल्ला महल स्थित नंदादेवी मंदिर में स्थापित करा दिया | सन 1690 में तत्कालीन राजा उघोत चंद ने पार्वतीश्वर और उघोत चंद्रेश्वर नामक “दो शिव मंदिर” मौजूदा नंदादेवी मंदिर में बनाए | वर्तमान में यह मंदिर चंद्रेश्वर व पार्वतीश्वर के नाम से प्रचलित है | सन 1815 को मल्ला महल में स्थापित नंदादेवी की मूर्तियों को कमिश्नर ट्रेल ने उघोत चंद्रेश्वर मंदिर में रखवा दिया |

 नंदा देवी मंदिर की मान्यता (BELIEFS OF NANDA DEVI TEMPLE)


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प्रचलित मान्यताओ के अनुसार एक दिन कमिश्नर ट्रेल नंदादेवी पर्वत की चोटी की ओर जा रहे थे , तो अचानक रास्ते में बड़े ही रहस्यमय ढंग से उनकी आँखों की रोशनी चली गयी | लोगो की राय(सलाह) पर उन्होंने अल्मोड़ा में नंदादेवी का मंदिर   बनवाकर उस स्थान में नंदादेवी की मूर्ति स्थापित करवाई , तो रहस्यमय तरीके से उनकी आँखो की रोशनी लौट आई | इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि राजा बाज बहादुर प्रतापी थे | जब उनके पूर्वज को गढ़वाल पर आक्रमण के दौरान सफलता नहीं मिली , तो राजा बाज बहादुर ने प्रण किया कि उन्हें युद्ध में यदि विजय मिली , तो वो नंदादेवी को अपनी ईष्ट देवी के रूप में पूजा करेंगे | कुछ समय के बाद गढ़वाल में आक्रमण के दौरान उन्हें विजय प्राप्त हो गयी , और तब से नंदा देवी को ईष्ट देवी के रूप में भी पूजा जाता है | मानसखण्ड में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मां नंदा के दर्शन मात्र से ही मनुष्य ऐश्वर्य को प्राप्त करता है तथा सुख-शांति का अनुभव करता है |
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[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’Google Map of Nanda Devi Temple , Almora !! ‘ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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कुमाऊं क्षेत्र के उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले के पवित्र स्थलों में से एक “नंदा देवी मंदिर” का विशेष धार्मिक महत्व है । आप इस स्थान को निचे Google Map में देख सकते हैं |
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NANDA DEVI TEMPLE , ALMORA !!
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उम्मीद करते है कि आपको अल्मोड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय मंदिर “ नंदा देवी मंदिर ” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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