नारायण आश्रम (पिथौरागढ़)Narayan Ashram , Pithoragarh !!

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन कि इस पोस्ट में पिथौरागढ़ जिले में स्थित “नारायण आश्रम “ के बारे में जानकारी बतायेंगे | नारायण आश्रम , पिथौरागढ़ जिले से 140 कि.मी. दूर ट्रैकिंग करने , ध्यान लगाने एवम् प्राकर्तिक सौन्दर्यता से भरपूर पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक आश्रम के रूप में सुविधाजनक स्थान है , यदि आप नारायण आश्रम के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

नारायण आश्रम (पिथौरागढ़) Narayan Ashram , Pithoragarh !!





History of Narayan Ashram in Pithoragarh पिथौरागढ़ जिले में स्थित “नारायण आश्रम” एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है , जो कि समुन्द्र तल से 2,734 मीटर की ऊँचाई पर “सोसा” नामक क्षेत्र में स्थित है | यह आश्रम पिथौरागढ़ से 116 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है | इस आश्रम को स्थानीय तौर पर “बंगबा” या “चौदास” भी कहा जाता है | इस आश्रम को 1936 में एक साधू एवम् सामाजिक कार्यकर्ता “नारायण स्वामी” के द्वारा स्थापित किया गया | नारायण आश्रम के लिए जमीन “सोसा” के स्वर्गीय कुशाल सिंह हयांकी ने स्वामी जी को दे दी थी और सोसा के लोगो से आसपास के कुछ भूखंडो को ख़रीदा गया था | इस स्थल में स्वामी जी द्वारा कई उद्यान और बगीचे लगवाए गए है | इस आश्रम से कुछ ही दुरी पर तवाघाट नाम स्थान पर धौलीगंगा और कालीगंगा नदी का संगम होता है |

नारायण आश्रम की मुख्य इमारत के अन्दर एक मंदिर है , जो कि तीर्थयात्रियों या आगुन्तको को श्रधांजलि अर्पित करने के लिए है |

नारायण आश्रम 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के लिए एक आराम स्थान के रूप में सेवा करते थे । 1990 के दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली के बाद से तीर्थयात्रा का मार्ग बदल गया और नारायण आश्रम मार्ग में तीर्थयात्रीयों का इस स्थान में आना कम होने लगा | वर्तमान समय में इस स्थान की सुन्दरता इतनी अधिक है कि देश के कोने-कोने के प्रकृति प्रेमी इस आश्रम में रहकर हिमालय के अद्भुत दर्शन करते हैं | इस आश्रम में हर साल हजारों की संख्या में विदेशी और देशी पर्यटक आते हैं और यहां ध्यान कर आत्म शांति प्राप्त करते हैं | पिथौरागढ़ के इतिहास में नारायण आश्रम का अत्यधिक महत्व है |

Festival of Narayan Ashram Pithoragarh

नारायण आश्रम के समीप पौराणिक गांवों के लोग गुरु पूर्णिमा और जन्माष्टमी के दौरान इकट्ठा होते हैं। गुरु पूर्णिमा को सभी गुरुओं और दुनिया के शिक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मनाया जाता है और जन्माष्टमी को हिंदू भगवान श्री कृष्ण के जन्म के रूप में मनाया जाता है । गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नारायण आश्रम में लोगों को मुफ्त भोजन प्रदान किया जाता है।

Best Time To Visit Narayan Ashram Pithoragarh

मार्च से नवंबर तक बरसात के मौसम में लगातार भूस्खलन के कारण रास्ते में सड़क के किनारे के कारण छोटी समस्या हो सकती है और अगस्त के महीने में आश्रम के समीप जंगली फूलों की सौन्दर्यता, खूबसूरती को देखकर मन मंत्रमुग्ध हो जाता हैं ।

पिथौरागढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध भुवनेश्वर मंदिर और थल मेला के बारे में जानने के लिए निचे दिए गए लिंक में क्लिक करे !!!




उम्मीद करते है कि आपको “नारायण आश्रम पिथौरागढ़ !! (Narayan Ashram Pithoragarh) ” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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