बिच्छू घास Nettle leaf

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “बिच्छू घास के औषधीय गुणों (Nettle leaf benefits)” के बारे में बताने वाले है यदि आप जानना चाहते है ”बिच्छू घास के औषधीय गुणों (Nettle leaf benefits)” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|





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बिछु घास के बारे में About Nettle –

बिच्छू घास एक प्रकार का जंगली पौधा है इसे छूने से करंट जैसा अनुभव होता है यह पौधा उत्तराखंड के हिमालयी इलाको में पाया जाता है| इसका वैज्ञानिक नाम Urtica dioica हैं| इस पौधे को कुमाऊ मंडल में सियूँण के नाम से जाना जाता है वही गढ़वाल में इस कंडली कहते है! इस पौधे से बिच्छू के डंक जैसा अनुभव होने के कारण ही इसे इसे बिच्छू घास के नाम से भी जाना जाता है! इस पौधे के पत्तो एव तनो पर हलके कांटे भी होते है सुई की तरह!  जहाँ लोग इस पौधे को छूने से डरते है तो इस पौधे के कई मेडिसिनल फायदे भी है!  “जानिए बिच्छू घास के फायदे एवं औषधीय गुण”





बिच्छू घास औषधीय गुण  Nettle leaf benefits

बिच्छू घास एक प्रकार की बारहमासी जंगली जड़ी-बूटी है। जिसे अक्‍सर खरपतवार या बेकार पौधा समझा जाता है। लेकिन अपने गुणों के कारण यह विभिन्‍न प्रकार के अध्‍ययनों का विषय बन चुका है। इसका वैज्ञानिक नाम अर्टिका डाइओका (urtica dioica) है।यह मुख्‍य रूप से हमारे लिए एंटीऑक्‍सीडेंट का काम करता है। इस पौधे के उपयोगी हिस्‍सों में इसके पत्‍ते, जड़ और तना होते हैं।यह औषधीय जड़ी-बूटी नेटल परिवार से संबंधित है। बिच्छू बूटी के पौधे आमतौर पर 2 से 4 फीट तक ऊंचे होते हैं। यह पौधा सीधा बढ़ता है। इसकी पत्तियां कुछ कठोर और दिल के आकार होती हैं जिसके बाहरी किनारे दांतों के समान होते हैं। इस पौधे के फूल पीले या गुलाबी होते हैं। पूरा पौधा छोटे-छोटे बालों से ढका हुआ होता है। इन्‍हीं बालों की बजह से छूने पर यह त्‍वचा में जलन या झनझनाहट पैदा करता है| यह बुखार आने, शरीर में कमजोरी होने, तंत्र-मंत्र से बीमारी भगाने, पित्त दोष, गठिया, शरीर के किसी हिस्से में मोच, जकड़न और मलेरिया जैसे बीमारी को दूर भागने में उपयोग करते हैं

बिच्छू घास के बीजों को पेट साफ करने वाली दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है

पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी साग-सब्जी भी बनायी जाती है. इसकी तासीर गर्म होती है और यदि हम स्वाद की बात करे तो पालक के साग की तरह ही स्वादिष्ट भी होती है  इसमें Vitamin A,B,D , आइरन, कैल्सियम और मैगनीज़ प्रचुर मात्रा में होता है.  माना जाता है कि बिच्छू घास में काफी आयरन होता है. जिसे हर्बल डिश कहते हैं.





आम तौर पर दो वर्ष की उम्र वाली बिच्छू घास को गढ़वाल में कंडाली व कुमाऊं में सिसूण के नाम से जाना जाता है. अर्टिकाकेई वनस्पति परिवार के इस पौधे का वानस्पतिक नाम अर्टिका पर्वीफ्लोरा है. बिच्छू घास स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभप्रद है. इसमें ढेर सारे विटामिन और मिनरल्स हैं. इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेड, एनर्जी, कोलेस्ट्रोल जीरो, विटामिन ए, सोडियम, कैल्शियम और आयरन हैं.

बिच्छू घास से बनती है चाय
अल्मोड़ा के निकट चितई के पंत गांव में स्थापित कंपनी पिछले डेढ़ साल में बिच्छू घास से बनी 500 किलो चाय देश भर के बड़े शहरों में बेच चुकी है. अभी सालाना उत्पादन करीब चार क्विंटल है. इसका फ्लेवर खीरे की तरह होता है. बिच्छू घास की चाय के 50 ग्राम के एक पैकेट की कीमत 110 रुपए है और इसकी काफी मांग है.

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