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पहाड़ी समाचार उत्तराखंड में आब पांच सौ फूट प्रोसेसिंग यूनिट जल्दी

   उत्तराखंड में आब पांच सौ फूट प्रोसेसिंग यूनिट जल्दी

जागरण संवाददाता , रुद्रपुर : सांसद अजय भट्ट क कृषि कानून किसानोक हितोक में छी | किसान के अफुढ फसल बेचनेक आजादी छू | कांट्रेक्ट फार्मिंक में किसानोक के ले प्रकारक नुकसान नी होल | कांग्रेस अनगर्ल बयानबाजी कर भेरन किसानोक के भढकुमे | किसनोक हित में मोदी सरकार फ़रवरी में पशुपालन और मत्स्य पालन के ले ऋण दे भेरन किसनोक आय बढूनेक लक्ष्य राखी खरो | क की राज्य में जल्दी पाचं सौ भे ज्याद फ़ूड पोसेसिंगयूनिट लगाई जाली |

सांसद भट्ट सोमवार के भाजपा जिल्ल्क कार्यालय में पत्र कार के बता की मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारतक तहत करीब एक लाख  करोड़ रुपये ऋण किसनोक के देली | जेम्मे मत्स्य पालनक लिजी 20 हजार करोड़ , पशुपालन में 15 हजार करोड़ , हर्बल खेतीक लिजी चार सौ करोड़ फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिटक लिजी 10 हजार करोड़क प्रस्ताव राखी खरो येक शुरुआत फ़रवरी भे होली | मौन पालनक लिजी 500 करोड़ रूपये अवमुक्त ले करी हालन | कांग्रेस पार्टिक लोगोंन में भ्रम फेलम मान की कांट्रेक्ट फार्मिंग में किसानोक भूमि ठेकेदार हड़प दयाल , फसलेक कीमत ने मिलेली आदि शंका पैद करी ह्या , जबकि यस न हाआ | कृषि विधेयक किसानोल हित में छू |  कांट्रेक्ट फार्मिंग में किसानोक के फसलक बुवाईक पेली ही कीमत तय कर दी जाली | इम्मे सिर्फ फसलेक बात होली न की भुमिक | किसान अफुड़ फसलक कीमत स्वयं लगाल | इम्मे कती हे ले किसानोक के नुकसान नी होल | बता की वर्ष 2009 – 10 में कांग्रेस सरकाररेली किसानोक लिजी 12 हजार करोड़ क बजट राखी छी | जम्मे भाजपा सरकार रेली बड़ाभेरन 1 लाख 34 हजार करोड़ कर हाछी | किसान सम्मान निधिक रूप में डीबीटी क माध्यम भे 10 करोड़ किसानोक खात में 75 हजार करोड़ रूपये भेजी ज्ञान | येक बाद ले कांग्रेस मोदी सरकार के बदनाम करमान | कृषि कानून में किसानक लिजी फसल बेचन में जो बेरियर लागी रछी उ ख़त्म भयान| एमएसपी निर्धारित करी गये धानेक खरीद उ आधार में हुमरे | किसानोक के बतून छू की मंडी आब ले छू और भविष्य में ले रोली | किसान किसान रेट पता करे आजी जां आसानी होली , वां अफुड फसल बेच सकनन  |

 

 

 

 

पहाड़ी समाचार उत्तराखंडक काम में जल जीवन मिशन में पीएम नरेन्द्र मोदी करी तारीफ

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उत्तराखंडक काम में जीवन जल मिशन में पीएम नरेन्द्र मोदी करी तारीफ

         प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावतेल जो काम करी छी उकी तारीफ करी

राज्य व्यूरो , देहरादून :  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल जीवन मिशन में प्रदेश सरकारेक कामेक तारीफ करी | उनील क की मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जो काम करी उ सिर्फ एक रुपमे में पाणीक कनेक्शन दिनक बीड़ा उठा बल्कि उत्तराखंड में जो सरकार छू उली वर्ष 2022  तक राज्यक हर एक घर तक पाणी पुजुनक लक्ष्य राखी खरो | उत्तराखंड में कोरोना दौर में बीती पांच महीन में 50 हजार परिवार के पाणीक कनेक्शन दी हालन | यो प्रदेश सरकारेक प्रतिबध्दता के प्रदर्शित करी |

मंगल वारक दिन नमामि गंगे मिशनक अंतर्गत उत्तराखंडक आठ परियोजनाक वर्चुअल लोकार्पण करन बखो पधानमंत्री नरेंद्र मोदी क की उत्तराखंडक हजारोंक घरों में पीनेते पाणी नी छी | पहाड़ में , जां चलनते आफत उछी , वां पिनेक पाणी लीजी सबसे ज्याद आफत महिलाओ बहनों ऊ बेटियों के उछी यों सप्पे चुनौतियों भे निपट्नेक लिजी जल शक्ति मंत्रालय क गठन करी ग्यो | यों मंत्रालय पाणी भे जुड़ी चुनौतिक दगाड – दगाड देशक गॉव में हर घर तक पाणी पुजुनेक काम में जुटी रे | यो मिशन गॉव  व गरीब घर तलक पाणी पुजुनक अभियान तो छू ही दगाड में य ग्राम स्वराज व ग्राम सशक्तिकरण के नई उर्जा दिनक काम ले करमो | मिशन क जो नई लोगो बनाई ग्यो , उ निरन्तर यो बातक प्रेरणा दयोल की पाणीक एक-एक बूदं के बचून जरुरी छू |

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावतेल क की जल संचय और जल संरक्षण के ले भेरन जनचेतनाक संचार हे रों | यो आन्दोलन जन – जनक विषय बन ग्यो वर्ष 2014 भे नमामि मांगे मिशन मोड़ में काम कर्म्छी | येक लिजी पर्याप्त बजट क व्यवस्था करी ग्ये | हगील साल हरिद्वार में कुंभ मेले समय में गंगा जल आचमन योग होल | शोधित पाणी के फिर इस्तेमाल करनक काम करी जाल |गंगा सहायक नदियों में ले काम करी जाल | मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावतेली यो परियोजनओं क लोकार्पणक लिजी प्रधानमंत्री और केंद्र सरकारेल आभार जता |

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पहाड़ी समाचार : ‘मधु न्याय पंचायत क्षेत्र’ आब हर जील्ल में होल

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‘मधु न्याय पंचायत क्षेत्र’ आब हर जील्ल में होल
राज्य व्यूरो , देहरादून : किसानोंक आय दोगुना करनेक कोशिश में जुटी रे प्रदेशक सरकार आब उद्यान विभागक माध्यम भे शहद उत्पादनक क्षेत्र ठुल कदम उठुन जमरो | येक तहत प्रत्येक जील्लक एक-एक न्याय पंचायत में मौनपालनक क्लस्टर आधार में बढावा दिनीते ‘मधु न्याय पंचायतक’ तौर में विकसित करी जाल | कृषि और उद्यान मंत्री सुबोध उनियालेली अधिकारियोक न्याय पंचायतोक चयन फटाफट करनक निर्देश दी खरान |
प्रदेश में अयेल करीब 1600 मीट्रिक टन शहदक उत्पादन हूँ | इम्मे करीब 300 मीट्रिक टन देशी आजी शेष यूरोपियन मधुमक्खियाँ भे मिलु | मैदानी आजी पर्वतीय स्वरूप वाल उत्तराखंड में उत्पादित शहदक भली मांग छू विशेषकर पहाड़ में उत्पादित हुनी वाल शहदक | चम्पावत जील्ल में तो मौनपालनक जरिये शहदक ठीकठाक कारोबार छू हालाँकि, पर्वतीय जाग में , मगर व्यावसायिक दृष्टिकोण भे य आकार ने ले पामरो |
एसे देखते ही सरकारेली आब मौनपालनक बढ़ावा देभेर शहद उत्पादन के किसानोंक आयक जरिया बनुनेक ठान खरी | कृषि आजी उद्यान मंत्री सुबोध उनियालक अनुसार पेली चरण में सप्पे 13 जील्ल में एक – एक न्याय पंचायत में वृहद पैमाने में मौनपालनक बढ़ावा दीई जाल | जाहिर छू इम्मे शहदक उत्पादन बडल आजी किसनोक लिजी अतिरिक्त आय होली | यो बार अधिकारियोंक केए कार्ययोजना जल्द तैयार करनते कई ग्यो उनील क की मधु न्याय पंचायतक चयन में उ न्याय पंचायतोक प्राथमिक दे दी जाल जां आइएमए विलेज योजना में आच्छादित गावं छीन |
कैबिनेट मंत्री उनियालेली क की शहद उत्पादन जैविक मोड में होल | जैविक शहदक मांग ज्याद छी | उनील क की शहद उत्पादनक लिजी बड़ी पैमान में मौनपालन भे फसलक पैदावार बडूनेक में ले मदद मिली | वजह यो छी की परागण में मधुमक्खी मुख्य भूमिका निभा |
फसल पैदावार बड़ेली जबत येक फेद ले किसानेक होली उनील बता की शहदक विपणनक व्यवस्था ले की जाल |
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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ‘Uttarakhand Open University’ Online Admission…

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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय Uttarakhand Open University

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में (उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय) Uttarakhand Open University का Online Admission Form कैसे भरे तथा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के बारे में बताने वाले है| यदि आप जानना चाहते है “form” कैसे भरे तो इस post को अंत तक जरुर पढ़े|


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क्या है उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय? Uttarakhand Open University

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय उत्तराखंड राज्य के हल्द्वानी में स्थित एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है| इस विश्वविद्यालय की स्थापना उत्तराखंड विधानसभा के अधिनियम से 31 अक्टूबर, 2005 को हुई| उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा का लोकतान्त्रिकरण करना था,ताकि जनसंख्या के एक बड़े भाग तक व्यवसायिक शिक्षा की पहुँच हो सके|


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Uttarakhand Open University में Online Admission आसानी से कैसे करे?

Step 1.सबसे पहले आपको Uttarakhand Open University की website www.UOU.ac.in पर Click करना होगा| इसके बाद इसी page में आपको Admission Summer 2019-20 करके option दिखाई देगा इस option  में आपको Click करना होगा|


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Step 2. उसके बाद आपको दूसरे page में Click Here for Online Admission पर Click करना होगा|
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Step 3. इसके बाद आपको अगले page में Click Here to Proceed पर click करना होगा|


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Step 4. इसके बाद आपको अगले page में General Instruction अभ्यार्थी द्वारा घोषणा (Dedaration By The Applicant) पूछा जायेगा इस पेज को ध्यान से पढ़े| उसके बाद I agree to abide by the rules and regulations.पर (सही का निशान ) लगा के नीचे दिए गए Option पर Click करे| अगर आप new student है तो For new Student Only पर click करे| अगर आप पहले से इस College में पढ़े है, तो For Already Enroll in University पर click करे|


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Step 5.   आपको form भरने से पहले अपने सारे document तैयार करने होंगे  जैसे फोटो, हस्ताक्षर (signature), 10th मार्कशीट/सर्टिफिकेट, 12th मार्कशीट/सर्टिफिकेट,तथा बी.ए, बीएससी, बी. कॉम  की  Degree तथा साथ में (अभ्यार्थी शपथ पत्र ) Self declaration form duly filled and signed by the candidate  लगा कर form भरे |

इस page में आप  अपना सत्र (वर्ष) ,सेण्टर, क्लास भरे| उसके बाद search पर Click करके नीचे दिए गए Option में से अपना सेंटर चुने|


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Step 7. इसके बाद आपको अगले page में student profile Information भरना होगा |


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Step 8. इसके बाद आपको Student Basic Information हाईस्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार भरना होगा |
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Step 9. यहाँ पर आपको Academic Qualificatio class 10 onwards शैक्षिक योग्यता कक्षा 10 से आगे  पूछे गए निर्देशों के अनुसार भरना होगा|
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Step 10. इसमें आपको Image Information भरनी है  यहाँ पर आप studant Image में Choose file पर Click करके photo Upload करे|

उसके बाद नीचे Upload Signature में  Choose file पर Click करके Signature Upload करे|


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Step 11. यहाँ पर आपको  (Image Information) अपने document Upload करने है|  नीचे दिए गए  Option, 10/High School/Matriculation Certificate   में Choose File पर Click करके अपने High School के (हाई स्कूल, मार्कशीट/सर्टिफिकेट) Document Upload करे| दूसरे Option में 12/Senior Secondary Certificate (इंटरमीडिएट, मार्कशीट/सर्टिफिकेट) Upload  करे| तीसरे Option में Admission Eligibilty Document अगर आपके पास 12th के बाद की Degree हो तो वो भी आप इसमें Upload कर सकते है| चौथे (4)Option में आपको अपना शपथपत्र (Declaration Document) Upload करना हैं|


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इस form को भरने के बाद आपको Proceed पर Click करना है| उसके बाद आपको अपने Admission Form तथा Document को Verify करना है| यदि आपके सारे document सही है तो आपको Payment करना है payment करने  के बाद आपको अपने इस form को Copy करके Download करना है| उसके बाद form को अपने Select किए हुए अध्यन केंद्र में जमा करें|

यदि आपको Online Admission करने में कोई परेशानी हो रही है तो नीचे दिए गए video में विस्तारपूर्वक जानकारी ले सकते है, और आसानी से घर बैठे अपना Online Admission कर सकते हैं|
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उमीद करते हैं आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा अगर आपको यह पसंद आये तो इसे like तथा नीचे दिए बटनों द्वारा share जरुर करें|
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बेडू फल के फायदे एवं औषधीय गुण Benefits and Medicinal Properties of Bedoo Fruit…

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‘बेडू फल’ उत्तराखंड Bedoo Fruit Uttarakhand

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “बेडू फल उत्तराखंड Bedoo Fruit Benefits” के बारे में बताने वाले है यदि आप जानना चाहते है “बेडू फल उत्तराखंड Bedoo Fruit Benefits” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|


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बेडू फल के फायदे एवं औषधीय गुण

Benefits and Medicinal Properties of Bedoo Fruit

उत्तराखंड राज्य में कई प्राकृतिक औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं , जो हमारी सेहत के लिए बहुत ही अधिक फायदेमंद होती हैं। बहुत ही कम लोग खासकर की शहरों में बसने वाले लोगों को इस पहाड़ी फल के बारे में जानकारी नहीं है। बेडू मध्य हिमालयी क्षेत्र के  जंगली फलों में से एक है। समुद्र के स्तर से 1,550 मीटर ऊपर स्थानों पर जंगली अंजीर के पौधे बहुत ही सामान्य होते हैं। यह गढ़वाल और कुमाऊँ के क्षेत्रों में इनका सबसे अच्छे से उपयोग किया जाता है।


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ये पेड़ जंगलों में बहुत कम पाए जाते हैं, लेकिन गाँवों के आसपास, बंजर भूमि, खेतों आदि में उगते हैं। फल लोगों को बहुत पसंद आते हैं।  और इन्हे बिक्री के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यह मीठा और रसदार होता है, जिसमें कुछ कसैलापन होता है, इसके समग्र फल की गुणवत्ता उत्कृष्ट है।

बेडू फल जून जुलाई में लगता है एक पूर्ण विकसित जंगली अंजीर का पेड़ अनुकूलित मौसम में  25 किलोग्राम के आस पास फल देता है।बीज सहित संपूर्ण फल खाने योग्य  होता है। बेडू के पत्ते जानवरों के लिए चारे का काम करती है यह दुधारू पशुओं के लिए काफी अच्छी मानी जाती हैं  कहा जाता है कि बेडू के पत्ते दुधारू पशुओं को खिलने से दूध में बढोतरी होती है|
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उत्तराखंड का सुप्रसिद्ध लोक गीत बेडू पाको Bedoo pako song

बेडू पाको बारो मासा, ओ नरणी काफल पाको चैता मेरी छैला,

बेडू पाको बारो मासा, ओ नरणी काफल पाको चैता मेरी छैला,

अल्मोड़ा की, नंदा देवी, ओ नरणी फूल चढोनो पाती,मेरी छैला

इस लोकगीत के रचयिता (लेखक) बृजेन्द्र लाल शाह तथा मोहन उप्रेती हैं। यह गीत सर्वप्रथम 1952 राजकीय इंटर कॉलेज नैनीताल, के मंच में गाया गया| अब यह गीत उत्तराखंड ही नही दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं|  इस गीत के माध्यम से यह बताया गया है की बेडू फल वर्ष भर पकते रहता है|
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बेडू के फल कहाँ-कहाँ पाया जाता है?

यह उत्तराखण्ड के अलावा पंजाब, कश्मीर, हिमाचल, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, सोमानिया, इथीयोपिया तथा सुडान में भी पाया जाता है। विश्व में बेडु की लगभग 800 प्रजातियां पाई जाती है।

वैसे तो बेडु का सम्पूर्ण पौधा ही उपयोग में लाया जाता है जिसमें छाल, जड़, पत्तियां, फल तथा चोप औषधियों के गुणो से भरपूर होता है| हाथ पावं में चोट लगने पर इसका चोप (बेडू पौधे से निकलने वाला सफ़ेद दूध जैसा) लगाने से चोट ठीक हो जाती है|


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बेडू फल फायदे  Bedoo Fruit Benefits

बेडू एक बहुत ही स्वादिष्ट फल है। पहाड़ी क्षेत्रों में सभी के द्वारा बहुत पसंद किया जाता है। बेडू फल पकने के बाद एक रसदार फल की भाती होता है। इस फल से विभिन्न उत्पादों, जैसे स्क्वैश, जैम और जेली बनाने के काम भी आता है।

इसमें मुख्य रूप से शर्करा और श्लेष्मा गुण होते हैं और, तदनुसार कब्ज के समस्याओ में भी काफी फायदेमंद होती है |


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बेडु के फल सर्वाधिक मात्रा में कार्बनिक पदार्थ होने के साथ-साथ इसमें बेहतर एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाये जाते हैं जिसकी वजह से बेडु को कई बिमारियों जैसे – तंत्रिका तंत्र विकार तथा जिगर की  बिमारियों के निवारण में भी प्रयुक्त किया जाता है

इसक उपयोग वसंत की प्रारंभिक सब्जी के रूप में किया जाता है। उन्हें पहले उबाला जाता है और फिर निचोड़ कर पानी निकाला जाता है। फिर उनसे एक अच्छी हरी सब्जी तैयार की जाती है।

इसक फल कच्चा मीठा रसीला होता है । बिना फलों और युवा अंकुरों को पकाया जाता है और सब्जी के रूप में भी खाया जाता है ।
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‘सारी गाँव’रुद्रप्रयाग उत्तराखंड Sari Village Rudraprayag Uttarakhand…

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सारी गाँव,रुद्रप्रयाग उत्तराखंड ‘Sari Village’ Rudraprayag Uttarakhand

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन के इस पोस्ट में “सारी गाँव,रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड )Sari Village Rudraprayag Uttarakhand के बारे में बताने वाले है यदि आप जानना चाहते हैं “सारी गाँव, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)  Sari Village Rudraprayag Uttarakhand” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|


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सारी गाँव, उत्तराखंड भारत रुद्रप्रयाग Sari Village Rudraprayag Uttarakhand

 

उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित सारी गाँव उखीमठ के पास 6554 फीट की ऊंचाई पर स्थित है| यह उत्तराखंड राज्य में बहुत छोटा और एक सुन्दर गांव है। यह एक बहुत ही सुंदर झील देवरिया ताल का आधार शिविर है।

देवरिया ताल यहां से केवल 2 किलोमीटर ट्रेक है। देवरिया ताल 7800 फीट की ऊंचाई पर है। सारी गांव देवरिया ताल के लिए आधार शिविर है और इसका उपयोग ट्रेक के लिए तुंगनाथ मंदिर और चोपता के लिए बेस के रूप में किया जाता है चोपता सड़क मार्ग से सारी तक पहुँचा जा सकता है।

यहाँ की सड़क यात्रा बहुत ही रमणीय है| सारी गाँव से चोपता तक केवल एक से दो घंटे लगते हैं। सारी गाँव में सुंदर सेब और आड़ू ऑर्किड पा सकते हैं। पर्यटन और खेती स्थानीय ग्रामीणों की आय का मुख्य स्रोत है। यह गांव ओक और रोडोडेंड्रॉन के घने जंगलों के बीच स्थित है।


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अगर आप फरवरी और मार्च के दौरान यहां आते हैं तो आप देवरिया ताल और देवरिया ताल में फूलों से भरे कुछ खूबसूरत रोडोडेंड्रन पेड़ देख सकते हैं। सारी गाँव बेहद रमणीय एवं प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नही यहाँ की खूबसूरती प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं|

सारी गाँव किसी बाजार के पास नहीं है| यहाँ का निकटतम बाजार ऊखीमठ है। यदि आप वहां जा रहे हैं तो आपको अपने साथ सभी आवश्यक सामान ले जाना चाहिए और यदि आप कुछ महत्वपूर्ण लेना भूल गए हैं तो आप उखीमठ से खरीद सकते हैं। यदि आप एक बार वहां जाते हैं तो आप निश्चित रूप से हमेशा के लिए यहां रहना पसंद करेंगे|
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सारी गाँव के बारे में About Sari Village Rudrprayag

सारी गाँव या साड़ी गाँव एक बहुत ही सुंदर झील देवरिया ताल के लिए आधार शिविर है सारी गाँव की सड़क यात्रा बहुत ही रोमांटिक है जो आपको आश्चर्यजनक पहाड़ों से प्यार कराती है। सड़क मार्ग से चोपता पहुंचने में साड़ी से केवल एक घंटे का समय लगता है। कई बार जब चोपता में सभी होटल बर्फ गिरने के कारण बंद हो जाते हैं। तो, आप अपने रहने के लिए बेस कैंप के रूप में साड़ी का उपयोग कर सकते हैं। आप सारी में कुछ लॉज या होम स्टे आसानी से पा सकते हैं।देवरिया ताल चंद्रशिला शिखर ट्रेक एक आसान-मध्यम ट्रेक है। इस ट्रेक में पहली बार हिमालयी ट्रेकिंग की दुनिया में कदम रखने वालों के लिए यह बेहद खुबसूरत जगह हैं। यहां आप पक्षियों, तितलियों, प्रकृति के रंगों, ओक और रोडोडेंड्रॉन पेड़ों की कई प्रजातियां देख सकते हैं।


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यहाँ तक कैसे पहुंचे How To Reach?

यहाँ तक आप आसानी से जा सकते हैं|

हवाई अड्डा- निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा हैं यहाँ से रुद्रप्रयाग सारी गाँव की दूरी लगभग 207 किलोमीटर हैं यहाँ से आप आसानी से बस अथवा कार से जा सकते है|

ट्रेन- निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है यहाँ से रुद्रप्रयाग सारी गाँव की दूरी लगभग 192 किलोमीटर है यहाँ से आप टैक्सी से आसानी से जा सकते है|
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Google Map Of Sari Village Rudraprayag


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Sari Village Rudraprayag In 360 Degree


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‘घिंगारू’ स्वादिष्ट,फल (औषधीय गुणों से भरपूर फल के फायदे) “Ghingharu Fruite” Uttarakhand …

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 ‘घिंगारू’ स्वादिष्टफल, (औषधीय गुणों से भरपूर फल के फायदे) Ghingharu Fruite Uttarakhand

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में उत्तराखंड में पाया जाने वाला “औषधीय गुणों से भरपूर  ‘घिंगारू’ फल के फायदे Ghingharu Fruite” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं “घिंगारू फल के फायदे Ghingharu Fruite” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|


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‘घिंगारू’ औषधीय गुणों से भरपूर Ghingharu Fruite

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में पाया जाने वाला घिंगारू औषधीय गुणों से भरपूर है| यह समुद्रतल से 3000 से 6500 फीट की ऊंचाई पर उगने वाला रोजसी कुल का बहुवर्षीय पौधा हैं| पर्वतीय क्षेत्र के जंगलो में पाया जाने वाला उपेक्षित घिंघारू ह्रदय को स्वस्थ रखने में सक्षम हैं| उसके इस गुण की खोज रक्षा जैव उर्जा अनुसंधान संस्थान पिथौरागढ़ ने किया हैं| घिंघारू के फलों के रस में रक्तचाप और हाईपरटेंशन जैसी बीमारी को दूर करने की क्षमता हैं|


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छोटी सी झाड़ियों में उगने वाला ‘घिंगारू’ एक जंगली फल है। यह सेव के आकार का लेकिन आकार में बहुत छोटा होता है, स्वाद में हल्का खट्टा-मीठा। बच्चे इसे छोटा सेव कहते हैं और बड़े चाव से खाते हैं। यह फल पाचन की दृष्टि से बहुत ही लाभदायक फल है।

इस फल का प्रयोग भी औषधि के तौर पर किया जाता है, हालांकि ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसकी गुणवता से अनजान हैं।‘घिंगारू’ पत्तियों से पहाडी हर्बल चाय बनायी जाती है ! इसके फलों को सुखाकर चूर्ण बनाकर दही के साथ खूनी दस्त का उपचार किया जाता है ! इस वनस्पति से प्राप्त मजबूत लकड़ियों का इस्तेमाल लाठी या हॉकी स्टिक बनाने में किया जाता है! फलों में पर्याप्त मात्रा में शर्करा पायी जाती है जो शरीर को तत्काल ऊर्जा प्रदान करती है इस वनस्पति का प्रयोग दातून के रूप में भी किया जाता है जिससे दांत दर्द में भी लाभ मिलता है !
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प्रोटीन के भरपूर घिंघारू पौधा Ghingharu Fruite 

घिंघारू का वन अनुसन्धान केंद्र ने अपनी नर्सरी में सफल संरक्षण किया है| पेड़ पर फल व फूल दोनों आ चुके है| घिंघारू में प्रोटीन की काफी मात्रा होती है| इसके औषधीय गुणों को पता करने के लिए रिसर्च भी किया जायगा|

इस पौधे का वैज्ञानिक नाम पैइराकैंथ क्रेनुलारा है| झाड़ीनुमा यह प्रजाति पूर्वी एशिया के पर्वतीय इलाकों में पाई जाती है| कुमाऊँ में इसके पौधे काफी मात्रा में पाए जाते है|संरक्षण को लेकर कुछ समय पूर्व वन अनुसंधान केंद्र ने नर्सरी में कवायत शुरू की थी| इसके फलों का सेवन वन्य जीवों से लेकर आम लोग भी चाव से खाते हैं| बारिश के दिनों में छोटे मवेशियों का यह मुख्य आहार माना जाता है| घिंघारू की लकड़ी कृषि यंत्र बनाने में काम आता हैं इसकी लकड़ी काफी मजबूत मानी जाती हैं|


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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय गुणों से भरपूर जंगली फलों के बारे में जानने के लिए नीचे दिए गए link पर click करें|


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काफल के फायदे

हिसालू के फायदे

किल्मोड़ा के फायदे

तिमुला के फायदे

आडू के फायदे

खुबानी के फायदे

शहतूत ( किम) के फायदे
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तुलसी पौधा के लाभ व् औषधीय गुण Tulsi Plant Benefit (Uttarakhand)…

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तुलसी पौधा के लाभ व् फायदे tulsi plant Benefit

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “तुलसी पौधे  के फायदे व गुणों  tulsi plant” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते है “तुलसी पौधे फायदे व गुणों tulsi plant” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|


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तुलसी पौधा के बारे में About Tulsi Plant

तुलसी का पौधा पवित्र पौधा माना जाता है यह हर घर में पाया जाता है तुलसी को देवी के रूप पूजा जता हैं| धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ तुलसी में अनेक प्रकारके औषधीय गुण भी पाए जाते हैं आयुर्वेद में युगों – युगों  से तुलसी का प्रयोग कई औषधीयां बनाने के लिए किया जाता हैं| तुलसी हमारे शरीर के लिए  एंटी बायोटिक  एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल का काम करती है|


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तुलसी अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी पौधा है। इसके सभी भाग अलौकिक शक्ति और तत्वों से परिपूर्ण माने गए हैं। तुलसी के पौधे से निकलने वाली सुगंध वातावरण को शुध्द रखने में तो अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती ही है, भारत में आयुर्वेद चिकित्सा पध्दति में भी तुलसी का बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। तुलसी का सदियों में औषधीय रूप में प्रयोग होता चला आ रहा है। तुलसी दल का प्रयोग खांसी, विष, श्वांस, कफ, बात, हिचकी और भोज्य पदार्थों की दुर्गन्ध को दूर करता है। इसके अलावा तुलसी बलवर्ध्दक होती है तथा सिरदर्द स्मरण शक्ति, आंखों में जलन, मुंह में छाले, दमा, ज्वर, पेशाब में जलन व विभिन्न प्रकार के रक्त व हृदय संबंधी बीमारियों को दूर करने में भी सहायक है।
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पुराणों और शास्त्रों के अनुसार

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार माना जाए तो ऐसा इसलिए होता है कि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है। क्योंकि दरिद्रता, अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास नही होता। अगर ज्योतिष की माने तो ऐसा बुध के कारण होता है। बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है और बुध को पेड़ पौधों का कारक ग्रह माना जाता है। बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध के कारक वस्तुओं पर भी होता है। अगर कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा उत्तरोत्तर बढ़ता रहता है।


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तुलसी पौधे की मान्यता –

कहा जाता है कि तुलसी के पौधे को लगाने से घर के आगन में सांप नही आता|

तुलसी के लाभ/ फायदा  – Tulsi Plant Benefit


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धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ तुलसी औषधीय गुणों से भी भरपूर है। आयुर्वेद में तो तुलसी को उसके औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व दिया गया है। तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है। इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। तुलसी के पत्ते को पीस के चहरे में लगाने से कील मुहासे ठीक होते हैं|  तुलसी के पांच पत्ते खाने से मौसमी बुखार व जुकाम जैसी समस्याएं दूर रहती है।

तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है। मुंह के छाले दूर होते हैं व दांत भी स्वस्थ रहते हैं।

दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में रोजाना तुलसी खाने व तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है।
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देवलगढ़ गौरा देवी मंदिर का इतिहास History Of Devalgarh Gaura Devi Temple (Uttarakhand)…

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देवलगढ़ गौरा देवी मंदिर का इतिहास History Of ‘Devalgarh Gaura Devi Temple’

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “देवलगढ़ में स्थित गौरी माता मदिर Devalgarh Gaura Devi Temple” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं “गौरी माता मदिर  Devalgarh Gaura Devi Temple” के बारे में तो इस पोस्ट  को अंत तक जरुर पढ़े|


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देवलगढ़ के बारे में About Devalgarh (Uttarakhand)

 

देवलगढ़ एक पहाड़ी शहर है जो उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित है और एक अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल खिरसू से 15 किलोमीटर दूर स्थित है। इस शहर का नाम कांगड़ा के राजा देवल से पड़ा है जिसने इस शहर की स्थापना की थी। श्रीनगर से पहले, 16 वीं शताब्दी में अजय पाल के शासनकाल के दौरान देवलगढ़ गढ़वाल साम्राज्य की राजधानी था। अपने अतीत के अतीत के कारण, यह शहर अपने पूजनीय मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। विशेषकर राज राजेश्वरी मंदिर। जो अति सुंदर प्राचीन गढ़वाली वास्तुकला को दर्शाता है जो इस खूबसूरत शहर को सुशोभित करता है।


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देवलगढ़ का पहाड़ी शहर तब लोकप्रिय हुआ जब गढ़वाल राज्य के राजा अजय पाल ने अपनी राजधानी को चांदपुर गढ़ी से देवलगढ़ स्थानांतरित कर दिया। 1512-1517 तक श्रीनगर में स्थानांतरित होने से पहले यह गढ़वाल साम्राज्य की भागदौड़ वाली राजधानी बनी रही। उसके बाद भी, शाही दल देवगढ़ में अपनी गर्मी और श्रीनगर में सर्दियाँ बिताता था। ऐसा था देवलगढ़ शहर की खूबसूरती। वर्तमान में यहाँ कई ऐतिहासिक मंदिर हैं| जो देवलगढ़ की खूबसूरती में चार चाँद लगाता हैं |
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देवलगढ़ में स्थित प्राचीन मंदिर

देवलगढ़ प्राचीन मंदिरों के समूह के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें मध्ययुगीन काल में बनाया गया माना जाता है। मंदिरों की वास्तुकला अति सुंदर गढ़वाली वास्तुकला से प्रभावित करती है। देवलगढ़ में कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं|


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राज-राजेश्वरी मंदिर

राज-राजेश्वरी मंदिर देवलगढ़ में प्रसिद्ध तीर्थस्थल है जो बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करता है भक्त यहाँ  देवी से आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, मंदिर देवी राजेश्वरी को समर्पित है जो गढ़वाल राजाओं के स्थानीय देवता हैं। हर साल अप्रैल के महीने में मेला लगता है। धार्मिक महत्व के अलावा, मंदिर पुरातत्व दृष्टिकोण से भी एक सुप्रसिद्ध है।


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गौरा देवी मंदिर का इतिहास

गौरा देवी मंदिर देवी पार्वती को समर्पित है और माना जाता है कि इसे 7 वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया था और इसे केदारनाथ और बद्रीनाथ के रूप में काफी पुराना माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि मंदिर का निर्माण भगवान कुबेर ने किया था। फसल के मौसम के दौरान, एक बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। स्थानीय लोग ताज़े गेहूँ से बने रोटी को देवता को (सीख)प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं। देवलगढ़ में अन्य महत्वपूर्ण स्थान लक्ष्मीनारायण मंदिर और सोम-की-डंडा (राजा का मचान) है। गौरा देवी (गैरजादेवी) मन्दिर प्रसिद्ध हैं |

गौरा देवी (गैरजादेवी) मन्दिर की गणना प्राचीन सिद्धपीठों में की जाती है। सातवीं शताब्दी का बना यह पाषाण मन्दिर प्राचीन वास्तुकला का अतुलनीय उदाहरण है। राजराजेश्वरी गढ़वाल के राजवंश की कुलदेवी थी इसलिये उनकी पूजा देवलगढ़ स्थित राजमहल के पूजागृह में होती थी। जनता के लिये एक और मन्दिर की आवश्यकता महसूस करते हुये गौरा मन्दिर का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्य उपरान्त होने के पश्चात विषुवत संक्रान्ति (वैशाखी) को सुमाड़ीगांव से श्री राजीवलोचन काला जी की अगुवाई में देवलगढ़ मन्दिर में स्थापित किया गया। इस मन्दिर में शाक्त परंपरा प्रचलित रही है। यहां मुख्यरूप से भगवती गौरी व सिंह वाहिनी देवी कि प्रतिमा स्थापित हैं।


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यहां से हिमालय का बड़ा मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। यह स्थानीय निवासियों की कुलदेवी हैं तथा प्रतिवर्ष बैशाखी को यहां विशाल मेले का अयोजन होता है। दूर दूर से देवी के भक्त आकर यहां इसमें सम्मिलित होते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि कुबेर ने गौरा माता का आशिर्वाद प्राप्त कर इस मन्दिर का निर्माण कराया था। गढ़वाल के राजवशं की कुलदेवी राजराजेश्वरी और सत्यनाथ के लिये प्रसिद्ध देवलगढ़ 6 वर्ष तक गढ़वाल राज्य की राजधानी रह चुका है। जनश्रुति के अनुसार यहां देवल ऋषि का आश्रम हुआ करता था। बाद में गुरू गोरखनाथ के शिष्यों ने यहां सत्त्यनाथ की स्थापना की। कहा जाता है कि गढ़वाल की भूमि गौरा माता का ही आशिर्वाद है। यहां से हिमालय का बड़ा मनोहारी दृश्य दिखाई देता है।
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देवलगढ़ का एतिहासिक गौरा देवी मेला 

उत्तराखंड के 52 गढ़ में एक देवलगढ़ स्थित माँ गौरा देवी के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर में हर वर्ष बैशाखी के दिन एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। माँ भगवती गौरादेवी सुमाड़ी के काला परिवार की कुलदेवी हैं। बैसाखी के पावन पर्व पर हर वर्ष माँ गौरा भगवती रीतिनुसार 4 महीने मायके में रहने के बाद ससुराल आती है। 13 अप्रैल को रात्रि जागरण किया जाता है। 14 अप्रैल को माँ भगवती गर्भगृह से बाहर आकर हिन्डोंला खेलती हैं। देवलगढ मे माँ गौरा देवी के दर्शन के लिए दूर-दूर से हजारों भक्त दूर-दूर से आते हैं। माँ भगवती गौरा देवी सभी आये हुए भक्तों के रोग व्याधि, दुख, दरिद्र लेकर संतान सुख, वैभव, कीर्ति, यश व ज्ञान का आशीष देते हुए भावुक होकर नम आंखों से अपने मायके वालों और सभी भक्तों से विदाई लेकर, अपने गर्भ में थान मान हो जाती है।


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यहाँ तक कैसे पहुंचे How To Reach?

यहाँ तक आप आसानी से पहुँच सकते है|

हवाई अड्डा – निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा हैं| यहाँ से देवलगढ़ की दूरी लगभग 140 किलोमीटर हैं| यहाँ से आप आसानी से देवलगढ़ तक जा सकते हैं|

ट्रेन- निकटतम रेलवे स्टेशन कोटद्वार रेलवे स्टेशन हैं यहाँ से देवलगढ़ की दूरी लगभग 135 किलोमीटर हैं| यहाँ से आप आसानी से टैक्सी अथवा बस से देवलगढ़ तक जा सकते हैं|
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Google Map OF Devalgarh Temple

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जानिए उत्तराखंड ,में स्थित ’25 प्रसिद्ध महदेव मंदिर’ के बारे में ‘Top 25 Most Popular Mahadev Temple’ Uttarakhand…

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जानिए उत्तराखंड ,में स्थित 25 प्रसिद्ध महदेव मंदिर  के बारे में Top 25 Most Popular Mahadev Temple Uttarakhand

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट  में उत्तराखंड ,में स्थित “25 प्रसिद्ध महदेव मंदिर Top 25 Most Popular Mahadev Temple Uttarakhand” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते है उत्तराखंड ,में स्थित “25 प्रसिद्ध महदेव मंदिर Top 25 Most Popular Mahadev Temple Uttarakhand” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|
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श्री प्रकाशेश्वर महादेव (शिव मंदिर) देहरादून

श्री प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर हिंदू भगवान शिव का मंदिर है जो उत्तराखंड में देहरादूनमसूरी रोड पर स्थित है यह लोकप्रिय रूप से शिव मंदिर के रूप में जाना जाता है। इस शिव मंदिर में भगवान शिव का स्फटिक शिवलिंग है। देहरादून में कई शिव मंदिर हैं, लेकिन यह शिवमंदिर विशेष है इस मंदिर में हिंदू त्योहार शिवरात्रि और सावन के महीनों में भक्तों का तांता लगा रहता हैं|


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यह प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। यह शिव मंदिर देहरादून के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां आप भगवान और देवी की कई तस्वीरें और मूर्तियां देख सकते हैं। हर रोज मंदिर को फूलों से सजाया जाता है। शिवरात्रि और सावन के अवसर पर विशेष पूजाएँ आयोजित की जाती हैं।

श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया जाता है, जहां उन्हें प्रसाद वितरित किया जाता है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है  जहां भक्त भगवान को कोई दान नहीं दे सकते। यह स्थान बहुत ही शांत है जो मन को पूर्ण विश्राम और शांति देता है।
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दंडेश्वर मंदिर अल्मोड़ा

उत्तराखंड के प्रमुख देवस्थालो में जागेश्वर धाम या मंदिर प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है | यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा मंदिर समूह है | यह मंदिर कुमाउं मंडल के अल्मोड़ा जिले से 38 किलोमीटर की दुरी पर देवदार के जंगलो के बीच में स्थित है | जागेश्वर को उत्तराखंड का पाँचवा धाम भी कहा जाता है | जागेश्वर मंदिर में 124 मंदिरों का समूह है | इनमे से दंडेश्वर मंदिर सबसे प्रमुख मंदिर माना जाता हैं| यह मंदिर जागेश्वर मंदिर परिसर से थोड़ा ऊपर की ओर स्थित है। दांडेश्वर मंदिर परिसर जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है, जिसके कई अवशेष खंडहर में बदल गए हैं। यह स्थान अर्तोला गाँव से 200 मीटर की दूरी पर है जहाँ से जागेश्वर के मंदिर शुरू होते हैं इस जगह से विनायक क्षेत्र या पवित्र क्षेत्र शुरू होता है। यह स्थान झंकार साईं मंदिर, वृद्ध जागेश्वर और कोटेश्वर मंदिरों के बीच स्थित है। डंडेश्वर मंदिर जागेश्वर में स्थित है (जागेश्वर में 124 मंदिर समूह के बीच, दांडेश्वर उनमें से एक है। यह जागेश्वर मंदिर परिसर से थोड़ा ऊपर की ओर है।


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 बैरासकुंड महादेव चमोली गढ़वाल

 

उत्तराखंड के चमोली जिले में बैरासकुंड गाँव में स्थित, बैरास्कुंड महादेव मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। बैरासकुंड में कई प्राचीन मंदिर हैं और बैरास्कुंड महादेव मंदिर उनमें से सबसे लोकप्रिय है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने बैरासकुंड महादेव मंदिरमें भगवान शिव की पूजा की जाती हैं| यहाँ प्रतिदिन सुबह 4 बजे शुरू होता है। मंदिर के मुख्य पुजारी और साधु, नेपाली महाराज, भगवान शिव की पूजा करते हैं और भगवान शिव को जल चढ़ाते हैं, और पूजा दोपहर 12 बजे तक की जाती हैं| गाँव और आस-पास के गाँव के लोग भगवान शिव की पूजा करने के लिए मंदिर में आते हैं और ग्रामीणों द्वारा विभिन्न धार्मिक समारोहों का आयोजन साल भर किया जाता है। मंदिर समिति महा शिवरात्रि के दौरान मंदिर में एक धार्मिक मेले का आयोजन करती है। विभिन्न क्षेत्रों के लोग मेले में शामिल होते हैं और भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं। सावन के माह में यहाँ शिवजी को जल चढाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता हैं|


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गोपेश्वर महादेव मंदिर

उत्तराखंड राज्य,  बागेश्वर जिले के धपोलासेरा में भद्रवती नदी के तट पर स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर हैं| यहाँ महाशिवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता हैं। दूर-दूर के गांवों से भक्त मंदिर में आते हैं। सुबह से ही जलाभिषेक को लोगों की लंबी लाइन लगी। पूरे दिन मंदिर में पूजा अर्चना चलती रही।


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गोपेश्वर महादेव क्षेत्र का एकमात्र शिव मंदिर है। यहां पर भगवान शिव की शिवरात्रि पर विशेष पूजा की जाती है। मंदिर के पुजारी रावल लोग हैं। स्थानीय लोगो का कहना हैं कि मंदिर की स्थापना द्वापर युग से हुई है। वहा के लोगो का कहना हैं कि यहां पर शिव लिंग की उत्पत्ति स्वयं हुई है। जिसकी गहराई भद्रवती नदी तक है। इस शिवलिंग में जल अर्पण करने पर वह बाहर नहीं दिखाई देता है। कहते हैं कि पानी शिवलिंग से होकर नदी में समा जाता है। उन्होंने बताया कि जब क्षेत्र में बारिश नहीं होती तो इस मंदिर में सहस्त्र घट पानी चढ़ाया जाता है। इसके बाद लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है।
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मोटेश्वर महादेव मंदिर काशीपुर

मोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान भीम शंकर महादेव के रूप में भी जाना जाता है जो उत्तराखंड राज्य में   उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर गाँव में भगवान शिव का मंदिर है। शिवलिंग की मोटाई अधिक होने के कारण ही इसे मोटेश्वर के नाम से जाना जाता है| प्राचीन काल में, इस जगह को डाकिनी राज्य के रूप में जाना जाता था। यहाँ, भगवान शिव एक ज्योतिर्लिंग के रूप में देखा जा सकता है जिसे भीम शंकर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव पीठासीन देवता हैं लेकिन इस प्राचीन मंदिर में कुछ अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है। इसमें भगवान गणेश, कार्तिकेय स्वामी, देवी पार्वती, देवी काली, भगवान हनुमान और भगवान भैरव शामिल हैं। मोटेश्वर महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व है और यह मंदिर शिव भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।


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शिव कालेश्वर महादेव मंदिर

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में लैंसडाउन एक छावनी शहर तथा  सुंदर,  सुदूर पहाड़ी स्टेशन है जिसमें बहुत सारे हरियाली और लंबे पेड़ हैं। भारत लॉर्ड  लैंसडाउन के वाइसराय के बाद स्थापित  किया गया। (14 जनवरी 1845 – 3 जून 1 9 27), पहाड़ी स्टेशन में शहर और आसपास के क्षेत्रों के भीतर कई पर्यटक स्थल हैं। इस क्षेत्र में कई  शिव मंदिर स्थापित  हैं।

भगवान शिव का एक सदियों पुराना मंदिरकालेश्वर महादेव मंदिर लैंसडाउन लोगों के साथ-साथ बहादुर गढ़वाल रेजिमेंट के लिए भक्ति का केंद्र है। मुख्य लैंसडाउन शहर के पास स्थित, कालेश्वर महादेव का नाम ऋष कालून के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने यहां ध्यान किया

कालेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव भक्तों के बीच जाने के लिए पहली और पसंदीदा जगह संतों के लिए ध्यान की भूमि माना जाता था। आगंतुक अभी भी मंदिर के पास कई ऋषियों की समाधि देख सकते हैं।


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क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर पौडी गढ़वाल

क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर पौडी गढ़वाल से लगभग 2200 मीटर की उचाई में स्थित हैं | क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन 8 वीं शताब्दी का मंदिर है। यह अलकनंदा घाटी के किनारे बसा हुआ है और यहाँ  हिमपात पर्वतमाला का सुन्दर दृश्य दिखाई देता हैं |


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कालेश्वर मंदिर का वास्तुकला कुछ हद तक केदारनाथ के समान है। मंदिर भगवान शिव, देवी पार्वती, गणपति, कार्तिकेय, भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों को दर्शाता है। भक्तों को मोटी वुडलैंड्स पार करना होता है और सीढ़ी आपको मंदिर ले जाती है। ऐसा माना जाता है कि अद्वैत वेदांत के संस्थापक आदि गुरु शंकराचार्य जी ने मंदिर का निर्माण किया था। महा शिवरात्रि इस मंदिर में आनंद के साथ मनाया जाता है।
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कमलेश्वर महादेव मंदिर पौड़ी गढ़वाल

कमलेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर क्षेत्र में स्थित अतिप्राचीनतम शिवालयों में से एक महत्वपूर्ण शिवालय है | कमलेश्वर महादेव मंदिर एक स्थान है , जहां भगवान विष्णु भगवान शिव की पूजा करते हैं और सुदर्शन चक्र के साथ आशीषें होती हैं | स्कन्दपुराण के केदारखण्ड के अनुसार त्रेतायुग में भगवान रामचन्द्र रावण का वध कर जब ब्रह्महत्या के पाप से कलंकित हुये तो गुरु वशिष्ट की आज्ञानुसार वे भगवान शिव की उपासना हेतु देवभूमि पर आये इस स्थान पर आकर उन्होने सहस्त्रकमलों से भगवान शिव की उपासना की जिससे इस स्थान का नाम “कमलेश्वर महादेव पड़ गया ।


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नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश

नीलकंठ महादेव मंदिर , भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन पवित्र मंदिर है , जो कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम (राम झुला या शिवानन्द झुला) से किलोमीटर की दुरी पर मणिकूट पर्वत की घाटी पर स्थित है | मणिकूट पर्वत की गोद में स्थित मधुमती (मणिभद्रा) व पंकजा (चन्द्रभद्रा) नदियों के ईशानमुखीसंगम स्थल पर स्थित नीलकंठ महादेव मन्दिर एक प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्र है । नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है | यह मंदिर समुन्द्रतल से1675 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | नीलकंठ महादेव मंदिर में बड़ा ही आकर्षित शिव का मंदिर बना है एवम् मंदिर के बाहर नक्काशियो में समुन्द्र मंथन की कथा बनायी गयी है | नीलकंठ महादेव मंदिर के मुख्य द्वार पर द्वारपालो की प्रतिमा बनी है |


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ओणेश्वर महादेव मंदिर टिहरी गढ़वाल

ओणेश्वर महादेव मंदिर जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड प्रताप नगर के पट्टी ओण के मध्य स्थित ग्राम पंचायत देवाल में स्थित प्राचीन एवम् धार्मिक मंदिर  है | ओणेश्वर महादेव भगवान शिव स्वरुप है | ओणेश्वर महादेव मंदिर श्रधा , विश्वास , प्रगति और उन्नति का प्रतीक है | इस मन्दिर में श्रीफल के अतिरिक्त और किसी भी चीज की बली नहीं दी गई और आज भी मात्र एक श्रीफल और चावल अपने ईष्ट को पूजने का काम सभी श्रद्धालू करते आ रहे हैं । ओणेश्वर महादेव मंदिर के पश्वा (जिन पर देवता अवतरित होते हैं) उनमें मुख्य रूप से ओनाल गांव के नागवंशी राणा एवं खोलगढ़ के पंवार वंशज व अन्य कई प्रमुख जाति पर अवतरित होते हैं तथा देवता की पूजा के लिए ग्राम सिलवाल गांव के भट्ट जाति के बाह्मण एवं ग्राम जाखणी, पट्टी भदूरा के सेमवाल जाति के ब्राह्मण हैं। पूजा वैसे तो सभी कर सकते हैं किन्तु देवता के पूजा के लिए सिलवाल गांव के मुण्डयाली वंशज भट्ट ब्राह्मण और ग्राम जाखणी के हरकू पण्डित के वंशज की खास जिम्मेदारी मन्दिर पूजा के लिए रहती है।


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सत्येश्वर महादेव मंदिर टिहरी गढ़वाल

सत्येश्वर महादेव मन्दिर प्रमुख हिन्दू मंदिर है जो कि बौराड़ी नई टिहरी की ढाल पर स्थित है |यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है | सत्येश्वर मन्दिर परिसर में तीन छोटे , दो मध्यम और एक मुख्य मन्दिर है । छोटे वाले मन्दिरों में से एक “भैरवबाबा का मंदिर  है तथा बाकी के दो मन्दिरों में कुछ स्थापना संबधी मतभेद के कारण किसी मूर्ति की स्थापना नहीं हो पायी है ।


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बायीं तरफ जो दो मध्यम आकार के बड़े मन्दिर हैं उनमें से एक में भगवान शिव तथा माता पार्वती की वरद हस्त मुद्रा में मूर्तियां स्थापित हैं, तथा दूसरे में मां त्रिपुरी सुन्दरी दुर्गा, विघ्नहर्ता गणेश और मां काली की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। इसके अलावा मुख्य मन्दिर में एक विशाल शिवलिंग और उसके पीछे माता लक्ष्मी और विघ्न हर्ता गणेश जी की मूर्तियां स्थापित हैं। शिवरात्री के अवसर पर मंदिर में भक्तो की भीड़ का तांता लगा रहता है |
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कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग

 

कोटेश्वर मंदिर हिन्दुओ का प्रख्यात मंदिर है , जो कि रुद्रप्रयाग शहर से 3 कि.मी. की दुरी पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है | कोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है | कोटेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 14वि शताब्दी में किया गया था , इसके बाद 16 वी और 17 वी शताब्दी में मंदिर का पुनः निर्माण किया गया था | चारधाम की यात्रा पर निकले ज्यादातर श्रद्धालु इस मंदिर को देखते हुए ही आगे बढते है , गुफा के रूप में मौजूद यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है | मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने केदारनाथ जाते समय , इस गुफा में साधना की थी और यह मूर्ति प्राकर्तिक रूप से निर्मित है | गुफा के अन्दर मौजूद प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियाँ और शिवलिंग यहाँ प्राचीन काल से ही स्थापित है


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जागेश्वर मंदिर का इतिहास

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है । यह ज्योतिलिंग आठवाज्योतिलिंग माना जाता है | इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में नागेशं दारुकावने के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है । जागेश्वर के इतिहास के अनुसार उत्तरभारत में गुप्त साम्राज्य के दौरान हिमालय की पहाडियों के कुमाउं क्षेत्र में कत्युरीराजा था | जागेश्वर मंदिर का निर्माण भी उसी काल में हुआ | इसी वजह से मंदिरों में गुप्त साम्राज्य की झलक दिखाई देती है | मंदिर के निर्माणकी अवधि को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा तीन कालो में बाटा गया है कत्युरीकाल , उत्तर कत्युरिकाल एवम् चंद्रकाल | अपनी अनोखी कलाकृति से इन साहसी राजाओं ने देवदार के घने जंगल के मध्य बने जागेश्वर मंदिर का ही नहीं बल्कि अल्मोड़ा जिले में 400 सौ से अधिक मंदिरों का निर्माण किया है |

 


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टपकेश्वर मंदिर  देहरादून

टपकेश्‍वर मंदिर एक लोकप्रिय गुफा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । टपकेश्वर मंदिर देहरादून शहर के बस स्टैंड से 5.5 किमी दूर स्थित एक प्रवासी नदी के तट पर स्थित है । यह मंदिर सिध्पीठ के रूप में भी माना जाता है | टपकेश्वर मंदिर में टपकएक हिन्दी शब्द है , जिसका मतलब है बूंद-बूंद गिरना । टपकेश्वर मंदिर एक प्राकर्तिक गुफा है , जिसके अन्दर एक शिवलिंग विराजमान है | यह कहा जाता है कि गुफा के अन्दर विराजित शिवलिंग पर चट्टानों से लगातार पानी की बूंदे टपकती रहती है तथा पानी की बुँदे स्वाभाविक तरीके से शिवलिंग पर गिरती है | जिस कारण इस मंदिर का नाम टपकेश्वर मंदिर पड़ गया | मंदिर के कई रहस्य हैं और मंदिर के निर्माण के ऊपर भी कई तरह की बातें होती रहती हैं | कोई कहता है कि यहाँ मौजूद शिवलिंग स्वयं से प्रकट हुआ है , तो कई लोग बताते हैं कि पूरा मंदिर ही स्वर्ग से उतरा है | यह माना जाता है कि मंदिर अनादी काल से इस स्थान पर विराजित है और यह भी माना जाता है कि यह पवित्र स्थान गुरु द्रोणाचार्य जी की तपस्थली है |

 


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ताड़केश्वर महादेव मंदिर टिहरी गढ़वाल

ताड़केश्वर महादेव मंदिर टिहरी गढ़वाल जिले के लैंसडाउन क्षेत्र में स्थित पवित्र धार्मिक स्थान है | ताड़केश्वर महादेव मंदिर भगवान् शिवजी को समर्पित है | यह मंदिर समुन्दरी तल से 2092 मीटर ऊँचाई पर स्थित है | ताड़केश्वर धाम मन्दिर 5 किमी. की चौड़ाई मे फैला हुआ है | यह मंदिर बलूत और देवदार के पेड से घिरा हुआ है जो कि प्रकति की सुंदरता के लिये बहुत ही अच्छा है । साथ ही यहाँ कई पानी के छोटे छोटे झरने बहते हैं ।ताड़केश्वर महादेव मंदिर सिध्द पीठों में से एक है और इसे एक पवित्र स्थल माना जाता है|


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कलेश्वर महादेव मंदिर

कलेश्वर महादेव मंदिर सबसे मशहूर मंदिरों में से एक है , जिसे भगवान शिव के लिए बनाया गया था । यह मंदिर आकर्षण का केन्द्र है एवम् मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग शामिल हैं , जो स्वयं के आकार का है | भगवान शिव के प्रेमियों के लिए यह स्थान लोकप्रिय है । इस मंदिर के बारे में यह कहा जाता है कि 5000 वर्ष पहले इस स्थान पर कालून ऋषि तपस्या किया करते थे , उन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम कलेश्वर पड़ा | 5 मई 1887 में गढ़वाल रेजिमेंट की स्थापना हुई और 4 नवंबर 1887 में रेजिमेंट की प्रथम बटालियन इस मंदिर पर पहुंची |

 


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बिल्केश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार

 

बिल्केश्वर महादेव मंदिर , भगवान शिव शंकर का धाम है एवम् हरिद्वार के पास स्थित बिल्व पर्वत पर बना है | यह एक छोटा मंदिर है , जो सामान्य शिवलिंग और नंदी के साथ पत्थर से बना है एवम् यह मंदिर एक पहाड़ी क्षेत्र में जंगल से घिरा हुआ है । इस जगह में भगवान गणेश , भगवान हनुमान , महादेव और माता रानी के छोटे मंदिर भी स्थित है । यहाँ भगवान शिव के लिए बैल की पत्तियों की पेशकश करने और गंगा नदी के पानी के साथ शिवलिंग के अभिषेक करने की परंपरा है ।


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दक्ष महादेव मंदिर हरिद्वार

दक्ष/ दक्षेश्वर महादेव मंदिर कनखल हरिद्वार उत्तराखंड में स्थित है | यह बहुत ही पुराना मंदिर है , जो कि भगवान शिव को समर्पित है | यह मंदिर हरिद्वार से लगभग 4 कि.मी.दूर स्थित है | इस मंदिर का निर्माण 1810 AD में रानी धनकौर ने करवाया था और 1962 में इसका पुननिर्माण किया गया | इस मंदिर को दक्षेश्वर महादेव मंदिर एवम्दक्ष प्रजापति मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | मंदिर के बीच में भगवान शिव जी की मूर्ति लैंगिक रूप में विराजित है | यह मंदिर भगवान शिव जी के भक्तो के लिए भक्ति और आस्था की एक पवित्र जगह है | भगवान शिव का यह मंदिर देवी सती (शिव जी की प्रथम पत्नी) के पिता राजा दक्ष प्रजापति के नाम पर रखा गया है | इस मंदिर में भगवान विष्णु के पाँव के निशान बने (विराजित) है , जिन्हें देखने के लिए मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओ का ताँता लगा रहता है |


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पंचेश्वर महादेव मंदिर , चम्पावत

पंचेश्वर महादेव मंदिर लोहाघाट , उत्तराखंड से लगभग 38 कि.मी. की दूरी पर काली एवं सरयू नदी के संगम पर स्थित है |पंचेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है । इस मंदिर को स्थानीय लोगों द्वारा चुमू (ईष्ट देवता) के नाम से भी जाना जाता है । स्थानीय लोग चैमु की जाट की पूजा करते हैं । मंदिर में भक्त ज्यादातर चैत्र महीने में नवरात्रि के दौरान आते हैं और इस स्थल पर मकर संक्रान्ति के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है । पंचेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है | पंचेश्वर मंदिर में शिव की सुंदर मूर्ति और शिवलिंग नाग देवता के साथ स्थापित है | नदी के संगम पर डुबकी लगाना बड़ा ही पवित्र माना जाता है |


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क्रांतेश्वर महादेव मंदिर , पिथौरागढ़

क्रांतेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का पवित्र मंदिर है , जो कि चंपावत शहर के पूर्व में एक ऊंचे पहाड़ी की चोटी पर स्थित है । क्रांतेश्वर महादेव मंदिर मुख्य चंपावत शहर से 6 किमी दूर स्थित है और यह समुद्र तल से 6000 मीटर की ऊंचाई पर बना है । यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है क्योंकि यह मंदिर के नाम से स्पष्ट हो जाता है | क्रांतेश्वर महादेव मंदिर को स्थानीय लोग कणदेव और कुरमापद नाम से भी संबोधित करते हैं । क्रांतेश्वर महादेव मंदिर अनोखी वास्तुशिल्प से निर्मित अद्भुत मंदिर है | पर्यटक के लिए क्रांतेश्वर महादेव मंदिर एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है क्योंकि यह स्थान भगवान द्वारा आशीषित है |


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कपिलेश्वर महादेव मंदिर , पिथौरागढ़

कपिलेश्वर महादेव मंदिर टकौरा एवं टकारी गांवों के ऊपर सोर घाटीयानी पिथौरागढ़ शहर “ में स्थित एक विख्यात मंदिर है । कपिलेश्वर महादेव मंदिर पिथौरागढ़ के ऐंचोली ग्राम के ऊपर एक रमणीक पहाड़ी पर स्थित है । 10 मीटर गहरी गुफा में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । एक पौराणिक कहावत के अनुसार , इस स्थान पर भगवान विष्णु के अवतार महर्षि कपिल मुनि ने तपस्या की थी इसीलिए इसे कपिलेश्वर के नाम से जाना गया । इस गुफा के भीतर एक चट्टान पर शिव , सूर्य व शिवलिंग की आकृतियाँ मौजूद हैं । यह मंदिर शहर से केवल 3 किमी दूरहै तथा यह मंदिर हिमालय पर्वतमाला का लुभावना दृश्य प्रस्तुत करता है ।


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बिनसर महादेव मंदिर रानीखेत

बिनसर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय हिंदू मंदिर है । यह मंदिर रानीखेत से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित है । कुंज नदी के सुरम्य तट पर करीब साढ़े पांच हजार फीट की ऊंचाई पर बिनसर महादेव का भव्य मंदिर है | समुद्र स्तर या सतह से 2480 मीटर की ऊंचाई पर बना यह मंदिर हरे-भरे देवदार आदि के जंगलों से घिरा हुआ है । हिंदू भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 10 वीं सदी में किया गया था | महेशमर्दिनी, हर गौरी और गणेश के रूप में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों के साथ निहित, इस मंदिर की वास्तुकला शानदार है | बिनसर महादेव मंदिर क्षेत्र के लोगों का अपार श्रद्धा का केंद्र है।


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मुक्तेश्वर महादेव मंदिर

 

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर के सर्वोच्च बिंदु के ऊपर स्थित है । यह मंदिर “मुक्तेश्वर धाम या मुक्तेश्वर के नाम से भी जाना जाता है । मंदिर में प्रवेश करने के लिए पत्थर की सीढ़ियों से पहुंचा जा सकता है और यह मंदिर समुद्र तल से 2315 मीटर की ऊँचाई पर कुमाऊं पहाड़ियों में है । मुक्तेश्वर का नाम 350 साल पुराने शिव के नाम से आता है , जिसे मुक्तेश्वर धाम के रूप में जाना जाता है , जो शहर में सबसे ऊपर , सबसे ऊंचा स्थान है। मंदिर के निकट चौली की जाली नामक एक चट्टान है |


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टिम्मरसैंण महादेव भगवान चमोली गढ़वाल

टिम्मरसैंण महादेव भगवान शिव की एक गुफा है जो उत्तराखंड के चमोली जिले के नीती गांव में स्थित है। यह गुफा जम्मू और कश्मीर के अमरनाथ मंदिर की तरह प्राकृतिक रूप से प्रसिद्ध है। क्योंकि यहाँ बर्फ का एक प्राकृतिक शिवलिंग है, इस स्थान को दिन प्रतिदिन लोकप्रियता मिल रही है।


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सर्दियों के मौसम में, चमोली की टिम्मरसैंण महादेव की इस आध्यात्मिक गुफा में एक प्राकृतिक शिवलिंग बनता है। यह गाँव भारत-चीन सीमा पर बर्फ से ढकी गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा है। इस स्थान पर जाने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। शिवलिंग लगभग जम्मू की अमरनाथ गुफा के शिवलिंग जैसा दिखता है। चमोली गढ़वाल के नीती क्षेत्र में महादेव गुफा एक बहुत ही पवित्र स्थान है। यहाँ स्थानीय निवासी भगवान शिव लिंग के दर्शन करने आते हैं और गर्मी के मौसम में भगवान शिव को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

 

 

लाखामंडल मंदिर

लाखामंडल मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो कि उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसर-बावार क्षेत्र में स्थित है । यह मंदिर देवता भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित हैं एवम् समुन्द्रतल से इस मंदिर की ऊँचाई 1372 मीटर है | यह मंदिर शक्ति पंथ के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि उनका मानना ​​है कि इस मंदिर की यात्रा उनके दुर्भाग्य को समाप्त कर देगी । मंदिर अद्भुत कलात्मक काम से सुशोभित है । लाखामंडल मंदिर का नाम दो शब्दों से मिलता है | लाख अर्थ कई और मंडल जिसका अर्थ है मंदिरों” या “लिंगम” मंदिर में दो शिवलिंग अलग-अलग रंगों और आकार के साथ स्थित हैं , द डार्क ग्रीन शिवलिंग द्वापर युग से संबंधित है , जब भगवान कृष्ण का अवतार हुआ था और लाल शिव लिंग त्रेता युग से संबंधित हैं , जब भगवान राम का अवतार हुआ था । लाखामंडल मंदिर को उत्तर भारतीय वास्तुकला शैली में बनाया गया है , जो कि गढ़वाल, जौनसर और हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्रों में मामूली बात है | मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टान पर देखे जा सकते हैं , जो इस मंदिर की विशिष्टता है । लाखामंडल मंदिरमें भगवान कार्तिकेयभगवान गणेशभगवान विष्णु और भगवान हनुमान की मूर्तियां मंदिर के अंदर स्थापित हैं ।

 


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