पंचाचूली पर्वत शिखर चमोली गढ़वाल Panchachuli Parwat Shikhar Chamoli ( How To Reach)

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“पंचाचूली का इतिहास एवं रहस्य” History Of Panchachuli !!

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “पंचाचुली पर्वत (चमोली गढ़वाल) ( panchachuli)” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहता हैं “पंचाचुली पर्वत (चमोली गढ़वाल) Panchachuli”  के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|


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 जानिए पंचाचूली  के बारे में  About  panchachuli

पंचाचुली पर्वत भारत के उत्तराखंड राज्य के उत्तरी कुमांऊ क्षेत्र में एक हिमशिखर पर्वत चोटी हैं समुद्रतल से पंचाचुली की ऊंचाई लगभग 6,312 मीटर से 6,104 मीटर तक हैं |

पंचाचूली बेस कैंप एक रोमांचक बेस कैंप है जो दार से पंचाचूली ग्लेशियर तक शुरू होने वाले 40 किलोमीटर के ट्रेक में अपने मार्की को स्थापित करता है। पंचाचूली  बर्फ से ढकी चोटियों की गोद में बसे हुए, पिथौरागढ़ जिले में दारमा घाटी प्रचुर प्राकृतिक भव्यता के साथ संपन्न है,

ग्लेशियर का मार्ग रोमांचकारी दृश्यों, बर्फ से ढके पहाड़ों, शानदार नदियों, अल्पाइन घास के एक शानदार संयोजन में है। वनस्पतियों और जीवों की समृद्ध विविधता। पूर्वी कुमाऊं हिमालय में स्थित, ट्रेकिंग मार्ग में गोरी गंगा और दारमा घाटियों के बीच जल क्षेत्र है। लोग यहाँ प्रकृति की सुंदरता को देखने आते हैं| नेपाल और तिब्बत की सीमाओं के पास दारमा घाटी में कुमाऊँ हिमालय पर्वतमाला की गोद में बसा पंचाचूली ग्लेशियर, उत्कृष्ट सौंदर्य का एक क्षेत्र है।


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डार से पंचाचूली ग्लेशियर एक सुखद मार्ग है। यह मार्ग धौलीगंगा नदी के किनारे बोंगलिंग, सेला, नागलिंग, बालिंग और दुक्तू के आदिवासी गांवों से होकर जाता है और देवदार और भोजपात्रा और कोनिफर के घने जंगलों से गुजरता है। पंचाचूली की पांच चोटियाँ देव खंड और भोज पत्र और शंकुधारी वृक्षों और विशाल घास के मैदानों से घिरे हुए हिम खंड के अविस्मरणीय दृश्य हैं।
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पंचाचुली पर्वत  की मान्यता!!

इन पर्वतों के पंचाचूली नाम का अधर हैं| महाभारत युध के उपरांत कई वर्षो तक पांड्वो ने सुचारू रूपसे राज्य संभाला| मान्यता हैं कि हिमालय में निवास करते समय पांड्वो ने अंतिम बार इस पर्वत में भोजन बनाया था| इसके पांच उच्चतम बिंदुओं पर पांचो चूल्ही अर्थात छोटे- छोटे चूल्हे बनाये थे, इसलिए यह स्थान पंचाचुली के नाम से जाना जाता हैं|

धार्मिक ग्रंथो में इसे पंचशिरा के नाम से जाना जाता हैं| कुछ लोगों का मानना हैं की यह पर्वत शिखर युधिष्ठिर,अर्जुन,भीम,नकुल और सहदेव-पांचों पांड्वो के प्रतीक हैं|  इस पर्वत के पूर्व में सोना हिमनद और पश्चिम में ओला हिमनद स्थित हैं साथ ही इसके पश्चिम में उत्तरी बालटी हिमनद और उसका पठार स्थित है.पंचाचूल का नाम पौराणिक आधार पर रखा गया है|

पंचाचूली पर्वत की उत्तर पश्चिम की चोटी पंचचूली-1 कहलाती है. इस चोटी की ऊंचाई समुद्रतल से 6,355 मीटर हैं पंचाचूली-1 पर पहली बार सफलता आईटीबीपी के जवानों को साल 1972 में मिली थी।पंचाचूली के पांच शिखरों में पंचचूली-2 सर्वोच्च शिखर है समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 6,312 मीटर है पंचाचूली-3 को 2001 में पहली बार फतह किया गया था.पंचचूली-4 पर पहली बार 1995 में न्यूजीलैंड के पर्वतारोहियों को सफलता मिली इसकी ऊंचाई 6,334 मीटर है.पंचचूली-5 की ऊंचाई 6,437 मीटर है इसपर 1992 में पहली बार इंडोब्रिटिश टीम को सफलता मिली.पंचचूली पर्वत पर कई बार तूफान के साथ साथ हिमस्खलन भी आते हैं|
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यहाँ तक कैसे पहुचे How To Reach?


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हवाई अड्डा – निकटतम हवाई अड्डा देहरादून हवाई अड्डा हैं यहाँ से चमोली पंचाचुली की दूरी लगभग 292  किलोमीटर हैं | यहाँ से आप आसानी से कार अथवा टैक्सी से जा सकते हैं|

ट्रेन –निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन हैं यहाँ से चमोली पंचाचुली की दूरी लगभग 272  किलोमीटर हैं यहाँ से आप आसानी से कार अथवा टैक्सी से जा सकते हैं|
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GOOGLE  MAP OF PANCHACHULI 


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