Raksha Bandhan History रक्षा बंधन

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Why the Raksha Bandhan is celebrated?

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता हैं?

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “हिन्दूओं का महत्वपूर्ण पर्व रक्षाबंधन”  (Raksha Bandhan ) के बारे में बताने जा रहे है। यदि आप जानना चाहते है। कि रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) क्यों मानाया जाता है तो इस पोस्ट को अन्त तक जरूर पढ़े।


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रक्षाबंधन का महत्व-

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रक्षा बंधन हिन्दूओं का महत्वपूर्ण पर्व है। जो भारत के कई हिस्सों में मानाया जाता है।यह श्रावण पूर्णीमा के दिन मानाया जाता है। श्रावण का महिना पवित्र महिना माना जाता हैं श्रावण माह में शिव की पूजा अर्चना भी की जाती हैं|


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रक्षाबंधन भाई-बहनों के बीच मानाया जाने वाला पवित्र त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा का धागा बधंती है। और भाई अपनी बहन को जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते है। इस त्यौहार के दिन भाई बहन एक साथ भगवान की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है।
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रक्षाबंधन कब प्रारम्भ हुआ-

रक्षाबंधन की मान्यता है। कि देवों और दानवों के बीच युद्ध में जब देवता हारने लगे, तब वे देवराज इंद्र के पास गए। देवताओं को भयभीत देखकर  इंद्राणी ने उनके हाथों में रक्षासूत्र बांध दिया। इससे देवताओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने दानवों पर विजय प्राप्त की, तब से यह पवित्र धागा  बांधने की प्रथा शुरू हुई।


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महाभारत में राखी का महत्व –

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महाभारत में रक्षाबंधन की मान्यता हैं जब युधिष्ठिर ने भागवान श्रीकृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार करू, तब कृष्ण ने उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्यौहार मनाने की सलाह दी थी। शिशुपाल का वध करते समय जब कृष्ण की तर्जनी में चोट आई तो द्रौपती ने लहू को रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली में बांध दी थी। तब कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया था। इस ऋण को चुकाने के लिए दुःशासन द्वारा चीरहरण करते समय भगवान कृष्ण ने द्रापदी की लाज रखी।
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राजा बलि की कथा-

वामन पुराण के कथा अनुसार जब भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया था, तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा कि वह उनकें साथ पाताल में निवास करें।

भगवान विष्णु को वरदान के कारण, पाताल जाना पड़ा इससे देवी लक्ष्मी बहुत दुखी हुई। लक्ष्मी जी भगवान विष्णु को वामन से मुक्त करवाने के लिए, वृद्ध  महिला का वेष लेकर पाताल गयी, और वामन को राखी बांधकर उन्हे अपना भाई बना लिया।

वामन ने जब देवी लक्ष्मी से कुछ मांगने के लिए कहा, तो देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को, पाताल से बैकुंठ भेजने के लिए कहा। बहन की बात रखने के लिए, वामन ने भागवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ बैकुंठ भेज दिया।
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रक्षा बंधन कैसे मनाया जाता है?

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रक्षाबंधन भाई बहन का स्नेहपूर्ण त्यौहार होता हैं पूरा दिन उल्लास भरा होता है। पूजा की थाली सजायी जाती हैं

थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी,चावल,दीपक,मिठाई और कुछ पैसे रखे जाते है। सबसे पहले अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके भाई को टीका लगाया जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है, दाहिनी कलाई पर राखी बाँधी जाती है। और भाई बहन को उपहार देता है।इस प्रकार रक्षा बधन को मनाया जाता है।


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रक्षासूत्र बाधने का मंत्र-

  ” येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो  महाबलः।

तेन त्वां प्रतिबध्नामि,रक्षे!मा चल!मा चल।।”

अर्थात- जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षासूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधता हूँ ,तू भी अपने उद्धेश्य से विचलित न हो और दृढ़ बना रहे।

बसन पंचमी का इतिहास 

मकर संक्राति 
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उमीद करते है आपको “रक्षाबंधन” यानि की रक्षा धागे के महत्व के बारे में पता चल गया होगा | अगर आपको यह पोस्ट पसंद आये तो इसे like तथा नीचे दिए बटनों द्वारा share जरुर करें|
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