Rudranath Temple , Chamoli !! (रुद्रनाथ मंदिर)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर “Rudranath Temple , Chamoli !! (रुद्रनाथ मंदिर)” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है , यदि आप रुद्रनाथ मंदिर के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

Rudranath Temple , Chamoli !! (रुद्रनाथ मंदिर)





Rudranath Temple Chamoliरूद्रनाथ मंदिर गढ़वाल के चमोली जिले में उत्तराखण्ड में स्थित है । यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है। रुद्रप्रयाग मंदिर पंच केदारों में से एक है तथा पंच केदारों में इस तीसरा नम्बर है । रुद्रनाथ मंदिर समुद्र तल से 3,600 मीटर (11,800 फीट) की ऊँचाई पर रुद्रप्रयाग मुख्यालय में अलकनन्दा एवं मंदाकिनी नदी के तट पर अवस्थित है । रुद्रनाथ मंदिर प्राकृतिक पत्थरों से बना एक मंदिर है , जो “रोडोडेंडन बौनों” और “अल्पाइन चरागाह” के एक घने जंगल के भीतर स्थित है या ऐसा भी कहा जा सकता है कि यह संपूर्ण प्रकृति और पहाड़ी वनस्पतियों से घिरा हुआ है । रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के चेहरे की पूजा की जाती है एवम रुद्रनाथ मंदिर को ‘रुद्रमुख’ भी कहा जाता है । ‘मुख’ शब्द का अर्थ है “मुख या चेहरा” ‘रुद्र’ शब्द का भगवान शिव को संदर्भित करता है । रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के चेहरे को ‘नीलकंठ’ के रूप में पूजा की जाती है । मंदिर में भगवान शिव की पूजा नीलकंठ महादेव के रूप में की जाती है । रुद्रनाथ मंदिर के निकट चन्द्र कुंड, मानकुंड, सूर्य कुंड, तार कुंड आदि पवित्र कुंड स्थित हैं | रुद्रनाथ मंदिर पंच केदार तीर्थयात्रा में तीसरे स्थान पर आता है । अन्य मन्दिर हैं – केदारनाथ मंदिर, तुंगनाथ मंदिर, मध्यमहेश्वर मंदिर और कल्पेश्वर मंदिर आदि । रुद्रनाथ मंदिर में आने वाले सभी भक्त मंदिर में आने से पहले सामने स्थित “नारद कुंड” पर स्नान कर सकते हैं । कपाट खुलने के विशेष अवसर पर हजारों भक्तजन उमड़ पड़ते हैं और जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं | श्रावण मास (जुलाई से अगस्त) में पूर्णिमा के दिन मंदिर में वार्षिक मेला लगता है |

रुद्रनाथ मंदिर को पंचकेदार क्यों कहा जाता है ?

एक कहानी के अनुसार इस मंदिर को पंचकेदार इसलिए कहा जाता है क्यूंकि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पाप से मुक्ति चाहते थे इसलिए श्रीकृष्ण ने पांडवो को परामर्श दिया कि वे भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करे इसलिए पांडव भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए वाराणसी पहुँच गए लेकिन भगवान शंकर वाराणसी से जा चुके थे एवम् गुप्तकाशी में आकर छुप गए क्यूंकि भगवान शंकर पांडवो से नाराज थे क्यूंकि पांडवो ने अपने कुल का नाश किया था । जब पांडव गुप्तकाशी पंहुचे तो फिर भगवान शंकर केदारनाथ पहुँच गए , जहां भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर रखा था । पांडवो ने भगवान शंकर को खोज कर उनसे आर्शीवाद प्राप्त किया था । ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए , तो उनके धड़ से ऊपर का भाग “काठमाण्डू” में प्रकट हुआ । अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में , मुख रुद्रनाथ में, नाभि मध्यमाहेश्वर में, भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए इसलिए इन पांच स्थानों में रुद्रनाथ मंदिर को “पंचकेदार” कहा जाता है ।

Google Map of Rudranath Temple , Chamoli !!

रुद्रनाथ मंदिर , उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जिले में स्थित भगवान शिव का एक मन्दिर है जो कि पञ्चकेदार में से एक है| आप निचे Google Map पर इस मंदिर को देख सकते है |





उम्मीद करते है कि आपको “Rudranath Temple , Chamoli !! (रुद्रनाथ मंदिर)” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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