थल मेला , पिथोरागढ़ (Thal Mela , Pithoragarh)

0
169
Thal Mela Festival of Pithoragarh

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]

[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’थल मेला , पिथौरागढ़ (Thal Mela , Pithoragarh)’ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]
नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन कि इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य में स्थित पिथौरागढ़ जिले में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध मेला “थल मेला” के बारे में जानकारी दी है , यदि आप “थल मेला” के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़े !
[/av_textblock]

[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’पिथौरागढ़ जिले में आयोजित होने वाले “थल मेला” की जानकारी !!’ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});


Thal Mela Festival of Pithoragarhपिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 50 कि.मी. की दुरी पर “थल” नामक एक क़स्बा है | पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के बालेश्वर थल मंदिर में हर वर्ष बैशाखी के अवसर पर क्षेत्र में प्रसिद्ध व्यवसायिक मेला का आयोजन किया जाता है , जो की स्थान के अनुसार “थल मेला” कहलाता है | 13 अप्रैल 1940 को यहां बैशाखी के अवसर पर “जलियांवाला दिवस” मनाए जाने के बाद इस मेले की शुरुआत हुई ।

थल में स्थित “शिव मंदिर” इस मेले का प्रमुख केंद्र है | थल के दुसरे मंदिरों में बालेश्वर मंदिर की महिमा का वर्णन भी मिलता है | इस मेले के अवसर पर मंदिर में स्थित “शिवलिंग” के विशेष दर्शन प्राप्त किये जाते है | स्कन्दपुराण के यात्री को रामगंगा में स्नान कर तथा शिव के गणों का पूजन कर पवित्र पर्वत की ओर प्रस्थान करना होता है | वर्तमान समय में भी थल यात्री मान सरोवर की ओर प्रस्थान करते है |

इस मेले के सम्बन्ध में यह कहा जाता है कि वर्ष 1940 में रामगंगा नदी के तट पर क्रांतिवीरो ने “जालियावाला दिवस” मनाया था , तभी से इस स्थान पर “थल मेले” का प्रथम आयोजन हुआ था | पहाड़ो के अन्य मेलो की तरह इस मेले की भी सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियाँ बनायी गयीं तथा समय बीतते-बीतते यह प्रसिद्ध सांस्कृतिक व व्यापारिक मेला बन गया |

इस मेले के व्यापारिक महत्व के कारण अलग-अलग राज्य से व्यापारी अपना सामान बेचने के लिए आया करते थे | मुन्सियारी , कपकोट , धारचूला जैसे हस्तकला (हाथो से निर्मित वस्तु) के केंद्र इस मेले से पूर्ण रूप से जुड़े हुए रहते थे एवम् इस मेले में किंरगाल की टोकरियाँ, मोस्तो, रस्से, डोके, कुर्सियाँ, कृषकों के लिए हल, कुदाल-कुटले से लेकर गृहणियों के काम में आने वाले सामान और चूड़ी-बिन्दी से लेकर टीकुली तक यहाँ बिकती थी | खरदी के ताँबे के बर्तन, भांग से बने हुए कुथले भी यहँ अधिक मात्रा में बिकते थे | नेपाल के व्यापारी थल मेले में व्यापार के लिए खाले एवम् उच्चतम नस्ल के पशूओ की खरीद फ़रोख्त करते थे |

इस मेले की सांस्कृतिक रीति-रिवाज़ बड़ी ही प्रसिद्ध थी | इस मेले में बैर , झोंडा , चांचरी व हुडके की थाप की संगीतमय गीतों से वातावरण गूँजता रहता था | काली कुमाउं , सोर घाटी , गंगोली , नेपाली तथा गोरखा सांस्कृतियों की वजह से मेला एक अनोखा संगम स्थल बन गया | आंदोलन के साधनों में वृद्धि के कारण , इस मेले का
व्यवसाय पक्ष उतना मजबूत नहीं था जितना चार दशक पहले था । तिब्बत से व्यापार में पाबंदी होने की वजह से वर्तमान समय में मेले की रौनक हलकी हो गयी है | पहले के समय में 20 दिनों तक चलने वाला यह मेला अब सिर्फ 4 दिनों तक के लिए सिमट गया है अर्थात अब थल मेला सिर्फ 4 दिन तक ही आयोजित होता है |

लेकिन वर्तमान समय में कुमाउं की हस्तकला (हाथो से निर्मित वस्तु) , लोकगीत , भगलौल , झोडे , चांचरी आदि के कारण मेले का अस्तित्व अभी भी जीवित है |

[/av_textblock]

[/av_one_full][av_hr class=’default’ height=’50’ shadow=’no-shadow’ position=’center’ custom_border=’av-border-thin’ custom_width=’50px’ custom_border_color=” custom_margin_top=’30px’ custom_margin_bottom=’30px’ icon_select=’yes’ custom_icon_color=” icon=’ue808′]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]
थल मेले के बारे में पढने से पहले यदि आप उत्तराखंड में होने वाले अन्य प्रसिद्ध मेले के बारे में जानना चाहते है , तो निचे दिए गए लिंक में क्लिक कर पोस्ट को जरुर पढ़े !
[/av_textblock]

[av_icon_box position=’left’ icon_style=” boxed=” icon=’ue81f’ font=’entypo-fontello’ title=’Kanchi Dham Mela , Nainital , Uttarakhand’ link=’manually,http://www.uttarakhanddarshan.in/kanchi-dham-mela-nainital-uttarakhand/’ linktarget=’_blank’ linkelement=’both’ font_color=’custom’ custom_title=’#4c97e8′ custom_content=” color=” custom_bg=” custom_font=” custom_border=” admin_preview_bg=”][/av_icon_box]

[av_icon_box position=’left’ icon_style=” boxed=” icon=’ue81f’ font=’entypo-fontello’ title=’उत्तरायणी मेला , बागेश्वर (Uttarayani Mela , Bageshwer)’ link=’manually,http://www.uttarakhanddarshan.in/uttarayani-mela-bageshwer/’ linktarget=’_blank’ linkelement=’both’ font_color=’custom’ custom_title=’#4c97e8′ custom_content=” color=” custom_bg=” custom_font=” custom_border=” admin_preview_bg=”][/av_icon_box]

[av_icon_box position=’left’ icon_style=” boxed=” icon=’ue81f’ font=’entypo-fontello’ title=’स्याल्दे – बिखौती का मेला ! (अल्मोड़ा)’ link=’manually,http://www.uttarakhanddarshan.in/famous-fair-of-almora/’ linktarget=’_blank’ linkelement=’both’ font_color=’custom’ custom_title=’#4c97e8′ custom_content=” color=” custom_bg=” custom_font=” custom_border=” admin_preview_bg=”][/av_icon_box]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

उम्मीद करते है आपको उत्तराखंड राज्य में स्थित पिथौरागढ़ जिले में होने वाला प्रसिद्ध मेला “थल मेले” के बारे में जानकारी प्राप्त कर आनंद आया होगा |

यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई तो “LIKE” और “SHARE” जरुर करे |

उत्तराखंड के विभिन्न स्थल एवम् स्थान का इतिहास एवम् संस्कृति आदि के बारे में जानकारी प्राप्त के लिए हमारा YOU TUBE CHANNEL जरुर SUBSCRIBE करे |
[/av_textblock]

[/av_one_full]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here