Top 10 Best Tourist Places to Visit in Champawat !!

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य के चम्पावत जिले में स्थित प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय पर्यटन स्थलों और धार्मिक स्थानों OR “Top 10 Best Tourist Places to visit in Champawat  !!”) के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है | यदि आप ” चम्पावत जिले में स्थित प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय पर्यटन स्थलों और धार्मिक स्थानों “ के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते है , तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े |

Champawat – A Tourist Place to Visit in Uttarakhand !!

चम्पावत , उत्तराखंड में स्थित एक प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय पर्यटन स्थल है | चम्पावत को 1997 में एक अलग जिले के रूप में स्थापित किया गया था और यह क्षेत्र मंदिरों और सौंदर्यपर्ण दृश्य के लिए प्रसिद्ध है | चम्पावत 1613 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को अपने आधीन करता है और नेपाल , उधमसिंह नगर जिला , नैनीताल जिला और अल्मोड़ा जिले के साथ अपनी सीमा को सांझा करता है | चम्पावत, टनकपुर से 75 किमी की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है | चम्पावत, टनकपुर से 75 किमी की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है | पौराणिक इतिहास के अनुसार चम्पावत चंद वंश की राजधानी थी |

चम्पावत के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए निचे दिए गए लिंक में क्लिक कर पोस्ट को जरुर पढ़े :-

HISTORY OF CHAMPAWAT !! (चम्पावत का इतिहास !!)

Top 10 Best Tourist Places to Visit in Champawat !!

Mount Abott (माउंट एबट !!)

उत्तराखंड के चंपावत जिले में यह प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लोहघाट से लगभग 8 किमी और चम्पावत जिले में काली नदी सीमा के पास कुमाऊं पहाड़ियों के पूर्वी हिस्से में स्थित है | लोहाघाट समुद्र तल से 7000 फीट ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है | माउंट एबट की स्थापना 20 वीं शताब्दी में जॉन हेरोल्ड एबॉट नामक एक अंग्रेजी व्यवसायी ने की थी | इसे जॉन हेरॉल्ड एबॉट द्वारा स्थापित किया गया इसीलिए इसका नाम “माउंट एबट” रखा गया यह स्थान ब्रिटिश राज में अंग्रेजो के शासन काल में बसाया गया था | यह स्थान कुमाऊ हिमालय की गोद में बसा हुआ है जहाँ से हिमालय का नज़ारा देखते ही बनता है | माउंट एबट दुनिया भर में अपनी ख़ूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है |

Baleshwar Temple (बालेश्वर मंदिर)

बालेश्वर मंदिर “भगवान शिव” को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है , जो कि उत्तराखंड के चंपावत शहर में स्थित है | बालेश्वर मंदिर पत्थर की नक्काशी का एक अद्भुत प्रतीक है | मुख्य बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है (जिन्हें बालेश्वर भी कहा जाता था) । बालेश्वर के परिसर में दो अन्य मंदिर भी उपस्थित हैं जिसमे एक “रत्नेश्वर” को समर्पित है और दूसरा मंदिर “चम्पावती दुर्गा” को समर्पित है | बालेश्वर मंदिर अपनी खूबसूरती के साथ अलग पहचान बनाए हुए हैं और मंदिर कि खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है और सोचने को मजबूर कर देती है | बालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें भक्तो का सैलाब उमडा होता है |

Lohaghat (लोहाघाट)

उत्तराखंड राज्य के चंपावत जिले से 14 किमी दूर लोहावती नदी के किनारे बसा “लोहाघाट” एक ऐतिहासिक शहर है । लोहाघाट , चंपावत जिले का नगर पंचायत है । चम्पावत के प्राचीन शहर का लोहाघाट का एक विशाल ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है , जो कई पर्यटकों को आकर्षित करता है । पर्यटक यहां के कई पुराने मंदिरों का भ्रमण कर सकते हैं , जो कि हिन्दू धर्म के विभिन्न त्योहारों को मनाने के लिए जाने जाते हैं । होली और जनमाष्टमी के दिन यहां भारी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं । लोहाघाट क्षेत्र की सुंदरता से मुग्ध होकर पी. बैरन ने इसे “कश्मीर के बाद धरती के दूसरे स्वर्ग” का खिताब दे दिया ।

Mayawati Ashram (मायावती आश्रम)

मायावती आश्रम उत्तराखंड में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है । मायावती आश्रम चम्पावत शहर से 22 कि.मी. की दुरी पर स्थित है | समुद्र तल से 1940 मीटर की ऊंचाई पर बना यह आश्रम हर साल भारी संख्या में भारतीय और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है । इस आश्रम को “अद्वैत आश्रम” के नाम से भी जाना जाता है | अद्वैत आश्रम रामकृष्ण मठ की एक शाखा है जो कि भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले में मायावती नामक स्थान पर स्थित है । इस आश्रम में एक छोटा सा संग्रहालय और एक पुस्तकालय भी है । मायावती आश्रम में विशेष अनुरोध करने पर रहने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है । यहां का मौसम ज्यादातर ठंडा रहता है | यहां कुमाऊंनी, हिंदी व अंग्रेजी भाषा बोली जाती है ।

Banasaur Ka Kila ( बाणासुर का किला !!)

बाणासुर का क़िला उत्तराखंड में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है । यह क़िला लोहाघाट से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर ‘कर्णरायत’ नामक स्थान के पास स्थित है । कर्णरायत से बाणासुर किले तक लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के बाद पहुंचा जा सकता है एवम् यह किला समुद्र तल से 1859 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है | इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा बाणासुर का वध किया गया था क्योंकि बाणासुर ने श्रीकृष्ण के पौत्र का अपहरण कर लिया था । बाणासुर के किले को “वाणासुर के किले” के नाम से भी जाना जाता है | पहाड़ी शैली में निर्मित इस किले में पत्थरों का उपयोग किया गया है और इसकी बनावट प्राकृतिक मीनार की भांति है।

Gurudwara Reetha Sahib (गुरुद्वारा रीठा साहिब !!)

रीठा साहिब गुरुद्वारा जिसे मीठा रीठा साहिब भी कहा जाता है , उत्तराखण्ड के चंपवात जिले में ड्युरी नामक एक छोटे गांव में स्थित है । इसे गुरुद्वारे को सिखों द्वारा अत्यधिक पवित्र माना जाता है और यह पवित्र स्थान चम्पावत से लगभग 72 कि.मी. की दुरी पर स्थित है । इस गुरुद्वारा का निर्माण 1960 में गुरु साहिबान ने करवाया था और यह ड्युरी गांव के निकट स्थित लोदिया और रतिया नदी के संगम पर स्थित है । इस स्थान के बारे में यह कहा जाता है कि गुरु नानक जी ने इस जगह का दौरा किया था और ऐसी मान्यता है कि गुरू नानक जी गोरखपंथी जोगी से धार्मिक और अध्यात्मिक चर्चा के लिए यहां आए थे | यह जगह एक खास तरह के मीठे रीठा फल (कटुआ – साबुन का फल) पेड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है ।

Pancheshwar Mahadev Temple (पंचेश्वर महादेव मंदिर !!)

पंचेश्वर महादेव मंदिर लोहाघाट , उत्तराखंड से लगभग 38 कि.मी. की दूरी पर काली एवं सरयू नदी के संगम पर स्थित है | पंचेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है । इस मंदिर को स्थानीय लोगों द्वारा चुमू (ईष्ट देवता) के नाम से भी जाना जाता है । स्थानीय लोग चैमु की जाट की पूजा करते हैं । मंदिर में भक्त ज्यादातर चैत्र महीने में नवरात्रि के दौरान आते हैं और इस स्थल पर मकर संक्रान्ति के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है । पंचेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है | पंचेश्वर मंदिर सुंदर जंगल के बीचो बीच और आसपास के जंगलों , धाराओं और उच्च फूलों से प्राकृतिक फूलों से घिरा हुआ है | पंचेश्वर महादेव मंदिर के बारे में स्थानीय लोगों का विश्वास है कि भगवान शिव ने पास के गांवों के पशुओं की रक्षा की है ।

EK HATHIYA KA NAULA STONE (एक हथिया का नौला !!)

एक हथिया का नौला , उत्तराखंड राज्य के चंपावत जिले से 5 किमी दूर स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है | पत्थर को तराश कर बनाया गया एक हथिया की नौले की कलाकृति पौराणिक कथा के कारण भी प्रसिद्ध है । ऐसी मान्यता है कि इस पूरी आकृति को एक हाथ वाले शिल्पकार ने एक रात में तराश कर बनाया था । यह पत्थर पर किया जाने वाला एक शानदार कार्य है जो कि यह चंद राजवंश के युग के दौरान बनाया गया था | लोक मान्यता है कि चंद राजा का राज महल व कुमांऊ की स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध बालेश्वर मंदिर का निर्माण करने वाले मिस्त्री जगन्नाथ का एक हाथ चंद शासकों ने कटवा दिया था ताकि बालेश्वर मंदिर जैसा निर्माण दोबारा न हो सके | एक हथिया का नौला वर्तमान समय में भी स्थापत्य कला प्रेमियों के लिये आकर्षण का केन्द्र है।

Hingla Devi Temple ( हिंगलादेवी मंदिर )

हिंगलादेवी मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के चम्पावत जिले के दक्षिण में पहाड़ो की चोटी पर घने बांज के जंगलो के बीच में स्थित है | यह देवी पीठ इस क्षेत्र के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है | इस मंदिर में देवी हिंगला को “माँ भवानी” के रूप में पूजा जाता है | हिंगलादेवी मंदिर की प्राकर्तिक छटा अत्यधिक अनमोल है और इस पवित्र स्थल से पुरे चम्पावत शहर के दर्शन किये जा सकते है | हिंगलादेवी का मंदिर करीब डेढ़ साल दशक पहले तक एक छोटे से स्थान पर था और उस स्थान पर एक कुतिया भी बनी थी | हिंगला सिद्धि को प्रदायक देवी के रूप में भी माना जाता हैं । लोगों का विश्वास है कि मां की शरण में आने से उनकी कल्याणप्रद मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं और भक्तो की मन चाही इच्छा पूर्ण होती हैं |

Aditya Temple (आदित्य मंदिर !!)

आदित्य मंदिर चम्पावत शहर से 75 किलोमीटर दूर ग्राम रमक में स्थित देवालय सूर्य देवता को समर्पित है , जो कि शिखर में फूल की घाटियों और हरे भरे वनों से घिरा है | एक विश्वास के अनुसार, यह मंदिर चन्द वंश के राजाओं द्वारा बनाया गया था । मंदिर का निर्माण शिखर शैली में करावाया गया है एवम् वास्तुकला से मंदिर की संरचना ओरिसा में स्थित कोनार्क सूर्य मंदिर के जैसे दिखती है । द्वापर युग में पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान यहां आये थे और उन्होंने छह दिनों तक यहां भगवान शिव का पूजन किया था । मंदिर में नित्य पूजा अर्चना की जाती है और नवरात्रों में आदित्य मंदिर में विशेष पूजा की जाती है | बड़ी संख्या में भक्त हिंदू भगवान सूर्य को अपनी प्रार्थना करने के लिए इस मंदिर की यात्रा करते हैं |





उम्मीद करते है कि आपको “Top 10 Best Tourist Places to Visit in Champawat !! (चम्पावत के आकर्षक स्थल )” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई तो हमारे फेसबुक पेज को LIKE और SHARE   जरुर करे |

उत्तराखंड के विभिन्न स्थल एवम् स्थान का इतिहास एवम् संस्कृति आदि के बारे में जानकारी प्राप्त के लिए हमारा YOU TUBE CHANNEL जरुर   SUBSCRIBE     करे |