Top 10 Best Tourist Places to Visit in Kausani !! (कौसानी के 10 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल !!)

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Attractive Places of Kausani

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नमस्कार दोस्तों …… उत्तराखंड दर्शन की इस पोस्ट में आपका हार्दिक स्वागत है | इस पोस्ट के द्वारा हम आपको प्रसिद्ध पर्यटन स्थल “कौसानी की दस प्रसिद्ध पर्यटन जगहों के बारे में बताने वाले है | जो की कौसानी की सुन्दरता में चार चाँद लगा देती है |( Top 10 Best Tourist Places to visit in Kausani ) मगर उस जगहो के बारे में बताने से पहले हम आपको थोड़ी सी जानकारी कौसानी के बारे में बताते है |
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[av_heading tag=’h2′ padding=’10’ heading=’Kausani – Mini Switzerland of India !! ‘ color=” style=’blockquote modern-quote modern-centered’ custom_font=” size=” subheading_active=” subheading_size=’15’ custom_class=” admin_preview_bg=”][/av_heading]

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Attractive Places of Kausani“कौसानी” उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले से 53 किलोमीटर दुरी पर उत्तर में स्थित है | यह भारत का एक खूबसूरत पर्वतीय पर्यटक स्थल है | यह स्थान हिमालय की सुन्दरता के दर्शन कराता पिंग्नाथ चोटी पर बसा है और साथ ही साथ इस स्थान से बर्फ से ढकी “नंदा देवी पर्वत” की चोटी का नज़ारा बड़ा भी अत्यधिक मनमोहक प्रतीत होता है | राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कौसानी (जो कि कोसी नदी और गोमती नदी के बीच में स्थित है) को “भारत का स्विट्ज़रलैंड” कहा था | कौसानी समुन्द्रतल से लगभग 6075 फीट की ऊँचाई पर बसा एक खूबसूरत पर्वतीय पर्यटक स्थल है | यह पर्वतीय शहर चिड के घने पेड़ो के बीच एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है एवम् इस स्थान से सोमेश्वर , गरुड़ आदि सुंदर घाटियों का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलता है | इस स्थान में एक चाय का बागान भी है , जो की कौसानी से लगभग 6 किलोमीटर की दुरी पर बैजनाथ की तरफ है | इस क्षेत्र की चाय बहुत ही खुशबूदार और स्वादिष्ट होती है | यहां के ख़ूबसूरत प्राकृतिक नजारे, खेल और धार्मिक स्थल पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं।
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RUDRADHARI FALLS AND CAVES !! (रुधराधरी फॉल्स और गुफा)

रुद्रधारी फॉल कौसानी में अल्मोड़ा रोड पर कौसनी से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं । यह एक प्राकृतिक स्थान है , जहां पानी एक उचाई से बहकर नदी के साथ बहता है । वहाँ कई प्राचीन गुफाएं हैं , जो कि झरने के पास खोजी गई हैं | पौराणिक कथा के अनुसार, यह स्थान भगवान शिव और भगवान विष्णु के साथ संबंध रखता है । सोमेश्वर शिव मंदिर झरने के निकट में स्थित है । भक्तों का मानना है कि इन गुफाओं में भगवान शिव के साथ एक संगठन है , जिसे रूद्र और हरि(भगवान विष्णु का दूसरा नाम) भी कहा जाता है | आदी कैलाश क्षेत्र या त्रिशूल पर्वत के ट्रेकिंग के दौरान ये झरना आसानी से देखा जा सकता है ।
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Gwaldam !! (ग्वालदाम !!)

गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने वाला एक खूबसूरत स्थान हैं ग्वालदाम | यह स्थान समुद्र तल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है । यह स्थान जंगलों और छोटे झीलों से भरा है , जो कि एक शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है । इस पर्यटन स्थल से नंदादेवी, त्रिशूल और नंदघुती जैसे चोटियों के खूबसूरत और आकर्षक दृश्य पेश होते है। ग्वालदाम हिमालय के बर्फ-धूमिल चोटियों को देखने के लिए एक आदर्श स्थान है । प्रसिद्ध नंददेवी राज जट्ट यात्रा ग्वालदाम के रास्ते से जाते हैं और रहस्यमय रूपकुंड झील के लिए ट्रेक ग्वालदाम का सबसे प्रसिद्ध ट्रेकिंग भ्रमण है ।
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Baijnath Temple !! (बैजनाथ मंदिर !!)

यह मन्दिर उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले के गरुड़ तहसील में स्थित है । यह मंदिर गरुड़ से 2 किमी की दूरी पर गोमती नदी के किनारे पर स्थित है । बैजनाथ मन्दिर लगभग 1000 साल पुराना है इस मंदिर के बारे में कहते है कि यह मन्दिर सिर्फ एक रात में बनाया गया था । बैजनाथ उत्तराखंड का काफी महत्वपूर्ण एवम् ऐतिहासिक स्थल है। कौसानी से महज 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बैजनाथ गोमती नदी के तट पर स्थित है । पर्यटकों के लिए यहां का सर्वाधिक आकर्षण का केन्द्र 12वीं सदी में निर्मित शिव, गणेश, पार्वती, चंडिका, कुबेर, सूर्य मंदिर हैं । यहां पत्थर के बने हुए कई मन्दिर हैं , जिनमें मुख्य मन्दिर भगवान शिव का है।
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[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/04/Kausani-Tea-Estate-300×150.png’ attachment=’2970′ attachment_size=’medium’ align=’center’ styling=” hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

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Kausani Tea Estate !! (कौसानी चाय बागान !!)

कौसानी चाय बगान कौसानी से 5 किमी दूर बागेश्वर रोड पर स्थित है। यह बगान 21 भागों में बंटा हुआ है और 208 हेक्टियर में फैला हुआ है । कौसानी चाय बागान विश्व भर में मशहूर है , यहाँ गिरियाज उत्तराँचल चाय 208 हेक्टेयर में फैले बागान में उगाई जाती है। यहाँ पर्यटक आकर इन बागानों की सैर कर सकते हैं साथ ही साथ चाय फैक्ट्री के अंदर का भी नज़ारा कर सकते हैं।उत्तरांचल की मशहूर ‘गिरियास टी’ का उत्पादन यहीं होता है । इसके अलावा जैविक चाय का भी उत्पादन किया जाता है और इस खुशबूदार चाय को संयुक्त राष्ट्र, जर्मनी, कोरिया और ऑस्ट्रेलिया में निर्यात किया जाता है । अगर आप यहाँ की चाय खरीदना चाहते हैं तो खरीद भी सकते हैं।

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[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/04/Anashakti-Ashram-300×150.png’ attachment=’2967′ attachment_size=’medium’ align=’center’ styling=” hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

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Anashakti Ashram !! ( अनाशक्ति आश्रम)

अनाशक्ति आश्रम को गांधी आश्रम के नाम से भी जाना जाता है क्यूंकि इस आश्रम का निर्माण महात्मा गांधी के सम्मान में किया गया था । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1929 में इस आश्रम का भ्रमण किया था । इस स्थान के बारे में महात्मा गांधी ने लिखा था कि “अनाशक्ति” का अर्थ होता है – ऐसा योग जिससे आप संसार से अगल होकर पूर्ण रूप से ध्यानमग्न होते हैं एवम् महात्मा गाँधी जी की जिंदगी से जुड़ी कई किताबें और फोटोग्राफ इस आश्रम में उपलब्ध हैं । वर्तमान समय में यह आश्रम अब अध्ययन और शोध केन्द्र में बदल गया है | अनाशक्ति आश्रम में एक प्रार्थना कक्ष भी उपस्थित है , जहां हर सुबह और शाम प्रार्थना की जाती है |
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[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/04/Sumitranandan-Pant-Museum-300×150.png’ attachment=’2976′ attachment_size=’medium’ align=’center’ styling=” hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

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Sumitranandan Pant Museum !! (सुमित्रानंदन पन्त संग्रहालय)

यह संग्रहालय कौसानी में जन्मे प्रसिद्ध हिन्दी कवि सुमित्रानंदन पंत को समर्पित है । पंत संग्राहलय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंतजी की जीवन से जुडी वस्तुओं के साथ साथ उनकी कविताओं की पांडुलिपियां व पत्र इस संग्राहलय में मौजूद हैं। यहां हिन्दी और अंग्रजी में उनके द्वारा लिखे गए किताबों का विशाल संकलन है, जिसे कांच की अलमारी में रखा गया है। सुमित्रानंदन पंत जी के जन्मदिवस पर हर साल यहां एक सम्मेलन का आयोजन किया जाता है । यह संग्राहलय कौसानी बस अड्डे से कुछ ही दूरी पर है। यदि आप कौसानी जाते है तो कौसानी में स्थित पुस्तकालय में जाना ना भूले क्यूंकि संग्रहालय में पुस्तकों के कुछ बहुत दिलचस्प संग्रह हैं।
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Pinkeshwar Temple !! (पिन्केश्वर मंदिर !!)

समुद्र सतह से 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पिनकेश्वर मंदिर बागेश्वर और अल्मोड़ा जिले की सीमा में स्थित है । ऊंची चोटी में बना मंदिर अत्यंत रमणीक है। कौसानी से करीब आठ किमी की दूरी पर स्थित पिनाकेश्वर मंदिर से बौरारो और गेवाड़ घाटी के लोगों की गहरी आस्था रही है। मंदिर का निर्माण कुमाऊं के चंद राजवंश के महाराजाधिराज बाल बहादुर ने वर्ष 1454 में किया था। राजा को महादेव ने प्रसन्न होकर पुत्र का वरदान दिया जिसका नाम उन्होंने उदेचंद रखा। मंदिर में नियमित पूजा पाठ , कथा भागवत पुराणों का वाचन होते रहते हैं । लोगों का विश्वास है कि जो भी व्यक्ति मंदिर में सच्चे मन से पहुंचता है। भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामनाओं को पूरी कर देते हैं ।
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KOT BRAHMARI TEMPLE (कोट ब्रह्मारी मंदिर)

कोट भ्रामरी मंदिर को “भ्रामरी देवी मंदिर” और “कोट की माई” नाम से भी जाना जाता है। कोट ब्रह्मरी में एक दर्शनीय मंदिर कोट भ्रामरी मंदिर है , जो की देवी दुर्गा के भ्रमर अवतार को समर्पित है । यह कौसानी से 20 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। एक प्रसिद्ध दंत कथा के अनुसार ऐसी मान्यता है कि महान भारतीय गुरु आदि गुरु शंकराचार्य गढ़वाल जाने के क्रम में इस जगह पर रुके थे। हर वर्ष अगस्त में यहां विशाल स्तर पर एक मेले का आयोजन किया जाता है, जिसे “नंदा अष्ठमी” या “नंदा राज जाट यात्रा” से जाना जाता है एवम् यह मेला तीन दिन तक चलता है । इस मेले में दूर दूर से कोट ब्रह्मरी मंदिर के भक्त आते हैं।
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Lakshmi Ashram !! (लक्ष्मी आश्रम !!)

महात्मा गांधी की एक अनुयायी कैथरीन हिलमन ने 1948 में लक्ष्मी आश्रम का निर्माण करवाया था। इसे सरला आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। वह गांधी जी की बहुत बड़ी प्रशंसक थी। 1931 में वह लंदन छोड़कर भारत आ गईं और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गईं । इस आश्रम में लड़कियों को खाना बनाने, सब्जियां उगाने और साफ-सफाई के बारे में सिखाया जाता है। इतना ही नहीं, इस आश्रम में कई अनाथ लड़कियां व औरतें भी रहती हैं। आश्रम का उद्देश्य कुमाऊं की महिलाओं को रहने के लिए एक सुरक्षित स्थान मुहैय्या कराना है और साथ ही उन्हें ऐसे हुनर भी सिखाना है, जिससे वह आत्मनिर्भर बन सके । लक्ष्मी आश्रम कौसानी के बस स्टेशन से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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Someshwar !! (सोमेश्वर !!)

कौसानी से 11 किमी दूर बसा सोमेश्वर एक प्रसिद्ध शहर है। यह शहर भगवान शिव के मंदिर के लिए जाना जाता है। सोमेश्वर में विराजित मंदिर का निर्माण चंद सम्राज्य के संस्थापक राजा सोमचंद ने करवाया था। इस जगह का नामकरण राजा सोम और भगवान महेश्वर के नामों को मिला कर किया गया है । सोमेश्वर में स्थित मंदिर कत्युरी शैली में बना बेहद आकर्षण मंदिर है, जो कि पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह मंदिर कौसानी से 19 किलोमीटर की दूरी पर है।
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