Top 15 Places To Visit In Chamoli Garhwal (Uttarakhand) चमोली आकर्षण पर्यटक स्थल

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चमोली जिले में स्थित आकर्षण पर्यटक स्थल Top 15 Places To Visit In Chamoli Garhwal

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट उत्तराखंड राज्य  के “चमोली में स्थित आकर्षण पर्यटक स्थल (Top 15 Places To Visit In Chamoli Garhwal)” के बारे  में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते हैं  “चमोली जिले में स्थित आकर्षण पर्यटक स्थल  (Top 15 Places To Visit In Chamoli Garhwal)” के बारे में तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|


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“Top 15 Places To Visit In Chamoli Garhwal” चमोली जिले में स्थित आकर्षण पर्यटक स्थल !!

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फूलो की घाटी VALLEY OF FLOWER!!

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park) जिसे आम तौर पर सिर्फ़ “फूलों की घाटी” कहा जाता है , भारत का एक राष्ट्रीय उद्यान है , जो उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र के हिमालयी क्षेत्र में चमोली जिले में स्थित है । नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित हैं । फूलो की घाटी उद्यान 87.50 किमी वर्ग क्षेत्र में फैला हुआ है । चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी को विश्व संगठन , यूनेस्को द्वारा सन् 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया । हिमाच्छादित पर्वतों से घिरा हुआ और फूलों की 500 से अधिक प्रजातियों से सजा हुआ , यह क्षेत्र बागवानी विशेषज्ञों या फूल प्रेमियों के लिए एक विश्व प्रसिद्ध स्थल बन गया । वैसे तो कहते हैं कि नंदकानन के नाम से इसका वर्णन “रामायण और महाभारत” में भी मिलता है | यह माना जाता है कि यही वह जगह है जहाँ से हनुमानजी भगवान राम के भाई लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाए थे परन्तु स्थानीय लोग इसे “परियों और किन्नरों का निवास” समझ कर यहाँ आने से अब भी कतराते हैं , हालाकि आधुनिक समय में ब्रितानी पर्वतारोही फ़्रैंक स्मिथ ने 1931 में इसकी खोज की थी और तब से ही यह एक पर्यटन स्थल बन गया।


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पंचाचूली ABOUT  PANCHACHULI

पंचाचुली पर्वत भारत के उत्तराखंड राज्य के उत्तरी कुमांऊ क्षेत्र में एक हिमशिखर पर्वत चोटी हैं समुद्रतल से पंचाचुली की ऊंचाई लगभग 6,312 मीटर से 6,104 मीटर तक हैं |

पंचाचूली बेस कैंप एक रोमांचक बेस कैंप है जो दार से पंचाचूली ग्लेशियर तक शुरू होने वाले 40 किलोमीटर के ट्रेक में अपने मार्की को स्थापित करता है। पंचाचूली  बर्फ से ढकी चोटियों की गोद में बसे हुए, पिथौरागढ़ जिले में दारमा घाटी प्रचुर प्राकृतिक भव्यता के साथ संपन्न है,

ग्लेशियर का मार्ग रोमांचकारी दृश्यों, बर्फ से ढके पहाड़ों, शानदार नदियों, अल्पाइन घास के एक शानदार संयोजन में है। वनस्पतियों और जीवों की समृद्ध विविधता। पूर्वी कुमाऊं हिमालय में स्थित, ट्रेकिंग मार्ग में गोरी गंगा और दारमा घाटियों के बीच जल क्षेत्र है। लोग यहाँ प्रकृति की सुंदरता को देखने आते हैं| नेपाल और तिब्बत की सीमाओं के पास दारमा घाटी में कुमाऊँ हिमालय पर्वतमाला की गोद में बसा पंचाचूली ग्लेशियर, उत्कृष्ट सौंदर्य का एक क्षेत्र है।
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गौचर, जिला चमोली,

गौचर भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले के भीतर कर्णप्रयाग तहसील में स्थित एक हिल स्टेशन है। गौचर अलकनंदा नदी के बाएं किनारे पर स्थित है और बद्रीनाथ मंदिर के  रास्ते में स्थित है| यह समुद्र तल से 800 मीटर (2,620 फीट) की ऊंचाई पर स्थित, गौचर सात पहाड़ों से घिरा हुआ है। गौचर अपने ऐतिहासिक व्यापार मेले के लिए जाने जाते हैं।  गौचर शांत वातावरण वाला स्थान हैं इसलिए यहाँ यहाँ पर्यटक आना पसंद करते हैं| गौचर उत्तराखंड के इस पहाड़ी इलाके में सबसे बड़ा मैदानी क्षेत्र है
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 ग्वालदम चमोली गढ़वाल

ग्वालदम हरी जंगल और सेब बागानों के बीच, 1629 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। कौसानी से 40 किलोमीटर, ग्वालदम हिमालयी चोटियों नंदा देवी (7817 मीटर), त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदा घुति (630 9 मीटर) का एक आकर्षक दृश्य पेश करता है।ग्वाल्दाम बैजनाथ से 22 किमी दूर है|

ग्वालदम एक छोटा सा शहर है, इसकी समृद्धि का मुख्य कारण यह कुमाऊं और गढ़वाल का स्टेशन  है और यहाँ से  बहुत  रास्ते विभिन्न क्षेत्रों और गांवों  की ओर जाते है|

यह ट्रेकर्स के लिए आधार शिविर भी है जो काठगोदाम (नैनीताल) रेलवे से लॉर्ड कर्ज़न ट्रेल (कुआरी पास), नंदा देवी राज जाट और रूपकंड तक ट्रेकिंग मार्ग पर प्रवेश करते हैं। एक बार यह आलू और सेब व्यापार के लिए एक मंडी था।  यहाँ से बर्फ से ढकी हिमालय की सुंदर चोटिया दिखाई देती है और  देवदार के वृक्षों से घिरा यह स्थान पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं


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माणा दर्रा चमोली 

माणा दर्रा उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल जिले में भारत चीन सीमा पर स्थित हिमालय का एक प्रमुख दर्रा है।

यह  NH-58 का अन्तिम छोर है। इसे माना ला, चिरबितया,चिरबितया अथवा डुंगरी ला के नाम से भी जाना जाता है। माणा दर्रा समुद्रतल से लगभग 5,545 मीटर तथा 18,192 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यह उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर के निकट स्थित है। माणा दर्रा उत्तराखंड के कुमाऊ श्रेणी में स्थित है। इस दर्रे से मानसरोवर तथा कैलाश की घाटी जाने का मुख्य मार्ग है। माणा दर्रा भारत को तिब्बत से जोड़ती हैं। इसे दुनिया का सबसे ऊंची परिवहन योग्य सड़क भी माना जाता है। माणा दर्रा सर्दियों के मौसम में 6 महीने तक बर्फ से ढका रहता है। माणा दर्रा, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर माणा शहर से 24 किलोमीटरऔर उत्तराखंड से प्रसिद्ध हिन्दू धार्मिक तीर्थ बद्रीनाथ से 27 किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है।  माना पास में बाईकर्स आना बेहद पसंद करते हैं|  यह  पर्यटकों के लिए बेहद सुन्दर एवं शांत वातावरण वाली जगह हैं |
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ALI BUGYAL अली बुग्याल

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बुग्यालो में से एक बुग्याल अली बुग्याल भी हैं| अली बुग्याल उत्तराखंड के चमोली जिले के दीदीना गांव के पास है। भारत में सबसे बड़ा घास का मैदान होने के कारण जाना जाता है, जो की समुद्र सतह से लगभग 13,000 फीट की उचाई स्थित हैं |

बुग्याल  निचले हिमालयी क्षेत्र में घास के मैदान हैं हरे-भरे, पहाड़ के शीर्ष पर या उसके किनारों पर कहीं, पाइन और देवदार के घने जंगल से घिरे हुए हैं। बुग्याल हिम रेखा और वृक्ष रेखा के बीच का क्षेत्र होता हैं यह स्थानीय लोगो को चराहगाह का काम देता हैं |ट्रेकिंग के लिए यह जगह बेहद खुबसूरत हैं |इन बुग्यालों में गर्मियों की मखमली घास पर, सर्दियों में बर्फ की सफ़ेद चादर बिछ जाती हैं |  उत्तराखंड में छोटे बड़े कई ऐसे बुग्याल हैं जो अपने आप में प्रसिद्ध  हैं, जैसे अली बुग्याल , बेदनी बुग्याल, चौपता, बन्शीनारायण,आदि|


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बेदनी बुग्याल  चमोली

बेदनी बुग्याल, गड़वाल हिमालय के हिमशिखरों में स्थित है। यहां के मैदान, हरे-भरें घास के मखमली चादर ओड़े हुऐ होते है।

बेदनी बुग्याल समुद्रतल से 3,354 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं।बेदनी बुग्याल रूपकुण्ड जाने वाले रास्ते में पड़ता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको ऋषिकेश से कर्णप्रयाग,ग्वालदम, मदौली होते हुए वाण गाँव पहुंचना होगा।

वाण से लगभग 10 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद  आप बेदनी बुग्याल तक पहुंच सकते है। बुग्याल के बीचों-बीच फैली यह झील यहाँ के सौदर्यं में चार चांद लगा देती है।

बर्फ पीघलने के बाद इन मैदानों में जगह-जगह रंग-बिरंगे छोटे-छोटे फूल खिल आते है, तथा इन मैदानों में कई प्रकार की जड़ी बूटियां भी पायी जाती है। जैसे रतनजोत,कलंक,बज्रदन्ती,अतीष,हत्थाजड़ी आदि।

चमोली गढ़वाल में कई बुग्याल है, उनमें से एक प्रसिद्ध बुग्याल बेदनी बुग्याल  है। इन बुग्यालों में हिमालयी भेड़, हिरण, कस्तूरी मृग, मोनाल जैसे जानवर भी दिखायी देते है।

यहां के हरे-भरें मैदान देखते मन मोह लेते है। यहां का सुन्दर आनन्द लेने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते है। अधिकतर पर्यटक  मई- जून में आते है।

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रूद्रनाथ मंदिरRUDRANATH TEMPLE

रुद्रनाथ मंदिर  उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। यह समुद्रतल से लगभग 3,600 से (11,800 ) फिट ऊचाई पर स्थित है।इस यात्रा के लिए सबसे पहले गोपेश्वर  पहुचना पड़ता है जो कि चमोली जिले का मुख्यालय है। गोपेश्वर एक आकर्षण हिल स्टेशन हैं।जहां पर ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर है। गोपेश्वर से पांच किलोमीटर की दूरी पर सागर गांव आता है। जहां से रूद्रनाथ के लिए खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।यहां देश विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते रहते है। और यहां के सुन्दर वातारण को देख मंत्रमुक्त हो जाते है।लेकिन यहां आने वाले लोग 3,600 से 11,800  फिट ऊँचाई के कारण हिम्मत कम ही जुटा पाते। रूद्रनाथ एक जाना माना गांव है यह गांव रूद्रनाथ मंदिर के कारण जाना जाता है। जो कि पंचकेदार के चौथे नम्बर पर आता है तथा चार अन्य मन्दिर भी है केदारनाथ मंदिर, तुंगनाथ मंदिर,मध्यमहेश्वर मंदिर और कल्पेश्वर मंदिर आदि भक्त आम तौर पर  मंदिर  जाने से पहले नारद कुण्ड में स्नान करतें हैं |

कपाट खुलने के विशेष अवसर पर हजारों भक्तजन उमड़ पड़ते हैं और जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं | श्रावण मास (जुलाई से अगस्त) में पूर्णिमा के दिन मंदिर में वार्षिक मेला लगता है |


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जोशीमठJOSHIMATH

जोशीमठ एक पवित्र शहर है जो उत्‍तराखंड के चमोली जिले में समुद्र स्‍तर से 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है । यह शहर बर्फ से ढकी हिमालय पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है। यह स्‍थल हिंदू धर्म के लोगों के लिए प्रतिष्ठित जगह है और यहां कई मंदिर भी स्‍थापित हैं । यहां 7 वीं सदी में धर्मसुधारक आदि शंकराचार्य को ज्ञान प्राप्त हुआ और बद्रीनाथ मंदिर तथा देश के विभिन्न कोनों में तीन और मठों की स्थापना से पहले यहीं उन्होंने प्रथम मठ की स्थापना की । जाड़े के समय इस शहर में बद्रीनाथ की गद्दी विराजित होती है , यहां हिंदू धर्म के लिखित वेद अथर्ववेद का पाठ पवित्र माना जाता है । इस शहर को पूर्व काल में कार्तिकेयपुर के नाम से जाना जाता था । जोशीमठ में एक प्राचीन पेड विराजित है – जिसे “कल्‍पवृक्ष” के नाम से जाना जाता हैं , जो देश का सबसे पुराना पेड़ माना जाता है । स्‍थानीय लोगों के अनुसार, लगभग 1200 पुराने इस वृक्ष के नीचे आदि गुरू शंकराचार्य ने घोर तपस्‍या की थी ।
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गोपेश्वर का इतिहास !! GOPESHWAR HISTORY !!

गोपेश्वर उत्तराखंड के चमोली जिले का एक प्रसिद्ध मुख्यालय है । गोपेश्वर उत्तराखंड की अलग-अलग हिमाच्छादित हिमालय से घिरा हुआ एक पर्यटक के लिए सबसे आकर्षक दृश्य पेश करता है । स्थानीय लोगो के अनुसार , गोपेश्वर का नाम भगवान कृष्ण के साथ जुड़ा हुआ है एवम् यह उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक है । गोपेश्वर का मुख्य आकर्षण भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। सैकड़ों और हजारों भक्त यहां आते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं । गोपेश्वर तुंगनाथ , अनसुया देवीरुद्रनाथ और बद्रीनाथ के चार प्रसिद्ध मंदिरों से घिरा हुआ है । वैतरणी कुंड – गोपेश्वर में अन्य दिलचस्प स्थान मूर्तियों और ओक व्यू के बिना मंदिरों का एक समूह है क्यूंकि गोपेश्वर एक धार्मिक महत्व वाला शहर है , गोपेश्वर में और आसपास कई आध्यात्मिक स्थान हैं । किंवदंतियों के अनुसार शहर का नाम भगवान कृष्ण के नाम पर रखा गया है। यह शहर गोपीनाथ मंदिर, भगवान शिव को समर्पित है। इसके अलावा, गोपेश्वर के ऊपर बहुत सारे मंदिर और तीर्थ हैं।


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JOSHIMATH , CHAMOLI नरसिंह मंदिर

देवभूमि उत्तराखंड के चमोली ज़िले के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) क्षेत्र में स्थित ‘नृसिंह मंदिर’ भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशमों में से एक है | नरसिंह मंदिर जोशीमठ का सबसे लोकप्रिय मंदिर है , यह मंदिर भगवान नरसिंह को समर्पित है जो कि भगवान विष्णु के चौथे अवतार थे | सप्त बद्री में से एक होने के कारण इस मंदिर को नारसिंघ बद्री या नरसिम्हा बद्री भी कहा जाता है | नरसिंह मंदिर के बारे में यह माना जाता है कि यह मंदिर, संत बद्री नाथ का घर हुआ करता था । 1200 वर्षों से भी पुराने इस मंदिर के विषय में यह कहा जाता है कि आदिगुरु शंकराचार्य ने स्वयं इस स्थान पर भगवान नरसिंह की शालिग्राम की स्थापना की थी | मंदिर में स्थापित भगवान नरसिंह की मूर्ति शालिग्राम पत्थर से बनी है , इस मूर्ति का निर्माण आठवी शताब्दी में कश्मीर के राजा ललितादित्य युक्का पीड़ा के शासनकाल के दौरान किया गया और कुछ लोगों का मानना है कि मूर्ति स्वयं-प्रकट हो गयी , मूर्ति 10 इंच(25से.मी) है एवम् भगवान नृसिंह एक कमल पर विराजमान हैं
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BHAVISYA BADRI TEMPLE , JOSHIMATH , CHAMOLI भविष्य बद्री मंदिर

भविष्य बद्री मंदिर एक प्रसिद्ध , धार्मिक एवम् पवित्र मंदिर है जो कि लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर जोशीमठ के पूर्व जोशीमठ-लता-मलारी मार्ग पर तपोवन के आस-पास घने जंगलों के बीच में स्थित है याभविष्य बद्री मंदिर , सप्त बद्री में से एक है जो गाँव सुभेन , जोशीमठ उत्तराखंड में स्थित है । यह मंदिर समुन्द्रतल से 2744 मीटर की ऊँचाई पर घने जंगलो के अन्दर स्थित है एवम् यह मंदिर पंच बद्री ( बद्रीनाथ, योगध्यान बद्री, आदि बद्री तथा वृद्ध बद्री ) तीर्थ में से एक है | भविष्य बद्री मंदिर की स्थापना आठवीं सदी में आदि गुरू शंकराचार्य ने की थी । भविष्य-बद्री मंदिर के समीप एक पत्थर पर शंकराचार्य ने भविष्यवाणी भी लिखी है । जिस भाषा में भविष्य वाणी लिखी गई है , उसे आज तक कोई नहीं पढ़ पाया है । यहां मंदिर के पास एक शिला है, इस शिला को ध्यान से देखने पर भगवान की आधी आकृति नज़र आती है | यहां भगवान बदरी विशाल शालिग्राम मूर्ति के रूप में विराजमान हैं। पौराणिक मान्यता है कि कलयुग के अंत में जब जय-विजय पर्वत के आपस में मिलने पर बदरीनाथ धाम की राह अवरुद्ध हो जाएगी , तब भगवान बदरी विशाल भविष्य बदरी मंदिर में ही श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। यहां भगवान बदरी विशाल शालिग्राम मूर्ति के रूप में विराजमान हैं ।


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ADI BADRI TEMPLE आदिबद्री मंदिर

आदिबद्री मंदिर प्राचीन मंदिर का एक विशाल समूह एवम् बद्रीनाथ मंदिर के अवतारो में से एक है , इस मंदिर का प्राचीन नाम “नारायण मठ” था | यह मंदिर कर्णप्रयाग से लगभग 16 किलोमीटर दूर 16 प्राचीन मंदिरों का एक समुह है लेकिन वर्तमान समय में केवल 16 मंदिर में से 14 ही बचे है | आदिबद्री मंदिर का आकर पिरामिड रूप की तरह है | आदिबद्री मंदिर बद्री क्षेत्र में स्थित सप्तम बद्री मंदिरों में से एक है जो कि बद्री विशाल या बद्रीनाथ , आदि बड़री , वृद्धा बद्री , ध्यान बद्री , अर्धा बद्री , भावीय बद्री और , योगिदान बदरी है । इस मदिर की यह मान्यता है कि आदिबद्री मंदिर भगवान नारायण की तपस्थली थी | इस क्षेत्र में आदि गुरु शंकराचार्य सबसे पहले आये थे , तब से इस स्थान को “आदिबद्री”कहा जाने लगा | इस पवित्र स्थान के निकट तीर्थ कर्णप्रयाग है जो कि पंच प्रयाग में से एक धार्मिक प्रयाग है | आदिबद्री मंदिर मुख्य रूप से भगवान विष्णु का मंदिर है तथा मंदिर में भगवान विष्णु की 3 फुट ऊँची मूर्ति की पूजा की जाती है | इस मंदिर में एक मीटर ऊँची काली शालिग्राम की मूर्ति है
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बुढाकेदार मंदिर BUDHAKEDAR TEMPLE , CHAMOLI !!

बुढाकेदार मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में बाल गंगा और धरम गंगा नदियों के संगम पर स्थित प्राचीन एवम् पवित्र , धार्मिक मंदिर है । “बुद्ध” (“पुराना”) केदार मंदिर और गंगा नदियों (स्थानीय तौर पर धर्म प्रयाग के रूप में जाना जाता है) के संगम पर एक मंदिर है | यह मंदिर नई टिहरी से मोटर मार्ग से लगभग 59 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है | बुढाकेदार मंदिर भगवान शिव को समर्पित है | मंदिर के प्रवेश द्वार लकड़ी और पत्थर नक्काशी का एक शानदार संयोजन हैं । बूढ़ा केदार मंदिर में स्थित शिवलिंग की गहराई की नपाई अभी तक कोई नहीं कर पाया है परंतु ऊपरी ऊंचाई जमीन से लगभग 2 से 3 फीट की है इस , शिवलिंग पर भगवान शिव जी के अलावा कई अन्य आकृतियां भी बनी है जैसे कि माता पार्वती , भगवान गणेश , भगवान गणेश का वाहन मूषक , पांच पांडव , द्रोपदी , हनुमान और साथ ही मंदिर में भगवान केलापीर का निशान व माता दुर्गा की प्रतिमा भी रखी गई है | स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर में स्थित शिवलिंग का निर्माण मानव द्वारा नहीं बल्कि इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की उत्पत्ति स्वयं हुई है , जो कि इस मंदिर को अपनी चमत्कारी शक्तियों के रूप में विशेष बनाती है |
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Badrinath Temple (बद्रीनाथ मंदिर)

बद्रीनाथ या बद्रीनारायण मंदिर एक हिन्दू मंदिर है | यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है , ये मंदिर भारत में उत्तराखंड में बद्रीनाथ शहर में स्थित है | बद्रीनाथ मंदिर , चारधाम और छोटा चारधाम तीर्थ स्थलों में से एक है | यह अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है । ये पंच-बदरी में से एक बद्री हैं। उत्तराखंड में पंच बदरी, पंच केदार तथा पंच प्रयाग पौराणिक दृष्टि से तथा हिन्दू धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं | यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बद्रीनाथ को समर्पित है | ऋषिकेश से यह 214 किलोमीटर की दुरी पर उत्तर दिशा में स्थित है | बद्रीनाथ मंदिर शहर में मुख्य आकर्षण है |


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Chamoli Garhwal In 360 Degree

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उम्मीद करते है कि आपको उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले के आकर्षक , पर्यटन स्थल और आनंद लेने के लिए गतिविधयो के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा |

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