Top 5 Hillstation in Uttarakhand !! उत्तराखंड के प्रसिद्ध पांच हिल स्टेशन !

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Hillstation in Uttarkhand

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Top 5 Hillstation in Uttarakhand

उत्तराखंड में शीर्ष 5 लोकप्रिय हिलस्टेशन उत्तराखंड के विशाल हिमालय पर्वत के पहाड़ो पर स्थित है |

यहाँ ऐसे कई पहाड़ी स्टेशन है जो की शांत वातावरण , मनोरम विचार और सुहाना मौसम प्रदान करते है |

उत्तराखंड में वैसे तो बहुत सारे हिल स्टेशन है जहा आप चाहे घूम सकते है | लेकिन आज हम आपको ऐसे 5 हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे है जहा आप अपने परिवार के साथ यात्रा करके हिल स्टेशन की सुन्दरता का आनंद ले सकते है | 

उत्तराखंड के शीर्ष 5 लोकप्रिय हिलस्टेशन निम्न है |

1.  मंसूरी

2. नैनीताल

3. औली

4. मुनस्यारी

5.कौसानी
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 Hillstation in Uttarakhand – मंसूरी (पहाड़ो की रानी )

उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले से मंसूरी मात्र 35 km की दुरी पर स्थित एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है |  यह उत्तराखंड में सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशन है |  इस जगह को “पहाड़ो की रानी” के नाम से भी जाना जाता है |

मंसूरी ने “मुसर्जी” या “झाड़ी के मंसूर” के पौधे से नाम प्राप्त किया है जो कि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। मंसूरी 1880 मीटर की औसत उचाई पर गढ़वाल के पहाड़ो पर एक घोड़े की नाल के ऊपर स्थित है | मंसूरी दून वैली और शानदार हिमालय के कमांडिंग नज़ारे प्रदान करता है | इस इलाके में सबसे ऊँचा स्थल लाल टिब्बा है  जो की लन्दौर नामक जगह में है | इसकी ऊँचाई 2,275 मीटर है | मसूरी को गंगोत्री और यमनोत्री का प्रवेश द्वारा भी कहा जाता है |

 इस जगह पर सबसे पहले 1960 में  tibetan school की स्थापना भी गयी है | मशहूर हरे-भरे पहाड़ियों, विविध वनस्पतियों और जीवों और हिमालय के राजसी दृश्य हर साल घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मसूरी से हजारों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मंसूरी में कई दिलचस्प पर्यटन इस्थल है जैसे की केम्प्टी फॉल्स, गन हिल, कैमल की बैक रॉक, झारिपानी फॉल्स, मॉल रोड, चाइल्डर लॉज, भट्टा फॉल्स, धनुल्टी, और कनाताल। यमुना ब्रिज, धनोल्टी, सुरखंडा देवी, चंबा (टिहरी), लाखा मंडल यह वह प्रमुख जगहें पर्वतों की रानी के आसपास की जगहें हैं, यह जगह भी मसूरी से कम खूबसूरत नहीं हैं। मसूरी घुमने-फिरने आए पर्यटक इन जगहों पर भी अवश्य ही आया करते हैं।
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Hillstation in Uttarakhand – नैनीताल (देवी और ताल की भूमि  )

सबसे लोकप्रिय और अतिसुंदर पहाड़ी स्टेशन “नैनीताल” उत्तराखंड राज्य में कुमाऊ क्षेत्र में स्थित है।

नैनीताल की खोज सन 1841 में एक अँगरेज़ चीनी व्यपारी ने की , बाद में अंग्रेजो ने इसे आरामगृह और स्वास्थ लाभ लेने की जगह के रूप में स्वीकार लिया | नैनीताल तीनो दिशायो से घने पेड़ो की छाया में ऊँचे ऊँचे पर्वत के बीच समुन्द्रतल से 1938 मीटर की ऊँचाई पर बसा है | नैनीताल के ताल की लम्बाई 1358 मीटर और चौडाई 458 मीटर है और गहराई 15 से 156 मीटर तक नापी गयी है हलाकि इसकी सही जानकारी अभी तक किसी के पास नहीं है |यह हिलस्टेशन  झील के लिए प्रसिद्ध है।

इस जगह में चिड़ियाघर एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जहां आपको हिम तेंदुए की दुर्लभ प्रजातियां , स्टेप ईगल और हिमालयियन भालू, शेर आदि की प्रजातीय मिलती है | अपने विशाल उद्यान के साथ राजभवन के गवर्नर हाउस सार्वजनिक खुले रहने के लिए खुले राज्यभावों में से एक है। नैनीताल में बोटिंग , शौपिंग , पिकनिक स्पॉट और रोपवे , ट्रैकिंग और हाईकिंग आदि चीजों का लुफ्त उठा सकते है | नैनीताल में देखने के लिए निम्न जगह है जैसे की नैनी लेक , नैनीताल जू , एरियल रोपवे ,नैना देवी मंदिर , मॉल रोड ,टिफ़िन टॉप , इको केव गार्डन , राज भवन , किल्बरी हिल्स , स्नो view पॉइंट , गर्ने हाउस , नैना पीक , हनुमान गढ़ी , नैना देवी पक्षी संरक्षण आदि |

यदि आप नैनीताल आना चाहते है तो आप Delhi से Kathgodam by Bus , Taxi ,Train , Private Car आदि से आ सकते है | उसके बाद आप Kathgodam से Taxi , Bike , Bus आदि से Nainital जा सकते है |
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Hillstation in Uttarakhand – कौसानी (भारत का स्विट्ज़रलैंड)

कौसानी गरुड़ तहसील में भारत के उत्तराखंड राज्य के अनतर्गत कुमाउं मंडल के बागेश्वर जिले का एक गाँव है |

कौसानी उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले से 53 किलोमीटर उत्तर में स्थित है |

यह पिंगनाथ छोटी पर बसा है | कौसानी से नंदा देवी पर्वत की चोटी का नजारा बड़ा भव्य दिखाई देता है | कोसी और गोमती नदी के बीच बसा कासानी भारत का स्विट्ज़रलैंड कहलाता है | इस सुंदर जगह में प्रसिद्ध हिंदी कवि सुमित्रा नंदन पन्त का जन्म भी हुआ है, जो कौशानी की खूबसूरती की प्रशंसा करते हुए कई कविताओं को लिखते हैं । कौसानी में म्यूजियम में घूमा जा सकता है (जैसे की अनाशक्ति आश्रम और मशहूर कवि सुमितानंदन पंत के घर से बने संग्रहालय में ) |साथ ही साथ में आप कौसानी से त्रिशूल, नंद घुटती और नंददेवी के कौशनी के हाथों से हिमालय की चोटियों के विशाल दृश्य का भी आनंद ले सकते हैं।

More Information :-

कौसानी में छोटी बाज़ार लगती है जहा से आप वहा के ग्रामीणों के हाथ द्वारा बनायीं गयी कौसानी शाल खरीद सकते है और साथ ही साथ आप कौसानी टी एस्टेट से कौसानी की चाय भी खरीद सकते हैं।पर्यटक यहाँ से ग्रामीण के जीवन, कला, संस्कृति और विरासत के बारे में बहुत कुछ सीख सकते हैं जो हिमालयी क्षेत्रों में फैलता है। कौसानी को उत्तराखंड की पहाड़ियों में संस्कृति और देहाती अभी तक आकर्षक जीवन के बारे में सीखने और तलाशने के लिए पर्यटकों के लिए एक पर्यावरण अनुकूल गंतव्य स्थान बन गया है।

कौसानी को एक लोकप्रिय सर्दियों के हिलस्टेशन के रूप में जाना जाता है |

इसलिए हिमपात में गवाह होने के लिए सर्दियों में इस जगह की यात्रा जरुर करनी चाहिए |

यदि आप कौसानी आना चाहते है तो आप Delhi से Kathgodam by Bus , Taxi ,Train , Private Car आदि से आ सकते है | उसके बाद आप Kathgodam से Taxi , Bike , Bus आदि से अल्मोड़ा से 53 किलोमीटर आगे कौसानी जा सकते है |
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Hillstation in Uttarakhand – औली

औली उत्तराखंड का एक भाग है जो की 5 से 7 किलोमीटर में फैला छोटा का सकिंग-रिसोर्ट है |

इस रिसोर्ट को 9500,10,500 की ऊँचाई पर बनाया गया है |

औली का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, नंदप्रयाग, अलकनंदा और नंदाकिनी नदियों के संगम पर स्थित है।

हिंदू धर्म के लोगो के लिए इस संगम में डुबकी लगाना धार्मिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

आली उत्तराखंड में शीर्ष पहाड़ी स्टेशनों में से एक है, जो अपने शीतकालीन खेलों के लिए अधिक लोकप्रिय है। इस जगह से बर्फ से भरी चोटियाँ बहुत ही आकृषित करती है | इनकी ऊँचाई लगभग 23,000 फीट है |

आली उत्तराखंड में शीर्ष पहाड़ी स्टेशनों में से एक है, जो अपने शीतकालीन खेलों के लिए अधिक लोकप्रिय है। स्की ढलान जो की समुद्र तल से 2500 मीटर और 3,500 मीटर के बीच – भारत में स्नोबोर्डिंग और स्कीइंग के लिए सबसे अच्छे विकल्प हैं।औली की बर्फीली ढलानों पर स्कींइग का भरपूर मज़ा लिया जा सकता है। अल्पाइन स्कीइंग, नार्डिक स्कीइंग तथा टेलीमार्क स्कीइंग का आनंद लेने के लिए ये ढलानें बेहतरीन हैं। एशिया की सबसे लंबी केबल कार औली में है जो 4कि.मी. की दूरी तय करती है।

केबल कार को गोंडोला कहते हैं जिसमें चेअर लिफ्ट और स्की लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है।

More Information :-

हिमालय क्षेत्र में औली ट्रैकिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ जोशीमठ ट्रैकिंग रूट बहुत लोकप्रिय है।

इस क्षेत्र के विभिन्न रास्तों पर ट्रैकिंग करते हुए कामेत, नंदादेवी, मान पर्वत तथा दुनागिरी पर्वत देखे जा सकते हैं । औली उत्तराखंड का एक भाग है जो की 5 से 7 किलोमीटर में फैला छोटा का सकिंग-रिसोर्ट है और इस रिसोर्ट को 9500-10,500 की ऊँचाई पर बनाया गया है | इस जगह से बर्फ से भरी चोटियाँ बहुत ही आकृषित करती है | इनकी ऊँचाई लगभग 23,000 फीट है |

नंदा देवी की चोटी, उगते सूर्य को प्रतिबिंबित करते हुए अधिक सुंदर लगती है |

औली में प्रकृति ने अपने सौन्दर्य को खुल कर बिखेरा है |

प्रकृति का ध्यान रखते हुए इन्हें पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है।

ऐसे में अप्रैल से जून तक भी पर्यटक औली आ सकते हैं।
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Hillstation in Uttarakhand – मुनस्यारी

मुनस्यारी उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक सुंदर गांव है |

जो हिमालयों की मस्तिष्कियों की बर्फ से ढकी हुई चोटियों में बसा है , प्राकृतिक सुंदरता का शानदार हिस्सा प्रदान करता है | जो कि उत्‍तराखण्‍ड में जिला पिथौरागढ़ का सीमांत क्षेत्र है जो एक तरफ तिब्‍बत सीमा और दूसरी ओर नेपाल सीमा से लगा हुआ है। मुनस्‍यारी के सामने विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला का विश्‍व प्रसिद्ध पंचचूली पर्वत (हिमालय की पांच चोटियां) जिसे किवदंतियो के अनुसार पांडवों के स्‍वर्गारोहण का प्रतीक माना जाता है |

यह प्राकृतिक हिल स्टेशन समुद्र तल से 2298 मीटर ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है ।

बर्फ बारी के आकर्षण की वजह से पर्यटक यहाँ खिचे चले आते हैं |

मुनस्यारी की वादियों में बर्फवारी का लुत्फ़ उठाते हैं।

सर्दियों में काफी बर्फ गिरने तथा हिमालय  शिखरों से घिरा होने के कारण इसे हिमनगरी का नाम भी दिया गया है ।यदि आप लम्बे समय के लिए आये है , तो वन्य जीवन की कई किस्मों को देखने मत भूलना जो कि हिमालयी ग्रिफ़ोन, हिमालयी भालू, वगाटेल, रेवेन, बाज़ , मोलल और कई और अधिक दुर्लभ प्रजातियों से समृद्ध है। जन्मी पतन जगह मुनस्यारी से लगभग 35 किमी / मील की दूरी पर है इसलिए पर्यटकों को ऐसे आकर्षण को जरुर देखना चाहिए ।

” नंदादेवी ” नामक एक बहुत पुराना मंदिर इस परिदृश्य का एक और आकर्षण है ।

More Information :-

मार्च से मई और अक्टूबर से नवंबर तक मुन्सयारी की यात्रा करने के लिए सबसे अच्छी अवधि माना जाता है।

सबसे पहले आपको Delhi से काठगोदाम आना होगा |

काठगोदाम से मुनस्‍यारी की यात्रा बस अथवा टैक्‍सी के माध्‍यम से की जा सकती है|

रास्‍ते में कई खूबसूरत स्‍थल आते हैं। काठगोदाम से चलने पर भीमताल, जो कि नैनीताल से मात्र 10 किलोमीटर है, पड़ता है उसके बाद वर्ष भर ताजे फलों के लिए प्रसिद्ध भवाली है, अल्‍मोड़ा शहर और चितई मंदिर भी रास्‍ते में ही है। अल्‍मोड़ा से आगे प्रस्‍थान करने पर धौलछीना, सेराघाट, गणाई, बेरीनाग और चौकोड़ी है। बेरीनाग और चौकोड़ी अपनी खूबसूरती के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां से आगे चलने पर थल, नाचनी, टिमटिया, क्‍वीटी, डोर, गिरगॉव, रातापानी और कालामुनि आते हैं।

कालामुनि पार करने के बाद आता है मुनस्‍यारी, जिसकी खूबसूरती अपने आप में निराली है।

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