उत्तराखंड में कुल कितने जिले है? Uttarakhand District Name

0
1096
Uttarakhand-map

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

उत्तराखंड के जिलों “Uttarakhand District Name”

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “उत्तराखंड दर्शन” के इस पोस्ट में “उत्तराखंड के जिलों Uttarakhand District Name” के बारे में बताने वाले हैं यदि आप जानना चाहते “उत्तराखंड के जिलों के बारे में Uttarakhand District Name” तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़े|
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

उत्तराखण्ड में कितने जिले है

उत्तराखंड राज्य में कुल 13 जिले हैं , जनसँख्या में सबसे बड़ा जिला हरिद्वार और क्षेत्रफल में उत्तरकाशी जिला है और जनसँख्या में सबसे छोटा जिला रुद्रप्रयाग और क्षेत्रफल में चम्पावत जिला  है |
[/av_textblock]

[/av_one_full][av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/04/Almora-A-Tourist-Place-in-Uttarakhand.png’ attachment=’2991′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

अल्मोड़ा का इतिहास

अल्मोड़ा का इतिहास महाभारत के प्राचीन काल में वापस आ सकता है। सातवीं शताब्दी में एक चीनी तीर्थयात्री ने शहर के पहले ऐतिहासिक विवरण प्रदान किया था
कत्युरी राजवंश क्षेत्र ने पहले राज्य की स्थापना की । उनके वंशज, राजा बैचाल्देव ने, भूमि का एक प्रमुख हिस्सा श्री चंद तिवारी, एक गुजराती ब्राह्मण को दान किया।
सोलहवीं शताब्दी के मध्य में , चंद वंश इस क्षेत्र पर शासन कर रहा था। उन्होंने अपनी राजधानी चंपावत से अल्मोड़ा तक स्थानांतरित कर दी और इसे आलम नगरया ‘राजपुर नाम दिया |


(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});


[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/06/Bageshwar-tourist-place.jpg’ attachment=’3270′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

बागेश्वर जिला

बागेश्वर जिला , उत्तराखंड के कुमाऊं मण्डल का एक जिला है | जिसका निर्माण 1997में हुआ था | इससे पहले यह जिला अल्मोड़ा जिला का भाग था | बागेश्वर जिले में 3 तहसीलें है और 1 विधान सभा सीट है एवम् बागेश्वर जिले का मुख्यालय बागेश्वर नगर में ही है। बागेश्वर जिले के पडोसी जिले कुछ इस प्रकार से है, पूर्व में पिथौरागढ़ जिला है, दक्षिण से पश्चिम तक अल्मोड़ा और पश्चिम से उत्तर तक चमोली जिला है।

बागेश्वर जिले का इतिहास बड़ा ही रोचक है | सर्वप्रथम बागेश्वर , अल्मोड़ा जिले का तहसील था लेकिन 15 सितम्बर 1990 को यह अल्मोड़ा से अलग हो गया और एक स्वतंत्र जिला बन गया | हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार इस स्थान पर साधू और अन्य देवी देवता भगवान शिव के लिए ध्यान लगाने के लिए आया करते थे | भगवान शिव इस स्थान में शेर का रूप धारण कर विराजे थे इसलिए इस स्थान का नाम व्याघ्रेश्वर तथा बागेश्वर बन गया | बाद में 1450 ईसवी में चंद राजवंश के राजा लक्ष्मी चंद ने बागेश्वर में एक मंदिर स्थापित किया | बागेश्वर को प्राचीन काल से भगवान शिव और माता पार्वती की पवित्र भूमि माना जाता है  एवम् पडोसी क्षेत्रो में भी बागेश्वर की भूमि विश्वास का प्रतीक है | पुराणों के अनुसार बागेश्वर देवो का देवता है |
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/06/champawat-tourist-places.jpg’ attachment=’3330′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

चम्पावत

चम्पावत में प्राकर्तिक सौंदर्य के साथ धार्मिक पर्यटन की सौगात भी मिलती है | प्रकर्ति की खूबसूरत वादियों में बसा चम्पावत ऐतिहासिक एवम् पौराणिक समृधि से परिपूर्ण है | चंद राजा की राजधानी रहे काली कुमाऊ के नाम से प्रसिद्ध यह नगर अपनी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासतों के लिए अधिक जाना जाता है | चम्पावत जगह का नाम चम्पावती से लिया गया है , जो कि राजा अर्जुन देव की बेटी थी | प्रसिद्ध प्रकृतिवादी और ब्रिटिश शिकारी जिम कॉर्बेट के द्वारा बाघों की हत्या के बाद यह स्थान लोकप्रिय हो गया एवम् जिम कॉर्बेट ने अपनी पुस्तक में मैन ईटर्स ऑफ़ कुमाऊ “Man Eaters of Kumaon” में बाघों की हत्या के बारे में एक स्पष्ट जानकारी दी है | चंपावत में पर्यटकों को वह सब कुछ मिलता है , जो वह एक पर्वतीय स्थान से चाहते हैं । वन्यजीवों से लेकर हरे-भरे मैदानों तक और ट्रैकिंग की सुविधा , सभी कुछ यहां पर है । चंपावत की ऐतिहासिकता और पहचान की बात करें तो जोशीमठ के गुरूपादुका नामक ग्रंथ के अनुसार नागों की बहन चम्पावती ने चम्पावत नगर की बालेश्वर मंदिर के पास प्रतिष्ठा की थी ।


(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});


[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/04/Places-to-Visit-in-Nainital.png’ attachment=’2934′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

नैनीताल

नैनीताल भारत के उत्तरी राज्य उत्तराखंड का एक पर्यटन नगर है | बर्फ से ढके पहाड़ो के बीच बसा यह जगह झीलों से घिरी हुई है | इनमे से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है | जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल रखा गया है | इसलिए इसे झीलों का शहर  भी कहा जाता है | यह नगर एक सुंदर झील के आस-पास बसा हुआ है और इसके चारों ओर नाच्छादित पहाड़ हैं । नैनीताल के उत्तर में अल्मोड़ा, पूर्व में चम्पावत, दक्षिण में ऊधमसिंह नगर और पश्चिम में पौड़ी एवं उत्तर प्रदेश की सीमाएँ मिलती हैं । नैनीताल को आप चाहे कही से भी देखे उसकी सुन्दरता बेहद खूबसूरत , और मन को मोह लेती है | नैनीताल का दृश्य नैनो को सुख देता है |
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/03/Pithoragarh-History-in-Hindi.png’ attachment=’2807′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

पिथौरागढ़


(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});


पिथौरागढ़ , देवभूमि उत्तराखंड राज्य का एक नगर है , जो कि उत्तराखंड राज्य के पूर्व में स्थित सिमांतर जनपद है | इस जिले के उत्तर में तिब्बत, पूर्व में नेपाल, दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व में अल्मोड़ा, एवं उत्तर-पश्चिम में चमोली ज़िले पड़ते हैं |पिथौरागढ़ का पुराना नाम सोरघाटी है। सोर शब्द का अर्थ होता है-– सरोवर। यहाँ पर माना जाता है कि पहले इस घाटी में सात सरोवर थे । सरोवर में पानी सूखने से इस स्थान में पठारी भूमि का जन्म हुआ | जिससे इस जगह का नाम “पिथोरा गढ़” पडा और यह भी माना जाता है कि मुगलों के शासन काल में उनकी भाषा की दिक्कतों के चलते इसका नाम “पिथौरागढ़ पड़ गया | पिथोरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है | इसके इतिहास के बारे में आम तौर पर दो कहानी बताई जाती है | पिथौरागढ़ (जिसे “मिनी कश्मीर” भी कहा जाता है)नेपाली राजा “पाल” नाम के राजा के अधीन था । जो कि 13 वी शताब्दी में पिथौरागढ़ पहुचे और उसके बाद पिथौरागढ़ में शासन करना शुरू कर दिया | स्थानीय राजा “चंद” ने उनके खिलाफ विद्रोह किया और “पाल” और “चंद” के बीच एक युद्ध आरम्भ हो गया | यह युद्ध तीन पीढियों तक जारी रहा , जिसमे कभी-कभी पाल का शासन होता था और कभी-कभी चंद के राजा इस राज्य पर शासन करते थे |
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2019/03/kashipur.png’ attachment=’5340′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

उधमसिंह नगर

काशीपुर उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में स्थित हैं|   वर्ष  2011 की जनगणना के अनुसार इस नगर की कुल जनसंख्या 1,21,623 है, जबकि काशीपुर तहशील  की कुल जनसंख्या 2,83,136 है। इस प्रकार, जनसंख्या की दृष्टि से काशीपुर कुमाऊँ  में तीसरा और उत्तराखंड  में छठा सबसे बड़ा नगर है।काशीपुर का मिनियन टाउन एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। कई बड़े औद्योगिक घरानों जैसे कि इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड, HCL, वीडियोकॉन, GAMA IFRAPROP प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हैं|

काशीपुर में 225MW का अपना पावर प्लांट, पेपर मिल और चीनी मिलें भी हैं। काशीपुर में स्थित कुछ मुख्य औद्योगिक स्टेट बालाजी, औद्योगिक स्टेट, भीम नगर औद्योगिक स्टेट, ओमेगा औद्योगिक स्टेट और आईडीईबी औद्योगिक स्टेट भी  हैं।

काशीपुर उत्तराखंड का एकमात्र ऐसा शहर जो अपनी एकमात्र IIM की सुविधा देता है, जो काशीपुर में स्थित एक पब्लिक बिजनेस स्कूल है। यह तेरह भारतीय प्रबंधन संस्थानों में से एक है जिसे सरकार ने ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान स्थापित किया है।

काशीपुर में पांडवों द्वारा गुरु द्रोणाचार्य या उनके गुरु को शुल्क देने के लिए पांडवों द्वारा बनाई गई प्राचीन द्रोण सागर झील को देख सकते हैं। वर्तमान में, द्रोण सागर में उत्खनन स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। अमन और शांति के लिए, लाहौरियान, काशीपुर में माँ मनसा देवी मंदिर जा सकते हैं।
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2017/12/History-of-Chamoli-in-Hindi.png’ attachment=’1929′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]


(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

चमोली उत्तराखंड राज्य

चमोली उत्तराखंड राज्य  का एक जिला है जो कि अलकनंदा नदी के संगम के समीप बद्रीनाथ रास्ते पर स्थित है | चमोली धार्मिक स्थानों में से एक है | इसकी औसत ऊँचाई लगभग 4,500 फुट है, परंतु कहीं-कहीं 10,000 फुट से भी अधिक ऊँचाई मिलती है | चमोली का क्षेत्रफल लगभग 3,525 वर्ग मील है । समुद्रतल से लगभग 1308 मीटर की ऊंचाई पर बसा गोपेश्वर नगर चमोली जिले का मुख्यालय है | मध्य हिमालय के बीच में स्थित चमोली जनपद में कई ऐसे मन्दिर हैं जो कि हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं | इस क्षेत्र में कई छोटे और बड़े मंदिर स्थित है , जो कि रहने कि सुविधा प्रदान करते है | अलकनंदा नदी यहाँ की प्रसिद्ध नदी है , जो तिब्बत की जासकर श्रेणी से निकलती है | जनपद की मुख्य फसलों में गेहूं, मक्का, मण्डुवा, झंगोरा, चावल, भट्ट, सूंठा, अरहर, लोबिया, मसूर, उड़द प्रमुख हैं ।
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2019/01/dehradun-1.png’ attachment=’4931′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

देहरादून

देहरादून दून घाटी में हिमालय की तलहटी में स्थित है जो पूर्व में गंगा नदी और पश्चिम में यमुना नदी के बीच स्थित है। यह शहर अपने सुरम्य परिदृश्य और थोड़ी सी जलवायु के लिए प्रसिद्ध है और आसपास के क्षेत्र के लिए एक प्रवेश द्वार प्रदान करता है। यह अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और मसूरी, और औली के निकट और हरिद्वार और ऋषिकेश के हिंदू पवित्र शहरों के साथ-साथ छोटा चार धाम के हिमालय तीर्थयात्रा सर्किट से जुड़ा हुआ है।

देहरादून नगर निगम को स्थानीय रूप से नगर निगम देहरादून के रूप में जाना जाता है। नागरिक सेवाओं और नगर प्रशासन और प्रबंधन में शामिल अन्य शहरी संस्थाओं में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए), विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एसएडीए), जल संस्थान और जल निगम शामिल हैं। देहरादून अपने बासमती चावल और बेकरी उत्पादों के लिए भी जाना जाता है।
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2017/08/Beliefs-of-haridwar.jpg’ attachment=’402′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

रिद्वार का इतिहास

रिद्वार का इतिहास  बहुत ही पुराना और रहस्य से भरा हुआ है | “हरिद्वार” उत्तराखंड में स्थित भारत के सात सबसे पवित्र स्थलों में से एक है | यह बहुत प्राचीन नगरी है और उत्तरी भारत में स्थित है | हरिद्वार उत्तराखंड के चार पवित्र चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी है | यह भगवान शिव की भूमि और भगवान विष्णु की भूमि भी है। इसे सत्ता की भूमि के रूप में भी जाना जाता है | मायापुरी शहर को मायापुरी, गंगाद्वार और कपिलास्थान नाम से भी मान्यता प्राप्त है और वास्तव में इसका नाम गेटवे ऑफ़ द गॉड्सहै । यह पवित्र शहर भारत की जटिल संस्कृति और प्राचीन सभ्यता का खजाना है | हरिद्वार शिवालिक पहाडियों के कोड में बसा हुआ है |


(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});


[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/06/pauri-garhwal-tourist-place.jpg’ attachment=’3317′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

पौड़ी गढ़वाल

चारो तरफ पहाड़िया और बीच में है “पौड़ी” | उत्तराखंड की एक बेहद सुन्दर जगह है | “पौड़ी”  उत्तराखंड राज्य का एक जिला है | इस जिले का मुख्यालय पौड़ी है |यह जिला मध्य हिमालय में कंडोलिया की पहाड़िया में स्थित है |

समुन्द्रतल से 1750 मीटर की ऊँचाई में स्थित ” पौड़ी ” हिल स्टेशन के रूप में भी जाना जाता है |

पुरे सालभर में पौड़ी का वातावरण बहुत ही सुहाना रहता है | पौड़ी गढ़वाल की मुख्य नदियों में से अलकनंदा और नायर मुख्य है | इस स्थान की मुख्य भाषा गढ़वाली” है | अन्य भाषा में स्थानीय लोग हिंदी , अंग्रेजी भाषा को बेहतरीन रूप में बोलते है |यहाँ के लोकगीत , संगीत व नृत्य यहाँ की संस्कृति की संपूर्ण जगह में अपनी पहचान छोड़ते है |
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2017/09/History-of-rudraprayag-in-h.jpg’ attachment=’919′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

रुद्रप्रयाग

उत्तराखंड जो कि ऐसे ही कई धार्मिक और पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्द है। यहाँ के कई स्थल सिर्फ पर्यटक स्थल के रूप में ही नहीं, पवित्र तीर्थस्थलों के रूप में भी लोकप्रिय हैं। उत्तराखंड के पंचप्रयागों में से एक रुद्रप्रयाग का अपना महत्व है | केदारनाथ धाम की ओर से आती मंदाकनी और दूसरी ओर से आती अलकनंदा जिस स्थान में मिलती है | उस स्थान को “रुद्रप्रयाग” के नाम से जाना जाता है | भगवान शिव को रूद्रनाम से भी संबोधित किया जाता था | इसलिए “रूद्र” नाम से इस संगम का नाम रुद्रप्रयाग रखा गया है | इस क्षेत्र में अलकनंदा व मन्दाकिनी नदियों के संगम पर भगवान रूद्रनाथ का प्राचीन मंदिर भी स्थित है | केदारनाथ भी रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है | प्रसिद्ध धर्मस्थल “केदारनाथ धाम” रुद्रप्रयाग से 76 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है |


(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});


[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2018/06/tehri-garhwal-tourist-place.jpg’ attachment=’3296′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

टिहरी गढ़वाल

टिहरी गढ़वाल , उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल मंडल का एक प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय जिला है | पर्वतों के बीच स्थित यह स्थान बहुत सौन्दर्य युक्त है। प्रति वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती काफी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है । तीन नदियों के संगम (भागीरथी, भिलंगना व घृत गंगा) या तीन छोर से नदी से घिरे होने के कारण इस जगह को त्रिहरी व फिर टीरी व टिहरी नाम से पुकारा जाने लगा । टिहरी गढ़वाल दो शब्दों से मिलकर बना है , जिसमे टिहरी शब्द त्रिहरी से बना है , इसका अर्थ है ऐसा स्थान जो तीन तरह के पाप (मनसा , वाचना , कर्मणा से ) मिटाने का काम करता है | वही गढ़ का अर्थ है किला , इसके पीछे का एक लम्बा इतिहास है | सन 888 से पूर्व सारा गढ़वाल छोटे-छोटे गढ़ों में विभाजित था , जिसमे अलग अलग राज्य के राजा राज करते थे , जिन्हें राणा’ , ‘रायया ठाकुर के नाम से जाना जाता था |
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_image src=’http://www.uttarakhanddarshan.in/wp-content/uploads/2019/03/barkot-uttarkashi.png’ attachment=’5274′ attachment_size=’full’ align=’center’ styling=’no-styling’ hover=’av-hover-grow’ link=” target=” caption=” font_size=” appearance=” overlay_opacity=’0.4′ overlay_color=’#000000′ overlay_text_color=’#ffffff’ animation=’no-animation’ admin_preview_bg=”][/av_image]

[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]

उत्तरकाशी


(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});


उत्तराखंड की गोद में बसा बड़कोट नामक एक खुबसूरत शहर है, यह पहाड़ी शहर समुद्र तल से 1,220 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है, कम ज्ञात और पर्यटकों से लगभग अछूता, बरकोट उत्तराखंड के सबसे अच्छे रहस्यों में से एक है। उत्तरकाशी जिले में स्थित, यमुना नदी के तट पर, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में तीर्थयात्रा करने के लिए जाने वाले हिंदू भक्तों के लिए एक स्थान का यह रत्न प्रमुख रोक है। सुंदर छोटा शहर कुछ अन्य हिमालयी चोटियों के साथ-साथ बंदरपून चोटी का एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। बार्कॉट आराम करने के लिए एक आदर्श स्थान है, और यह एक ऐसी जगह है जहाँ आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता हैं |

उत्तरकाशी 
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_one_full first min_height=” vertical_alignment=” space=” custom_margin=” margin=’0px’ padding=’0px’ border=” border_color=” radius=’0px’ background_color=” src=” background_position=’top left’ background_repeat=’no-repeat’ animation=” mobile_display=”]
[av_textblock size=” font_color=” color=” admin_preview_bg=”]
उमीद करते हैं आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा अगर आपको यह पोस्ट पसंद आये तो इसे like तथा निचे दिए बटनों द्वारा share जरुर करें|
[/av_textblock]
[/av_one_full]

[av_social_share title=’Share this entry’ style=’minimal’ buttons=’custom’ share_facebook=’aviaTBshare_facebook’ share_twitter=’aviaTBshare_twitter’ share_gplus=’aviaTBshare_gplus’ admin_preview_bg=”]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here